Suprabaat Jyotish Academy

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Basics of astrology, along with latest information about planets chnge & their effect

16/12/2025

जय श्री राम १७-१२-२०२५
केतुदेव जिस राशि में हैं उस भाव एवं राशि के कारकत्व से हमेशा संतुष्ट रहें
केतुदेव आपको अदृश्य चोट देगा
केतु आपको दिखाई न देने वाला दर्द देगा
केतुदेव का मतलब है गुप्त दुश्मन
केतुदेव जहां भी बैठेगा या जहां भी उसका स्वामी होगा, उसकी ताकत और तकलीफ के आधार पर आपके जीवन में कुछ ऐसा होगा जो कभी ठीक नहीं होगा
केतुदेव सिखाते हैं कि कैसे अलग होना है
केतुदेव आपकी अपनी इच्छा और छिपी हुई सभी इच्छाओं का एक संकेतक है
केतुदेव अध्यात्मिक एवं भावनात्मक स्तर पर कार्य करते हैं केतुदेव इस प्रकार कार्य करते है जो दिखाई नहीं देता केतु का अधिकार आपकी आत्मा पर है इसके विप्रीत मंगल का अधिकार आपके शरीर पर है इसलिए दोनों के दोनों ८ घर के मालिक हैं मरने के बाद आत्मा का क्या होगा वो केतुदेव एवं शारीर का क्या होगा मंगलदेव निर्धारित करते हैं
केतुदेव देता है चिंता, बहुत सरल उपाय है सुबह 4 बजे उठें आपकी चिंता का स्तर कम हो जाएगा
केतुदेव को त्याग एवं वैराग्य का कारक ग्रह माना गया , केतुदेव का उद्देश्य है दुसरो को लाभ कराएं अपने लिए कुछ ना मांगे
केतुदेव जिस भी घर में उस घर की एक तडफ है, एक प्यास है, उस घर के कारकत्व से मोक्ष चाहता है

08/12/2025

१. संचित कर्म (Sanchita Karma – Accumulated Karmas)

अर्थ:
कई जन्मों में किए हुए सभी कर्मों का विशाल भंडार।
ज्योतिषीय संकेत:

यह पूरा कर्म-बैंक एक जन्म में खत्म नहीं होता।

इसका प्रतीक आत्मकारक, आठवाँ भाव, और चंद्रमा की स्थिति से देखा जाता है।

यह बताता है कि व्यक्ति के जीवन में किस प्रकार की घटनाएँ संभावित हैं।

ग्रंथ-वाक्य (सूत्र):
“संचितं कर्म जातानां प्रभवो भवति” — (सार: संचित कर्म जन्म का हेतु है)

२. प्रारब्ध कर्म (Prarabdha Karma – Destined Portion of Karma)

अर्थ:
संचित कर्म में से इस जन्म में जिसे अनुभव करना निश्चित है— भाग्य का वह अंश।

ज्योतिषीय संकेत:

लग्न, लग्नेश, दशा-सिस्टम, और पहला-नवां भाव।

स्वास्थ्य, परिवार, विवाह, जातक के प्रमुख सुख-दुःख इसी का परिणाम।

जिस कर्म को भोगना निश्चित है, उसे विनष्ट नहीं किया जा सकता, केवल शांति या उपशमन किया जा सकता है।

ग्रंथ-वाक्य (सूत्र):
“प्रारब्धं भुज्यते देहे” — जब शरीर मिला है, तब प्रारब्ध भी अवश्य भोगना होगा।

३. क्रियमाण कर्म (Kriyamana Karma – Present Actions / Free Will)

अर्थ:
आप अभी जो कर्म कर रहे हैं— वर्तमान की क्रिया। इससे भविष्य बदलता है।

ज्योतिषीय संकेत:

तृतीय भाव (पराक्रम), षष्ठ भाव (प्रयास), दशम भाव (कर्म क्षेत्र)।

मनुष्य की इच्छाशक्ति, साधना, उपाय, ग्रह-शांति, वर्तमान निर्णय — सब क्रियमाण कर्म बदल देते हैं।

