25/02/2021
मैं और मेरा स्कूल से संबंध, निश्चित तौर पर मेरी जिंदगी ही स्कूल रही और मैं स्कूल को ही अपना जिंदगी समझकर अनवरत अपना संघर्ष रुपी जीवन इसी में समाहित करने का फैसला ले लिया| जब मेरा पहला कदम इस विद्या रूपी मंदिर में प्रवेश कर रहा था बतौर एक शिक्षक मैं अपने आप में बहुत ही संकुचित था, क्योंकि हमसे दो 4 साल छोटे-छोटे विद्यार्थी उसमें पढ़ रहे थे वह स्कूल और उसके संचालक का भी नाम में लेना चाहूंगा इसलिए कि मेरी जिंदगी की वह संकुचित सा पल और शिक्षा सिंधु स्कूल उसके संचालक नवीन सर और प्रवीण सर के द्वारा दिया गया हौसला| बेशक मेरी जिंदगी बचपन से ही संघर्षशील रहा संसाधनों के घोर अभाव में अपने बचपन को समेट कर भी हमने अपने मनोबल को कभी टूटने नहीं दिया हां इसमें मेरे ग्रामीण दोस्त जो संपन्न किसान व्यापारी और सरकारी नौकरी वाले के बेटे रहते हुए मुझे कभी यह आभास होने नहीं दिया की मैं एक गरीब मजदूर किसान सुरेश सिंह का बेटा था दोस्तों ने स्कूली जीवन में भी ग्रुप नेतृत्व का भार सदैव मेरे ऊपर दिया इसलिए नहीं कि मैं बहुत प्रतिभाशाली था सिर्फ इसलिए कि वह दोस्ती का कद्र कृष्ण सुदामा के जैसा कर रहे थे मेरे उस वक्त के सहपाठी मेरे ग्रामीण दोस्त त्रिपुरारी जेसीबी मालिक, संगीत जेसीबी और ट्रक मालिक, दीपक मुखिया, रिपु सरदार, फंटूश जो वर्तमान सरकारी शिक्षक, सोनी झा जो वर्तमान झारखंड सरकार के कर्मचारी, गौरी पासवान, पिंटू बोलेरो मालिक, डिस्को सरकारी शिक्षक, बबलू ठाकुर, पतलू ट्रैक्टर मालिक जिससे आज वर्तमान समय में भी मेरे संबंध मधुर और दोस्ताना ही है बेशक जिंदगी आगे बढ़ती गई देखते-देखते मेरे नाम के आगे सर रूपी विशेषण लग गया और मैं इस विशेषण को स सम्मान बचाने का संकल्प ले लिया| निसंदेह मैंने बहुत सारे छोटे बड़े कार्य भी किए लेकिन अपने लक्ष्य को सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के साथ जुड़े रहकर प्राप्त करने का दौर शुरू किया आज वर्तमान दौर में जी एस एस पब्लिक स्कूल का पांचवा ब्रांच के रूप में मैं अपने गृह क्षेत्र कतरी सराय में अपना सेवा दे रहा हूं और मेरे सारे ब्रांच आज भी लगभग 4000 विद्यार्थियों का भविष्य सुधारने का कार्य कर रहा है मेरे सारे पार्टनर आज एक -एक ब्रांच का निर्देशक बने हुए हैं और मैं जी एस एस पब्लिक स्कूल कतरी सराय का निर्देशक| आज भी परम पूज्य गुरुदेव स्वामी शांतानंद के नाम से ट्रस्ट में जुड़े हुए हैं और स्कूल का नाम भी इन्हीं से संबंधित है बेशक मैं अपनी जिंदगी में स्कूल को एक बिजनेस के रूप में नहीं देखा |छोटे-मोटे बिजनेस भी किया और सब में सफल भी रहे
आप लोगों के आशीर्वाद से आवश्यकता के अनुरूप किसी चीज की कमी नहीं है मेरे गुरुदेव से एक ही आरजू हर वक्त रहती है जो प्रतिष्ठा लोगों के द्वारा मिल रहा है वही मेरी जिंदगी के लिए काफी है आज भी मेरे गुरु जन बांके सर, रेवती रमन सर, दयानंद सर, नवीन सर, भोला सर, अंबिका बाबू बादी टेक नारायण बाबू कमल विघा केदार बाबू सुंदरपुर तथा अन्य शिक्षक जिनके सानिध्य में रहकर मैं संस्कारित हुआ और उस संस्कार को सदा सुशोभित करने के लिए आगे प्रयत्नशील हूं मेरी लेखनी में अगर कोई त्रुटि हुई तो सारे पाठकों से क्षमा करने का अनुरोध से अपनी लेखनी की समाप्ति
विनय कुमार
निर्देशक, जी एस एस पब्लिक स्कूल
कतरी सराय( नालंदा)