gyan prwah

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15/05/2025

कलम एक पहचान
शिक्षा प्रणाली मनुष्य के जीवन के लिए वह अवशोषित कण है, जो समग्र रचनात्मक प्रक्रिया का एक साधन है, अर्थात जीवन में शिक्षा विचारों को स्थानांतरित करने का सिद्धांत है, जो प्रभावशाली गुण को निर्धारित करता है जो नए जीवन के निर्माण या उत्पत्ति के उत्तर में सक्रिय हो जाता है, जो समाज में विकास एवं सुधार की स्थिति को दर्शाता है। जिसे आंतरिक रूप से प्राप्त करके मनुष्य अपने जीवन का प्रबंधन करता है।शिक्षा मानव के लिए संचार का एक साधन है जो परिवर्तन की व्याख्या प्रदान करती है, उनकी विशेषताओं को आत्मसात करके, व्यवस्थित संरचनाओं के साथ संयोजित करके, अथवा शिक्षा द्वारा उत्पन्न सकारात्मक अवधारणाओं के संग्रह से उत्पन्न जीवन-परिवर्तनकारी प्रतिक्रियाओं का व्यवस्थित विश्लेषण है, जो मन में अवशोषित या समन्वित भावनात्मक गुणों जैसे दृष्टिकोणों से संबंधित विभिन्न प्रकार की संवेदनाओं को प्रतीकात्मक रूपों में परिवर्तित करती है, जो मानव जीवन में विकास और सुधार की स्थिति को दर्शाते हुए, नए जीवन के निर्माण या नवीनीकरण की प्रतिक्रिया में सक्रिय हो जाती हैं। इसे आंतरिक रूप से आत्मसात करके, मनुष्य एक उपयुक्त जीवन प्रबंधन प्रणाली को अपनाकर अपना जीवन संचालित करता है, जो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समन्वित कार्य करने का एक व्यवस्थित तरीका है। इससे उत्पन्न सकारात्मक अवधारणाओं का संग्रह आर्थिक, सामाजिक, साक्षरता में प्रगति या परिवर्तन लाता है, और इनसे उत्पन्न होने वाले गुणों के साथ कौशल को जोड़कर, मनुष्य अपने जीवन में समस्याओं को हल करने और विभिन्न परस्पर संबंधित विशिष्ट लक्ष्यों या उद्देश्यों की निश्चितता प्राप्त करने में सक्षम होता है।
Written by
ESHAN SINGH

15/05/2025

जीवन एक रचनात्मक केंद्र का सोत है.

जीवन का अर्थ है (ऊर्जा, गति, स्थिरता )
ऊर्जा – जिस प्रकार जीवन की शुरुआत पाँच तत्त्व के सम्मेलन से होती है, जैसे – भूमि जो स्थिरता का प्रतीक है( शिक्षा जो हमे आर्थिक, सामाजिक,साक्षरता, मैं प्रगति अथवा बदलाव लाती तकनीकी विज्ञान, सामाजिक विज्ञान,तार्किक क्षमता,स्वैच्छिक दृष्टिकोण, मानसिक एवं बौद्धिक क्षमता प्रदान करती है) गगन जो ऊंचाई का प्रतीक है (ज्ञान ,जो जीवन का प्रतिनिधित्व करता है , तथा मनुष्य के भीतर दृश्य प्रकाश प्रदान कर सुन्दरता को निखारता है, जिसका अर्थ है -विचारशील, बुद्धिमान और समझदार होना है,जो विशेष रूप से मनुष्य के लिए आंतरिक प्रकृति के सराहनीय गुणों में से एक है, तथा प्रतिरुप की तरह उत्पन हो कर मानव दष्टि का संचार करता है), वायु – तीव्रता का प्रतीक है ( जैसे विचार जो विशेष रूप से रूपांतरित होकर जीवन में जीवनशैली, आचरण, क्रियाकलाप जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल होकर जीवन को आकार देता है,), नीर -शीतलता का प्रतीक है (चरित्र और आचरण, जिनसे प्रभावित होकर व्यक्ति अपनी जीवन शक्ति का निर्माण और विकास करता है)

