21/08/2026
*🌸 सीरतुन्नबी ﷺ 🌸*
💐*हुज़ूर सरकार-ए-दो जहाँ, सरवर-ए-अंबिया, ताजदार-ए-कायनात ﷺ की नूरानियत का मुख़्तसर तज़्किरा*
✅*अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने नबी ए रहमत, शफ़ी ए उम्मत ﷺ को जहाँ बेमिस्ल व बेमिसाल बशर होने का शर्फ़ अता फ़रमाया, वहीं ह़िस्सी व मअ्नवी नूरानियत से भी नवाज़ा।*
हकीमुल उम्मत मुफ़्ती अहमद यार ख़ाँ साहिब नईमी علیہ رحمۃ اللہ تعالی علیہ फ़रमाते हैं:
*> "हुज़ूर ﷺ बशर भी हैं और नूर भी, यानी नूरानी बशर हैं। ज़ाहिरी जिस्म शरीफ़ बशर है और हक़ीक़त नूर है।"*
(रिसाला-ए-नूर मअ रसाइल-ए-नईमिया: स. ३९)
*✨ सबसे पहले नूरे मुहम्मदी की तख़्लीक़ हुई*
हज़रत सय्यिदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضی اللہ تعالٰی عنہ ने सबसे पहली तख़्लीक़ के मुतअल्लिक़ सवाल किया तो हुज़ूर पुरनूर ﷺ ने ख़ुद अपनी नूरानियत को यूँ बयान फ़रमाया:
❤️*> "ऐ जाबिर! अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ ने तमाम मख़्लूक़ से पहले आपके नबी के नूर को पैदा फ़रमाया।"*
(अल-जुज़्उल-मफ़्क़ूद मिनल-जुज़्इल-अव्वल मिनल-मुसन्नफ़: स. ६३: हदीस १८)
(मवाहिबे लदुनिया: जि. १: स. ३६)
हज़रत सय्यिदना इमाम ज़ैनुल आबिदीन رضی اللہ تعالٰی عنہ फ़रमाते हैं:
> हुज़ूर नबिय्ये करीम ﷺ ने फ़रमाया:
'मैं आदम علیہ الصلاۃ والسَّلام की तख़्लीक़ से चौदह हज़ार साल पहले अल्लाह عَزَّ وَ جَلَّ के यहाँ नूर था।'
(मवाहिबे लदुनिया: जि. १: स. ३९)
हुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ ने फ़रमाया:
*> "जब अल्लाह عَزَّوَجَلَّ ने हज़रत आदम علیہ الصلاۃ والسَّلام को पैदा फ़रमाया तो उनके बेटों को बाहम फ़ज़ीलत दी। आप علیہ الصلاۃ والسَّلام ने उनकी एक-दूसरे पर फ़ज़ीलत मुलाहज़ा फ़रमाई।* (फिर हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ ने फ़रमाया:) *आदम علیہ الصلاۃ والسَّلام ने सबसे आख़िर में मुझे एक बुलंद नूर की सूरत में देखा तो बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़ की: 'ऐ मेरे रब! यह कौन है?' अल्लाह عَزَّوَجَلَّ ने इरशाद फ़रमाया: 'यह तुम्हारा बेटा अहमद है, यह अव्वल भी है, आख़िर भी है और यही सबसे पहले शफ़ाअत करने वाला है।'*"
(दलाइलुन्नुबुव्वत लिलबैहक़ी: जि. ५: स. ४८३)
*🌹 नूरानियते मुस्तफ़ा ﷺ ब-ज़बान-ए-अस्हाब-ए-मुस्तफ़ा ﷺ*
सहाबा-ए-किराम علیہم الرضوان ने नबी-ए-पाक ﷺ की नूरानियत के जल्वों को देखा तो सबने अपने-अपने अंदाज़ में इज़हार फ़रमाया। मुलाहज़ा कीजिए:
❶ हज़रत सय्यिदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضی اللہ تعالٰی عنہما
फ़रमाया:
> "हुज़ूर-ए-अनवर ﷺ के सामने के मुबारक दाँतों में कुशादगी थी, जब आप गुफ़्तगू फ़रमाते तो उनमें से नूर दिखाई देता था।"
(जामेउल-सग़ीर: स. ४०३: हदीस ६४८२)
शैख़ुल-इस्लाम अल्लामा अब्दुर्रऊफ़ मुनावी علیہ رحمۃ اللہ تعالی علیہ इस हदीस के तहत फ़रमाते हैं:
> "यह नूर महसूस होता था और आप ﷺ की कुल ज़ात-ए-शरीफ़ा ज़ाहिरी व बातिनी तौर पर नूर थी, यहाँ तक कि आप ﷺ अपने अस्हाब में से जिसको चाहते उसे नूर अता फ़रमाते, जैसा कि हज़रत सय्यिदना तुफ़ैल बिन अम्र अद-दौसी رضی اللہ تعالٰی عنہ को अता फ़रमाया।"
(फ़ैज़ुल-क़दीर: जि. ५: स. ९३)
*❷ हज़रत सय्यिदतुना उम्मुल-मोमिनीन आयशा सिद्दीक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا*
फ़रमाती हैं:
