14/02/2025
कुछ दिनों से मैं रिपोर्ट्स पढ़ रहा था आत्महत्या को लेकर और उन आत्महत्याओं के संदर्भ में मुझे यह पता चला कि 9 से 10 फ़ीसदी जो होती है वह संबंध टूटने के कारण ही होती हैं संबंध उनके पीछे ही जिम्मेदार है तो इस पर ही मैंने कुछ लिखा है कि क्यों संबंध जो है वह इस तरीके से दूषित होते हैं।................
यह जो स्थिति है यह हो रही है समाज में। हम पढ़ रहे हैं हम देख रहे हैं तो इस पर मैंने यह सब लिखा है..---
चार पन्नों का एक लेटर लिखकर ।।
चार पन्नों का एक लेटर लिखकर,
एक फंदे से वह झूल गया,
गिनकर सारी मजबूरी के किस्से,
इस दुनिया को अलविदा कह गया।
बेशक, माँ का लाड़ला और पिता का सहारा था,
भाई का आदर्श और बहन का भी दुलारा था। कामनाओं की गठरी इतनी भारी,
कि अपना ही ख्याल भूल गया।
हाँ, वह एक फंदे से झूल गया। # # #
**क्यों लाया था पत्नी घर में?** ज़रा सुनिए, उसकी मानसिकता के बारे में—
**"हाँ, तुम्हें इसलिए लाया हूँ..."** जब जाऊँगा ऑफिस, तो नाश्ता तुम बनाओगी,
दोपहर को आऊँगा, तो लंच तुम खिलाओगी।
कपड़े धोओगी, उनमें प्रेस करोगी,
शाम को आऊँगा, तो चाय-कॉफी पिलाओगी।
रात का खाना खाकर, अपनी भूख मिटाऊँगा,
और बची भूख तुम्हारी देह से बुझाऊँगा।
सुबह की चाय के साथ मेरी नींद खुलवाओगी,
नहाना होगा, तो पानी लेकर आओगी।
हाँ, मैं तुम्हें इसलिए लाया हूँ... माँ-बाप की सेवा करके स्वर्ग का फल तुम पाओगी,
ना रहा मेरा सहारा, तो घर का सहारा तुम बन जाओगी।
सच कहूँ—ऊपर के सारे काम तो महज़ बहाने थे,
मुझे तो तुमसे बस अपना कुल-कुनबा बढ़वाने थे। # # # **और फिर...**
उम्र ढल गई तुम्हारी, अब तुममें रस आता नहीं,
सोचा, छोड़ दूँ तुम्हें, पर यह समाज को भाता नहीं।
ना रहने का साथ अब, द्वंद्व यहीं से शुरू हो जाता है,
या तो मैं फाँसी लगा लेता हूँ,
या फिर तुम टुकड़ों में बाँट दी जाती हो।
**हाँ, चार पन्नों का एक लेटर लिखकर,
एक फंदे से वह झूल गया,
गिनकर मजबूरी के किस्से,
दुनिया से अलविदा कह गया।** ---
आचार्य जी की शिक्षाएं क्यों हर एक इंसान तक पहुंचे हर एक युवा तक पहुंचे। यह बात आप सब पढ़कर समझ ही गए होगे।हम सब का प्रयास यही होना चाहिए की कैसे भी हम करें। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को आचार्य जी की शिक्षाओं से जोड़ें क्योंकि बस यही एक तरीका हैं ,यही एक उपाय अब इस विनाश को रोक सकता हैं।👏👏👏🪔🪔