दशा-गोचर में सकारात्मक ग्रह सक्रिय हों तो क्रियमाण कर्म अत्यंत शक्तिशाली हो जाता है।

ग्रंथ-वाक्य (सूत्र):
“कर्मणि एवाधिकारः ते” — वर्तमान कर्म ही मनुष्य के हाथ में है।

संक्षेप में

कर्म का प्रकार अर्थ ज्योतिषीय संकेत

संचित पिछले जन्मों का संचित भंडार आत्मकारक, 8वाँ भाव
प्रारब्ध इस जन्म में निश्चित अनुभव लग्न, दशा, 1–9 भाव
क्रियमाण वर्तमान कर्म, जिसे आप बदल सकते हैं 3, 6, 10 भाव

24/10/2025

जय श्री राम २५-१०-२०२५
मंगल देव २७-१०-२०२५ को तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे जो के जल राशि है यहाँ एक और बात याद रखें देव् गुरु बृहस्पति अभी वक्री होकर कर्क राशि में और शनिदेव् पहले से ही मीन राशि में हैं यानी तीनो महत्वपूर्ण ग्रह जल राशि में होंगे
अचानक लगेगा की उर्जा बढ़ रही है ,देश के आजकल के राजाओं के मन में आक्रमकता बढ़ेगी जमीन के टुकड़े के लिए वो किसी भी हद तक जा सकतें हैं
जमीन से निकलने वाले मेटल्स खनिज सोना चांदी लोहा इत्यादि पदार्थों के दामो में भारी विरधी के संकेत दे रहें हैं मंगलदेव जो की सेनापति भी हैं कुछ नया घटित होने का सन्देश दे रहे हैं

28/09/2025

जय श्री राम
१७-३-२०२५
आज का लेख
जब भी हमारा संपर्क या समबन्ध आकाश देव से छुट जाता है तो हमारे जीवन में अपने उच्चाईओ से नीच आने लगते हैं आपके जॉब छुट जाते हैं, काम धंदे कमजोर होने लगते हैं ,बीमार पड़ने लगते हैं यह ही ज्यौतिष का सार है इस सम्पर्क वापिस कायम कीजिये आपका जीवन आनन्द से भर जाएगा
जब भी आपके लगन से कोई भी गृह जाएगा तो बदलाव आपके कर्मो अनुसार आएगा या तो आप उपर उठ जातें हैं या नीचे गिर जाते हैं
अब जब शनिदेव मीन राशि यानी मोक्ष की राशि में जा रहें है वो बहुत ही भावुक राशि (EMOTIONAL) है समुद्र की राशि है यहाँ आपको कोई मदद नहीं करेगा यहाँ सिर्फ अपने कर्मो से भगवान ही आपकी मदद कर सकते हैं यह ऊर्जा किस तरह से कार्य करती हैं इसको समझते हैं
सबसे पहले यह सोचे की मै आज किसी को क्या फायदा पहुंचा सकता हूँ कैसे किसी की मदद करूँ अपने आस पास के हर वास्तु चाहे वो निर्जीव हो या सजीव हो उसे कैसे खुश कर सकता हूँ , आप उसकी तारीफ कर सकते हैं ,आप किसी की मनोदशा समझ कर उसकी भावना से ,पैसे से मदद कर सकते हैं उसे दिलासा देकर सही राह दिखा कर मदद कर सकते हैं , मुस्करा कर उसे सही सोच विचार देकर आनन्दित कर सकते है या किसी भी तरह उसे सही दिशा में मोड़ दे सकते हैं इसका मतलब आप कोई ना कोई कर्म कर रहे होते हैं जो सिर्फ उसका ही नहीं आपका भी फायदा करता हुवा कही ना कहीं आपको दिखेगा इससे आपका जीवन जरुर बदलेगा ,
शनि देव मीन राशि में जा रहें है तो हो सके उतनी पैदल यात्रा करें इसमें कोई भी लालच ना करें शांत से मंदिर में जाएँ तो नियामानुसार ही दर्शन करने की चेष्टा रखें
जीवन की इस महान यात्रा का आनंद ले और हर पल हर क्षण भगवान का धन्यवाद करें

