28/07/2026
आयोजन – राष्ट्रीय संगोष्ठी - कारगिल विजय दिवस : अदम्य साहस और अप्रतिम बलिदान की गाथा
देश की सुरक्षा केवल सैनिकों का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है- प्रोफेसर. कुमार रत्नम
सहराई । मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शासकीय महाविद्यालय सहराई में कारगिल विजय दिवस के अंतर्गत आभाषी पटल पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं हिंदी विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मेजर सरस चंद त्रिपाठी (सेवा निवृत सेन्य अधिकारी प्रयागराज), सारस्वत वक्ता प्रोफेसर आनंद पाटील दूर शिक्षा निदेशालय हिंदी, अतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र संस्थापक सदस्य अखिल भारतीय राष्ट्रावादी लेखक संघ, अन्य सारस्वत वक्ता डॉ. अजय खेमरिया आयुक्त दिव्यांगजन भोपाल मध्य प्रदेश शासन रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता अरितिक्त संचालकउच्चशिक्षा ग्वालियर चम्बल संभाग ग्वालियर ने की। कार्यक्रम के संयोजक डॉ अंजू सिहारे एवं संरक्षक प्राचार्य डॉ अतुल गुप्ता रहे। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया तथा राष्ट्रध्वज को नमन एवं राष्ट्रगान के साथ छात्राओं में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार किया गया।
मेजर सरस त्रिपाठी ने अपने कारगिल युद्ध के अनुभव साझा किये । 26 मई को सरकार द्वारा सभी छुट्टी निरस्त करते हुए युद्ध की घोषणा कर दी ,इसके अलावा तीनो सेनाओ का अदम्य साहस और शौर्य को विस्तार पूर्वक समझाया, जिसके अंतर्गत वायु सेना ने पाकिस्तान के बंकर तबाह किए, लेजर वीम के द्वारा पाकिस्तानी आर्मी को ध्वस्त किया, इसके अलावा अपने साथी वीर जवानों जैसे कि कर्नल कालिया,ग्रुप कैप्टन नचिकेता आदि को याद किया।
प्रो.आनन्द पाटिल ने कहा कि केवल सैनिक ही क्यों राष्ट्र के अपने प्राण नौछवार करे, हम और आप आम नागरिक क्यों नहीं, हम सबका नैतिक दायित्व है राष्ट्रभक्ति का। अटल जी ने कहा था कि पड़ोसी बदले नहीं जा सकते, इसीलिए हम सबको सजग एवं सतर्क रहना चाहिए और अपने अधिकारो के साथ- साथ अपने कर्तव्यों का भी पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक निर्वहन करना चाहिए।
प्रोफेसर कुमार रत्नम ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सैनिकों का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है। युवाओं को राष्ट्रहित के प्रति सदैव जागरूक एवं उत्तरदायी रहना चाहिए।“गाथा “ जो कि वीरो की होती है,मेजर बत्रा को याद करते हुए उनके युद्ध कौशल को सराहा, भारत शांति का पुजारी है लेकिन यदि कोई हमारी मातृ भूमि पर ग़लत नियत डालेगा तो हम आँख में आँख डालकर बात करेंगे, झुकेंगे नहीं। विद्यार्थी अर्थात जेन-जी को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश की एकता, अखंडता एवं संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.अतुल गुप्ता ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक दिवस नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान का अमर प्रतीक है। वर्ष 1999 में कठिनतम परिस्थितियों में भारतीय सेना ने अपने अद्वितीय पराक्रम से विजय प्राप्त कर सम्पूर्ण विश्व के समक्ष भारत की शक्ति और संकल्प का परिचय दिया। युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा एवं समर्पण की भावना विकसित करना ही ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ अंजू सिहारे ने कार्यक्रम का संचालन किया। समिति सदस्य रविन्द्र कुमार रीतोरिया एवं डॉ अली अहमद कुरैशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय परिवार सहित अधिक संख्या में विद्यार्थी एवं श्रोतागण उपस्थित रहे।
शासकीय महाविद्यालय सहराई में कारगिल विजय दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित
विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं के लिए कारगिल विजय पर व्याख्यान, संगोष्ठी एवं परिचर्चा, निबंध, भाषण, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषयक प्रेरक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया।