Samhita Adhyayan with Dr Abhijeet Saraf

Samhita Adhyayan with Dr Abhijeet Saraf

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13/10/2023

चातुर्मास अध्ययन - तृतीय वर्ष - 2023

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चातुर्मास अध्ययन संपन्न हो रहा है । इस वर्ष हम सुश्रुत संहिता के 4 तंत्रभूषण अध्यायों का टीका सह अध्ययन करेंगे ।

*सुश्रुतोक्त तंत्रभूषण अध्याय*
उत्तरतंत्र ६३ से ६६
डल्हण और हाराणचंद्र चक्रवर्ति टीका सह

मंगलवार 17 ॲाक्टोबर से

भाषा - हिंदी

समय - 9 pm to 10 pm

For Registration please contact at number given in the photo & Then Fill up the google form (link given below)

Google form - https://forms.gle/xTPN4yGyB3L48Ynb9

Lecture mode - Goto meeting app

Online Certificate will be issued after the course

Recordings will be available for three months after the completion of course

Photos from Samhita Adhyayan with Dr Abhijeet Saraf's post 14/01/2023

श्री धन्वन्तरि (काशिराज दिवोदास)देहोत्सर्ग स्थल
श्री धन्वन्तरि आश्रम, धणेज, वेरावळ, गुजरात

12 वा संहिता निरुपण समारोह
दि 28 से 31 जानेवारी 2023

वक्ता - वैद्य अनंत धर्माधिकारी, वैद्य श्रीप्रसाद बावडेकर, वैद्य लीना बावडेकर, वैद्य अभिजित सराफ, वैद्य रेणुका गयाळ, वैद्य मेघना बाक्रे

जल्द से जुडीये
संपर्क - Vd Meghana Bakre , Anjali Deshpande

03/07/2022

*SHREYAS E LEARNING ACADEMY*
& *AGASTYA FOUNDATION*
presents

_*CHATURMAS ANUSHTHAN'22*_

*सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान*

_डल्हण, चक्रपाणि, गयदास एवं हाराणचंद्र चक्रवर्ति टीकाओं के साथ_

पर्व १ - *अध्याय १-१४*
(21/07/2022 - 31/07/2022)

पर्व २- *अध्याय १५-२४*
(20/08/2022 -30/08/2022)

पर्व ३- *अध्याय २५-३७*
(20/09/2022- 30/09/2022)

पर्व ४- *अध्याय ३८-४६*
(11/10/2022- 21/10/2022)

in the presence of Eminent Speaker

*VD. ABHIJEET SARAF*
*M.D. Ph.D (Ayurved)*

Time: 9 pm to 10 pm

Fees:
Each *Parva* = *999/-* only

All 4 sessions include *46 adhyaya* = *3499/-only*

*For Registration*
*9850311036*
*9004968388*

For registration of *चातुर्मास अनुष्ठान- द्वितीय वर्ष - 2022*

EASY 💁🏻‍♂️

• *Bank details*
Name - Apurva P. Inamdar
A/c no: *021110100006828*
Bank: *Thane Janata sahakari bank*
Branch: *Gangapur Road*(Nashik)
IFSC CODE: *TJSB0000021*

UPI ID -
apurvainamdar7@okicici

After completion of payment,
please 🙏🏻
*WhatsApp Screenshot* of the receipt on no. *09850311036*
& Then Fill up the google form (link given below)

https://forms.gle/YXL51EYPbA2aJDvHA

After successful registration and filling up the google form, you will be added in a whatsapp group.

To participate in a webinar,
you need a computer or smartphone or a tablet PC with *good internet connection*.