गति- अच्छी शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने तथा उनसे उत्पन्न गुण, व्यवहार का उत्पादन करके, जिसका निरंतर उपयोग किसी जीवन को आकार या दिशा देने में किया जाता है, अपने जीवन को स्थायी बनाकर अनेक अवसर प्रदान करता है, इसके साथ ही मनुष्य अपनी स्थिति को सरल बनाकर अपने उद्देश्य को प्राप्त करता है।

स्थिरता - ज्ञानमूलक मनोवृत्ति (जो उत्पन्न होकर जीवन का निर्माण करती है)

रचनात्मक – कल्पनाशील और नवाचार में अपने कौशल विकसित कर अथवा मूल्यवान या नवीन विचारों का सृजन कर व्यक्तिगत गुणों को विकसित कर प्राप्त दृष्टिकोणों द्वारा समस्याओं को हल करने के तरीके को संदर्भित करता है।

ज्ञान जीवन के सभी जैविक, संरचनात्मक और क्रियात्मक पहलुओं के प्रथम चरण में उत्कृष्ट जीवन जीने की दिशा में पहला कदम है। जीवन में इसके प्रयोग से मानव मन से व्यभिचार जैसे विषैले अपशिष्ट दूर होते हैं, नैतिक गुणों का विकास होता है तथा जीवन के विशिष्ट कार्यों के लिए प्रशिक्षण द्वारा जीवन को दिशा मिलती है। शिक्षा के संयोजन या विश्लेषण से उत्सर्जित विचारों या उत्तेजनाओं को मस्तिष्क ग्रहण करता है तथा मस्तिष्क में संवेदी तंत्र के माध्यम से विस्तृत जानकारी को अवशोषित कर उन्हें विभिन्न श्रेणियों में संरचित करता है, विशिष्ट गुणों या योग्यताओं को प्राप्त करता है। ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचारों से महान गुणों का विकास होता है। उच्च और उचित शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य अपने जीवन को दिशा देताहै तथा ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचार अमृत के समान होते हैं जो हमें समस्याओं का समाधान करने और अपने जीवन को बदलने, वर्तमान स्थिति को सुधारने और मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने के लिए निर्णय लेने में सहायता करते हैं। अन्य लोगों के साथ संबंधों, सर्वेक्षणों, गुणों, व्यावहारिक ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचार हमें अपनी सीख को अपने वास्तविक जीवन की स्थितियों में लागू करने में सहायता करते हैं, विशेष रूप से एक दिशा में निरंतर और सुचारू रूप से आगे बढ़ते हुए दूसरे लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए मनुष्य अपने जीवन का संचालन करता है। ऐसे गुणों को विकसित करके यह जीवन को दीर्घजीवी बनाता है और अनेक अवसर प्रदान करता है। यह आचरण, चरित्र और योग्यता का निर्माण करता है, जो मानव जीवन के आधारभूत संसाधन हैं। जिससे जीवन उज्ज्वल और विकसित बन सकता है अथवा जीवन निर्माण में बुद्धि, विवेक और कुशलता को अपनाकर हम वस्तुगत जगत को उसकी विशिष्ट विशेषताओं सहित अवधारणाओं, सिद्धांतों आदि में परिवर्तित कर सकते हैं और इसके साथ जीवन को आकार दे सकते हैं।

