27/02/2020
~~~बिहार की युवा पीढ़ी से अपील~~~
मिश्रित अर्थव्यवस्था से पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर देश तीव्र गति से बढ़ रहा है और बिहार इससे अछूता नहीं है । वैश्विक स्तर पर वहीं देश अग्रणी हैं जहां शिक्षा प्राथमिक सूची में है । भारत के राज्यों में बिहार शिक्षा के क्षेत्र में सबसे निचले पायदान पर है । बिहार कभी शिक्षा के क्षेत्र में विश्व गुरु हुआ करता था और आज ये रसातल की ओर निरंतर बढ़ रहा है । समय रहते इस पर युवा पीढ़ी ने ध्यान नहीं दिया तो इतिहास हमें कभी माफ़ नहीं करेगा ।
बिहार सरकार जानबूझकर सरकारी शिक्षण संस्थानों को चौपट करने में दिन- रात लगी हुई है ताकि गरीबों के बच्चें शिक्षा से वंचित रह जाए । बिहार में शिक्षा ग्रहण करने के लिए दो समानांतर व्यवस्था प्रचलन में है । अमीरों के लिए निजी शिक्षण संस्थान और गरीबों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थान । एक षड्यंत्र के तहत सरकारी शिक्षण संस्थानों को जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है ताकि निजी शिक्षण संस्थानों की स्थिति मजबूत होते जाए और गरीब गुरबा शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाए । प्रारंभिक विद्यालयों से विश्वविद्यालयों तक की वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था को देख कर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कितनी सज़ग है ? विश्वविद्यालयों में बिना पढ़े -लिखे हमारे बच्चे परीक्षा देते हैं और किसी तरह उत्तीर्ण भी हो जाते हैं जो कहीं से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता हैं ।
माननीय मुख्यमंत्री व तथाकथित सुशासन बाबू कहते हैं कि --हमारे पास संसाधन नहीं हैं और बिहार गरीब राज्य है । इसलिए शिक्षा देने वाले शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन नहीं दिया जा सकता हैं । प्रश्न यह उठता है कि 2005 में भी बिहार शिक्षा के क्षेत्र में निचले पायदान पर था और गरीबी में भी ---और पन्द्रह वर्ष बाद भी 2020 में बिहार की स्थिति वहीं हैं ,तो बिहार कब विकसित राज्यों की श्रेणी में आयेगा ? सुशासन बाबू को विकसित राज्यों की श्रेणी में बिहार को लाने के लिए और कितना समय चाहिए ??
समय की मांग हैं कि युवा पीढ़ी सहित सभी बिहारियों को सरकार की इस कुटिल चाल को समझाया जाना चाहिए ताकि शिक्षकों के मौजूदा आंदोलन को जन आंदोलन बनाया जा सके । मांग यह भी किया जाना चाहिए कि बिहार सरकार से वेतन पाने वाले सभी व्यक्तियों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थान में पढ़ाया जाना अनिवार्य किया जाए । उसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए योग्य माना जाए जिनके बच्चे सरकारी शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हों या अध्ययन कर लिए हों ।
भविष्य में बिहार में सरकारी नौकरी पाने के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई किया जाना अनिवार्य किया जाये ।
कहने का मतलब ये हुआ कि ऐसा करने से अपने आप सरकारी शिक्षण संस्थानों की दुर्दशा सुधर जायेगी ।
जब बिहार में शिक्षकों की बहाली व पठन- पाठन की सम्पूर्ण जिम्मेवारी स्थानीय सरकार को दे दी गई है ,तो बिहार सरकार किस हैसियत से बिहार के शिक्षकों पर कार्रवाई कर रही हैं ?? यह एक गंभीर प्रश्न हैं ??
बिहार में ठेका पर बहाल/ नियोजित कर्मियों के लिए सुनहरा अवसर आ गया है। समय को पहचानिये । नाज़ुक समय है। लोहा गरम है । हथौड़ा चलाने का समय आ गया है। अपने सुशासन बाबू अपनी सत्ता बचाने के लिए नियोजित कर्मियों की ओर हरा चारा फेक रहे हैं । लेकिन सावधान रहना होगा । सभी नियोजित कर्मियों को अहिंसात्मक व संविधान सम्मत आंदोलन ही चलाते रहना चाहिए । वर्तमान में जो लोग नियोजित कर्मियों के दुर्भाग्य पर हँस रहे हैं --वे लोग इतना ध्यान रखेंगे कि आगत भविष्य में आपके भी बाल -बच्चे नियोजित शिक्षक जहां हैं , वहीं आयेंगे । इसलिये बिहार के सभी लोग बिहार सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ़ नियोजित कर्मियों के पक्ष में हुंकार भरें । इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी बाजपेयी जी ने कांग्रेस के बारे में कहा था कि --आज आप (कांग्रेस)हमारी पार्टी पर हंस रहे हैं कम संख्या को देखकर , एक समय ऐसा भी आयेगा जब हम बहुमत में होंगे और तब हम हंसेंगे आप के ऊपर ।
वर्तमान हालात को देखते हुए शिक्षकों को एक नई व दमदार जन आंदोलन की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । बिहार के तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधियों , युवा पीढ़ी , किसान ,मजदूर ...तमाम आवाम को साथ लेकर एक #मानव_श्रृंखला बनाया जाना चाहिए जो बिहार के सभी जिलों से होते हुए #गांधी_मैदान_पटना तक जाए जिसका उद्देश्य बहुआयामी हो । खासकर शिक्षा और सरकारी शिक्षण संस्थानों को प्राथमिक सूची में पहले पायदान पर लाना हमारा उद्देश्य रहना चाहिए । यह भी विश्व रिकॉर्ड बन जायेगा ।
धन्यवाद ।
राजेश कुमार
अध्यक्ष 【BRTSS】