Jaankeesh Educational Academy

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Happy learning & growing!

15/08/2024

🚩🇧🇴🌻💐
७८ वें स्वतंत्रता दिवस की
अनेकानेक शुभकामनाएं....
🙏🌸🌴💥🌹

🌴 रोटी कपड़ा और मकान... के बाद ही सच्ची स्वतंत्रता का प्रारंभ होता है!!!!!!!!!🌻
पहला भूमि.... दूसरा अन्न ...
जो कि....सबसे बड़ा धन है ...जिसके सामने सारे धन व्यर्थ हैं...
और तीसरा धन-धान्य...
इसके बाद जो स्वतंत्रता आती है...
🍃"वह है सांस्कृतिक और सांस्कारिक स्वतंत्रता !!!!"🌾
🥀 अत्यंत विचारणीय है कि... हमारे वृहदभारत का अफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक प्रस्तार था.... हमारा भारत इतना विशाल था...
वह आज
सिकुड़कर एक छोटा सा भारत वर्ष बन गया!!! इस पर गहन विचार आवश्यक है....🍃
🌻ज्ञान विज्ञान और महाविज्ञान सनातन धर्म के अंग हैं...🌷

🍃"ज्ञान" जीवन का आवश्यक अंग है...
🥀"विज्ञान" हमारी सुविधाओं का केंद्र है... जो महाविनाश का कारण भी बन सकता है!!!!
और "महाविज्ञान"
अर्थात
🪷ईश्वरीय विज्ञान... !!!
अर्थात जन्म से पहले और मृत्यु के बाद का विज्ञान...
अर्थात लोक और परलोक को जोड़ने वाला ज्ञान.....
जो की सनातन धर्म का गहन दर्शन है...
🌾जहां इन तीनों की स्वतंत्रता हो !!!! वही सच्ची स्वतंत्रता है............
🥀सनातन धर्म समस्त जीवों ... प्रकृति...
ऊर्जा के केंद्र सूर्य ,चंद्र ...पहाड़ों ...नदियों आदि- आदि सबका चिंतन करता है... और उन्हें धन्यवाद भी देता है...
वही धन्यवाद पूजा का अंग होता है...🌸
🥀सनातन धर्म सिर्फ मनुष्य का नहीं!!! संपूर्ण जीवों.... प्रकृति और ब्रह्मांड का ज्ञान है...
और विश्व शांति का मूल है...🪴

🌴अर्थात जहां ज्ञान... विज्ञान... और ईश्वरीय महाविज्ञान ......तीनों की स्वतंत्रता हो!!! वही पूर्ण स्वतंत्रता है....💥
🍃जहां आविष्कार की स्वतंत्रता हो!!!! बुद्धि की स्वतंत्रता हो!!! परिवर्तन की स्वतंत्रता हो!!! वही स्वतंत्रता है.......🌾
सनातन धर्म विश्व शांति का मूल है... परंतु विश्व में अनेकों स्थलों में उसकी स्वतंत्रता का हनन अत्यधिक हुआ!!!!! और अत्याचार हुए!!!
🥀 अखंड भारत "वसुधैव कुटुंबकम" 🌸अर्थात समस्त समस्त विश्व एक परिवार है....के महाज्ञान से... प्राचीन काल से संपूर्ण विश्व का केंद्र था ...और सबके लिए समृद्धि और शांति का प्रतीक था ... आज भी है और रहेगा!!!! 🌾

🌻ईश्वर संपूर्ण विश्व की...
भारतवर्ष की... और उसके समस्त नागरिकों की रक्षा करें.... उन्हें सुख... समृद्धि और सद्ज्ञान प्रदान करें!!! यही ईश्वर से कामना है....🙏
स्वतंत्रता दिवस पर सभी को
अनेकानेक शुभकामनाएं....
🙏💐🌴💥
🍃🐎🐒🍅🦜
🚩🌻

21/07/2024

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं......💓🙏🌷
🚩🚩
पूरे लेख को धीरे-धीरे आत्मसात करें... एवं गुरु की महिमा के लिए प्रसारित करें
🙏🌷🚩🚩

