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27/05/2025

"एक चायवाले की रंगोली और बेरोजगार पोते की कहानी, जिसने सब बदल दिया..."

कभी सोचा है कि एक कड़वे नीम के नीचे भी मीठी कहानियाँ पलती हैं?
यह कहानी सिर्फ एक पेड़ या एक चाय के ठेले की नहीं है… ये कहानी है उम्मीद, इंसानियत और छोटे से बदलाव की जो किसी की ज़िंदगी बदल सकता है।

हमारे गली के नुक्कड़ पर, जहाँ दिन भर की धूप और चहल-पहल आकर ठहर जाती थी, वहाँ एक बूढ़ा, घिस चुका नीम का पेड़ खड़ा था। उसकी छाया में रमेश चाचा का चाय का ठेला था, दादीअम्मा की बैंच, और बच्चों की शरारतें थीं।

दादीअम्मा उदास थीं—उनका पोता रोहन पढ़-लिखकर भी बेरोजगार था। रमेश चाचा ने कुछ नहीं पूछा, बस एक अदरक वाली चाय उनके सामने सरका दी और कहा,
"कभी-कभी, ये नीम के कड़वे पत्ते भी सबसे मीठी छाया देते हैं।"

फिर आई प्रिया, एक युवा कलाकार। उसे रमेश चाचा की ठेले के पास बनी रंगोली ने आकर्षित किया। उसने तस्वीरें खींचीं और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं—नीम, रंगोली और चाय के साथ।

अगले हफ्ते, एक इवेंट प्लानर रमेश चाचा की कला से इतनी प्रभावित हुई कि उन्हें एक बड़े आयोजन का ऑर्डर दे दिया। रमेश चाचा ने इस काम में रोहन को भी साथ लिया, और उसकी डिजिटल समझ ने उनका काम और भी निखार दिया।

अब नीम का वही पुराना पेड़, जो गवाह था चुपचाप उम्मीदों का, एक नई धुन छेड़ता सा लगता है।

"कड़वे पत्ते भी मीठी छाया देते हैं।"
दादीअम्मा की आँखों में चमक थी, और मोहल्ले में उम्मीद की हवा।
...

कभी-कभी, सबसे बड़ी खुशियाँ और बदलाव, हमारे अपने समुदाय के दिल में, सबसे छोटे इशारों से ही जन्म लेते हैं।
....
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपको लगता है कि एक छोटी सी मदद भी किसी की ज़िंदगी बदल सकती है?
अपने अनुभव ज़रूर साझा करें!