15/05/2025

मानव का जीवन

ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचार मनुष्य के भीतर प्रकाश की एक किरण उत्पन्न करते हैं|
मानव जीवन में ज्ञान और शिक्षा निर्धारित और जानने योग्य चीजों को प्राप्त करने, सोचने और समझने की क्रिया के लिए मुख्य मार्गदर्शक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का आधार है, अपनी जीवन-पद्धति में मनुष्य अपने मस्तिष्क में श्रेष्ठ विचारों का संचय करता है , जो समस्याओं को सुलझाने और निर्णय लेने में सहायता करते हैं तथा मानव जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करके मानव जीवन में विकास और सुधार करते हैं। ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचार मनुष्य के भीतर प्रकाश का एक पुंज उत्पन्न करते हैं, जिसे प्राप्त कर मनुष्य अपने भीतर सौंदर्य प्रकट करता है।. कुछ मूलभूत कण जो मानव के मूल स्रोत हैं, जिन्हें मनुष्य अपने भीतर आत्मसात करता है और उनसे प्राप्त अवधारणाओं से मनुष्य अपने जीवन के कुछ तत्वों जैसे चरित्र, रूप आदि को परिवर्तित करता है। जैसे ज्ञान और शिक्षा जो बौद्धिक समानता, जीवन का प्रतिनिधित्व या किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति जैसे व्यावहारिक तत्वों को मनुष्य अपने जीवन को नियंत्रित करने के लिए सर्वोत्तम सैद्धांतिक विचारों को प्रवाहित करते हैं जो अपने गुणों के माध्यम से मनुष्य में आवेशित होकर और परिणामस्वरूप मानवीय आवश्यकताओं, इच्छाओं और मानव जीवन को नियंत्रित करने के लिए अवधारणाओं की संरचना करके, मनुष्य अपने जीवन में बुनियादी कार्यों में संचार करता है, अपने जीवन से संबंधित समस्याओं का समाधान करता है और मनुष्य अपने जीवन को उत्कृष्ट बनाता है,और अपनी विशाल और रचनात्मक, संज्ञानात्मक क्षमता और स्मृति के साथ, वह सृजन और विनाश, सामंजस्य और विघटन के जटिल खेल के माध्यम से जीवन या जग को बनाता है और नवीनीकृत करता है, स्वयं प्रकाश का स्रोत बनकर जीवन के मूल प्रकाश स्रोत की तरह जीवन का विस्तार करता है और आंशिक अवास्तविकताओं को खत्म करके अपने सर्वश्रेष्ठ जीवन का निर्माण करता है, अपनी विशिष्ट विशेषताओं जैसे बुद्धि, विवेक, कौशल और नैतिकता जैसे मानवीय सिद्धांतों के आधार पर एक व्यवस्थित कार्यप्रणाली का पालन करता है, प्राकृतिक और सामाजिक दुनिया का ज्ञान उत्पन्न करता है और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समन्वित तरीके से किए गए प्रक्रियात्मक समान उद्देश्य तार्किक संचालन और योजनाबद्ध गतिविधियों के माध्यम से व्यवस्थित रूप से प्रसारित करता है, एक समग्र दृष्टिकोण विकसित करता है और विशेषताओं के अनुसार इसके मूल तत्वों का अध्ययन, समझ और उपयोग करके अपने जीवन को बनाता और आकार देता है।जब शिक्षा और ज्ञान मानव जीवन में प्रकाश की तरह फैलते हैं तो इससे चरित्र, प्रतिभा, सद्गुण, समृद्धि, व्यवहार आदि का निर्माण होता है जो मानव जीवन के मूल उपकरण हैं जो जीवन को विशेष रूप से विकसित कर उसे उत्कृष्ट बनाते हैं अशिक्षा और अज्ञानता को दूर कर मनुष्य अपने जीवन को एक दिशा से दूसरे लक्ष्य की ओर निरंतर एवं सरलता से आगे बढ़ाता है। शिक्षा प्राप्त करने से इनसे उत्पन्न विचार हमें अपनी सीख को हमारे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने में मदद करते हैं। एक दिशा से निरंतर एवं सरलता से आगे बढ़ते हुए दूसरे लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए मनुष्य अपने जीवन का संचालन करता है। ज्ञान और शिक्षा से उत्पन्न विचार मनुष्य के भीतर प्रकाश की एक किरण उत्पन्न करते हैं जो मानव जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करने एवं मानव जीवन के विकास एवं जीवन की परिस्थितियों को आकार देने में सक्षम होता है।

15/05/2025

मानव का जीवन चक्र?

