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Indian Desi Folk
We have primarily chosen the medium of folk music as these folk songs reflect a wide spectrum of Indian culture. Every song tells an interesting story.
On the one extreme, they narrate stories that reflect the hopes and fears of common people. India is one of the most diverse countries in the world. This rich cultural diversity of India is reflected in its folk music. In modern India, the ancient culture of India breathes through its folk songs. And on the other extreme, the songs tell stories motivated by deep insights from the ancient Indian sc
08/05/2026
बागोर की हवेली
यह हवेली मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमरचंद बड़वा द्वारा 1751 से 1778 के बीच बनवाई गई थी।
बाद में यह हवेली महाराणा मेवाड़ के छोटे भाई महाराज शक्ति सिंह के निवास के रूप में उपयोग हुई।
1823 से 1864 के बीच इसे बागोर ठिकाने के महाराणा शक्तावत सिंह, शंभू सिंह और सज्जन सिंह आदि ने विकसित कराया।
पिछोला झील के किनारे बने गणगौर घाट पर महाराज भीम सिंह ने सुंदर महल बनवाया। बाद में 1878 में महाराणा शक्तावत सिंह ने तीन मंज़िला महल का निर्माण करवाया।
1930 में यह हवेली मेवाड़ राज्य द्वारा अधिग्रहित की गई और राज्य अतिथि गृह बनाई गई।
स्वतंत्रता के बाद राजस्थान सरकार ने इसका उपयोग सरकारी कर्मचारियों के आवास के रूप में किया।
1986 में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र को यह भवन सौंपा गया। इसके बाद संरक्षण और जीर्णोद्धार के बाद इसे संग्रहालय बनाया गया।
इस हवेली में:
138 कमरे
अनेक चौक
लंबे बरामदे
राजसी बैठक कक्ष
संगीत कक्ष
पूजा घर
भोजन कक्ष
आदि देखने योग्य हैं।
यह हवेली राजस्थानी जीवन शैली, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर उदाहरण मानी जाती है।
06/05/2026
डॉ. निरंजन राज्यगुरु : लोकधारा के साधक
Dr. Niranjan Rajyaguru गुजरात की लोकसंस्कृति, संतवाणी और लोकगायन परंपरा के महत्वपूर्ण शोधकर्ताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपना जीवन लोकधारा, लोकगायकों और संत परंपरा के संरक्षण के लिए समर्पित किया। विशेष रूप से सौराष्ट्र और काठियावाड़ की लोक परंपराओं पर उनका कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
डॉ. राज्यगुरु के पास लोकसाहित्य, संतवाणी, लोकभजन और दुर्लभ लोकधुनों का विशाल संग्रह है। कहा जाता है कि उनके संग्रह में लगभग 18 हज़ार से अधिक लोकगीत, भजन, दोहे, कथाएँ और लोकध्वनियों का दस्तावेजीकरण सुरक्षित है। यह केवल संग्रह नहीं, बल्कि गुजरात की लोकस्मृति का जीवित अभिलेख है।
उन्होंने गाँव-गाँव घूमकर उन लोकगायकों और संतों की वाणी को संजोया, जिनकी परंपरा धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही थी। उनके शोध का एक महत्वपूर्ण पक्ष “जीवनदासी संत” परंपरा है। जीवनदासी संतों की वाणी में भक्ति, करुणा, श्रम और जनजीवन की गहरी अनुभूति मिलती है। डॉ. राज्यगुरु ने इन संतों के पदों और लोकगायन को केवल अकादमिक विषय नहीं माना, बल्कि उन्हें जनमानस की आत्मा के रूप में देखा।
लोकगायक के रूप में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। वे मंच पर केवल प्रस्तुति नहीं देते, बल्कि गीतों के पीछे छिपे इतिहास, लोकविश्वास और सांस्कृतिक संदर्भों को भी सामने लाते हैं। उनके गायन में मिट्टी की सुगंध, लोकभाषा की आत्मीयता और संतवाणी की आध्यात्मिक गहराई एक साथ दिखाई देती है।
घोड़ा-बदर जैसे लोक आख्यानों और ग्रामीण सांस्कृतिक परंपराओं पर उनका कार्य गुजरात की मौखिक परंपरा को समझने में महत्त्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि लोकसाहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की स्मृति, संघर्ष और संवेदना का दस्तावेज होता है।
आज के समय में, जब आधुनिकता के दबाव में लोकपरंपराएँ तेजी से बदल रही हैं, डॉ. निरंजन राज्यगुरु जैसे शोधकर्ता भारतीय लोकसंस्कृति के प्रहरी की तरह दिखाई देते हैं। उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को बचाने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
04/05/2026
Indian Heritage Gem
Laxmi Vilas Palace (Baroda/Vadodara) is one of the grandest royal residences in India—built by the Maharaja Sayajirao Gaekwad III. It’s not just architecture; it’s a living cultural space where art, music, and royal aesthetics come together beautifully.