*> "ब-वक़्त-ए-सहर खो जाने वाली सुई हुज़ूर नबिय्ये अकरम ﷺ के चेहरे-ए-अनवर की रोशनी की किरण से मिल गई।"*
(अल-क़ौलुल-बदीअ: स. ३०२)
*❸ हज़रत सय्यिदना अबू हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ फ़रमाते हैं:
*> "जब नबिय्ये करीम ﷺ मुस्कुराते तो दर-ओ-दीवार रोशन हो जाया करते थे।"*
(मुसन्नफ़ अब्दुर्रज़्ज़ाक़: जि. १०: स. २४२: हदीस २०६५७)
*🌟 नूरानी बशरियत*
याद रहे! नूर और बशर एक-दूसरे की ज़िद नहीं कि एक जगह जमा न हो सकें, क्योंकि हज़रत जिब्राईल अमीन علیہ الصلاۃ والسَّلام नूरी मख़्लूक़ होने के बावजूद हज़रत सय्यिदतुना बीबी मरयम رضی اللہ تعالٰی عنہا के सामने इंसानी शक्ल में जल्वागर हुए थे।
जैसा कि क़ुरआन-ए-हकीम में है:
فَاَرْسَلْنَاۤ اِلَیْهَا رُوْحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِیًّا
(सूरतुल-मरयम: १७)
तर्जुमा:
तो उसकी तरफ़ हमने अपना रूहानी भेजा, वह उसके सामने एक तंदुरुस्त आदमी के रूप में ज़ाहिर हुआ।
नीज़ हज़रत मलकुल-मौत علیہ الصلاۃ والسَّلام बशरी सूरत में हज़रत सय्यिदना मूसा कलीमुल्लाह علٰی نَبِیِّنَا و علیہ الصَّلٰوۃ وَالسَّلام की ख़िदमत में हाज़िर हुए।
(बुख़ारी: जि. १: स. ४५०: हदीस १३३९)
*📖 बुज़ुर्गाने दीन का अक़ीदा*
जलीलुल-क़द्र मुफ़स्सिरीन, मुहद्दिसीन, उलेमा-ए-रब्बानिय्यीन और औलिया-ए-कामिलीन ने भी नबिय्ये करीम ﷺ के नूर होने को बयान फ़रमाया।
जैसा कि क़ुरआन-ए-मजीद की आयत:
قَدْ جَآءَكُمْ مِّنَ اللّٰهِ نُوْرٌ وَّ كِتٰبٌ مُّبِیْنٌۙ
(सूरतुल-माइदा: १५)
तर्जुमा:
बेशक तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ़ से एक नूर आया और रोशन किताब।
के तहत इमाम अबू जाफ़र मुहम्मद बिन जरीर तबरी (मुतवफ़्फ़ी ३१० हि.), इमाम अबू मुहम्मद हुसैन बग़वी (मुतवफ़्फ़ी ५१० हि.), इमाम फ़ख़रुद्दीन राज़ी (मुतवफ़्फ़ी ६०६ हि.), इमाम नासिरुद्दीन अब्दुल्लाह बिन उमर बैज़ावी (मुतवफ़्फ़ी ६८५ हि.), अल्लामा अबुल-बरकात अब्दुल्लाह नसफ़ी (मुतवफ़्फ़ी ७१० हि.), अल्लामा अबुल-हसन अली बिन मुहम्मद ख़ाज़िन (मुतवफ़्फ़ी ७४१ हि.), इमाम जलालुद्दीन सुयूती शाफ़ई (मुतवफ़्फ़ी ९११ हि.) رحمۃ اللہ تعالٰی علیہم اجمعین समेत कसीर मुफ़स्सिरीन ने फ़रमाया कि इस आयत-ए-तय्यिबा में मौजूद लफ़्ज़ "नूर" से मुराद हुज़ूर नबिय्ये करीम ﷺ की ज़ात-ए-बाबरकत है।
हज़रत अल्लामा क़ाज़ी अयाज़ मालिकी (मुतवफ़्फ़ी ७४४ हि.) رحمۃ اللہ تعالی علیہ फ़रमाते हैं:
*> "हुज़ूर-ए-अनवर ﷺ का साया सूरज, चाँद की रोशनी में ज़मीन पर नहीं पड़ता था, क्योंकि आप ﷺ नूर हैं।"*
(अश-शिफ़ा: जि. १: स. ३६८)
*✨ नूरे मुस्तफ़ा ﷺ ग़ालिब आ गया*
शारिह़-ए-बुख़ारी, हज़रत इमाम अहमद बिन मुहम्मद क़स्तलानी (मुतवफ़्फ़ी ९२३ हि.) قدس سرہ العزیز फ़रमाते हैं:
*> "अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ ने जब हमारे नबी-ए-मुहतशम ﷺ के नूर को पैदा फ़रमाया तो उसे हुक्म फ़रमाया कि तमाम अंबिया के नूर को देखे। चुनाँचे अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ ने तमाम अंबिया के नूर को हमारे नबी-ए-करीम ﷺ के नूर से ढाँप दिया। उन्होंने अर्ज़ की: 'मौला! किसके नूर ने हमें ढाँप लिया?' तो अल्लाह عَزَّ وَجَلَّ ने फ़रमाया: هٰذَا نُورُ مُحَمَّدِ ابْنِ عَبدِاللہ यानी यह अब्दुल्लाह के बेटे मुहम्मद ﷺ का नूर है।"*
(अल-मवाहिबुल-लदुनिय्या: जि. १: स. ३३)
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