SanskritX

SanskritX Online Sanskrit Classes SanskritX brings the online Sanskrit shlok recitation program for your children to get acquainted with ancient Sanskrit language.

Age group - 3 to 16 years

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Benefits of reciting Sanskrit shlokas at early age:

1) Sharpens memory and intellect
2) Improves concentration
3) Corrects pronunciation issues
4) Increases purity in voice

17/08/2022
16/04/2022

02/04/2022

सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने।
लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्‌।।

अर्थात

जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह आने वाला हमारा यह नूतन वर्ष आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो।

सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने।लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्‌।।अर्थातजिस तरह सूर्य प्रकाश...
02/04/2022

सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने।
लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्‌।।

अर्थात

जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह आने वाला हमारा यह नूतन वर्ष आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो।

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।जहाँ स्त्रियों की पूजा अ...
08/03/2022

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।

जहाँ स्त्रियों की पूजा अर्थात सम्मान होता हैं ,वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों का सम्मान नहीं होता वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।

अधीरः कर्कशः स्तब्धः कुचलः स्वयमागतः ।पञ्च विप्रा न पूज्यन्ते बृहस्पतिसमा अपि ॥अर्थातचंचल, कठोर, दुराग्रही, कुवस्त्रधारी...
23/02/2022

अधीरः कर्कशः स्तब्धः कुचलः स्वयमागतः ।
पञ्च विप्रा न पूज्यन्ते बृहस्पतिसमा अपि ॥

अर्थात

चंचल, कठोर, दुराग्रही, कुवस्त्रधारी, और आगंतुक (बिना बताये आनेवाला), ऐसे ब्राह्मण यदि बृहस्पति समान विद्वान हो तो हि पूज्य है, अन्यथा नहीं ।

दाता दरिद्रो कृपणो धनाढ्यः पापी चिरायुः सुकृति र्गतायुः ।कुले च दास्यं अकुले च राज्यंकलौ युगे षड्गुणमावहन्ति ॥अर्थातकलिय...
22/02/2022

दाता दरिद्रो कृपणो धनाढ्यः पापी चिरायुः सुकृति र्गतायुः ।
कुले च दास्यं अकुले च राज्यंकलौ युगे षड्गुणमावहन्ति ॥

अर्थात

कलियुग में सब विपरीत होता है; दाता गरीब, और लोभी धनिक होता है; पापी दीर्घायु और सत्पुरुष अल्पायु होते हैं; कुलीन इन्सान दास होता है और अकुलीन राज्य करता है !

भो दारिद्र्य ! नमस्तुभ्यं सिद्धोऽहं त्वत्प्रसादतः ।पश्याम्यहं जगत्सर्वं न मां पश्यति कश्चन ॥अर्थात्हे दारिद्र्य तुजे नमस...
20/02/2022

भो दारिद्र्य ! नमस्तुभ्यं सिद्धोऽहं त्वत्प्रसादतः ।
पश्याम्यहं जगत्सर्वं न मां पश्यति कश्चन ॥

अर्थात्

हे दारिद्र्य तुजे नमस्कार हो । तेरे कृपा-प्रसाद से मुजे सिद्धि मिल गयी है कि मैं तो समस्त जगत को देख सकता हूँ पर मुजे कोई नहीं देख पाता ! (अर्थात् दरिद्र को सब जगह से दुर्लक्ष ही प्राप्त होता है । )

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