The palace blends Indo-Saracenic, Mughal, and European styles, giving endless visual inspiration.
Durbar Hall, stained glass, intricate pillars, and expansive gardens are ideal subjects.
Natural elements like peacocks, banyan trees, and lawns create a calm, artistic environment.
Baroda has a deep tradition of Hindustani classical music, and the palace culture supported great artists.
Faiyaz Khan — One of the greatest vocalists of the Agra gharana, closely associated with the Baroda royal court.
Ram Kumar — Though primarily a modernist painter, his artistic sensibility reflects the kind of deep, meditative inspiration such heritage spaces offer.
The royal court historically encouraged music mehfils, classical performances, and artistic gatherings, making it a cultural hub.
"Jodi tor daak shune keu na ashe, tobe ekla cholo re "
singer learns from nature (like the
Ganga ) sings with true emotion and simplicity
04/03/2026
दूल्हा सरकार कोहबर में रंग लूटे..........होली की ढेरों शुभकामनायें # mathili # Holi #
Maithali song | Holi | traditional | Villagers of Barhetha ( BIHAR) singing traditional Holi songwebsite-www.indiandesifolk.comSubscribe ---https://www.youtube.com/c/IndianDesiFolkLike and foll...
03/03/2026
Happy Holi
24/02/2026
Song Recording with # vijay verma khan Tiwari at Yashraj Studio
23/01/2026
जब बौद्धिक ज्ञान, संगीत और ध्यान—तीनों एक साथ आते हैं, तभी वास्तविक प्रज्ञा (Wisdom) का उदय होता है। यही माँ सरस्वती की उपासना का गूढ़ अर्थ है।
भगवान ब्रह्मा की अर्धांगिनी माँ सरस्वती को वीणा बजाते हुए दर्शाया गया है। वीणा भारत के सबसे प्राचीन वाद्य यंत्रों में से एक है। वीणा मानव शरीर का प्रतीक है। जिस प्रकार वीणा में सात तार होते हैं, उसी प्रकार मानव शरीर भी सात धातुओं से निर्मित है। जब वीणा ठीक से सुर में बंधी होती है, तो उससे मधुर संगीत निकलता है; उसी तरह जब जीवन संतुलित और संयमित होता है, तो उससे दिव्य संगीत—अर्थात् श्रेष्ठ कर्म और चेतना—प्रकट होती है।
इसी कारण माँ सरस्वती की प्रतिमा हमें अनेक विद्यालयों में दिखाई देती है। वे उस समग्र शिक्षा का प्रतीक हैं, जो कभी भी आध्यात्मिकता से अलग नहीं होती। माँ सरस्वती एक शिला (पत्थर) पर विराजमान हैं। शिला ज्ञान का प्रतीक है—स्थिर, दृढ़ और अडिग। सच्चा ज्ञान चंचल नहीं होता, न ही भटकाता है; वह जीवन में स्थिरता और संतुलन लाता है।
उनके साथ उपस्थित मोर सौंदर्य और उल्लास का प्रतीक है। ज्ञान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि अंतरात्मा में सौंदर्य और संवेदनशीलता का सृजन करना है।
माँ सरस्वती के एक हाथ में पुस्तक है, जो साहित्य, तर्क और बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रतीक है—यह बाएँ मस्तिष्क (Left Brain) का संकेत करती है। दूसरे हाथ में वीणा है, जो संगीत, रचनात्मकता और भावनात्मक बोध का प्रतीक है—यह दाएँ मस्तिष्क (Right Brain) को दर्शाती है।
इसके अतिरिक्त उनके हाथ में जप-माला भी है, जो ध्यान और साधना का प्रतीक है। यह बताती है कि ज्ञान तब पूर्ण होता है, जब उसमें ध्यान और आत्मचिंतन का समावेश हो।
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