04/08/2026
जब हमलोग विद्यालय में पढ़ते थे तबतक यही संस्कृति और अनुशासन तय था, सफाई और स्वच्छता विद्यालय के बच्चे ही दैनिक रूप से समूहों में करने अच्छी आदत और नैतिक शिक्षा के रूप में समाज और गुरुओं द्वारा एक संस्कार और व्यवहार स्वरूप छात्रों में ढाला गया था, जिसे आज की कागजी और अव्यवहारिक सरकार सरकारी धन की लूट की छूट के लिए NGO को देकर बच्चों को इससे अलग कर दिया गया, जबकि ये पुराने समय से सभी वर्गो के बच्चे प्रतिदिन विद्यालय में करते रहे हैं एक जिम्मेदारी बोध और साफ सफाई को ज्ञान में प्राथमिकता देने के सोच और नीयत से!
लेकिन आज भी देखिए जापान की शिक्षा व्यवस्था सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी इसका अहम हिस्सा है। यही वजह है कि वहां के स्कूलों में क्लासरूम, गलियारे और टॉयलेट की सफाई के लिए अलग से सफाई कर्मचारी नहीं रखे जाते।
जापान में "ओसोजी" नाम की परंपरा के तहत छात्र, शिक्षक और स्कूल का पूरा स्टाफ मिलकर रोज़ाना स्कूल की सफाई करते हैं। "ओसोजी" का अर्थ है गहराई से सफाई करना। यह परंपरा घरों में नए साल से पहले होने वाली सफाई से जुड़ी है, लेकिन स्कूलों में इसे रोजमर्रा की आदत के रूप में अपनाया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल स्कूल को साफ रखना नहीं, बल्कि बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन, टीमवर्क और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। सफाई के दौरान आधुनिक उपकरणों और मशीनों का भी उपयोग किया जाता है, ताकि यह काम आसान और प्रभावी हो।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चे खुद अपने आसपास की जगह साफ रखते हैं, तो वे उसे गंदा करने से भी बचते हैं। यही आदत आगे चलकर समाज में जिम्मेदार और अनुशासित नागरिक बनाने में मदद करे