Rameshwar Roj

Rameshwar Roj में बागी रहूंगा उन महफिलों का, जहां शोहरत तलवे चाटने से मिलती हो..!! ��

23/07/2026

बाकी सब ठीक है पर वो राघव चड्डी कहा है वो तो बड़ा सुधारवादी बन रहा था,हर समस्या का इलाज था उसके पास #राघवचड्ढा #बीजेपी # delhipolice

07/07/2026

रियल हीरो 🫡🫡

01/07/2026

इंसान को जाति से नहीं उसकी इंसानियत के अनुसार इज्जत दो तभी समाज देश दुनिया का कल्याण होगा
#कालचक्र #ह्यूमैनिटी #इंसानियत

27/06/2026

पैसा कमाने, धंधे लगाने, सफल होने के लिए सबसे आसान तरीका है अच्छा "सर्किल"। मैं इसे "Cut the Drama" नियम बोलता हूं।

तुम जिस तरह के लोगों में उठोगे बैठोगे, जैसे लोगों से बात करोगे, जिनके साथ टाइम स्पेंड करोगे उनकी आदतें, उनके विचार, उनकी एनर्जी, उनकी जिद, उनके तरीके बिना कहे आपके स्वभाव में आ जायेगे।

अगर आप ऐसे लोगों के साथ बैठते हो, जो किसी भी बात में हार नहीं मानते। कुछ भी हो जाए वो रास्ता निकालने में लगे रहते हैं। तो तुम्हारा दिमाग भी वैसे ही चलने लगेगा। आपके सफलत के चांस बढ़ने लगेंगे। पैसठ, धंधा , दुनिया को देखने का आपका नजरिया बदलने लगेगा।

एक आदमी के सर्किल में कुल 15 से 20 लोग होते हैं। जिसमें परिवार, कुछ दोस्त, साथ में काम करने वाले कलीग और कुछ रिश्तेदार।

cut the drama

इनमें से परिवार का तो आप चाह के भी कुछ नहीं कर सकते। बाकी लोगों में देखो कितने लोग नेगेटिव है। कितने लोग ड्रामा करते हैं। मतलब बातों को बढ़ा चढ़ा के स्ट्रेस लेवल पे ले आते हैं। राई का पहाड़ बनाते हैं। कलह, क्लेश, गॉसिप, जेलसी उनका मुख्य स्वभाव है।

इन लोगों को धीरे से अपनी लाइफ से कट कर दो। इन्हें फोन मत करो, इनका फोन आए तो उठाने से पहले सोच लो 2 मिनट से ज्यादा बात नहीं करनी। और जिनसे मिलना अवॉयड कर सकते हो कर दो।

आप की जिंदगी में सुख, सफलता, शांति सब उन्हीं लोगों से आती है जो आपके सर्किल में हैं। अगर सर्किल के 40% लोग टॉक्सिक है तो जिंदगी में 40% दुख toxicity होगी। क्योंकि सुख दुख सब उन्हीं लोगों से आता है जो सर्किल में है.. आपके जीवन में कोई मंगल ग्रह से आके प्रभाव नहीं डाल जाता।

एक बार इनको साइड करके देखो। जीवन में शांति सुख सफलता सब बढ़ने लगेगी। #कालचक्र

सभी का दिन शुभ हो। 🙏

20/06/2026
डंका बज रहा है ?अमेरिका ने अपने "इंडो पेसिफिक US कमांड" में से इंडो (मतलब इंडिया) शब्द हटा दिया है।अमेरिका ने कहा है कि ...
18/06/2026

डंका बज रहा है ?

अमेरिका ने अपने "इंडो पेसिफिक US कमांड" में से इंडो (मतलब इंडिया) शब्द हटा दिया है।

अमेरिका ने कहा है कि ये हमारे गौरव की बात है, पेसिफिक कमांड की अपनी हिस्ट्री है उसमें इंडिया के इंडो को रखने का कोई तुक नहीं है। इस कमांड का नाम शुरू में "यूएस पेसिफिक" कमांड ही था।

भारत के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसका नाम बदलने की कवायद शुरू हुई और सन 2018 में इसे इंडो पेसिफिक यूएस कर दिया गया।

अब कहने को ये बड़ी छोटी बात है।
लेकिन इससे समझ आता है कि भारत की औकात ग्लोबल लेवल पे बढ़ रही है या घट रही है।

अपनी बेइज्जती छुपाने के लिए हम कह सकते हैं कि उनकी कमांड है साहब कुछ भी नाम रखे।

हम सब को पता ही की जब आपका प्रभाव किसी रीजन पर बढ़ता है, तो वहां की हर चीज में आपका उल्लेख होने लगता है। और जब आपका प्रभाव घटता ही तो आपका नाम गायब होने लगता है।

भारत के क्रू वाले तीन शिप पर हमला हुआ, हमारे नागरिक मारे गए, हमने कुछ नहीं कहा। एक बयान तक नहीं आया।

प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप से मिले और नाराजगी जाहिर करना छोड़ो इसका जिक्र तक नहीं किया। इतना किस बात का डर है?