#हिंदीसाहित्य #कहानी #देसी #कथा

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07/04/2025

कौशल्यानंदन प्रभु श्री राम...
भारतीय जनमानस के नायक श्रीराम का जीवन पूर्णतः अनुकरणीय है किन्तु उनकी कुछ विशेषताएं जो आज भी हमारे जीवन जीने के लिए मार्गदर्शक है जैसे कि है
• कर्तव्य पालन: श्री राम ने हमेशा अपने कर्तव्यों का पालन किया, चाहे वह एक पुत्र, भाई, पति या राजा के रूप में हो। उन्होंने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राजपाट त्याग दिया और वनवास स्वीकार किया। यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने की शिक्षा देता है।
• सत्य और धर्म का मार्ग: श्री राम ने हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने न्याय और नैतिकता का पालन किया, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। यह हमें सही मार्ग पर चलने और अपने मूल्यों पर अटल रहने की प्रेरणा देता है।
• धैर्य और सहनशीलता: वनवास के दौरान श्री राम ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। उन्होंने हर परिस्थिति में शांति और संयम बनाए रखा। यह हमें जीवन की चुनौतियों का सामना धैर्य और सहनशीलता के साथ करने की प्रेरणा देता है।
• न्यायप्रियता: श्री राम ने हमेशा न्याय का पक्ष लिया, चाहे वह अपने परिवार के खिलाफ ही क्यों न हो। उन्होंने रावण जैसे शक्तिशाली शत्रु को भी पराजित किया, जो अधर्म का प्रतीक था। यह हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और न्याय के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।
• मित्रता और निष्ठा: श्री राम ने सुग्रीव, विभीषण और हनुमान जैसे मित्रों के साथ अटूट मित्रता निभाई। उन्होंने अपने मित्रों के प्रति हमेशा निष्ठा और वफादारी दिखाई। यह हमें सच्चे मित्र बनाने और उनके साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
• सभी के प्रति सम्मान: श्री राम ने सभी प्राणियों के प्रति सम्मान और करुणा दिखाई, चाहे वे छोटे हों या बड़े। उन्होंने शबरी जैसी साधारण महिला को भी सम्मान दिया और उनके प्रेम को स्वीकार किया। यह हमें सभी के साथ समान व्यवहार करने और सभी प्राणियों के प्रति दयालु होने की प्रेरणा देता है।
• संकल्प और दृढ़ निश्चय: श्री राम ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ निश्चय दिखाया। उन्होंने सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराने के लिए अथक प्रयास किए और अंततः सफल हुए। यह हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहने की प्रेरणा देता है।
• त्याग और बलिदान: श्री राम ने अपने परिवार और प्रजा के कल्याण के लिए अनेक त्याग और बलिदान दिए। उन्होंने राजपाट त्याग दिया, वनवास स्वीकार किया और अपने सुखों का त्याग किया। यह हमें दूसरों के लिए त्याग करने और बलिदान देने की प्रेरणा देता है।
• क्षमा और करुणा: श्री राम ने अपने शत्रुओं को भी क्षमा किया और उनके प्रति करुणा दिखाई। उन्होंने विभीषण को शरण दी और उन्हें लंका का राजा बनाया। यह हमें क्षमा करने और करुणा दिखाने की प्रेरणा देता है।
• आत्मसंयम: श्री राम ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा और कभी भी क्रोध या अहंकार को हावी नहीं होने दिया। उन्होंने हमेशा संयम और विवेक से काम लिया। यह हमें आत्मसंयम रखने और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की शिक्षा देता है।


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06/04/2025

श्रीराम कथा : भाग ०१

श्रीरामजन्म

प्राचीन भारत में, अयोध्या नगरी के राजा दशरथ, जो अपनी न्यायप्रियता और प्रजा के प्रति प्रेम के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी तीन रानियाँ थीं - कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। राजा दशरथ को कोई पुत्र नहीं था, और यह चिंता उनके मन में सदैव बनी रहती थी। राज्य के उत्तराधिकारी के बिना, उन्हें भविष्य की चिंता सताती थी।
राजा दशरथ ने अपने गुरु, ऋषि वशिष्ठ से इस समस्या का समाधान पूछा। ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी, जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। राजा दशरथ ने तुरंत यज्ञ की तैयारी शुरू करवाई। देश भर से ऋषि-मुनियों और विद्वानों को आमंत्रित किया गया।
यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित हुई, और वेद मंत्रों का उच्चारण होने लगा। ऋषि ऋष्यश्रृंग ने यज्ञ का संचालन किया। यज्ञ की समाप्ति पर, अग्नि देव प्रकट हुए और उन्होंने राजा दशरथ को एक दिव्य पायस (खीर) का पात्र दिया। उन्होंने कहा, "हे राजन, यह पायस आपकी रानियों को खिलाएं, इससे आपको चार तेजस्वी पुत्र प्राप्त होंगे।"
राजा दशरथ ने प्रसन्न होकर पायस को अपनी रानियों में बाँट दिया। कौशल्या ने आधा पायस खाया, कैकेयी ने एक चौथाई और सुमित्रा ने बचा हुआ पायस ग्रहण किया। समय बीतता गया, और रानियाँ गर्भवती हुईं।
कौशल्या के गर्भ से, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को, पुनर्वसु नक्षत्र में, भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम का जन्म हुआ। अयोध्या में आनंद की लहर दौड़ गई। राजा दशरथ और उनकी रानियाँ खुशी से झूम उठे।
कौशल्या ने अपने पुत्र को गोद में लिया, और उनके नेत्रों में वात्सल्य के अश्रु बहने लगे। उन्होंने कहा, "हे प्रभु, आपने मेरे घर को अपने आगमन से धन्य कर दिया है। मैं आपकी कृपा से कृतार्थ हूँ।"
ऋषि वशिष्ठ ने बालक का नाम राम रखा। राम का तेज सूर्य के समान था, और उनकी आभा दिव्य थी। अयोध्या के हर घर में उत्सव मनाया गया। राजा दशरथ ने दान-पुण्य किया और गरीबों को भोजन कराया।
कैकेयी ने भरत को जन्म दिया, और सुमित्रा ने जुड़वां पुत्रों, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। चारों राजकुमार तेजस्वी और गुणवान थे। उनका लालन-पालन राजा दशरथ और उनकी रानियों ने बड़े प्यार से किया।
राम की बाल लीलाएँ अयोध्या के लोगों के लिए आनंद का स्रोत थीं। उनकी मधुर वाणी और दिव्य मुस्कान सभी का मन मोह लेती थी। वे अपने भाइयों के साथ खेलते और सीखते थे। ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें वेदों, शास्त्रों और युद्ध कला की शिक्षा दी।
एक दिन, जब राम और उनके भाई खेल रहे थे, तो राजा दशरथ ने उन्हें अपने पास बुलाया। उन्होंने कहा, "मेरे प्रिय पुत्रों, तुम मेरे राज्य के उत्तराधिकारी हो। तुम्हें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए।"
राम ने विनम्रता से कहा, "पिताजी, हम आपकी आज्ञा का पालन करेंगे। हम अपने राज्य और अपनी प्रजा की सेवा में तत्पर रहेंगे।"
समय बीतता गया, और राम युवावस्था में प्रवेश कर गए। वे एक आदर्श पुत्र, एक कुशल योद्धा और एक न्यायप्रिय राजकुमार थे। उनकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई।
एक दिन, ऋषि विश्वामित्र अयोध्या आए और राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, "राजन, राक्षसों ने मेरे आश्रम में विघ्न डालना शुरू कर दिया है। मुझे राम और लक्ष्मण की सहायता चाहिए।"
राजा दशरथ को राम को भेजने में हिचकिचाहट हुई, लेकिन ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें समझाया कि यह राम के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। राजा दशरथ ने अनिच्छा से राम और लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेज दिया।
राम और लक्ष्मण ने ऋषि विश्वामित्र के आश्रम में राक्षसों का सामना किया और उन्हें पराजित किया। उन्होंने ताड़का और सुबाहु जैसे शक्तिशाली राक्षसों का वध किया। उनकी वीरता और पराक्रम देखकर ऋषि विश्वामित्र प्रसन्न हुए।
ऋषि विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र और ज्ञान प्रदान किया।
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#EP 37 आगरा से मुक्तता #shivajimaharaj #amazing #intrestingfacts #facts #viral #trending #history #s 03/06/2024