*All rights are reserved with the Organizers* ....
_*Courtesy: Shreyas e-learning academy*🌳_

19/12/2021

*संहिता अध्ययन कैसे करना चाहिये ?*
- *वैद्य अभिजित सराफ*

- किसी भी संहिता के केवल सारे 'अथ से इति' श्लोक पढना या बिना श्लोक पढे केवल भाषांतर पढना यह "संहिता अध्ययन" नही है ।

*संहिता अध्ययन करते समय निम्नलिखित बाते पहले से ही नित्य ध्यान मे रहनी चाहिये* -

१. संहिता अध्ययन हम चिकित्सा की दृष्टीसे और चिकित्सा करने के लिये कर रहे है ।
२. केवल साहित्यिकीय दृष्टी पर्याप्त नही ।
३. जिस संहिता का अध्ययन करने जा रहे है उस संहिता का और उससे संबंधित आचार्यो का ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक पर्याप्त ज्ञान अत्यावश्यक है ।
४. तन्त्रयुक्तियों का पर्याप्त ज्ञान अत्यावश्यक है ।
५. संहिता की रचना शैली एवं भाषा शैली का भी अध्ययन आवश्यक है ।

*संहिता अध्ययन विधि* -

१. *अधिकरण* - हर सूत्र का अधिकरण पहले निश्चित करना चाहिये । तंत्र, स्थान, अध्याय और प्रकरण कौन सा है यह देखना चाहिये ।
केवल किसी एक ही सूत्र का अर्थ लगाना हमेशा अव्याप्त होता है । वोह सूत्र कहा आया है, उसके पहले और बाद मे क्या वर्णन है , विषय क्या चल रहा है यह सर्व देखना अनिवार्य है । जैसे -
तमके तु विरेचनम् यह सूत्रार्ध हिक्काश्वास के उपद्रवों का सूत्र है जो अध्याय के अंतिम स्तर पर वर्णित है (च.चि.१७/१२१)

२. *पूरे सूत्र का विचार करना ।* जैसे केवल 'तमके तु विरेचनम्' इस सूत्र का केवल एक चरण पढकर अर्थ लगाना गलत हो सकता है । पूरा सूत्र जब पढेंगे तो उस सूत्र का अर्थ स्पष्ट होता है ।

३. *अन्वय* - गद्य और पद्य सूत्रोका यथायथ अन्वय लगाना यह आगे की अवस्था है ।

४. *शब्दशः अर्थ* - सूत्र का पदशः अर्थ निश्चित करना । इस के लिये विविध शब्दकोश, डिक्शनरी का उपयोग होता है ।

५. *उपलब्ध टीका वाचन और विचार* - उस सूत्र पर उपलब्ध सभी टीकाऐ पढकर टीकाकारों का मंतव्य देखना आवश्यक होता है । टीकाकार कभी कभी अलग ही दृष्टीसे सूत्र का वर्णन करते है । वोह भी विचार करना जरुरी है ।

६. *तन्त्रयुक्ति* - संहिताकर्ता ने सूत्र रचना करते समय कौन सी तन्त्रयुक्ति का उपयोग किया है वोह विचार करना । जैसे वाक्यशेष,अर्थापत्ति,व्याख्यान,संभव इत्यादि

७. *अभिप्रेतार्थ* - टीका और तंत्रयुक्ति का विचार करके शब्दार्थ और अभिप्रेतार्थ निश्चित करना ।

८. *वर्ण्य सूत्र का अन्य सूत्रो से संबंध* - अध्ययन चल रहे सूत्र का संहिता के अन्यत्र वर्णित सूत्रो से क्या संबंध है वोह देखना । जैसे
- चरक विमान ६/१२ मे अग्नि के वर्णन पढते समय चरक चिकित्सा १५ ग्रहणी मे वर्णित सूत्रो का विचार करना ।
- चरक सूत्र ७/३६ मे सात्म्य का वर्णन पढते समय चरक विमान १, चरक सूत्र ५ और चरक शारीर ६ के सूत्रो का विचार करना ।
- तमके तु विरेचनम् इस सूत्रार्थ मे तमक पद का अर्थ के लिये पित्त के नानात्मज विकारों का च.सू.२० के सूत्र और पित्तज कास च.चि.१८/१३१ का वर्णन देखना ।

९. *स्वतंत्र प्रत्यय* - उस वर्ण्य विषय का अन्य आयुर्वेद के ग्रंथो मे क्या वर्णन आया है वोह देखना । जैसे -
- चरक की ऋतचर्या का वर्णन देखते समय सुश्रुत और काश्यप मे वर्णित वैशिष्ट्यपूर्ण द्विविध ऋतुक्रमों का वर्णन देखना ।
- चरक चिकित्सा गुल्म का अध्ययन करते समय, गुल्म की शल्यचिकित्सा की अवस्थाओं का वर्णन सुश्रुत संहिता से पढना ।

