Ramnarain Ruia Autonomous College Hindi Department

Ramnarain Ruia Autonomous College Hindi Department The seed of the Hindi Department of Ramnarain Ruia Autonomous College was sown in the year 1937. level under University of Mumbai.

Hindi Department of Ruia College was the first to get the permission to have Hindi as a special subject at B.A.

विदेश में हिंदी का प्रभाव
17/09/2026

विदेश में हिंदी का प्रभाव

राजभाषा विभाग
14/09/2026

राजभाषा विभाग

नवभारत दैनिक पत्र व यशोभूमि दैनिक पत्र के सम्पादक महोदय व उनकी समस्त टीम को बहुत बहुत धन्यवाद।
14/09/2026

नवभारत दैनिक पत्र व यशोभूमि दैनिक पत्र के सम्पादक महोदय व उनकी समस्त टीम को बहुत बहुत धन्यवाद।

रुइया कॉलेज में हिन्दी दिवस सम्पन्न 12 सितंबर 2026 को रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय व रामनिवास रुइया कनिष्ठ महावि...
13/09/2026

रुइया कॉलेज में हिन्दी दिवस सम्पन्न

12 सितंबर 2026 को रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय व रामनिवास रुइया कनिष्ठ महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 'हिंदी दिवस' का आयोजन हिंदी दिवस के दो दिन पूर्व संपन्न हुआ क्योंकि 14 सितंबर से गणेशोत्सव का अवकाश प्रारंभ हो रहा था। इस वर्ष हिंदी दिवस एक अनोखे अंदाज में मनाया गया। हिन्दी ने न केवल भारतीय भाषाओं व बोलियों के शब्दों को अपनाया है बल्कि हिंदी विश्व के अनेक भाषाओं के शब्दों का संगम स्थल भी है।

इस वर्ष हिंदी विभाग ने भारत के अनेक राज्यों के लोक गीत, लोक संगीत व लोक नृत्यों की प्रस्तुति के साथ हिन्दी दिवस को एक नई स्फूर्ति के साथ मनाया जिसमें लगभग 50 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनके अंतर्गत तमिलनाडु का भरतनाट्यम - श्रावणी नाइक, केरल का ओणम ज्योतिका पुतुवल, ओडिशा की रथयात्रा में सभी प्रतिभागी शामिल, आंध्र प्रदेश का कुचिपुड़ी - साक्षी पुलि, महाराष्ट्र का पोवाड़ा - श्रावणी राजेश जागरे, सुधांशु, सुहानी, आशुतोष, तथागत, सुयश, तारक, रुद्राक्ष, उत्तर प्रदेश की रास लीला, अन्वेषा समीर म्हस्कर, प्रियंका संजय चिली, साक्षी वीरेश अहीर, पायल प्रवीण घुमे, रुद्राक्ष रूपेश पलव, निहारिका नितिन कवि, रिद्धि संतोष म्हस्के, नुपुर अप्पा चव्हाण, अवनि सुभाष धौस्कर, तृप्ति अनंत कांबले 'असम का बिहू - सौंदर्या यादव, स्वानंदी धनावड़े, लावण्या कांबले, 'राजस्थान का घूमर'- अन्वेषा समीर म्हस्कर, प्रियंका संजय चिले, गौरी प्रसाद भाटकर, ग्लोरिया जोसेफ सर्गर, निहारिका नितिन कवि, 'गुजरात का गरबा'- नूपुर अप्पा चव्हाण, पायल प्रवीण घुमे, सौंदर्या नाना यादव, तृप्ति अनंत कांबले, वेदांती देवेन्द्र, अवनि सुभाष धौस्कर, 'उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश' का पहाड़ी नृत्य - सयाली हम्बरे, भूमि हम्बरे, जिया फारूकी, अनुष्का गायकवाड़, गौरी भटकर, ग्लोरिया सुरगर, 'कश्मीर की ग़ज़ल' - ऋषिकेश गायकर, युवराज मोरे, सुयश पाध्ये ने किया । इसके साथ ही कनिष्ठ महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित प्रांतीय रंग में रंगा अपने ढंग का फैशन शो (सई, खुशी, सिद्धांत, विहा, कृपा, झेनोवियन, वेदांत, शौर्य, रिद्धी, जीविका, अमन, अंजली, चारुदत्त और मल्हार) भी इसमें शामिल था।