01/08/2025

जय श्री राम २४-७-२०२५
श्रावण का महीना भगवान शिव एवं नवग्रह
सूर्यदेव जब कर्क राशि में आतें है तब श्रावण माह का आगमन होता है
सूर्यदेव आग है और कर्क राशि जल है और देवों के देव महादेव ही सबसे बड़े संतुलन करने वाले देव हैं
शिव परिवार को देखें उनका वाहन ननदी ,गले में नाग धारण किये हुवे, माता पार्वती उनका वाहन शेर , इससे प्रकार उनके पुत्र श्री गणेश वाहन मुषक , दुसरे पुत्र कारितकेय उनका वाहन मोर, कितना विरोधाभास असंतुलन सब के बीच नजर आता है (एक दुसरे के विरोधी ) उसके बावजूद शिव परिवार है और भगवान शिव इस संतुलन को रखने में समर्थ है और आनंद में रहते हैं
श्रवण माह में भगवान शिव का रुद्रा अभिषेक करके हम अपने जीवन की समस्याओं के निवारण का मार्ग बना सकतें है और जीवन को आनद से जी सकतें है
१)चन्द्रमा- जल दूध चावल अर्पण करते है - मन की शन्ति ,अच्छा स्वास्थ्य
२)मंगल देव – शहद , गुड अर्पण – क्रोध पर काबू
३)बुद्धदेव - विल्वपत्र अर्पण करते है – गन्ने का रस –व्यापार में उन्नति के नए मार्ग
४)बृहस्पति देव – केसर चन्दन का तिलक हल्दी पाउडर, पीले फूल, देशी खांड – धर्म मजबूत
५) शुक्रदेव –इतर फूल – संबंधो में प्रेम
६) शनी देव -भगवान् शिव की प्रतिमा जो की पत्थर से निर्मित है जिनको हम सब अर्पण करते हैं
७)राहुदेव – धतुरा भांग इत्यादि आर्पण करके

उनकी भक्ति से ९ के ९ गर्हों को संतुलित कर सकते हैं

11/07/2025

भगवान हरि जब चार महीने के लिए निद्रा में चले जाते हैं तो, उस वक्त पृथ्वी का भार बाकी देवता मिलकर उठाते हैं....
1. देव शयनी एकादशी के चार दिन बाद गुरु पूर्णिमा आती है यानी 4 दिन गुरु देवों ने संभाल लिया.
2. गुरु पूर्णिमा के अगले दिन सावन लग जाता है, तब एक महीने के लिए भोले नाथ पृथ्वी का भार संभालते हैं.
3. सावन के बाद 19 दिन का भाद्रपद लग जाता है, जिसके बाद पृथ्वी का भार श्री कृष्ण संभालते हैं.
4. भाद्रपद के बाद फिर आती है गणेश चतुर्थी तब 10 दिनों के लिए गणेश जी पृथ्वी का भार संभालते हैं.
5. गणेश चतुर्थी के बाद 16 दिन का पितृ पक्ष लगता है, जिसे पितृ देव संभालते हैं.
6. पितृ पक्ष के अगले दिन नवरात्री आ जाती है, जिस वजह से माता रानी 9 दिनों तक पृथ्वी का भार संभालती है.
7. इसके बाद आखिरी के 10 दिन पृथ्वी का भार कुबेर जी संभालते हैं.
8. इसके बाद आती है देव उठनी एकादशी, इस दिन भगवान निद्रा से उठ जाते है और वापस पृथ्वी का भार संभाल लेते हैं.