१०. *परतंत्र प्रत्यय* - वर्ण्य विषय का आयुर्वेद के अतिरिक्त अन्य उपलब्ध शास्त्रो मे से अध्ययन करना । जैसे
- दिनचर्या का अध्ययन करते समय कौटिल्य और वात्स्यायन के ग्रंथो मे वर्णित दिनचर्या का वर्णन देखना ।
- वायु की संकल्पना का अध्ययन करते समय विविध उपनिषदों मे आया हुआ वर्णन देखना ।

१२. आयुर्वेद के सूत्रो का अर्थ आधुनिक चिकित्सा शास्त्र की दृष्टी से पढना अयोग्य है । क्योंकी इन दो शास्त्रो मे कालतः बहोत बडा अंतर है और मूल विचारणीय घटक ही अलग है । *अॅलोपॅथी के विचारों को अपनी जगह रखकर आयुर्वेद की दृष्टी से ही सूत्रो का अर्थ निश्चित करना आवश्यक है ।* जैसे रस का अर्थ प्लाझ्मा, रक्त का अर्थ ब्लड, मेद का अर्थ फॅट, शुक्र का अर्थ सीमेन, मज्जा का अर्थ बोन मॅरो ऐसे लगाना शास्त्रार्थ को दूषित कर सकता है ।

१२. *अर्थ निश्चिती (अध्यवसाय)* - सभी घटको के परिशीलन के बाद सूत्र का प्रमाणाधिष्ठित अर्थ निश्चय करना ।

१३. *अवबोध और व्यवहार* - अर्थनिश्चिती के बाद सूत्र के वर्णन का अवबोध करके उसका व्यवहार मे उपयोग करना ।

*संहिता अध्ययन करते समय आवश्यक अन्य शास्त्रो का ज्ञान* -
संहिता और टीका की रचना जिस काल मे हुई थी उस काल के उपलब्ध सभी शास्त्रो का स्वशास्त्र उपबृंहणार्थ जितना आवश्यक है उतना अध्ययन करना
उदा. उपनिषद,स्मृतिग्रंथ,दर्शनशास्त्र,काव्य,सुभाषित, पाकशास्त्र,कामशास्त्र,मनोविज्ञान,अध्यात्मशास्त्र, मोक्षशास्त्र शब्दकोश इत्यादि

- *वैद्य अभिजित सराफ*
PhD Ayurveda

16/09/2021

चातुर्मास अध्ययन
तृतीय पर्व
भाद्रपद मास :- सुश्रुत संहिता निदानस्थान
Secure ur seat fast

19/08/2021

काश्यप संहिता पर प्रथमतः विवेचनात्मक कार्यक्रम

महर्षि कश्यप और भार्गव इनके बीच हुऐ कौमारभृत्य प्रधान संवाद को काश्यप संहिता मे ग्रंथित किया गया.

उसमे से विशिष्ट ऐसा 'कल्प स्थान' का अध्ययन इस कार्यक्रम मे पूर्णरुप से होगा.

कल्पस्थान मे धूपकल्प, लशुनकल्प, षट् कल्प, रेवतीकल्प, भोजनकल्प, विशेषकल्प और संहिताकल्प ऐसे वैशिष्ट्यपूर्ण विषयों का वर्णन है

काश्यप संहिता के प्रथमतः होनेवाले निरुपण मे अवश्य जुडीये

19/07/2021

चातुर्मास अध्ययन - आषाढ मास

कल से प्रथम पर्व (चरक संहिता शारीर स्थान) का प्रारंभ हो रहा है ।
इसमे यथा आवश्यक और कुछ महत्व की
चक्रपाणि - आयुर्वेद दीपिका
गंगाधर राय - जल्पकल्पतरु
योगीन्द्रनाथ सेन - चरकोपस्कार
ज्योतिषचंद्र सरस्वति - चरकप्रदीपिका
इन टीकाओं के साथ शारीर स्थान के हर एक सूत्र का विवेचन किया जायेगा ।
२० जुलै से ३१ जुलै तक यह प्रथम सत्र चलेगा ।