श्रेष्ठ गुरु कैसे प्राप्त हो ??????????
गुरु श्रेष्ठ है या नहीं इसकी परीक्षा कैसे करेंगे????
हम तो कहीं भी चले जाते हैं...
इसीलिए महागुरु भगवान कृष्ण कहते हैं ...जो गुरु लाखों करोड़ों साल ...अर्थात अनादि काल से निकले... शास्त्रों के श्रेष्ठ ज्ञान के अनुसार कहे... वही गुरु है....वही महागुरु है...
ऐसे गुरुओं के छोड़ कर अन्य गुरुओं के पास में कभी मत जाओ!!!! अन्यथा यह मनुष्य जीवन नष्ट हो जाएगा!!!
निकृष्ट गुरु निर्मल बाबा के कहने पर हमने तो शिवलिंग को भी अपने घरों से बाहर निकाल कर फेंक दिया.... क्या हम इतने स्वार्थी और निकृष्ट हो गए!!! क्या हमारा आत्मविश्वास इतना कम है ????? क्या हमारे पास कोई बुद्धि नहीं!!!!!!क्या हमारा भय और लालच इतना बड़ा हो गया!!!!
ऐसा क्यों होता है???? पूरा लेख पढ़ने पर स्पष्ट हो

*गुरु की परीक्षा आवश्यक है...*

प्रश्न यह है कि... हम यदि शास्त्रों के बारे में ही नहीं जानते तो कैसे परीक्षा करेंगे ?????? कैसे पता चलेगा????
यही समस्या है!!!!!

*शिष्य को कैसा होना चाहिए???*
अब शिष्य का क्या लक्षण है ????
शिष्य को सबसे पहले अपने भीतर बैठे हुए गुरु तत्व को पहचानना चाहिए.... गुरु की कृपा से उसी गुरुतत्व के कारण हमें ज्ञान प्राप्त होता है...
कैसे ???????
ध्यान से समझना होगा!!!
यह शक्ति हमें ईश्वर ने दी है...
हम कक्षाओं में पढ़ने जाते हैं .... हमें बात समझ में क्यों आती है???? गुरु हमें समझाता है... हमें बात क्यों समझ में आती है????? समझने वाले तो हम ही है ना!!!!! क्या गुरु हमारे भीतर घुस जाता है... ध्यान से समझें.... ऐसा इसलिए है कि... हमारे भीतर ईश्वर का दिया हुआ गुरु तत्व बैठा हुआ है... गुरु हमारे भीतर घुसकर कोई क्रिया नहीं करता!!!! भाषा के माध्यम से ज्ञान देता है... और समझने वाले हम ही होते हैं... समझते तो हम ही है ना...... अर्थात हम सक्षम हैं... हमारा ज्ञान सोया हुआ है ...गुरु उसको जगाता है ...कुछ पैदा नहीं करता!!!!
हम समझने योग्य थे इसीलिए समझ पाए!!!! यही हमारे भीतर बैठे हुए गुरु तत्व की पहचान है...
गुरु की कृपा को प्रणाम अवश्य करना चाहिए.....

*महागुरु भगवान श्री कृष्ण के अनुसार ज्ञान क्या है ????*
हम ज्ञान को केवल पकड़ने वाले हैं.............. ज्ञान के अधिकारी नहीं हैं.....
कैसे??????
किसी भी ज्ञानी को अहंकार का अधिकार नहीं!!!!!
क्यों???
जब से यह ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ!!! सृष्टि उत्पन्न हुई!!!जीवन उत्पन्न हुआ... ज्ञान तब से है!!! सृष्टि बन रही है... बिगड़ रही है ...ज्ञान सदैव था... सदैव रहेगा!!! बहुत ध्यान से समझना होगा कि ...ज्ञान हमारी पूंजी नहीं!!!!!!
इस उदाहरण से स्पष्ट होगा!!!?
हम रेडियो में गाने सुनते हैं...
हम उस गाने को पकड़ते कैसे हैं ???? क्योंकि हमारे पास ट्रांजिस्टर होता है.... इसी तरह ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान पूरे ब्रह्मांड में फैला हुआ है...
जिसने पकड़ लिया उसको मिल गया!!! वह ज्ञान का अधिकारी नहीं है ...वह पकड़ने वाला है यह समझना है......

अगर रेडियो स्टेशन से गाना ही ना बजे तो क्या गाना सुन पाओगे????? लेकिन ईश्वर कृपालु है ज्ञान सदैव से है ...सदैव रहेगा....
हम सब रिसीवर हैं..... अर्थात पकड़ने वाले हैं....ईश्वर ने हमें उसे सुनने की ...अर्थात ज्ञान को पकड़ने की अनुमति दी है.... अर्थात विकास की अनुमति दी है....
नीचे लिखी बात से भी यह सिद्ध हो जाएगा!!!!
एक ही खोज अनेकों व्यक्तियों के द्वारा एक ही समय में हो सकती है... जिस तरह रेडियो से प्रसारित होने वाला गाना एक ही समय में आने को लोग सुनते हैं....
ज्ञान यदि किसी एक व्यक्ति का होता ...तो बहुत सारे लोगों के पास कैसे पहुंचता ??????
झूठे गुरुओं के लिए अहंकार की कोई जगह नहीं..