जिस प्रकार परिवर्तनों की एक श्रृंखला जिससे एक जीव अपने जीवन भर गुजरता है जो निषचेन से शुरू होकर मृत्यु पर समाप्त होने वाले महत्वपूर्ण चरणों से चिन्हित होती है...
मनुष्य सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में उपस्थित एक ऐसा प्राणी है जो इस धरती पर उपस्थित सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है, मनुष्य ज्ञान और विज्ञान का सामूहिक परिणाम है, तथा मनुष्य के वे पांच अंग, जिनके माध्यम से प्राणियों को बाह्य जगत और उसकी वस्तुओं का ज्ञान प्राप्त होता है। जैसे – मनुष्य शिक्षा, विचार, चरित्र, प्रतिभा, योग्यता प्राप्त करके ,जो जीवन का प्रतिनिधित्व करता है , तथा मनुष्य के भीतर दृश्य प्रकाश प्रदान करता है सुन्दरता को निखारता है,जो विशेष रूप से मनुष्य के लिए आंतरिक प्रकृति के सराहनीय गुणों में से एक है, तथा प्रतिरुप की तरह उत्पन हो कर मानव दष्टि का संचार करता है| किसी विशेष उदेश्य की पूर्ति जैसे भौतिक समानता, व्यवहारिक तत्वौ संग्रहित कर अपने जीवन को नियंत्रण करने के लिए सर्वोत्तम सैद्धांतिक विचार प्रवाह कर अपने जीवन से संबधी समस्याओं का निवारण करता है| जिस प्रकार परिवर्तनों की एक श्रृंखला जिससे एक जीव अपने जीवन भर गुजरता है जो निषचेन से शुरू होकर मृत्यु पर समाप्त होने वाले महत्वपूर्ण चरणों से चिन्हित होती है, उसी प्रकार मानव जीवन चक्र को पाँच मुख्य चरणो मे वर्णित करते है लोग इन सभी चरणो के दौरान लगातार और धिरे – धिरे दिन प्रतिदिन अपने जीवन के विकास के लिए बुद्धि, कौशल, विवेक जैसे विशेषताओ की संरचना कर परिणामस्वरूप मे वर्तमान स्थिति को सुधारने और मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने के लिए अपने जीवन मे निरंतर दिन – प्रतिदिन बढलते रहता है, अथवा मनुष्य अपने जीवन का संचालन करता है। ऐसे गुणों को विकसित करके यह जीवन को स्थायी बनाता है और कई अवसर प्रदान करता है। जो मानव जीवन के मूल उपकरण हैं।

प्रथम अवस्था
बाल्यावस्था (आयु 0 से 12 जिसका अर्थ विचारशील होना है)

बाल अवस्था में प्राप्त शिक्षा को जीवन में समाहित करने से सामान्य विचार उत्पन्न होकर मन में घुलमिल जाते हैं और सकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में दो प्रकार के श्रेष्ठ गुण प्राप्त होते हैं जो जीवन के सूक्ष्म अंग हैं जैसे चरित्र और आचरण, जिनसे प्रभावित होकर अपनी जीवन शक्ति का निर्माण और विकास करता है, अपने जीवन को आकार देता है और अपने जीवन को बदलता है और फलस्वरूप चरित्र विकास (चरित्र निर्माण) के बीज को आधारभूत या आवश्यक रूप से बोकर अपने जीवन को संतुलित और विकसित करता है।

द्वितीया अवस्था

किशोरावस्था (आयु 11 से 21 जिसका अर्थ बुद्धिमान और समझदार होना है)

किशोरावस्था में वह शैक्षिक ज्ञान का उपयोग अपने रचनात्मक, व्यावहारिक, सांसारिक एवं सामाजिक कर्तव्यों के लिए करता है। यह वह माध्यम है जिसके माध्यम से वह अपने मन में उठने वाले विचारों को लिखकर, बोलकर या सुनकर व्यक्त करता है तथा उनसे उत्पन्न श्रेष्ठ गुणों को ऐसे विशिष्ट रूप में परिवर्तित करता है कि वह अपने जीवन में जीवनशैली, क्रियाकलाप आदि व्यावहारिक गतिविधियों को सम्मिलित कर अपने जीवन को आकार देता है। यह संचार का वह माध्यम है जो जीवन में सामाजिक जागरूकता, अवधारणाओं एवं दृष्टिकोण जैसी विशेषताओं को मापता है, किसी भी विषय या वस्तु के अनुभव के संदर्भ के महत्व को पहचानता है, सार्वभौमिकता एवं निरपेक्षता में दार्शनिक एवं बौद्धिक रुचि के प्रति प्रतिरोध प्रदर्शित करता है, अपने जीवन की परिस्थितियों को बदलता है तथा अपने जीवन स्तर की गति या दिशा को बदलकर अपने जीवन का विकास करता है।

