01/11/2024
ऐक्टर बनना है? 'लॉटरी' का टिकट ख़रीदो
अजीब सा टाइटल है। है न?
बात जब तक पहेली सी हो, रहस्यमयी लगती है। भरम खोलने के लिए, चलिए इस पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकालते हैं।
तो सबसे पहले आपके ज़ेहन में यही आया होगा कि ये ऐसा कौनसा 'लॉटरी' का टिकट आ गया भाई, जिससे ऐक्टर बना जा सकता है? इस पेँच को समझने के लिए ये क़िस्सा सुनें।
एक आदमी भगवान के पास जाकर, पूरे मनोयग से, रोज़ाना प्रार्थना करता कि - "हे भगवन, मेरी एक करोड़ की लॉटरी निकाल दो।" बरसों बीत गए। भक्त उम्रदराज़ हो चला। एक दिन भगवान प्रकट होकर उससे बोले- मैं तो कब से तुम्हारी एक करोड़ की लॉटरी निकालना चाह रहा था, लेकिन तुम ने कभी लॉटरी का टिकट ख़रीदा ही नहीं।
क़िस्सा ख़त्म।
ऐक्टर बनने वालों के लिए लॉटरी का यह टिकट है- ऑडिशन।
अगर आप ऑडिशन ही नहीं देंगे तो ऐक्टर कैसे बनेंगे? भले ही ऑनलाइन ऑडिशन देते रहें या लम्बी लाइन में लगकर। आप जितने अधिक ऑडिशन देंगे, उतनी ही आपकी लॉटरी निकलने यानी काम मिलने की प्रत्याशा बढ़ती जाएगी।
जितनी अधिक प्रत्याशा होगी, उतना ही ज़्यादा काम आपके पास आ सकता है। और कमाल की बात यह है कि सिर्फ एक अच्छा काम मिलते ही आपकी ऐक्टिंग का सफ़र शुरू हो जाएगा।
छोटा-मोटा काम करने के बाद, थोड़ी पहचान बनने के बाद, कुछ ऐक्टर ऑडिशन देने से कतराने लगते हैं या ऑडिशन देना अपमान समझने लगते हैं। यानी लॉटरी का टिकट ख़रीदना बन्द कर देते हैं। इससे उनको काम मिलना भी धीरे-धीरे मन्द हो जाता है।
यह भी सच है कि ऐक्टर बनने का सपना देखने वाले ज़्यादातर युवा, ऑडिशन को बड़ी तुच्छ चीज़ समझते हैं। उनको लगता है कि कोई जुगाड़ हो जाए, किसी से जान-पहचान हो जाए, लिंक बन जाए, पैसे देकर काम मिल जाए या कोई चमत्कार हो जाए तो उनको ऐक्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
अब चमत्कार होने की उम्मीद में तो आप बैठे नहीं रह सकते। वो होगा तो होगा, नहीं होगा दो नहीं होगा। फिर भी चमत्कार या जुगाड़ फ़िट बैठने के इंतज़ार में दिन, महीने, साल गुज़रते जाते हैं।
वहीं ऑडिशन में इन्ट्रो देने के लिए किसी कास्टिंग डायरेक्टर के दरवाज़े पर लगी लम्बी क़तार देखकर भी कई नए ऐक्टर घबरा जाते हैं। या उनमें इतना धैर्य नहीं होता कि वह लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतज़ार कर सकें।
ऐसे उपर्युक्त ख़याल उन्हीं ऐक्टर्स के मन में आ सकते हैं, जिनमें अभिनय के प्रति समर्पण न हो। वरना जिनके लिए अभिनय ही ज़िंदगी है, वह डटे रहते हैं। उनको धूप, पसीना, इंतज़ार दिनों-दिन चमकाता चला जाता है। असलियत में लॉटरी भी इन्हीं में से किसी की निकलती है। जो स्मार्ट बनकर निष्क्रिय बैठा है, उसकी कभी लॉटरी नहीं निकल सकती। उसका चांस तो पहले से ही ज़ीरो है।
मुम्बई फि़ल्म सीरियल इण्डस्ट्री का हब (Hub) है। काम पहले से ज़्यादा बढ़ गया है। पहले तो सिर्फ़ फ़िल्म सीरियल ही थे, अब वेब सीरीज़, कमर्शियल विज्ञापनों की भरमार हो गई है। आजकल सोशल मीडिया में इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, यू टूयब, OTT platforms Netflix, Hotstar आदि के लिए भी ख़ूब विज्ञापन बनाए जाने लगे हैं। एक ही विडियो में कभी-कभी तो दो-दो विज्ञापन दिखाए जाते हैं। तो काम ख़ूब है। ऑडिशन जमकर देना शुरू कीजिए।
यहाँ फ़ेक या झूटे ऑडिशन का सवाल भी आपके ज़ेहन में आया होगा। इस पर बात अगली पोस्ट में।
फ़िलहाल, सौ बात की एक बात। ऐक्टर बनने मुम्बई आए हो तो ऑडिशन देते रहिए। बहुत जल्दी आपका टाइम आएगा।
आपका शुभाकाँक्षी
नरेश पाँचाल, ऐक्टिंग कोच, लोखण्डवाला, अंधेरी वेस्ट, मुम्बई
98208 65844
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