S.D.Public School, Muzaffarnagar

S.D.Public School, Muzaffarnagar Post your name/pic on this wall so that others can recognise you. The School was founded on 10th July 1968 under the aegis of S.D.

College Association in response to the demand to develop academic excellences, aiming at imparting co-education under the well guided educational programme. This leading organisation is running a Post Graduate College, Two Intermediate Colleges, Polytechnic, Medical Institute & Research Centre, Engineering College and a college for Management Studies. The school is housed in triple storyed good looking buildings near Roadways Bus Stand for classes L.K.G. to V and at Patel Nagar, New Mandi, for the classes VI to XII, which follows the curriculum and courses laid down by the Central Board of Secondary Education, New Delhi [School Affiliation No. 2130006] and the Kendriya Vidyalaya Sangathen (Central School Organisation), New Delhi, under the new pattern introduced by the board in differentiated courses.

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27/11/2015

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15/07/2014

Friends, share your class group photos with year of passing.

15/08/2013
19/07/2013

Has english tortured our indian culture?

what do you think...

18/07/2013

ExamFear is a one stop platform that provides FREE Quality education. The channel has more than 2000 educational videos on Physics, Maths & Chemistry with co...

11/07/2013

Can anyone help me to know whether Mrs.Punita Bhandari is still working in school or not....
I m one of the old student of school who left in 2004,
and Mrs.Punita is my aunt but m not in contact wid her but searching for her contact.....

30/06/2013

फिल्म रांझना के टॉप डायलॉग:

1. हमें अपने गाल पर थप्पड़ से ज्यादा उसके गाल पर पप्पी का शौक था...

2. ए रिक्शा वाले! पैसा मत ले मैडम से। भाभी है तुम्हारी...

3. गली के लौंडों का प्यार अक्सर डॉक्टर और इंजिनियर ले जाते हैं...

4. हम खून बहाएं, तुम आंसू बहाओ। साला आशिकी न हो गई, लाठीचार्ज हो गया।

5. लंका दहन होना बाकी था, क्योंकि हमारा जवान होना अभी बाकी था।

6. एक बात मैं समझ गया हूं। लड़की और रॉकेट आपको कहीं भी ले जा सकते हैं।

7. तुम्हारा प्यार न हो गया, यूपीएससी का एग्ज़ाम हो गया। 10 साल से क्लियर ही नहीं हो रहा।

8. नमाज में वो थी, पर ऐसा लगा कि दुआ हमारी कबूल हो गई।
9.कुन्दन के पाजामे का नाड़ा इतना कमजोर नही बिंदिया, जो तेरे ब्लाउज के दो बटन पर खुल जाये.
१०. मेरे पीछे स्कूटर में बैठना पड़ेगा . मैं ब्रेक मारूंगा तुम्हे मुझपे गिरना पड़ेगा .
मेरे साथ नाचना - गाना पड़ेगा गर्लफ्रेंड न सही .फील ही देदे "

11. 180 रुपये किलो है सेब , विटामिन हमसे खाओ,आशिकी इनसे लड़ाओ |

और सबसे जबरदस्त
12. साढ़े सात साल में तो शनीचर भी छोड़ देता है, पता नहीं ये कब छोड़ेगी।

225 B-schools, 52 engineering colleges close in 2 years
14/05/2013

225 B-schools, 52 engineering colleges close in 2 years

MUMBAI: When the sun of the new millennium came up, shining on the aspirations of a young India, it marked the golden age for professional education. In the early part of the last decade, hundreds...

19/03/2013

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हारी गर्लफ्रेंड को छीन सकता है?
गर्लफ्रेंड न पैदा होती है और न मरती है वो तो बस बॉयफ्रेंड बदलती है |

जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम पिछली गर्लफ्रेंड के छोड़ के जाने का पश्चाताप न करो। आने वाली गर्लफ्रेंड की चिन्ता न करो। अभी तुम्हारे पास जो है उसी के साथ आनंद मनाओ

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आए , जो लिया यही से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। जो लिया, गर्लफ्रेंड से लिया। जो दिया, गर्लफ्रेंड को दिया।

खाली हाथ आए और खाली हाथ चले। जो गर्लफ्रेंड आज तुम्हारी है, कल किसी और की थी , परसों किसी और की होगी । तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।

परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम गर्लफ्रेंड का छोड़ के जाना समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। मेरी -तेरी , छोटी -बड़ी , अपना-पराया, गोरी-काली मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारी है, तुम सबके हो।