तृतीय अवस्था

युवावस्था (आयु 21 से 45 जिसका अर्थ सृजन, सीखना और योगदान होना है)

युवावस्था में अपने जीवन में ज्ञान और शिक्षा का संयोजन या विश्लेषण से उत्सर्जित विचारों या उत्तेजनाओं को ग्रहण करता और संवेदी तंत्र के माध्यम से मस्तिष्क में मानवीय धारणा की एक विस्तृत श्रृंखला को अवशोषित करता है और विभिन्न श्रेणी में विशिष्ट गुणों या क्षमताओं को प्राप्त करता है। जब यह जीवन चक्र में शामिल होते हैं तो अपने अवधारणाओं या उत्तेजनाओं को अपने भीतर पूरी तरह अवशोषित कर लेते हैं, जिसका उपयोग वह कई संबंधित शैक्षिक और अन्य गतिविधियों में तार्किक क्षमता और दृष्टिकोण का समन्वय और निर्माण करके स्वचालित रूप से संचालित करता है, जैसे भौतिक समानता पहलू, व्यवहारिक तत्व, उपलब्ध संसाधनों का कुशल और प्रभावित तरीकों में उपयोग करना, लोगों के कार्यों में समन्वय होकर ताकि एक लक्ष्य को प्राप्त करके अपने जीवन को नियंत्रित करता है, और अपने जीवन को एक निश्चित रूप देता है। शैक्षिक ज्ञान से उत्पन्न अवधारणाओं और विचारों से अपने जीवन में मूलभूत गुना का विकास करता है। शैक्षिक ज्ञान से युवा अवस्था में आर्थिक, तार्किक क्षमता, दृष्टिकोण, मानसिक और बौद्धिक क्षमता विकसित करता है और अपने जीवन में आने वाले समस्याओं का समाधान करता है और अपने जीवन चक्र का प्रतिनिधित्व और विकास करता है। यह जीवन में उन्नति या परिवर्तन लाता है तथा इसे उत्पन्न गुना के साथ कौशल का संयोजन कर मानव जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान करता तथा व्यक्तियों के विभिन्न पर्स पर संबंधित विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्यों को प्राप्ति में सक्षम बनाता है तथा उसके जीवन स्तर की गतियां दिशा में परिवर्तन कर उसके जीवन की संरचना करता है जिससे मनुष्य के जीवन में विकास बनाया जा सके उसके जीवन में सफलता प्राप्त करने में सहायता मिल सके। जो जीवन में लागू होने पर मानव मनुष्य विचार जैसे जहरीले कचरे को निकलता है नैतिक मूल्यों का विकास करता है तथा जीवन के विशेष कार्य का प्रशिक्षण देकर जीवन को दिशा प्रदान करता तथा विस्तृत गुना की योग्यताओं को आत्मसात कर उन्हें विभिन्न श्रेणियां में संरक्षित करता है, नहीं जिससे मनुष्य के जीवन को उज्जवल एवं विकसित बनाया जा सकता था उसके जीवन में सफलता प्राप्त करने में सहरका मिल सके।

चतुर्थ अवस्था
प्रौढ़ावस्था अथवा वृद्धावस्था (आयु 45 से 60 जिसके अर्थ अंतर्दृष्टि, ज्ञान,विवेकशील होता है)

प्रौढ़ावस्था अथवा वृद्धावस्था में ज्ञान और शिक्षा के संयोजन से उत्पन्न महान विचारों से अपने जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करके जीवन को विकसित और उन्नत करते हैं वैचारिक संचार से उत्पन्न विचारों सिद्धांतों अवधारणाओं और विचारों को एकत्रित करते हैं, तथा अपने जीवन में संतुलन लाने के लिए व्यक्तियों के साथ न्यायपूर्ण और निष्पक्ष व्यवहार करते हैं , जैसे नैतिकता, तर्कसंगत सोच ,धार्मिक सिद्धांत, सामाजिक वर्ग , प्रत्येक वर्ग के साथ समानता, सम्मान साथ ही एकता की मूल्यों को समझने और स्थापित करने का प्रयास करते हैं तथा व्यक्ति की गरिमा को समझते हैं और अपने जीवन में गुणवत्ता द्वारा परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।

15/07/2024

What is the role of thought in human life?
Thoughts generated from knowledge and education in human life are like nectar, which when integrated in human life, helps in solving problems, difficulties and conflicts arising in human life and by integrating them in many related educational activities, by developing logical ability and perspective, automatically develops qualities like character and behavior and by changing the speed or direction of the stage of his life, by using the available resources efficiently and effectively, by coordinating the tasks of man so that by achieving a goal and earning money for running the social system, man controls his life and gives it a definite shape.