छत्रपति शिवाजी महाराज,
अज्ञात एवं रोचक तथ्य।
भाग ३७,

*आगरा से मुक्तता*

https://youtube.com/shorts/fiyL_2lVFWE?feature=share

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#EP 35 औरंगज़ेब की मंशा #amazing #facts #shivajimaharaj #intrestingfacts #trendingshorts #viral #s 01/06/2024

छत्रपति शिवाजी महाराज,
अज्ञात एवं रोचक तथ्य।
भाग ३५,

*औरंगज़ेब की मंशा*

https://youtube.com/shorts/Q-UajFZphQo?feature=share

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#EP 34 आग्रा भेंट से पूर्व #shivajimaharaj #history #marathas #facts #s #amazing #intrestingfacts 31/05/2024

छत्रपति शिवाजी महाराज,
अज्ञात एवं रोचक तथ्य।
भाग ३४,

*आगरा भेंट से पूर्व*

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#EP 34 आग्रा भेंट से पूर्व #shivajimaharaj #history #marathas #facts #s #amazing #intrestingfacts छत्रपति शिवाजी महाराज, अज्ञात एवं रोचक तथ्य।भाग ३४,आगरा भेंट से पूर्व-Team SaSneh Infotainment@HISTORY ...

#EP 33 पुरंदर की सन्धी #shivajimaharaj #history #marathas #facts #maratha #amazing #intrestingfacts 31/05/2024

छत्रपति शिवाजी महाराज,
अज्ञात एवं रोचक तथ्य।
भाग ३३,

*पुरंदर की सन्धि*

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#EP 33 पुरंदर की सन्धी #shivajimaharaj #history #marathas #facts #maratha #amazing #intrestingfacts छत्रपति शिवाजी महाराज, अज्ञात एवं रोचक तथ्य।भाग ३३,पुरंदर की सन्धी -Team SaSneh Infotainment@HISTORY ...

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