प्रत्येक प्रस्तुति का संचालन अलग-अलग विद्यार्थियों (मल्हार,मृणाल, शीतल, विश्वनाथ परब, ऐश्वर्या, सुनीता एकनाथ तालेकर, आमना मुनाफ मुकद्दम, ध्रुवी रवींद्र देसले, मनुश्री यतिन मोरे, धारा हितेश कुमार डागलिया, भक्ति धोंडीराम नागरकर ) से करवाने का प्रयास सफल रहा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को हिंदी भाषा से जोड़ना व उनके नेतृत्व क्षमता को निखारना था।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर, सरस्वती वंदना (अनिमेश पुजारे व लीशा मुल्की की मधुर ध्वनि में) के साथ की गई। हिंदी विभाग के अध्यक्ष, ‌डॉ. प्रवीण चंद्र बिष्ट ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला व वरिष्ठ अध्यापिका श्रीमती शारदा कहार व प्राध्यापिका रोहणी अंकलगी ने आभार व्यक्त किया। डॉ पांडुरंग महालिंगे, प्राध्यापक प्रतीक पवार कनिष्ठ महाविद्यालय की उप प्राचार्या डॉ. संगीता कामत, श्रीमती पूनम सिंह, बागेश्री कोल्हटकर, गौरी बेलगांवकर, कविता सोनावणे, आशा मौर्या, कविता जाधव, संजीवनी राठोड, रिया मॅडम सुनील और नितांशु सर जी कार्यक्रम में प्रारंभ से अंत तक जुड़े रहे।

इस पावन अवसर पर महाविद्यालय के सभागार में 250 विद्यार्थी उपस्थित रहे जो कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है। कार्यक्रम का समापन 'वंदे मातरम्' के साथ किया गया।

*कार्यक्रम आयोजन टीम* - रोहिणी अंकलगी, राज डोइफोडे, राजदीप जाधव
*कार्यकर्ता*- अलमीरा, शिफा, सुहानी

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की १४६ जयंती संपन्न । एस. पी. मंडळी द्वारा संचालित रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय व रामन...
03/08/2026

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की १४६ जयंती संपन्न ।


एस. पी. मंडळी द्वारा संचालित रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय व रामनिवास रुइया कनिष्ठ महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित
कार्यक्रम की शुरुआत सिद्धांत मिश्रा ने गणेश वंदना से की। ध्रुवि रावत ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। अंजली सिंह ने मुंशी प्रेमचंद का परिचय दिया और डॉ. प्रवीण चंद्र बिष्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया।
वरिष्ठ अध्यापिका श्रीमती शारदा कहार ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्राध्यापिका रोहिणी अंकलगी, श्रीमती पूनम सिंह, साक्षी ठीक, बागेश्री कोल्हटकर, पुष्पांजली सरकार और माही पिंपळे भी उपस्थित रहीं।
तन्मय कदम, सिद्धांत मिश्रा, सेजल धर्मप्रकाश मिश्रा,ध्रुवि रावत ने क्रमशः
'सवा सेर गेहूँ', 'बूढ़ी आँखें', 'मंत्र', 'गुल्ली डंडा' आदि कहानियाँ प्रस्तुत की ।

विद्यार्थियों द्वारा प्रेमचंद की दो कहानियों का नाट्य मंचन भी किया गया जिसमें 'नमक का दरोगा' व कफ़न शामिल थे।
'नमक का दरोगा' कहानी का मंचन मान्या मोदी, दिया मोरे, ऋषिका सिंह, देवांश सोनी, अद्विका पिल्लई, दिव्या पाण्डेय, स्वरा देशपांडे, वेदांत प्रभाले, भार्गव नक्टी, धर्मराज और चित्रा शिंदे ने किया और
'कफ़न' कहानी का मंचन देवा जोशी, वीहा तिवारी, अनिमेश पुजारे, लीशा मुल्की, शौर्य आदित्य, शिवानी जैस्वाल, अनुष्का, ध्रुव और सई ने किया।