30/06/2025

घर हैं लेकिन रहने वाले नहीं! जापान में 90 लाख से ज़्यादा घर खाली पड़े हैं — विकास के बीच छिपा अकेलापन और शहरीकरण की भारी कीमत।

21/06/2025

लुनार अस्त्रों के सोजन्य से
कार्मिक शुक्र, नवमांश की भूमिका, स्थानबल की भूमिका

यह उस व्यक्ति की कुंडली है जो विवाह में भारी कीमत चुका रहा है (चैट स्नैपशॉट संलग्न हैं), जीवनसाथी जो मजबूत तानाशाही, अति आतंक से अपने जीवन को नरक बना रहा है। आइए संलग्न चार्ट को देखकर और दीपांशु सर द्वारा आज तक सीखे गए प्रत्येक पाठ को सहसंबंधित करके प्रत्येक बिंदु को धीरे-धीरे समझने का प्रयास करें।
यहाँ कहानी समझें - व्यक्ति ने एक तलाकशुदा लड़की से शादी की और कह रहा है कि मैंने किसी की जान बचाने के बारे में सोचा था लेकिन हम जानते हैं कि 8वें घर में शुक्र और दूसरे स्वामी का डिस्पोजिटर - यह परिवार और उसका धन लालच है।
1. डी1 चार्ट - लग्न स्वामी और दूसरा स्वामी तुला राशि में जा रहा है और 8वें घर में 8वें स्वामी सूर्य के साथ डिस्पोजिटर शुक्र है।
2. 6वें स्वामी बुध वक्री और शुक्र के साथ समान 19 डिग्री पर - 6वें स्वामी के साथ शुक्र की करीबी डिग्री - शुक्र के माध्यम से भुगतान को दर्शाता है जो 10वें स्वामी भी हैं यानी कर्म।
3. D9 चार्ट - D9 में मेष राशि का सूर्य और मंगल, 6वें घर में कन्या राशि में 4 ग्रहों के साथ उदय हो रहा है। 12वें घर में SA RA है। यहां समझें कि D1 का 8वां स्वामी D9 लग्न में उदय हो रहा है, शुक्र D1 के 8वें से D9 की 6वें घर कन्या में आ रहा है।
4. स्थानबल - शक्तियों के अनुसार शुक्र ने खुद को शनि के स्थान पर गिरा दिया है, इसलिए शुक्र दुख कारक शनि के रूप में कार्य करेगा। बृहस्पति अब शुक्र का स्थान ले रहा है, लेकिन इसके 12वें स्वामी को याद रखें। व्यक्ति लालची होता है क्योंकि दूसरे स्वामी शनि का स्थानबल सबसे अधिक है, 8वें स्वामी सूर्य का स्थानबल दूसरा सबसे अधिक है और वह D9 लग्न में बैठा है।
5. अब राहु बृहस्पति बुध की दशा आती है फल नवमांश है इसलिए राहु शनि के साथ 12वें भाव (8 डिग्री) में है – व्यक्ति दुबई में है जहां बेहतर वेतन के लिए दुबई पहुंचने के बाद वैवाहिक जीवन खराब हो गया। राहु शनि ने उसे करियर का लालच दिया।
बृहस्पति मिथुन राशि में है जो D1 का 6वां भाव है इसलिए व्यापारी और झगड़ों की ऊर्जा लेकर आ रहा है।
बुध कन्या राशि के 6वें भाव में मंगल, केतु और नीच के शुक्र के साथ है।
6. फिर से स्थानबल – चूंकि D9 में - 3,6,12 के स्वामियों की ताकत अच्छी है, इसलिए झगड़े बहुत मजबूती से हो रहे हैं।
7. पत्नी क्या चाहती है? – D1 और D9 में शुक्र के साथ बुध बुरे घरों में है और D1 के 8वें से आने वाला शुक्र कहता है कि मेरे पास दहेज में ली गई सभी वस्तुओं की एक सूची

