07/03/2016
एक औरत थी,जो अंधी थी,जिसके कारण उसके बेटे को स्कूलमें बच्चे चिढाते थे,कि अंधी का बेटा आ गया,हर बात पर उसे ये शब्द सुननेको मिलता था कि "अन्धी का बेटा".इसलिए वो अपनी माँ से चिडता था. उसेकही भी अपनेसाथ लेकर जाने मेंहिचकता थाउसे नापसंद करता था..उसकी माँ ने उसे पढ़ाया..और उसे इस लायक बना दिया की वो अपने पैरो परखड़ा हो सके..लेकिन जब वो बड़ा आदमी बनगया तो अपनी माँ को छोड़अलग रहने लगा..एक दिन एक बूढी औरत उसके घरआई और गार्ड से बोली..मुझे तुम्हारे साहब से मिलना है जब गार्ड ने अपने मालिक सेबोल तो मालिक ने कहा कि बोलदो मै अभी घर पर नही हूँ.गार्ड ने जब बुढिया सेबोला कि वो अभी नही है..तो वो वहा से चली गयी..!!थोड़ी देर बाद जब लड़का अपनी कार सेऑफिस के लिएजा रहा होता है..तो देखता है कि सामने बहुत भीड़लगी है..और जानने के लिए कि वहा क्यों भीड़लगी है वहवहा गया तो देखा उसकी माँ वहा मरी पड़ी थी..उसनेदेखा की उसकी मुट्ठी मेंकुछ है उसने जबमुट्ठी खोली तो देखा की एकलेटर जिसमे यहलिखा था कि बेटा जब तू छोटा था तो खेलते वक़्ततेरी आँख में सरिया धंसगयी थी और तूअँधा हो गया था तो मैंने तुम्हेअपनी आँखे दे दी थी..इतना पढ़ कर लड़का जोर-जोर सेरोने लगा..उसकी माँ उसके पास नही आसकती थी..दोस्तों वक़्त रहते ही लोगो की वैल्यूकरना सीखो..माँ-बाप का कर्ज हमकभी नही चूका सकत..हमारी प्यास का अंदाज़ भी अलग हैदोस्तों,कभी समंदर को ठुकरा देते है,तो कभी आंसू तक पी जाते है..!!!"बैठना भाइयों के बीच,चाहे "बैर" ही क्यों ना हो..और खाना माँ के हाथो का,चाहे "ज़हर" ही क्यों ना हो..!!...अगर आप अपनी माँ को बेहद प्यारकरते है तो ये मैसज को इतना फेला ओ जितना तुम अपनी माॅ। कोचाहतें हो