30, 31 जुलाई तथा 1 अगस्त तक महाविद्यालय के पुस्तकालय में मुंशी प्रेमचंद के पुस्तकों की प्रदर्शनी रखी गई थी; जिसका लाभ लगभग 200 विद्यार्थियों ने उठाया।

कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय माटुंगा मुम्बई के पुस्तकालय में तीन दिन त...
31/07/2026

कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय माटुंगा मुम्बई के पुस्तकालय में तीन दिन तक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। 1 अगस्त 2026 को उनके कहानियों का नाट्य मंचन व पाठ किया जाएगा।

देवेश ठाकुर की स्मृति में अंतर्महाविद्यालयीन आशुभाषण प्रतियोगिता सम्पन्न 25 जुलाई 2026 को रामनारायण रुइया स्वायत्त महावि...
27/07/2026

देवेश ठाकुर की स्मृति में अंतर्महाविद्यालयीन आशुभाषण प्रतियोगिता सम्पन्न

25 जुलाई 2026 को रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा देवेश ठाकुर की स्मृति में प्रथम अंतर्महाविद्यालयीन आशुभाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह सिलसिला अगले वर्षों में भी इसी तरह चलता रहेगा। प्रतियोगिता में समसामयिक विषयों को शामिल किया गया था जिसमें मुम्बई महानगर व उसके आस-पास के 38 महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

इस प्रतियोगिता में जुनियर कॉलेज से रामनिरंजन झुनझुनवाला स्वायत्त महाविद्यालय के विनायक धर्मप्रकाश मिश्रा को प्रथम, नरसी मोंजी कॉलेज की प्राची चौरसिया को द्वितीय, रॉयल कॉलेज की सुहानी बैनर्जी को तृतीय तथा रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय के सिद्धांत राजेशकुमार मिश्रा को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ।
डिग्री कॉलेज से रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय के सेजल धर्मप्रकाश मिश्रा को प्रथम, भवंश कॉलेज के पवनजीत गुप्ता को द्वितीय, विद्यावर्धिनी अण्णासाहेब वर्तक कॉलेज,वसई के आशुतोष विक्रम शुक्ला को तृतीय तथा रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय के पीहू सोनार को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ। जुनियर व सीनियर कॉलेज के प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार विजेताओं को क्रमश: 6,000/-, 4,000/- व 3,000 रुपए पुरस्कार स्वरूप प्रदान किए गए अर्थात कुल 26,000/- रुपए पुरस्कार के रूप में दिए गए। अंतर्महाविद्यालय आशुभाषण चल विजय - चिह्न (Rotating Trophy) रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय को प्राप्त हुई।

इस प्रतियोगिता का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर सरस्वती वन्दना के साथ किया गया तत्पश्चात हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रवीण चंद्र बिष्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और प्रतियोगिता के नियम बताए। प्रा. रोहिणी अंकलगी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया तथा वरिष्ठ अध्यापिका श्रीमती शारदा कहार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

निर्णायक की भूमिका का निर्वहन समीचीन शोध-पत्रिका के संपादक व वरिष्ठ आलोचक डॉ सतीश पांडेय और कवि व गीतकार श्री रासबिहारी पांडेय ने किया।

प्रतियोगिता के आयोजक डॉ. आभा नागराल व डॉ. आरती प्रसाद के साथ-साथ डॉ. संजय नागराल, निष्ठा नागराल, डॉ. देवेश ठाकुर जी के छोटे भाई श्री शैलेश ठाकुर,‌ उप-प्राचार्या डॉ संगीता कामत, अध्यापिका पूनम सिंह, डॉ मनोज कुमार दुबे और डॉ ज्योत्सना राम उपस्थित थे।

मैं नवभारत, दैनिक भास्कर, जागरूक टाइम्स, भारत संवाद न्यूज नेटवर्क, पहला समाचार के संपादकों व सहयोगियों का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने अपने दैनिक पत्र में इस कार्यक्रम की रूपरेखा को स्थान देकर हमारा व प्रतिभागियों के मनोबल को सुदृढ़ किया।

'समीचीन पत्रिका' के संस्थापक स्वर्गीय डॉ देवेश ठाकुर जी की स्मृति में: हिंदी के वरिष्ठ कथाकार व समीक्षक डॉ देवेश ठाकुर अ...
23/07/2026

