12/09/2026
भीड़ बढ़ती जा रही है, मन मगर तन्हा हुआ…
शब्द बढ़ते जा रहे हैं, संवाद क्यों कम हुआ?
आईनों में ढूँढ़ते हैं आज हम अपना वजूद,
जिससे मिलना था हमें, वही ख़ुद से गुम हुआ।
— डॉ. वेदप्रकाश दुबे
#वेदज्ञान #विचार #हिंदीकविता #साहित्य #संवाद #वजूद #जीवनदर्शन #मनकीबात #हिंदीसाहित्य