Himanshu Santmat

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आध्यात्मिक ज्ञान,संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कि वाणी, संतमत सत्संग संदेश।।
💐🙏जय गुरु महाराज 🙏💐

24/11/2025

Himanshu Santmat

23/11/2025

💥✨🙏 जय गुरु महाराज 🙏✨💥

07/11/2025

विषय पाँच हैं-रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द। आँख, जिह्वा, नाक, त्वचा और कान-इन पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से जो जानते हैं, वे हैं विषय। मन इन्हीं पाँचों विषयों को जानता है।

- सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस

29/09/2025
23/09/2025

Celebrating my 3rd year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

24/04/2025

सांसारिक सुख पाकर ईश्वर को भूल जाओ, यह ठीक नहीं। संत कबीर साहब ने कहा -

*सुख के माथे सिल पड़ै, नाम हृदय से जाय।*
*बलिहारी वा दु:ख की, पल-पल नाम रटाय।।*

समाज में लोग रहते हैं। अपना अच्छा नमूना देकर अच्छे कर्मों में समाज को लगाओ, तो बहुत अच्छा होता है। अच्छे समाज में रहते हुए ईश्वर की उपासना करो। हम लोगों के यहाँ ठाकुरबाड़ी है। उसमें पूजा के समय बाजा बजाते हैं। उसका तात्पर्य है कि उसमें सभी लोग भाग लें। मुसलमान लोग नमाज पढ़ते हैं। ईसाई भी सामूहिक प्रार्थना करते हैं। जितने आस्तिक लोग हैं, सभी सामूहिक प्रार्थना करते हैं। वेद में यही आज्ञा है - *"सब कोई आपस में मिलकर रहो।"* इसके लिए पंच पापों से बचो। सब पापों में सरदार है झूठ। झूठ छोड़ना और सत्य को ग्रहण करना, यह संतों ने बहुत जोरों से कहा है।
*ईश्वर उपासना भी सभी मिलकर कीजिए। सभी कोई मिलकर रहिए। सदाचार का पालन कीजिए। साँच को ग्रहण कीजिए। सत्य की बड़ी प्रतिष्ठा है - प्रशंसा है। सत्यनिष्ठ ही ईश्वर की उपासना में अग्रसर हो सकते हैं।* इसलिए सदाचार का पालन मजबूती से कीजिए। आलस्य छोड़कर अपना काम करना चाहिए।
*जीवन का अंत होना अनिवार्य है। ईश्वर की भक्ति करके वैसे लोक में जाना होगा, जहाँ से फिर दु:ख सागर में नहीं गिरेंगे। इसलिए सबों को ईश्वर का भक्त बनना चाहिए।*
-- महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज
जय गुरु!🙏🙏

24/04/2025

जय गुरु महराज 🙏🙏

24/04/2025

जय गुरु महराज....

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