जो कूटनीति या विदेश नीति या जियोपोलिटिक्स के जानकार हैं वो इस बात को समझेंगे। #कालचक्र

बाकी लोग अब्दुल टाइट होने में खुश हो सकते हैं।
✍️ #विदेशनिति Mahaveer Dhayal Rameshwar Roj Anupriya Choudhary

हे कोई इनकी खिलाफत के लिए आपके पास शब्द Hanuman Beniwal   टीम हनुमान बेनीवाल  #हनुमानबेनीवाल
13/06/2026

हे कोई इनकी खिलाफत के लिए आपके पास शब्द Hanuman Beniwal टीम हनुमान बेनीवाल #हनुमानबेनीवाल

12/06/2026

# # # **भाग 2: प्रतिशोध और पिपासा**

करण की मौत को एक हफ्ता बीत चुका था। पुलिस ने मामले को 'अज्ञात जंगली जानवर का हमला' बताकर फाइल बंद कर दी थी, क्योंकि करण के शरीर में खून की एक बूंद भी नहीं बची थी। लेकिन दिल्ली में बैठी उसकी मंगेतर, **अनामिका**, इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थी। वह खुद एक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर (अदृश्य शक्तियों की शोधकर्ता) थी। करण के कैमरे का क्लाउड बैकअप चेक करते वक्त उसे आखिरी रात की कुछ तस्वीरें मिली थीं—तस्वीरों में करण के साथ एक धुंधली, लाल साड़ी वाली परछाईं दिख रही थी।

अनामिका समझ गई कि मामला कुछ और है। वह अपनी जान की परवाह किए बिना नीलगिरि की उस खौफनाक हवेली के लिए निकल पड़ी।

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# # # **नया शिकार, वही जाल**

उसी रात, हवेली के आसपास एक और शख्स भटक रहा था। उसका नाम था **विक्रम**—एक स्थानीय ट्रेकर, जो रास्ता भटक गया था। तेज बारिश और कड़कती बिजली के बीच उसे वह पुरानी हवेली दिखाई दी। डर और ठंड से कांपता हुआ विक्रम हवेली के भारी दरवाजे को धकेलकर अंदर आ गया।

"कोई है?" विक्रम की आवाज़ खाली हॉल में गूंज उठी।

तभी हवा में मोगरे की वही मदहोश कर देने वाली खुशबू तैरने लगी। सीढ़ियों से पायलों की छनक सुनाई दी। विक्रम ने ऊपर देखा और देखता ही रह गया। लाल पारदर्शी साड़ी में लिपटी रूपा नीचे उतर रही थी। बारिश के पानी से भीगे विक्रम के बदन को देखकर रूपा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।

"भटके हुए मुसाफिरों का इस हवेली में स्वागत है," रूपा ने अपनी जादुई आवाज़ में कहा और विक्रम की छाती पर अपना हाथ रख दिया।

विक्रम रूपा के हुस्न और उसकी छुअन के सम्मोहन में ऐसा फंसा कि अपनी सारी थकान और डर भूल गया। रूपा उसे उसी आलीशान बेडरूम की तरफ ले गई। बिस्तर पर लेटते ही वासना का खेल फिर शुरू हो गया। रूपा ने विक्रम की कमीज के बटन खोले और उसके जिस्म को चूमने लगी। विक्रम कामुकता के चरम पर था, वह भूल चुका था कि वह एक मौत के जाल में है। रूपा के होठ जैसे ही विक्रम की गर्दन पर पहुंचे, उसके दांत नुकीले होने लगे... वह उसका खून चूसने ही वाली थी कि तभी—

**"रुक जाओ, शैतान!"**

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# # # **अनामिका का प्रवेश**

कमरे का दरवाजा एक जोरदार धमाके के साथ खुला। अनामिका हाथ में एक प्राचीन तांबे का त्रिशूल और पवित्र गंगाजल की बोतल लिए खड़ी थी।

अचानक हुए इस हमले से रूपा चौंक गई। उसने मुड़कर देखा, उसका चेहरा गुस्से से भयानक होने लगा था। "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे खेल में खलल डालने की?" रूपा की आवाज़ में चीख गूंजी।

अनामिका ने तुरंत गंगाजल की कुछ बूंदें रूपा पर फेंकी। जैसे ही पवित्र जल रूपा के बदन पर गिरा, उसके जिस्म से धुआं निकलने लगा और वह दर्द से चिल्ला उठी। विक्रम सम्मोहन से बाहर आया और अपनी हालत देखकर डर के मारे कमरे के कोने में दुबक गया।