17/06/2025

विनायक भट्ट जी के सोजन्य से

अग्नि-त्रिकोण चमत्कार: कैसे एक व्यक्ति 2025 विमान दुर्घटना में बच गया
BNN समूह चर्चा निष्कर्ष
भगवान ने उसे क्यों बचाया – भृगु नंदी नाड़ी व्याख्या
(इसे धीरे-धीरे पढ़ें। प्रत्येक पंक्ति का गहरा अर्थ है। यह आपको सिखाएगा कि वास्तविक ज्योतिष जीवन और मृत्यु के रहस्य को कैसे दर्शाता है।)
जन्म कुंडली में पहले से ही एक सुरक्षा स्विच था
इस व्यक्ति की कुंडली में तीन ग्रह अपनी अग्नि राशियों में हैं – मेष राशि में चंद्रमा, सिंह राशि में सूर्य और धनु राशि में मंगल।
भृगु नंदी नाड़ी में, इसे अग्नि-त्रिकोण कहा जाता है – सुरक्षा का अग्नि त्रिकोण। जब जीवन खतरे में होता है, तो ये तीनों एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और आत्मा को शरीर से बाहर नहीं निकलने देते।
दूसरा रहस्य: बृहस्पति कुंभ राशि में 26 डिग्री पर बैठा है, ठीक उसी जगह जहां दुर्घटना के दिन राहु पारगमन में आया था (राहु 28 डिग्री कुंभ राशि)।
जब बृहस्पति राहु के समान डिग्री पर बैठता है, तो यह एक रक्षक बन जाता है। बीएनएन में, हम कहते हैं: "गुरु राहु के अंधेरे को रोशन करता है।" और यहाँ, बृहस्पति वक्री है - इसका मतलब है कि यह अंदर देख रहा है और चुपचाप जातक के प्राण (जीवन-शक्ति) की रक्षा कर रहा है।
एक और उपहार: शुक्र कन्या राशि में केतु के साथ है। यह एक दुर्लभ योग है जो खतरे को कम करता है लेकिन जीवन को बचाता है। बीएनएन में इसे "केतु-शुक्र सुरक्षात्मक कट" कहा जाता है - वाहन नष्ट हो सकता है (विमान दुर्घटना), लेकिन शरीर जीवित निकलता है।
12 जून 2025 को खतरे को खोलने वाले पारगमन
इस घटना को लाने के लिए ब्रह्मांड ने तीन सटीक ग्रहों का उपयोग किया:
मंगल ने सिंह राशि में प्रवेश किया और जन्म के सूर्य के बहुत करीब आ गया। सूर्य का अर्थ है शरीर। मंगल खतरा है। मंगल का सूर्य से टकराना शरीर पर सीधा हमला है।
राहु जन्म के बृहस्पति पर बिल्कुल बैठा था। राहु हवाई जहाज, झटकों और बड़ी सार्वजनिक त्रासदियों का शासन करता है। लेकिन बृहस्पति ने नुकसान को जीवित रहने में बदल दिया।
शनि मीन राशि में था, जो कन्या राशि के ठीक विपरीत था जहाँ शुक्र-केतु बैठते हैं। यह एक दुर्लभ अक्ष है। बीएनएन में, शनि-शुक्र-केतु का अर्थ हो सकता है "मशीन टूट जाती है लेकिन शरीर कट या दर्द के साथ बच जाता है, मृत्यु नहीं।" साथ में उन्होंने टी-आकार का प्रहार किया - अग्नि (सिंह), वायु (कुंभ), और पृथ्वी-जल (कन्या-मीन)। इससे विमान टूट गया, लेकिन जीवन-रज्जु नहीं टूटी। कुंडली ने जातक की रक्षा कैसे की अग्नि ने जहर को जला दिया। जब मंगल ने सूर्य को छुआ, तो इसने अग्नि सर्किट - चंद्रमा, सूर्य, मंगल को सक्रिय कर दिया। ये तीनों ग्रह सेना के सैनिकों की तरह एक साथ काम करते