05/09/2021
गुरु' शब्द में 'गु' का अर्थ है 'अंधकार' और 'रु' का अर्थ है 'प्रकाश' अर्थात गुरु का शाब्दिक अर्थ हुआ 'अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक'। सही अर्थों में गुरु वही है जो अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करे और जो उचित हो उस ओर शिष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। भले ही आज गुरु और शिष्यों के बीच वो रिश्ता न रहा हो लेकिन मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि जीवन के शुरुआती दिनों से लेकर वर्तमान समय तक मुझे गुरु हमेशा बेमिशाल मिलें है। फिर चाहे वो ज़िंदगी कीमत सिखाने वाले अपने हों, स्कूल के शिक्षक हो, मददगार हो या फिर दफ्तर में हमेशा हौसला बढ़ाने वाले। हर जगह हर कोई बाबत कुछ सिखा गया। शाह मैम, चरन सर, पांडेय सर, विल्सन सर, मिश्रा मैम, मीता मैम, कविता मैम आदि ने किताबों के साथ साथ जो जीवन का पाठ पढ़ाया वो आज भी काम आता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नही होता यह मैं तब ही समझ गया था, जब बहुतों को हिरोन का सूत्र याद नही होता था। स्कूल के लड़कपन से जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो गुरुजनों की शिक्षा ने पैर लड़खड़ाने नही दिए। इसके बाद जिंदगी और वक्त ने बहुत इम्तेहान लिए लेकिन इसकी तैयारी मेरे गुरुजन पहले ही कर चुके थे। स्कूल कई अच्छे बुरे शिक्षकों से मिलाया, सब से सीखा और यही जीवन जीने में सहायक बना। हो सकता है मैं एक अच्छा शिष्य न रहा हूं लेकिन गुरुओं के मामले में मैं खुद को धनी मानता हूं। आज शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को मेरा सादर प्रणाम।