23/02/2013

हर कक्षा में अलग-अलग टाइप के बच्चे होते
हैं,हमने गुणों के आधार पर कुछ टाइप्स ढूंढ
निकले हैं..
1*सोनिया गांधी टाइप—ये वो बच्चे
होते हैं जिनके माता-पिता स्कूल के
प्रिंसिपल या चेयरमेन होते हैं और सिर्फ
इसी वजह से इन्हें क्लास का मॉनीटर
बना दिया जाता है,अमूमन इस तरह के हाई
सोसायटी बच्चे ‘बाहर के बच्चो’ से
ज्यादा संपर्क रखते हैं..!
2*राहुल गांधी टाइप—ये वो बच्चे होते है
जो शारीरिक रूप से तो बड़े हो जाते हैं पर
मानसिक तौर पर अभी भी छोटे होते
हैं,इनमे निर्णय लेने की और
परिस्थितियों का सामना करने
की क्षमता नहीं होती है,इनके घर वाले
इनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर खुश
हो जाते हैं..!
3*दिग्विजय सिंह टाइप—ये वो बच्चे
होते हैं जो पढाई की बाते छोड़ कर हर
तरह की बाते करते हैं,इनका सिर्फ एक
ही काम होता है ज्यादा से ज्यादा बोल
कर सबका ध्यान अपनी और आकृष्ट
कराना,साफ़-सफाई पर ध्यान न देने से इनके
मुंह से हमेशा दुर्गन्ध आती रहती है,कोई
भी इनके पास बैठना पसंद नहीं करता ,इनमे
कई बुरी आदते होती है जैसे हमेशा नाक में
ऊँगली डालना,ये बड़े पूर्वाग्रही होती हैं
मसलन अगर इनके किसी मित्र (राम सिंह
शेरावाला-RSS) ने इनके चने चुरा कर
खा लिए तो इनकी हर शिकायत में
उसी का नाम आएगा..!
4*सुरेश कलमाडी टाइप--ये बच्चे पढाई में
कमजोर होते हैं,चाक से लेकर डस्टर तक स्कूल
में किसी भी चीज की चोरी होने पर
इनका ही नाम आता है लेकिन तब भी स्कूल
के हर तरह के आयोजन में सबसे आगे होते हैं,और
ऐसे मौको पर विदाई में दी जाने
वाली घड़ी से लेकर टेंट की कुर्सिओ और
पानी की बोतल तक के पैसो में हेर-फेर
का मौका कभी नहीं गंवाते..!
5*नरेंद्र मोदी टाइप—ये बच्चे
कुशाग्र बुद्धि के होते हैं और #1 टाइप
के बच्चे इनसे काफी डरते हैं,ये खुद मोनीटर
बनना चाहते हैं लेकिन इनपर सेक्शन-B के
बच्चो से मारपीट के इल्जाम के कारण बात
कुछ बनती नहीं,यूँ तो ये स्कूल में
काफी लोकप्रिय बच्चे होते हैं पर
कभी इनकी खुद के दोस्त के दोस्तो से
नही बनती कभी ऑटो में आने वाले
बच्चो से,शिक्षको की माने तो ये बच्चे इस
साल टॉप भी कर सकते हैं बशर्ते इनके
साथी B-सेक्शन के बच्चो को डराना बंद कर
दे वर्ना प्रेक्टिकल्स में इनके नंबर कम किये
जा सकते हैं..!
6*DNA तिवारी टाइप—ये वो बच्चे होते
हैं जो एक ही क्लास में कई साल फेल होते हैं
और दिमाग बड़ा होने के कारन
इनका ध्यान पढाई से कई-कई माशूकाओं पर
होता है,कक्षा में इनका ध्यान ज्यादातर
बगल की बेंच की छात्राओं पर होता है..!
7*अभिषेक मनु सिंघवी टाइप—ये बच्चे
निहायत ही टुच्चे किस्म के होते
हैं,आवारा बच्चो की संगत में रहने के कारण
ये काफी बिगड़ जाते हैं,कुछ
बच्चों का कहना ये भी है कि पेन्सिल
का डिब्बा देने के बहाने पिछले साल ये
कईयों को फुसलाते हुए भी देखे गए थे, क्लास
में इनका ज्यादातर समय किताबो के भीतर
मनोहर कथाएँ और सरस-सलिल पलटाते हुए
बीतता है..!
8*अमर सिंह या सी.डी.सिंह टाइप—ये
बच्चे टुच्चे के साथ ही लुच्चे किस्म के
भी होते हैं ये क्लास में छुपकर छात्राओं
की फोटो खीचने के कारण बदनाम होते हैं
खबर है पिछले साल स्टाफ रूम में
कैमरा भी इसी ने छुपाया था ..!
9*ममता बनर्जी टाइप—ये बच्चे
शिकायतों से भरे होते हैं इन्हें हर बात में
शिकायत रहती है,आज अगर टेस्ट है तो ये
कहेंगे कल इन्हें बताया नहीं गया,ये अक्सर
शिक्षको से पिछले चेप्टर पढ़ाने की जिद
(रोल बैक ) लेकर बैठे रहते हैं..!
10* लालू यादव टाइप—ये
मस्तमौला टाइप के बच्चे होते हैं इनके
जो मन में आया वो करते हैं,गंभीर से गंभीर
विषय को ये खिल्ली में उड़ाते रहते हैं और
अपनी राय बना कर रखते हैं ,गाँव देहात से
आये ये बच्चे क्लास में कभी-कभी सोते हुए
भी पाए जाते हैं..अपनी इसी आदत के कारण
कभी-कभी इन्हें उसी क्लास में कई साल
गुजारने पड़ते हैं..!
11*शशि थरूर टाइप—ये बाहर की स्कूल से
आये हुए बच्चे होते हैं जिन्हें यहाँ का माहौल
ज्यादा रास नहीं आता,ये उस किस्म के बच्चे
होते हैं जो स्कूल में मोबाईल,वीडीओगेम
लाकर बाकी बच्चो के सामने इठलाते हैं,
टेक्नोसेवी होने के कारन क्लास में
ज्यादातर समय स्मार्टफोन पर खुटर-
पिटर करते बिताते है,ये अपनी ‘गर्लफ्रेंडों’
के कारन भी चर्चा का विषय बने रहते हैं..!
12* मायावती टाइप—ये कुंठित किस्म के
बच्चे होते हैं इनकी शिकायत होती है
की शिक्षक इन पर ध्यान नहीं देते कोई
इन्हें प्यार नहीं करता सब बहन-जी,बहन-
जी कह कर चिढाते हैं ,ये अक्सर स्कूल
की दीवारों और बाथरुम में अपना नाम
लिखते हुए पाए जाते हैं..!

