दृगेंद्रिय अनुराग : कोशिश जागरूकता की - अंधकार से प्रकाश की ओर

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20/12/2025

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Qutub Minar Diary -2
30/06/2025

Qutub Minar Diary -2

Qutub Minar Diary
30/06/2025

Qutub Minar Diary

"Nature's therapy: one trek at a time."
28/04/2025

"Nature's therapy: one trek at a time."

पुष्प की अभिलाषाचाह नहीं, मैं सुरबाला केगहनों में गूँथा जाऊँ,चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंधप्यारी को ललचाऊँ,चाह नहीं सम्र...
27/07/2022

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक।।

_ माखनलाल चतुर्वेदी

25/02/2022

Russia attacking on Ukraine is not a great move in this present situation where whole world is fighting the pandemic and numerous other problems.
Other countries condemning Russia for this move is also a good gesture.

But US and UK condemning Russia and imposing sanctions is the greatest height of hypocrisy which I have witnessed till date. I might not be a great historian or a researcher but I still know that these gore (Britishers) ruled us for almost 200 years. What did they didn't do with us?
Killed our brothers, R***d our women, took away our lands from us and what not.

Same goes for US in Vietnam. The bombs they used against Vietnam, the war they waged for almost 30 years took lives of thousands. They murdered, plundered and tried to destroy everyone who went against there philosophy of Capitalism.

So they do not have a right to condemn Russia at all.
Russia is doing what they feel is best for them. Ukraine invited terror upon them by joining NATO. Had they not done that, Russia might not have done this.

It's a simple philosophy in this world that strong oppresses weak. Rich kills poor. So just a simple process.

हम अजनबीयों से बात नहीं करते, पर इस जद्दोजहद में रहते है की कहीं हम इसे जानते तो नहीं!! पेश है विष्णु विशाल जी द्वारा रच...
02/12/2020

हम अजनबीयों से बात नहीं करते, पर इस जद्दोजहद में रहते है की कहीं हम इसे जानते तो नहीं!! पेश है विष्णु विशाल जी द्वारा रचित ये सुन्दर सी कविता जिसका किरदार इसी जद्दोजहद में है......

गुरु गोविन्द दोउ खरे, काके लागु पांय।बलिहारी गुरु अपने, गोविन्द दियो बताये।। इस कबीर अमृतवाणी को हम सबने बचपन में सुना ह...
05/09/2020

गुरु गोविन्द दोउ खरे, काके लागु पांय।
बलिहारी गुरु अपने, गोविन्द दियो बताये।।

इस कबीर अमृतवाणी को हम सबने बचपन में सुना है और सुनते आ रहे है। आशा है की अर्थ भी जानते ही होंग। इस आधुनिक समाज में हर किसी जाने माने सख्शियत के जन्मदिवस पर कोई न कोई दिन को उत्सव स्वरुप मानाने की प्रथा चलती आ रही है परन्तु आज ५ सितम्बर को जिस सख्शियत (डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन) का जन्मदिवस मानते है वो उनके जन्मदिवस के रूप में काम और शिक्षक दिवस के स्वरुप में ज्यादा मनाया जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमIरे दूसरे राष्ट्रपति के अलावा एक अच्छे शिक्षक भी थे।

शिक्षक/गुरु, यह एक ऐसा वर्ग है जो समाज को सही और गलत में क्या चयन करना है उसकी राह दिखाता है। अब ये हमारे ऊपर है की हम क्या चयन करते है ये हमारे ऊपर निर्भर करता है। अगर राह सही साबित हुई तो हम आने वाले भविस्य में कुछ उत्तम काम को अंजाम देते है , और अपने नाम के साथ गुरु, घर, परिवार, समाज तथा देश के नाम को भी रौशन करते है। गलत राह का चयन करने वाला छात्र हमेशा ही अपने शिक्षक को कोसता रहता है। कभी भी वो ये विचार नहीं करता की जिस छात्र ने सफलता प्राप्त की है उसे भी उसी शिक्षक ने राह बताया था , बस चयन उसने स्वयं किया है।

हम जिस आधुनिक समाज में रह रहे है, वहां जानने और समझने के लिए बहुत सारी चीजे हैं। इनकी जानकारी भी कहीं न कहीं से मिल ही जाती है। बस चयन आपको एक अच्छे मार्गदर्शक की जो आपको क्या गलत और क्या सही है उसमे अंतर समझा सके। सही राह का चुनाव कर आप को उस पथ पे अकेले ही चलना है। इस लेख को समाप्त मैं कुछ पंक्तियों के साथ करना चाहूंगा वो कुछ इस प्रकार है :

प्रथम गुरु है माँ / पिता मेरे , जीवन का डोर थमाया।
दूजा गुरु बना भाई/बहन मेरा , विद्यालय का राह दिखाय।।
वहां (विद्यालय/महाविद्यालय) मिले बहुत सारे गुरुवार, संसार का ज्ञान कराया।
उत्तम और अधम में , भिन्नता समझाय।।
आगे किस पथ पर चलना है यह निर्भर है मुझपर।
ऐसे ही राह दिखाना गुरुवार , पीढ़िया निर्भर है तुझपर।।

22/08/2020
कल मुझे जब सीने पे गोलियां लग जाएंगी,तुम अपने बिस्तर में रहोगे और खबर छप जायेगी।ये जिंदगी तो आनी जानी है अ' मेरे हमवतन,ज...
25/03/2020

कल मुझे जब सीने पे गोलियां लग जाएंगी,
तुम अपने बिस्तर में रहोगे और खबर छप जायेगी।

ये जिंदगी तो आनी जानी है अ' मेरे हमवतन,
जो भी सिकन्दर है कहानी उसकी बन जाएगी।

जाने कितने चमन में खिलेंगे और गुल,
फूल तो बस है वही खुश्बू जिसकी उड़ जाएगी।

हम रहें या ना रहें अ' दोस्तों फिर जमाने में,
निशानी हमारी हमेशा के लिए रह जाएगी।

जाने को जाना है इक रोज जमाने से सभी को,
जाने की अदा ही अपनी दास्ताँ कह जायेगी।

हम समन्दर ना सही पर ए दोस्त सुन रख ये भी
हमसी लहरों में समन्दर की रवानी रह जाएगी।

08/03/2020

Happy women's day !!!
Women, A single word which carries lots of emotions with herself from the time of her birth till the end of the life. Begins life as a daughter ( it can be said as father's pride, loved by mother also but as I have seen and experienced in my life) , sister (brother's first best friend and remains till the end of life), Wife ( As said by lord Shiva, stree is half part of Purus, they complete each other by Sharing the responsibility of each other) and the most important part which no man can compete with she is none other than Our "Mother": This is not a simple word, it is complete universe. Even the Gods wants to take birth on earth for the love of Mother. What she does, is Incredible.

Now some words to describe the modern women:
माँ की प्यारी, दादी का दुलारी हूँ मैं।
भाई की सूरमा, पापा की गरिमा हूँ मैं।
घर की शान, देश की अभिमान हूँ मैं।
कमजोर समझने की गलती ना कर,
अबला, बेचारी नहीं, नारी हूँ मैं।।

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