हैं। वे जाग गए और जातक की रक्षा की। बृहस्पति ने राहु से लड़ाई की। जब दो ग्रह एक ही डिग्री पर बैठते हैं, तो लड़ाई होती है। बृहस्पति गुरु है - इसने राहु के जहर को शुद्ध किया और उसे वापस फेंक दिया। इसलिए, विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन यह एक व्यक्ति बच गया। शुक्र के साथ केतु ने केवल रस्सी को काटा, जीवन को नहीं। मीन राशि में शनि की स्थिति ने इसे सक्रिय किया। बीएनएन में, यह "वाहन को काटें, आदमी को बचाएं" है। इसलिए शरीर घायल हो सकता है, लेकिन आत्मा अछूती रहती है। चंद्रमा और राहु एक दूसरे से बहुत दूर थे - एक दिव्य सुरक्षा अंतराल। चंद्रमा 27 डिग्री मेष पर था, राहु 29 डिग्री मीन पर। उनके बीच गंडांत है - एक गुप्त ब्रह्मांडीय क्षेत्र। बीएनएन में यह बफर है। यह करीबी कॉल देता है लेकिन अंतिम कॉल नहीं। अब क्या किया जाना चाहिए (कर्म संदेश) बीएनएन में, जब कोई व्यक्ति सामूहिक मृत्यु की घटना से बच जाता है, तो इसका मतलब है कि उसे दूसरों के अधूरे कर्म मिले हैं। 2028 तक, जब शनि मीन राशि को छोड़ देगा, तब तक जीवन उसे अजीबोगरीब मौके देगा। बड़े मिशन उसे बुलाएंगे। यह शिक्षा, सामूहिक उपचार, या सभी की भलाई के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में हो सकता है। उसे इन कॉलों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। अगर वह करता है, तो शनि फिर से आएगा - शायद दूसरे रूप में। शरीर के हिसाब से, पीठ के निचले हिस्से और पेट की नसें संवेदनशील रह सकती हैं। हर शुक्रवार को शुक्र की पूजा करें। बस देवी के पैर छुएँ (पाद पूजा) और सफेद फूल चढ़ाएँ। इसके अलावा, हर महीने एक बार, जब चंद्रमा 27 डिग्री मेष में हो, तो एक बार भोजन छोड़ दें। इससे अग्नि कर्म साफ हो जाएगा।
यह चार्ट हर छात्र को क्यों याद रखना चाहिए
यह अग्नि-त्रिकोण द्वारा जीवन बचाने का एक स्पष्ट उदाहरण है
यह राहु-बृहस्पति डिग्री युद्ध को दर्शाता है - और कैसे शुभ जीतता है
यह साबित करता है कि शनि-शुक्र-केतु अक्ष मशीनों को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन मनुष्य को बचा सकता है
यह सिखाता है कि कैसे चंद्रमा और राहु के बीच एक छोटा सा अंतर दिव्य ढाल बन जाता है
एक दिन, जब आप एक समान चार्ट देखेंगे, तो आपको यह मामला याद आएगा -
एकमात्र व्यक्ति जो जलते हुए विमान से बाहर निकल गया - और आप कहेंगे:
"अब मुझे समझ में आया। ज्योतिष वास्तविक है।"
जय गुरु देव,
विनायक भट्ट
नोट:-बीएनएन में, गंडांत आपका दुश्मन नहीं है। यह भगवान द्वारा आपकी कहानी को फिर से लिखने से पहले ब्रह्मांडीय अल्पविराम है।
यह केवल तभी खतरनाक होता है जब चार्ट में कोई सुरक्षा न हो - जैसे अग्नि-त्रिकोण, बृहस्पति की कृपा, या शुक्र-केतु उपचार क्षेत्र। विनायक भट्ट जी के सोजन्य से

