16/08/2015
आज हमारी आज़ादी नहीं हुयी थी ये आप सभी को मालूम है,जानकर बहुत ख़ुशी हुयी।
मुझे लगता है के ये जानना भी आवश्यक है के क्या अंग्रेजी राज्य भारत के मूलनिवासी लोगो के लिए लिए अच्छा था या बुरा।आइये जानते है के अंग्रेजो के राज्य में हमारे लिए क्या क्या हुआ था।
लोग कहते है के आज़ादी की लढ़ाई 1857 को शुरू हुयी थी।लेकिन वो तो ब्राह्मणों की आज़ादी की लढ़ाई थी।लेकिन हमारी लढाई की आज़ादी तो 1848 में शुरू हो गयी थी,जब पहली बार महात्मा ज्योति राव फूले जी ने अछूतों की प्राइमरी शिक्षा की ज़रूरत को समझते हुए पहला स्कूल खोला था।उसके 10 साल बाद माता सावित्री बाई फूले जिनको ज्योति राव फूले ने पढाकर तैयार किया था उन्होंने ने औरतों के लिए 1858 में पहला स्कूल खोला,जिसमें किसी भी जात धर्म की औरतें पढ़ सकती थी,जिनको पैर ।
अब आगे आते हैं।1882 में जब फूले जी ने पहली बार त्रावणकोर में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की बात शुरू की और hunter commision ने इस मांग को जायज ठहिराते हुए आरक्षण की मांग को मंन्ज़ूर किया था।
इसके बाद शाहू जी महाराज ने पहली बार कानूनन तौर पर पहली बार 26 July 1902 को भारत में अपनी रियासत में समाज में दबे कुचले मूल निवासियों को 50% आरक्षण दिया था।
यही वो समय था जब बाबा साहेब डॉ:भीम राव आंबेडकर स्कालर शिप ले जरिये विदेश में पढ़े।
अब बात करते है 1919 के एक्ट की
जिसमें कि पहली बार हमारी पहचान Depressed Classes के रूप में हुई।उसके बाद साइमन कमीशन भारत आया जो यह देखने भारत आया था कि असल में यहाँ पर Depressed Classes हैं या नहीं।
इंग्लैंड में हुयी राउंड टेबल कांफ्रेंस में जहा पे बाबा साहेब के प्रयत्नों से 1932 में Communal Award पास हुआ,जिसमें अछूतों को Seperate Electrorates का हक़ मिला,जिस पर गांधी में मरन वरत रख लिया था,और जो बाद मे Poona Pact के समझौते के रूप में खत्म हुआ।
एक और महत्वपूर्ण बात Land Aquisition Act 1942 जिसके जरिये कुछ और लोगों को ज़मीन रखने का हक़ मिल गए।
ये अंग्रेजो का राज ही था जिसमें बाबा साहेब ने मनुस्मृति को जला डाला था।
आज हम सब बाबा साहेब के संविधान की बदौलत यहाँ तक पहुँच पाएं हैं,ये अंग्रेजी शासन की वजह से संभव हुआ था।
अंत में एक बात कहना चाहूँगा,एक बुरे दोस्त से अच्छा एक सच्चा दुश्मन होता है।ब्राह्मण हमारा दोस्त बनकर हमे गुमराह कर रहा है और अंग्रेज जिनको हम दुश्मन मानते है वो हमारा इतना भला कर गए की हम उनका देना नहीं दे सकते।
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जय भीम जय मूलनिवासी
रोहित कुमार