"तूने मेरे करण को मारा है! आज मैं तेरी इस वासना की भूख को हमेशा के लिए मिटा दूँगी!" अनामिका चिल्लाई।

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# # # **रूहानी जंग**

रूपा का असली भयानक रूप सामने आ चुका था। उसकी खूबसूरत त्वचा काली पड़ गई थी और बाल हवा में लहरा रहे थे। वह हवा में उड़ते हुए अनामिका की तरफ झपटी। रूपा की ताकत बहुत ज्यादा थी, उसने एक ही झटके में अनामिका को दीवार से दे मारा। अनामिका के हाथ से त्रिशूल छूट गया।

रूपा अनामिका की गर्दन दबाने आगे बढ़ी। "तुम इंसान बहुत कमजोर हो। तुम्हारी वासना ही मेरी ताकत है। जितने मर्द यहाँ आएंगे, मेरा हुस्न उन्हें खींच लाएगा और मैं अमर रहूंगी!" रूपा जोर से हंसी।

अनामिका का दम घुट रहा था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसकी नजर पास ही गिरे त्रिशूल पर पड़ी। उसने अपनी पूरी ताकत समेटी, पैर से त्रिशूल को उछाला और उसे हाथ में पकड़कर सीधे रूपा के सीने के पार कर दिया। यह कोई साधारण त्रिशूल नहीं था, इस पर पवित्र मंत्र लिखे थे।

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# # # **अंतिम अंत या...**

त्रिशूल लगते ही रूपा के सीने से काले रंग का खून बहने लगा। वह दर्द से कराह उठी। उसका पूरा शरीर धीरे-धीरे राख में बदलने लगा। हवा में उसकी आखिरी चीख गूंजी—*"तुमने मुझे नष्ट तो कर दिया... लेकिन इस हवेली की मिट्टी में मेरी प्यास हमेशा रहेगी..."*

कुछ ही पलों में रूपा पूरी तरह राख हो गई। कमरा एकदम शांत हो गया।

अनामिका ने राहत की सांस ली और विक्रम को संभाला। दोनों तुरंत उस मनहूस हवेली से बाहर निकल आए। सुबह की पहली किरण के साथ वे गाँव की तरफ बढ़ रहे थे। अनामिका को लगा कि उसने करण का बदला ले लिया है।

लेकिन... हवेली के उस बेडरूम में, जहाँ रूपा की राख बिखरी थी, हवा का एक तेज झोंका आया। वह राख धीरे-धीरे हवा में उड़कर फिर से एक आकृति बनाने लगी... एक बेहद खूबसूरत, लाल साड़ी वाली औरत की आकृति। उसकी आँखें खुलीं, और वह धीरे से मुस्कुराई।

हवेली का खेल अभी खत्म नहीं हुआ था।


अगले भाग के लिए कमेंट में नेक्स्ट जरूर लिखे #हिंदीकहानियाँ #हिंदी #भूत #रिश्तेदार Rameshwar Sharma रामेश्वर शर्मा Mahaveer Dhayal Rameshwar Roj Toy Story Rameshwar Roj Rohtash Beniwal आपणी आवाज गच्छीपुरा

10/06/2026

भाग 1 (काली रात)
यह कहानी है एक पुरानी हवेली की, जहाँ वासना और खौफ का एक ऐसा खेल शुरू हुआ जिसका अंत रूह कंपा देने वाला था।

# # # **काली रात का बुलावा**

करण पेशे से एक फोटोग्राफर था। वह हमेशा ऐसी जगहों की तलाश में रहता था जहाँ सन्नाटा और रहस्य हो। इसी तलाश में वह 'नीलगिरि' की पहाड़ियों के बीच बनी एक सदियों पुरानी वीरान हवेली में पहुँचा। गाँव वालों ने उसे चेतावनी दी थी—*"वहाँ रात को जो जाता है, वह कभी लौटकर नहीं आता। वहाँ एक खूबसूरत डायन का साया है।"*

करण इन बातों पर हँस दिया। वह भूत-प्रेत पर विश्वास नहीं करता था।

रात के करीब बारह बज रहे थे। हवेली के अंदर घने अंधेरे को चीरती हुई सिर्फ करण की टॉर्च की रोशनी थी। चारों तरफ धूल और मकड़ी के जाले थे। तभी अचानक... हवेली के बड़े से हॉल में मोगरे की तेज खुशबू फैल गई। हवा में एक अजीब सी गर्माहट आ गई।

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# # # **मायावी हुस्न**

करण ने मुड़कर देखा, और उसकी सांसें थम गईं।

सीढ़ियों से एक बेहद खूबसूरत औरत नीचे उतर रही थी। उसने लाल रंग की पारदर्शी रेशमी साड़ी पहनी थी। उसका रंग संगमरमर जैसा सफेद था, आँखें गहरी और नशीली थीं, और होठों पर एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान थी।

"इतनी रात को इस दीवाने का यहाँ क्या काम?" उसकी आवाज़ में एक अजीब सा जादू था, जो सीधे करण के दिल पर वार कर रहा था।

करण सम्मोहन में आ चुका था। उसने अपनी टॉर्च गिरा दी। उसने पूछा, "तुम कौन हो? इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो?"