14/06/2025

Vinayak Bhatt
Admin
Group expert
· 21h ·
Eclipsed by Light: A Venus Story from the 8th House

Question- I have 8th house Sun in virgo with Mercury retro & venus both combust...
My stomach burns, bloating anything i eat spicy. Earlier people look at me for my eye color lips.

I have got severe ™ lip eczema™ & pigmentation on face .. my lip line is fading & lips turning white . Does posting pics causing harm ??
Sun is AK

Answer-
Your Lagna is Aquarius. The 8-th house therefore falls in Virgo, and here you have a tight stellium: retrograde Mercury at 9°, debilitated Venus at 14° and the Sun – your ātmakāraka – at 21°. Because all three lie within one Rashi span, the Sun’s fierce rays “dry-roast” both Mercury and Venus. In classical language they are both combust and sitting in a dusta-sthāna. Pitta (Sun) + vāta (retro Merc) + dehydrated kapha (fallen Venus) is the perfect chemical mix for the complaints you describe: acidity, intestinal gas, lip eczema, patchy pigmentation and that chalky whitening of the vermilion border.
Why did your beauty markers suffer?
Initially Venus gave its natural sparkle — clear eyes, well-defined lips, youthful skin — because till the mid-twenties Venus kept more distance from the Sun by progression. Today, as transits and vimśottarī sub-periods pull the natal Sun closer to Venus, the soft tissues lose lubrication. The Sun rules vision (netra) and pigmentation (melanin): when it burns the very planet of moisture inside an earthy intestine-sign, dryness appears exactly where Venus normally colours us — lips, cheeks and the soft gut lining.
Is posting pictures on social media making it worse?
Strictly astrologically, a photograph alone cannot trigger disease. What can hurt is the pattern of dr̥ṣṭi (envious gaze) you invite when combust Venus, the planet of attractiveness, sits in the mysterious eighth. An 8-th-house Sun does two things:
It exposes you suddenly to hidden currents (people’s thoughts, the psychic atmosphere).
It resists public scrutiny because the ego is busy processing deep karmic material.
So each selfie feels fine at first but quietly adds psychic heat, exactly where you are already overheated. If you sense your symptoms flaring after a major post, heed the signal: for you less public sharing is genuinely healthier.
Health / life predictions tied to this yoga
Over the next two years Saturn will continue to transit Aquarius and Pisces. While he is in your Lagna and 2-nd he forces disciplined diet and shows every digestive mistake on your skin like an instant report card. From late 2027, when Saturn reaches Aries (your 3-rd house), relief comes — by then you will have rebuilt food habits and gut flora, and Venus will regain some moisture.
Professionally the same 8-th-house trio is excellent for research, healing arts, forensic finance or any field that requires x-ray vision into what is hidden. You can teach or counsel people on diet, detox or even the occult once you stabilise your own regimen.
Remedies –
Begin at sunrise: offer a plain copper arghya (water with one pinch of turmeric and a tulsi leaf) to the Sun while chanting the Sāvitrī (short Gayatrī) nine times. The water cools while connected to Sūrya; the turmeric is a mild anti-inflammatory; tulsi balances vāta-kapha.
At breakfast replace chilli-based spice with roasted cumin, ajwain and a sliver of fresh ginger. This combination keeps agni strong without provoking hyper-acidity; it also pacifies combust Mercury (ajwain) and fallen Venus (ginger helps lubrication instead of drying it).
Each night, massage a drop of warm cow-ghee mixed with powdered licorice on the lips. Ghee carries Venusian rasa, licorice is a classic ulcer-soother for Mercury-ruled intestines, and together they rebuild colour.
Every Friday evening light one pure sesame-oil lamp in the southwest corner of your room and chant “Om Śukrāya Namaḥ” 16 times. Sesame grounds solar fire into the earth element and fortifies Venus. Stop the chant at 16 — nothing extra, nothing missing — because retrograde Mercury prefers exact counts.
Wear a small, uncut green peridot (olivine) in the right little finger on a Wednesday during the waxing Moon. Unlike an emerald it is gentle, helps the retro Mercury organise digestion and skin renewal, yet does not inflate your ego the way a diamond might under current combustion.
Twice a week practise slow Surya-namaskāra followed by a minute of Sheetalī prāṇāyāma. The posture sequence honours the Sun; the cooling breath immediately diffuses that stored fire from the gut lining and lips.
And yes, limit public selfies until Venus completes its upcoming sub-period — not out of fear, but to give your aura time to moisten and thicken again. When people see you next, the glow will speak louder than any post.
Follow these steps for three lunar months and review. Most students with a similar Virgo combust cluster report measurable relief in acidity within 20 days, and visible lip improvement in one Moon cycle.
May the Sun illuminate you from within, not scorch you from outside.
Jai Guru Dev,
Vinayak Bhatt

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