22/03/2022
STEM के माध्यम से वैज्ञानिक वातावरण तैयार करने की जरूरत
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट 2019-20 के अनुसार, भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) स्नातकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से अधिक है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। हालांकि, उनमें से केवल 14 प्रतिशत ही विश्वविद्यालयों और संस्थानों में वैज्ञानिक अनुसंधान करती हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण, विज्ञान में महिलाओं को दशकों तक प्रोत्साहित नहीं किया गया। वर्तमान में उच्च पदों पर महिलाएं विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों से हैं या वे दूसरी पीढ़ी की वैज्ञानिक हैं। जैसे अन्ना मणि, अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम, रमन परिमाला, रत्नश्री, रोहिणी गोडबोले, डॉ वी शांता, सौम्या स्वामीनाथन, सुजाता रामदोराय व अन्य सहित कई भारतीय महिलाओं ने विज्ञान में सफलता प्राप्त की है।
हाल ही में एड-टेक कंपनी अविष्कार द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, लड़कियों सहित 95 प्रतिशत बच्चे STEM क्षेत्र में पुरुष को ही अपना रोल मॉडल मानते है। कई बार शिक्षक, माता-पिता और स्वयं लड़कियों में STEM क्षेत्र में जेंडर संबंधी धारणाएं विज्ञान के प्रति उनकी प्रारंभिक रुचि को कम कर देती है। कम से कम 30% माता-पिता को लगता है कि इन क्षेत्रों में काम करने का माहौल महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए अधिक उपयुक्त है। आज भले ही उच्च शिक्षा में विज्ञान पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन बहुत कम महिलायें ही विज्ञान को करियर के रूप में चुनती हैं। क्योंकि स्कूल-टू-वर्क ट्रांज़िशन में एक ऐसा दौर आता है, जहां महिलाएं व्यवहारिक रूप से STEM को करियर बनाने में सक्षम नहीं होती हैं और जो ऐसा करती हैं, उनके लिए अपने करियर को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
करियर की चुनौतियां आने से पहले, भारत में युवा लड़कियों को कई वास्तविक जीवन की बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो स्कूल के दौरान ही उन्हें STEM से दूर कर देता है। इसके लिए उनकी सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक स्थितियां जिम्मेदार होती है। शहरी क्षेत्रों में लड़कियों के पास अधिक जानकारी और पहुंच होती है, लेकिन भारत की 65% से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
नेशनल साइंस फाउंडेशन के अनुसार, भविष्य में काम का सोर्स टेक्नोलॉजी है और आने वाले समय में लगभग 80% नौकरियों के लिए STEM स्किल की आवश्यकता होगी। हर साल देश की कामकाजी आबादी में लगभग 12 मिलियन लोग जुड़ रहे हैं। ऐसे में STEM में लड़कियों को पूर्ण और समान भागीदारी देने के साथ-साथ लैंगिक समानता और महिलाओं का सशक्तिकरण भारत की अर्थव्यवस्था और सार्थक विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए बहुत आवश्यक है। क्योंकि महिलाओं का रचनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विज्ञान को समृद्ध, व्यापक और अधिक सटीक बनाता है।
STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार आने वाली दुविधाओं पर रिसर्च और उसका समाधान खोजने का लगातार प्रयास कर रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग महिला वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जैसे- GATI (Gender Advancement for Transforming Institutions) और महिला वैज्ञानिक योजना और CURIE कार्यक्रम (Consolidation of University Research for Innovation and Excellence in Women Universities) इत्यादि। जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी महिला वैज्ञानिकों के लिए कई अवसर प्रदान करता है।
हमें लड़कियों के लिए STEM जैसी पहल के माध्यम से एक ऐसा वातावरण तैयार करने की जरूरत है जहाँ उन्हें तकनिकी तौर पर सक्षम बनाने के साथ STEM चुनने के लिए प्रेरित किया जा सके। हमें लड़कियों की क्षमता को पहचान कर उन्हें यह महसूस कराने की जरूरत है कि वे STEM में भी करियर बना सकती हैं। साथ ही हमारे पास उन्हें विज्ञान में बनाए रखने का एक अवसर होना चाहिए। अगर वे अच्छा काम कर रही हैं, तो उन्हें उचित पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करना चाहिए। इस तरह के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हम पहचान सकते हैं कि लड़कियां किसी भी तरह से पुरुषों से कम नहीं हैं। इसके लिए हमें सबसे पहले स्कूल स्तर पर काम करने की जरूरत है ताकि उन्हें STEM के प्रति रुचि और उत्साह जागृत करके उसे आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सके।
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