*श्रेष्ठ को गुरु कौन??????*
महागुरु श्री कृष्ण कहते हैं....
गुरु ज्ञान को पकड़ने वाला है.... श्रेष्ठ गुरु निरभिमानी होता है...
निर्मल होता है... अर्थात अहंकारी नहीं होता...
भगवान कृष्ण की आध्यात्मिक विद्या के अनुसार गुरु वह है... जो हमें हम कहां से आए???? इसका विचार करे ....और कहां जाएंगे??? इसका विचार करे... जीवन में आनंद के लिए
हमें इसका ज्ञान....शास्त्रों के अनुसार बताएं.... यह पुनर्जन्म और कर्मवाद का सिद्धांत है.... 84 लाख योनियों का सिद्धांत है... कर्म और फल का सिद्धांत है... और वेदों का महाविज्ञान है... दूसरे धर्म पुनर्जन्म के बारे में ना ही जानते हैं.... ना ही उसे मानते हैं ....यही सबसे बड़ा मैनेजमेंट है...........
हम मैनेजमेंट की बात करते हैं.... मैनेजमेंट पूर्ण तब होगा जब हम कहां से आए ??? क्यों आए????और कहां जाएंगे??? इसके बारे में भी विचार करें ....इसको लोक और परलोक का विचार कहा जाता है..... हम तो केवल इस जीवन को ही सब कुछ समझ लेते हैं!!!!
हम तो धन और पद की कमी से स्वयं को छोटा समझने लगते हैं.... और झूठी दौड़ में दौड़ते रहते हैं.... धन से कोई बड़ा नहीं होता !!!! धन तो चोर भी कमाता है.... हमारा आत्मविश्वास आनंद और ईश्वरीय ज्ञान कैसे बढ़े... यही गुरु का कार्य है....

*गुरु कृपा को समझना अत्यंत आवश्यक है....*
आज विज्ञान में जो भी खोज हुई ....उसमें अनेकों वैज्ञानिकों ने थोड़ा-थोड़ा खोजा... उन वैज्ञानिकों की हजारों सालों की भी तपस्या का फल हमारे पास है...
ध्यान से यह समझना है कि...
एक खोज को करने में किसी वैज्ञानिक को पूरा जीवन लग जाता है ....
लेकिन हमारे बच्चे उस ज्ञान को..
जो कि ... पुस्तकों के रूप में आ चुका है....कक्षाओं में जाकर 45 मिनट में समझ लेते हैं!!!!! अब ध्यान से यह समझ कि....
जिस ज्ञान को विज्ञान को खोजने में 200 साल लग गए !!!!!! वह हमारे बच्चों को 45 मिनट में कैसे समझ में आ गया???????? यह किसकी तपस्या का फल है?????? यही गुरु का आशीर्वाद है ......
गुरु के आशीर्वाद को बहुत ध्यान से समझना होगा......
सत्य यह है कि..... गुरु की कृपा से समय संकुचित हो जाता है.... अर्थात समझने का समय कम हो जाता है....जो ज्ञान हम अकेले 100 सालों में प्राप्त करेंगे !!!!वह गुरु की कृपा से एक क्षण में मिल जाएगा!!!!!!!
यही गुरु कृपा है.....
समस्त गुरुओं को प्रणाम
महागुरु
श्रीकृष्ण
माता हरिहर
🙏🌷🌴💥
🍃🐎🐒🍅🦜
🚩🚩🚩🚩
संगीता आध्यात्मिक गुरु
अजेय त्रिवेदी

GSR 6th Annual Day – K06 - Prakhar Mishra 03/06/2024

बच्चों को संस्कार दें

GSR 6th Annual Day – K06 - Prakhar Mishra GSR 6th Annual Day – K06 - Prakhar MishraGSR's young star - Prakhar Mishra recites two shlokas from Shreemad BhagwadGeeta as a part of the Sanskrit Talent Co...

