11/05/2024
खुशी तो आज भी गांवो के खेतो मे मिलती है
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11/05/2024
खुशी तो आज भी गांवो के खेतो मे मिलती है
15/03/2024
ॐ शांतिः
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10/08/2023
भूख का कोई मजहब नहीं होता
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मन्दिर से पहले मस्जिद थी
मस्जिद से पहले मन्दिर था
उस मन्दिर से पहले क्या था
एक खेत था शायद
धान का होगा या गेहूँ का
सबकी भूख से रिश्ता था
भूख का कोई मज़हब नहीं है
वो खेत कब का ज़ब्त हुआ
उस खेत के लिए कौन लड़ेगा ?
खेत से भी पहले क्या था
अल्लाह राम के नाम से पहले
क़ाबा काशी धाम से पहले
राम-राम सलाम से पहले
शायद घना एक जंगल था
जँगल में सब मंगल था
आदम अभी आदमी नहीं था
उसे आग लगानी नहीं आती थी
आग का कोई मज़हब नहीं है
वो जँगल जल कर राख़ हुआ
उस जँगल के लिए कौन लड़ेगा ?
जंगल से भी पहले क्या था
साँ साँ करता कहकशाँ था
हरसूँ सिर्फ़ धुआँ धुआँ था
तूँ कहाँ था, मैं कहाँ था
ना कोई हिन्दू ना मुसलमाँ था
ना किसी का नामो निशाँ था
बेनामोनिशाँ का कोई मज़हब नहीं था
वो कहकशाँ अब दैरो-हरम हुआ
कहकशाँ के लिए कौन लड़ेगा