13/02/2013

लीजिये कुछ सत्य वचन -

1) अगर किसी लडके ने किसी लड़की से “हाय/
हैलो” कहा है तो वो इसे केवल “हाय/हैलो”
ही समझती है. इसके उल्टे अगर किसी लड़की ने
किसी लडके को “हैलो”
कहा तो लड़का इसको केवल “हैलो” नहीं समझेगा.

2) अगर लड़का “हैलो” को केवल “हैलो”
समझना भी चाहेगा तो उसके दोस्त ऐसा नहीं होने
देंगे, आख़िर दोस्त होते ही किस दिन के लिए हैं.

3) लड़के जिनकी गर्ल फ्रेंड होती है और
जिनकी नहीं होती है, में केवल एक फर्क होता है,
पहले वाले लोग “लड़कियों से बात करते हैं” और
दूसरे वाले “लड़कियों के बारे में बात करते हैं”.

4) आपके मित्र कभी नहीं चाहते कि आपकी कोई
गर्ल फ्रेंड बने, वरना वो कैंटीन में किसके साथ
बैठ कर मौज करेंगे.

5) कालेज में लड़कियों के पीछे पंजीकरण बिल्कुल
मुफ्त होता है, बन्दा साल में दो बार लड़की से
बात नहीं करेगा लेकिन कैंटीन में
हमेशा “मेरी वाली”/”तेरी वाली” संबोधन से
ही बात होगी…

6) जब तक लड़का चेक नहीं करता तब तक , U Are my sweetu , U Are my janu , चलता रहता है ,
साला जिस दिन उसने चेक किया तब उसे
पता चलता है कौन किसकी भाभी है और कौन
किसका देवर ..!

Agree ??

10/02/2013

YO YO HONEY SINGH IN EXAM VERSION
Book se hu dur
lekin exam se Majboor......

Dil ko staye teacher ka Noor....
haaaaaaa

Answer ye sachi aaj usko batau
Mujhko samzh nahi aata, kaise teacher ko patau......

Bas pass hone ke liye main ye answer likhte jau...
Din raat mai ye book rat'te jau...

Book aur Guide mai dekhu vari vari....
Ji karda kitabein fad du main sari...... :-D

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