05/09/2020
गुरु गोविन्द दोउ खरे, काके लागु पांय।
बलिहारी गुरु अपने, गोविन्द दियो बताये।।
इस कबीर अमृतवाणी को हम सबने बचपन में सुना है और सुनते आ रहे है। आशा है की अर्थ भी जानते ही होंग। इस आधुनिक समाज में हर किसी जाने माने सख्शियत के जन्मदिवस पर कोई न कोई दिन को उत्सव स्वरुप मानाने की प्रथा चलती आ रही है परन्तु आज ५ सितम्बर को जिस सख्शियत (डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन) का जन्मदिवस मानते है वो उनके जन्मदिवस के रूप में काम और शिक्षक दिवस के स्वरुप में ज्यादा मनाया जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमIरे दूसरे राष्ट्रपति के अलावा एक अच्छे शिक्षक भी थे।
शिक्षक/गुरु, यह एक ऐसा वर्ग है जो समाज को सही और गलत में क्या चयन करना है उसकी राह दिखाता है। अब ये हमारे ऊपर है की हम क्या चयन करते है ये हमारे ऊपर निर्भर करता है। अगर राह सही साबित हुई तो हम आने वाले भविस्य में कुछ उत्तम काम को अंजाम देते है , और अपने नाम के साथ गुरु, घर, परिवार, समाज तथा देश के नाम को भी रौशन करते है। गलत राह का चयन करने वाला छात्र हमेशा ही अपने शिक्षक को कोसता रहता है। कभी भी वो ये विचार नहीं करता की जिस छात्र ने सफलता प्राप्त की है उसे भी उसी शिक्षक ने राह बताया था , बस चयन उसने स्वयं किया है।
हम जिस आधुनिक समाज में रह रहे है, वहां जानने और समझने के लिए बहुत सारी चीजे हैं। इनकी जानकारी भी कहीं न कहीं से मिल ही जाती है। बस चयन आपको एक अच्छे मार्गदर्शक की जो आपको क्या गलत और क्या सही है उसमे अंतर समझा सके। सही राह का चुनाव कर आप को उस पथ पे अकेले ही चलना है। इस लेख को समाप्त मैं कुछ पंक्तियों के साथ करना चाहूंगा वो कुछ इस प्रकार है :
प्रथम गुरु है माँ / पिता मेरे , जीवन का डोर थमाया।
दूजा गुरु बना भाई/बहन मेरा , विद्यालय का राह दिखाय।।
वहां (विद्यालय/महाविद्यालय) मिले बहुत सारे गुरुवार, संसार का ज्ञान कराया।
उत्तम और अधम में , भिन्नता समझाय।।
आगे किस पथ पर चलना है यह निर्भर है मुझपर।
ऐसे ही राह दिखाना गुरुवार , पीढ़िया निर्भर है तुझपर।।