11/07/2021

चातुर्मास अनुष्ठान

श्रेयस इ-अकादमी और अगस्त्य फाऊण्डेशन आयोजित

इस चातुर्मास मे संहिता अध्ययन के स्वरुप मे अनुष्ठान करेंगे ।

आजतक जिन संहिता या उनके स्थानो का ज्यादातर चिंतन नही किया गया, उन संहिता और स्थानो का अध्ययन करेंगे ।

पर्व १ - चरक संहिता शारीरस्थान
(आषाढ - २० जुलै से ३१ जुलै)

पर्व २ - काश्यप संहिता कल्पस्थान
(श्रावण - २० ऑगस्ट से ३१ ऑगस्ट)

पर्व ३ - सुश्रुत संहिता निदानस्थान
(भाद्रपद - २० सप्टेंबर से १ ऑक्टोबर)

पर्व ४ - काश्यप संहिता विमान, शारीर और इंद्रियस्थान
(अश्विन - २० ऑक्टोबर से १ नोव्हेंबर)

हर मास मे एकादश दिन का अध्ययन

वक्ता - *वैद्य अभिजित सराफ*
M.D. Ph.D.

भाषा - हिंदी

समय - प्रातः ७ से ८

शुल्क - केवल एक पर्व - ९९९/-
चारो पर्व - ३४९९/-

संपर्क - 9757035060
9004968388
9664488190
9930627602
9221528099

संपर्क करके के लिये रजिस्ट्रेशन फॉर्म प्राप्त किजीये

सुश्रुत संहिता अनुसार मरक (जनपदोद्ध्वंस) का विवेचन । Dr Abhijit Saraf 14/12/2020

सुश्रुत संहिता के अनुसार मरक (जनपदोद्ध्वंस) का विवेचन...

हमेशा जनपदोद्ध्वंस के लिये चरकोक्त संदर्भ दिये जाते है । किन्तु सुश्रुत संहिता का पठण, वाचन, अध्ययन न होने से उसमे वर्णित अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ दुर्लक्षित हो जाते है । यह एक प्रयास है की सुश्रुत संहिता से मरक अर्थात जनपदोद्ध्वंस का महत्वपूर्ण मौलिक विवेचन....

"मनुष्यों के आचरण का परिणाम निसर्ग पर होता है ।" (सुश्रुत)

सुश्रुत संहिता अनुसार मरक (जनपदोद्ध्वंस) का विवेचन । Dr Abhijit Saraf

अग्रोपहरणीयम् अध्यायम् । सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान अध्याय ५ । Dr Abhijit Saraf 07/12/2020

सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान - पंचम अध्याय
अग्रोपहरणीयम् अध्यायम्
प्रसंगोत्पात आवश्यकता नुसार निबन्धसंग्रह (डल्हण), न्यायचन्द्रिका (गयदास), भानुमति (चक्रपाणि) एवं सुश्रुतार्थसन्दीपन (हाराणचन्द्र चक्रवर्ति) इन टीकाओं के विवरण के साथ.....

अग्रोपहरणीयम् अध्यायम् । सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान अध्याय ५ । Dr Abhijit Saraf

06/12/2020

संपूर्ण चरक संहिता विमान स्थान

वैद्य अभिजित सराफ

रसविमानम् - https://youtu.be/dlvy9vxn5Yc

त्रिविधकुक्षीयम् - https://youtu.be/Xeno-fL9PEg

जनपदोद्ध्वंसनीयम् - https://youtu.be/XcKfuF1WAT4

त्रिविधरोगविशेषविज्ञानीयम् - https://youtu.be/2cmae2Ytbzw

स्रोतसां विमानम् - https://youtu.be/LMe_DW4fkqY

रोगानीकं विमानम् - https://youtu.be/nqilLnMmVms

व्याधितरुपीयं विमानम् - https://youtu.be/RbGdxJ9eQCc

रोगभिषग्जितीयं विमानम् -
प्रथम भाग - https://youtu.be/lih-Qm7dQ6E
द्वितीय भाग - https://youtu.be/vZ5y5yCe0no
तृतीय भाग - https://youtu.be/r_fLLTnRm3U
चतुर्थ भाग - https://youtu.be/-GtVCHZIzLo

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