23/04/2024

*🌷सबसे न्यारे हनुमानजी अत्यंत विशेष क्यों है???🌹*
हनुमान जी विशेष क्यों है ????
क्योंकि हनुमान जी सबसे बड़े महाज्ञानी ...ज्ञानगुण सागर होकर भी.. स्वयं को ज्ञानी नहीं कहते!!!ना ही उन्हें ज्ञान का कोई अभिमान है...🙏

सबसे बड़े शक्तिशाली हनुमानजी अपनी शक्ति को बिसर जाते हैं ...भूल जाते हैं... है ऐसा कोई शक्तिशाली ???
जो अपनी शक्ति को भूल जाए!!! संसार में तो शक्ति का प्रदर्शन होता है....🙏

है कोई ऐसा व्यक्ति??? जिसका जीवन स्वयं के लिए ना होकर सिर्फ सेवा के लिए हो !!!
संसार में तो सब सेवक ढूंढते हैं...🙏
अत्यधिक विशेष यह है कि...संसार में वीर तो बहुत हैं.... परंतु महावीर वह है ...जिसने अपनी इंद्रियों को मन को जीत लिया हो!!!!! ऐसा व्यक्ति ही ईश्वर को पाने का अधिकारी होता है... और ईश्वर का अंश होता है... हनुमान जी महावीर हैं.... ईश्वर के अंश हैं...
महाज्ञानी... महाशक्तिशाली... महानसेवक ...महावीर.. महाचरित्रवान ...हनुमान जी को हनुमान प्रकटोत्सव पर कोटि-कोटि नमन...
एवं सभी को हार्दिक ...💕💕शुभकामनाएं...
🙏🌷🌴💥
समस्त कष्टों का निवारण करने वाला हनुमान जी का मंत्र ,
कौन सो संकट मोर गरीब को
जो तुमसों नहीं जात है टारो ,
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु
जो कछु संकट होय हमारो
हं हनुमते नमः
सभी कष्टों का हरण करने वाला...और शक्ति को प्रदान करने वाला महामंत्र है...
इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए...
जय सियाराम🙏🌷
माताहरिहर
🙏🌸🍃🐎🐒🍅🦜
संगीत आध्यात्मिक गुरु
अजेय त्रिवेदी

15/01/2024

हमारे सौरमंडल के ऊर्जा के केंद्र सूर्य भगवान के कारण ही... हमारे जीवन को शक्ति और गति मिलती है ... 💥🙏 हमारे जीवन में जितने भी रंग हैं.. वनस्पति अन्न इत्यादि ... सभी सूर्य भगवान की कृपा से ही प्राप्त होते हैं!!! 🙏सूर्य भगवान के ना होने पर हमारा जीवन पूर्णतया अंधकार में परिवर्तित हो जाएगा!!! त्राहि त्राहि मच जाएगी !!!! जीवन असंभव हो जाएगा!!!! हम कभी इस तरह विचार नहीं करते!!! अत्यधिक विशेष यह है कि... हम उन्हें प्रणाम करें या ना करें!!!! वह हमें सतत् देते हैं...🤔 वह हमें माता-पिता के सामान देते हैं!!!🙏💖 वस्तुतः वही हमारे माता-पिता है.. ध्यान देने योग्य यह है कि...नदियों को ..वृक्षों को... पहाड़ों को... पंचतत्वों को हम प्रणाम करें या ना करें !!! वह हमें देते हैं...
हमसे कभी कीमत नहीं मांगते!!! सनातन धर्म की इस परंपरा को ही कृतज्ञता कहते हैं.. हमें प्रकृति और पदार्थों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए!!! अर्थात उन्हें धन्यवाद देना चाहिए!!!क्योंकि हमारा शरीर भी उन्हीं पंचतत्वों से बना है...🙏 यह अलग बात है कि... हम कृतज्ञ हो या ना हो !!! अर्थात हम उन्हें धन्यवाद देते हो या ना देते हों!!! वह हमें देते ही रहते हैं... यही सामान्य मनुष्य और प्रकृति और पदार्थों के बीच का भेद है...
मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर कृतज्ञतापूर्वक सूर्य भगवान को हम प्रणाम करते हैं... सूर्य भगवान आपके और सभी के जीवन में रचनात्मक ऊर्जा को भर दें ...विश्व का कल्याण करें... यही मकर संक्रांति में कामना की जा सकती है!!! मकर संक्रांति का वैज्ञानिक पक्ष भी है... एक सौर वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं ...सूर्य भगवान जब अपने पुत्र के घर ..अर्थात मकर राशि में प्रवेश करते हैं.... वहां सूर्य भगवान अति ऊर्जावान हो जाते हैं... यही मकर संक्रांति की महाऊर्जा का महारहस्य है...
अनेकानेक शुभकामनाएं....
💖🌷🍃☘️🌹
संगीत आध्यात्मिक गुरु
अजेय त्रिवेदी

17/09/2023
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