23/06/2026
एमपी के टीकमगढ़ में मिली 10 फीट लंबी पांडूलिपि, सामने आया जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा
Ancient Manuscript found in MP:
मध्य प्रदेश के टिकमगढ़ जिले में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे कार्य, अब तक मिल चुकी हैं कुल 825 पांडुलिपियां, भारत ज्ञान मंडपम 234 को कर चुका है एप्रूव, अब मिले जम्बूद्वीप नक्शे और 10 फीट लंबी पांडूलिपि से खुल सकते हैं कई प्राचीन रहस्य
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे कार्य में जिले में प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां सामने आ रही हैं। इन पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन होने के बाद इनका अध्ययन किया जाएगा और इसका ज्ञान बेहद उपयोगी साबित होगा। जिले में चल रहे इस काम में अब तक कुल 825 पांडुलिपियों को ऑनलाइन किया जा चुका है तो, भारत ज्ञान मंडप द्वारा इनमें से 234 को एप्रूव कर स्वीकृत किया जा चुका है।
ज्ञान भारतम् मिशन की नोडल टीम के अनुपम दीक्षित ने बताया, केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे कार्य के बाद विशेषज्ञ इन पांडुलिपियों (Ancient Manuscripts Study) का अध्ययन करेंगे। ऐसे में हमारे प्राचीन मनीषियों, ऋषियों एवं विद्वानों द्वारा संजोए गए इस ज्ञान का लाभ आने वाले समय में हमारे देश को मिलेगा। लाइब्रेरियन विजय मेहरा ने बताया कि यह पांडुलिपियां विभिन्न विषयों पर लिखी गई हैं और यह मानव जीवन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
भारतीय ब्रह्मांड विज्ञान या फिर जम्बूद्वीप का नक्शा
मध्यप्रदेश के टिकमगढ़ जिले में मिली पांडुलिपियों में एक विशाल नक्शा (Ancient Manuscripts and a map) भी मिला है। अनुपम दीक्षित का कहना है कि यह चित्र किसी प्राचीन जैन या भारतीय ब्रह्माण्ड-विज्ञान का हस्तलिखित मानचित्र प्रतीत होता है। चित्र में कुछ शब्द पहचाने जा सकते हैं, जैसे भरत क्षेत्र, ऐरावत क्षेत्र, विदेह, गंगा, सिन्धु, लवण समुद्र, मेरु (संभवत: मध्य भाग में) यह सभी नाम जैन आगमों और जैन भूगोल में वर्णित जम्बूद्वीप था। इससे संबंधित द्वीप-समुद्र रचना के प्रमुख भाग हैं।
जम्बूद्वीप का मानचित्र है या फिर त्रिलोक, लोकविज्ञान सं संबंधित चित्र
उनका कहना है कि संभावना है कि यह जम्बूद्वीप का मानचित्र हो, या त्रिलोक, लोकविज्ञान से संबंधित कोई प्राचीन जैन चित्र हो। चित्र में बीच में वृत्ताकार संरचना है, उसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और क्षेत्र दिखाए गए हैं। बाहर की ओर समुद्र और द्वीपों की परतें बनी हैं (Ancient Manuscripts and Jambudweep Map) तथा किनारों पर नदियों और क्षेत्रों के नाम लिखे हैं। यह विशेषताएं जैन परंपरा के जम्बूद्वीप-रचना चित्र से काफी मेल खाती हैं। उनका कहना था कि इसी प्रकार से ज्योतिष विज्ञान, विभिन्न रोगों के उपचार से जुड़ी अन्य सामग्री भी प्राप्त हुई है।
यह खास प्रकार की पांडुलिपियां
अनुपम दीक्षित ने बताया कि अब तक जिले में मिली पांडुलिपियों (Ancient Manuscripts found in Tikamgarh) में जिला पुस्तकालय से 75, दुष्यंत द्विवेदी से 3, शिवराज सिंह श्रीवास्तव से 1, अजीत श्रीवास्तव से 6, बाजार जैन मंदिर से 141, संजय जैन से 7, नया जैन मंदिर से 62, सुनहरा तालाब माडूमर से 3 शिलालेख, क्षत्रपाल सिंह सोलंकी से 4, अजनौर जैन मंदिर से 25, बड़ागांव फलहोड़ी जैन मंदिर से 13, दरगुवां जैन मंदिर से 107, खरगापुर जैन मंदिर से 121 एवं माझ पंचायती जैन मंदिर से 247 हस्तलिखित प्राचीन पांडुलिपियां मिली है।
ज्योतिष गणना की अनोखी पुस्तक
विजय मेहरा ने बताया कि खरगापुर के जैन मंदिर में एक ज्योतिष से जुड़ी खास (Ancient Manuscripts and Astroloty Book) पुस्तक मिली है। इसके साथ ही एक लकड़ी का पाशा मिला है। बताया जाता है कि इस पाशा से ज्यातिष गणना की जाती थी। इस पाशा पर कुछ अंक, कुछ अक्षर लिखे है। उनका कहना था कि इसकी विस्तृत जांच एवं अध्ययन के बाद हो सकता है कि यह ज्योतिष विज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो। अध्ययन के बाद ही और जानकारी सामने आ सकेंगी।
Jun 22, 2026
(फोटो सोर्स: पत्रिका)
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