Photos from gyan prwah's post 05/07/2024

मनुष्य के जीवन में किताबें किस प्रकार बदलाव करती है?
जिस प्रकार एक पीढ़ी प्रणाली के विकास में सुधार की स्थिति को संदर्भित करती है। पीढ़ी से पहले कंप्यूटर इलेक्ट्रोमैनिकल बनाए जाते थे,प्रत्येक पीढ़ी के कंप्यूटर में प्रमुख तकनीकी विकास की विशेषता होती है जिसमें कंप्यूटर के संचालन के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया, उसी प्रकार मुदित पन्नों का वह संग्रह जिनसे उत्पन्न सकारात्मक संकल्पनाओं से आर्थिक, सामाजिक,साक्षरता, मैं प्रगति अथवा बदलाव लाती है और उनसे उत्पन्न गुणवत्ता, के साथ कौशल का संयोजन कर मानव जीवन में आने वाले समस्याओं का समाधान कर सुनिश्चित रूप से विभिन्न परस्पर से जुड़े विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए समर्थवान् बनाती है।

01/07/2024

मनुष्य के जीवन में किताबों के क्या उद्देश्य हैं?
जिस प्रकार रसायन विज्ञान वह शाखा है जो पदार्थ की संरचना ,गुण और परिवर्तन के साथ-साथ इन परिवर्तनों से जुड़ी ऊर्जा का अध्ययन करती है, उसी प्रकार मुदित पन्नों का वह संग्रह जो मनुष्य के जीवन का सार है,जीसे विशेष रूप से मनुष्य अपने जीवन में तकनीकी विज्ञान, सामाजिक विज्ञान,तार्किक क्षमता,स्वैच्छिक दृष्टिकोण, मानसिक एवं बौद्धिक क्षमता और संकल्पनाओं का निर्माण कर उनसे उत्पन्न ज्ञान से मनुष्य अपने जीवन में उत्पन्न समस्याओं का हल कर अपने जीवन का प्रतिनिधित्व करता है और विकसित करता है।

24/06/2024
15/06/2024

जिस प्रकार श्वसन एक ऑक्सीकरण प्रक्रिया है जिसमें ऊतकों के भीतर कार्बोहाइड्रेट वसा प्रोटीन और खाद्य पदार्थ जलकर कार्बनडाइऑक्साइड जल बनाते हैं और परिणामस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है, उसी प्रकार कोई मनुष्य अपनी रचनात्मक, क्रियात्मक, लौकिक एवं सामाजिक कर्तव्य के लिए शैक्षणिक ज्ञान संयोजित कर उनसे उत्पन्न संकल्पनाओं से मनुष्य अपने जीवन में चारित्रिक विकास (चरित्र का निर्माण)को बुनियादी या अनिवार्य रूप से बीजरोपित कर मनुष्य अपने जीवन को संतुलित कर विकसित करता है।

04/06/2024

जिस प्रकार रासायनिक बंधन वह आकर्षक बल है जो विभिन्न रासायनिक प्रजातियों मैं विभिन्न घटकों को एक साथ बांधे रखता है ताकि एक परिपक्व परमाणु क्रम और एक निश्चित लेकिन विशिष्ट ज्यामितीय आकार बनाए रखा जा सके, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में ज्ञान और शिक्षा वह मूल तत्व है जिन्हें मनुष्य अपने जीवन में संयोजन कर विशेषता रूप में उनसे उत्पन्न संकल्पनाओं, अवधारणाओं से मनुष्य अपने जीवन में चरित्र व्यवहार जैसे गुणों का निर्माण करता हैं और अपने जीवन की अवस्था की गति या दिशा में बदलाव कर अपने जीवन को विकसित बनता है।

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