'समीचीन पत्रिका' के संस्थापक स्वर्गीय डॉ देवेश ठाकुर जी की स्मृति में:

हिंदी के वरिष्ठ कथाकार व समीक्षक डॉ देवेश ठाकुर अपनी सजग एवं सकारात्मक प्रतिबद्धता के लिए विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। ये एक ऐसे रचनाकार थे जिन्होंने रचनात्मक साहित्य, शोध और समीक्षा में समान रूप से निरंतर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ये प्रगतिशील चिंतक और प्रयोगधर्मी कथाकार रहे। देवेश ठाकुर साहित्य जगत का एक ऐसा नाम है जो अपनी कथनी और करनी में एकरूपता के लिए सदैव चर्चित रहा है। इसका प्रमाण एक उद्धरण से समझा जा सकता है। जब मैं पी-एच.डी. कर रहा था उस वक्त मेरी पूर्व निर्देशिका डॉ राजम नटराजम जी ने मेरे शोध के सिलसिले में मुझे उनके पास भेजा, साथ ही यह हिदायद भी दी कि -"जब भी उनसे मिलो बड़ी ही शालीनता के साथ मिलना। मुंबई में हम साहित्य से जुड़े लोग उन्हें 'शंकर भगवान' कहते हैं। क्योंकि जब तक आप उनके साथ शालीनता से पेश आओगे तब तक वे आपके लिए समर्पित रहेंगे। जहाँ आपने चलाकी दिखाने की कोशिश की तो वे आपको अपने पास एक पल के लिए भी खड़ा नहीं करेंगे।" अर्थात उनसे वही व्यक्ति जुड़ सकता था जो पढ़ने लिखने से संबद्ध हो, अवसरवादिता से दूर-दूर तक जिसका नाता न हो, जो छली व कपटी न हो और दूसरों की निंदा न करता हो।

डॉ.देवेश ठाकुर का हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में एक विशिष्ट योगदान रहा है। उन्होंने 3 काव्य संग्रह, 23 उपन्यास, 02 कहानी संग्रह, बाल साहित्य के तहत एक उपन्यास और एक कहानी संग्रह, जीवनी, आत्मकथा, समालोचना, पत्रकारिता आदि विविध साहित्य विधाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को लगभग 80 रचनाओं से समृद्धि किया। उन्हें समय-समय पर विविध पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाता रहा ।
कुछ लोग देवेश जी के बारे में कहते हैं कि वे मुंहफट थे। वास्तव में वे बेलौस थे। वे मधुलेपित भाषा नहीं बोलते थे। वे बहुत फक्कड़, बहुत सहज, सीधी चोट करने वाले लेकिन उतनी ही मात्रा में स्नेहल, संवेदनशील, सहायक और आत्मीय भी थे।
जीवन के अंतिम समय तक डॉ देवेश ठाकुर एक विशिष्ट ऊर्जा के साथ लेखन करते रहे। वे हम सभी के प्रेरणा स्रोत थे और बने रहेंगे। ऐसी जीवटता के साथ जीने वाले देवेश ठाकुर जी पर हमें हमेशा गर्व रहेगा।

जन्म 23 जुलाई 1933
मृत्यु 10 जून 2024

सैंट्रल बैंक द्वारा विद्यार्थियों के लिए आठ सप्ताह का इंटर्नशिप कोर्स तैयार हो चुका है जो विविध संस्थाओं में राजभाषा अधि...
08/05/2026

सैंट्रल बैंक द्वारा विद्यार्थियों के लिए आठ सप्ताह का इंटर्नशिप कोर्स तैयार हो चुका है जो विविध संस्थाओं में राजभाषा अधिकारी और ट्रांसलेटर बनने के लिए बहुत उपयोगी है।

हिंदी विभाग के चार बच्चों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में इंटर्नशिप करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह इंटर्नशिप कुछ आठ सप्ता...
30/04/2026

हिंदी विभाग के चार बच्चों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में इंटर्नशिप करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह इंटर्नशिप कुछ आठ सप्ताह की रहेगी। प्रत्येक सप्ताह में विद्यार्थियों को 1000/रुपए की राशि भी प्राप्त होगी। इन विद्यार्थियों को हिंदी विभाग व महाविद्यालय की ओर से ढेर सारी बधाई।

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