25/12/2025
कामधेनु शिक्षण संस्थान गुड़ला रोड़, नागौर में महान योद्धा एवं कुशल प्रशासक महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस तथा भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर निदेशक महोदय श्रीमान दौलत राम सारण एवं स्टाफ साथियों ने किया।
इस अवसर पर हिंदी व्याख्याता नगेंद्र सिंह बीका ने महाराजा सूरजमल के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि वे 18वीं शताब्दी के ऐसे महान शासक थे, जिन्होंने भरतपुर राज्य को संगठित कर एक सशक्त सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया। उन्होंने मुगल साम्राज्य की अत्याचारी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष किया और दिल्ली, आगरा एवं आसपास के क्षेत्रों में अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाया।
नगेंद्र सिंह बिका ने बताया कि महाराजा सूरजमल केवल वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने किसानों, व्यापारियों और आम जनता के हितों की रक्षा की, धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया तथा अपने शासन में न्याय और समानता की मिसाल कायम की। राष्ट्र और धर्म की रक्षा करते हुए उन्होंने 25 दिसंबर 1763 को अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जिससे उनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेश कच्छावा ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे शिखर पुरुष थे, जिन्होंने विचारधारा से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। वे एक प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि, पत्रकार और दूरदर्शी नेता थे।
प्रधानाचार्य कच्छावा ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने पोखरण परमाणु परीक्षण कर अपनी सामरिक क्षमता का परिचय दिया, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना एवं स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी ऐतिहासिक योजनाओं की शुरुआत हुई तथा “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” का नारा देकर उन्होंने देश के वैज्ञानिकों को नई ऊर्जा प्रदान की। उनका संपूर्ण जीवन लोकतंत्र, संवाद और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा।
इस अवसर पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि महाराजा सूरजमल का त्याग, साहस और न्यायप्रियता तथा अटल बिहारी वाजपेयी का समर्पण, सादगी और राष्ट्रनिष्ठा आज की युवा पीढ़ी के लिए आदर्श हैं।
अंत में निदेशक श्रीमान दौलत राम सारण ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में इतिहासबोध, राष्ट्रप्रेम एवं नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।