वह औरत करण के बेहद करीब आ गई। उसकी सांसों की गर्मी करण के चेहरे पर महसूस हो रही थी। उसने अपनी कोमल उंगलियां करण के सीने पर फेरीं और फुसफुसाई, "मैं इस हवेली की मालकिन हूँ... रूपा। सालों से किसी ऐसे का इंतजार कर रही थी जो मुझे इस अकेलेपन से आजाद कर सके।"

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# # # **जुनून और वासना का जाल**

रूपा का हुस्न और उसकी छुअन इतनी कामुक थी कि करण सब कुछ भूल गया। हवेली का डर, गाँव वालों की चेतावनी—सब कुछ हवा हो गया। रूपा ने करण का हाथ पकड़ा और उसे बेडरूम की तरफ ले गई, जहाँ एक पुराना लेकिन आलीशान बिस्तर लगा था। चारों तरफ मोमबत्तियाँ खुद-ब-खुद जल उठी थीं।

करण रूपा के प्यार में पूरी तरह अंधा हो चुका था। उसने रूपा को अपनी बाहों में भर लिया। रूपा का बदन आग की तरह गर्म था। दोनों एक दूसरे के जुनून में डूबने लगे। करण ने जैसे ही उसके होठों को चूमा, उसे एक पल के लिए खून का स्वाद आया, लेकिन वासना के नशे में उसने इस बात को नजरअंदाज कर दिया।

रूपा की सांसें तेज हो रही थीं, और वह करण की पीठ पर अपने नाखून चुभा रही थी। करण को दर्द तो हो रहा था, लेकिन उसमें भी एक अजीब सा मज़ा था।

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# # # **खौफनाक हकीकत**

तभी अचानक कमरे का तापमान एकदम से गिर गया। मोमबत्तियाँ बुझ गईं, सिर्फ खिड़की से आती चाँद की रोशनी बची थी।

करण ने रूपा की आँखों में देखा। लेकिन अब वो आँखें खूबसूरत नहीं थीं। वे पूरी तरह से काली हो चुकी थीं, जिनमें से खून टपक रहा था।

"रू... रूपा? तुम्हारी आँखें..." करण ने डरते हुए पीछे हटने की कोशिश की।

लेकिन रूपा की पकड़ अब लोहे जैसी मजबूत हो चुकी थी। उसके चेहरे की खूबसूरत त्वचा धीरे-धीरे सिकुड़ने लगी और वह एक भयानक कंकाल जैसी दिखने लगी। उसके सफेद, नुकीले दांत बाहर आ गए।

"मैंने कहा था न करण... मैं सालों से इंतजार कर रही थी," उसकी आवाज़ अब किसी डायन की तरह भारी और गूंजने वाली थी। "मुझे तुम्हारी रूह और तुम्हारे खून की प्यास थी!"

करण ने चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन रूपा ने उसका गला दबोच लिया। उसके लंबे नाखून करण के सीने को चीरते हुए अंदर घुस गए। करण तड़पने लगा, लेकिन उस वीरान हवेली में उसकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं था। रूपा उसका खून पी रही थी और करण की आँखों के सामने अंधेरा छा रहा था।

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# # # **सुबह का सन्नाटा**

अगली सुबह, सूरज की किरणें हवेली पर पड़ीं। हवेली फिर से उतनी ही शांत और वीरान दिख रही थी। हॉल के फर्श पर करण का कैमरा पड़ा था, और बेडरूम में सिर्फ उसकी सूखी हुई लाश बची थी, जिसके चेहरे पर अब भी खौफ और वासना के मिले-जुले भाव थे।

रूपा कहीं नहीं थी... वह फिर से अगली रात और किसी नए शिकार के इंतजार में हवेली के अंधेरों में छिप चुकी थी।
,,,,,, भाग 2 पढ़ने के लिए कमेंट में next लिखे Rameshwar Sharma रामेश्वर शर्मा Rameshwar Roj Lucky Traders Club Mahaveer Dhayal Toy Story #हिंदीकहानियाँ #हिंदी #भूत

10/11/2025

पशुपालन विभाग के कर्मवीर योद्धा ओर दयनीय हालत भी एक साथ देखे #पशुपालन #पशुपालनविभाग @पशुपालनविभाग Animal Husbandry, Dairying & Fisheries, Uttarakhand Animal Husbandry Department Rajasthan

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