08/05/2026
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि काश जजों की नियुक्ति भी चुनाव आयुक्तों की तरह इतनी तेजी से होती। सीनियर वकील विजय हंसारिया ने दलील दी कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष से ठीक से राय नहीं ली गई। 13 मार्च 2024 को उनको 200 नामों की लिस्ट दी गई थी और अगले ही दिन नाम चुन लिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष यह तर्क देते हुए कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता न्यायपालिका की स्वतंत्रता के समान ही महत्वपूर्ण है, यह कहा कि कार्यपालिका और सरकार को चुनाव आयोग की नियुक्तियों में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे चापलूसों की नियुक्ति होगी, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता गंभीर रूप से प्रभावित होगी, जो गणतंत्र और लोकतंत्र की आधारशिला है। याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने पीठ को बताया कि कुमार और संधू की नियुक्ति प्रभावी परामर्श के बिना की गई थी।