Abvp Mukteshwar

Abvp Mukteshwar Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad is an all India student Organization, working in the field of education with a wider perspective of National Reconstruct

अगर बाबा केदार की धरती पर पहुंच कर तुम्हारा मन से आंसुओं की धारा ना बहे शरीर में एक कंपन ना हो वाइब्रेशन न हो तो समझो कि...
18/05/2022

अगर बाबा केदार की धरती पर पहुंच कर तुम्हारा मन से आंसुओं की धारा ना बहे शरीर में एक कंपन ना हो वाइब्रेशन न हो तो समझो कि तुम केदारनाथ सिर्फ मस्ती करने और घूमने आए हो एक और आपदा का बुलावा दे रहे हो
एक भाईसाहब केदारनाथ परिसर में अपना पालतू कुत्ता लेकर न केवल पहुंच गए बल्कि नंदी की पूजा भी कुत्ते को गोद मे लेकर करते दिखे भाईसाहब का मकसद भक्ति भाव का नही बल्कि केवल रील बनाकर वायरल करने का था
गंगा किनारे दारू पियेंगे मंदिर परिसरों में कुत्ते लेकर जायेंगें और यह सब इसलिए क्योंकि परिवारों में बालकों को न कोई संस्कार दिए जा रहे हैं न पूजा स्थल का महत्त्व समझाया जा रहा है न शुचितापूर्ण व्यवहार की महत्ता बताई जा रही है..

हम हिन्दू ही अपने आराध्य शिव के ज्योतिर्लिंग पर कुत्ते लेकर जायेंगें तो दूसरो को शिवलिंग पर वजू करने को कैसे गलत कहेंगें अधिकांशतः युवा पीढ़ी में श्रद्धाभाव न के बराबर है वह लोग चार धाम की यात्रा को केवल adventure fun trip और photo opportunity की तरह लेते हैं
अपने धर्म की दुर्गति के हम हिन्दू ही जिम्मेदार हैं..

कृपया लोगो क़ो अपनी मनमानी करने से रोके, रोके उन्हे वंहा कोई भी गलत कार्य करने, मान मर्यादा का ख्याल ना रखने क़े लिए..

तीर्थ और ट्रिप मैं अंतर है दोस्तों...

बाबा केदार के वाइरल वीडियोस देखें होंगे सभी ने भीड़ बहुत है पर किसी ने भी वहां की जानकारी आपको दी ? ऐसी कोई पोस्ट नही देख...
09/05/2022

बाबा केदार के वाइरल वीडियोस देखें होंगे सभी ने
भीड़ बहुत है पर किसी ने भी वहां की जानकारी आपको दी ? ऐसी कोई पोस्ट नही देखी मैंने, आइए आपको सकारात्मक तरीके से कुछ जानकारी देता हूँ अगर एक पोस्ट में नही हो पाए तो ज्यादा करूँगा। इस पोस्ट में केवल इस बार के नियम, हालांकि इस बार कुछ नियम बदल गए हैं इनकी वजह है प्रशाशन का भीड़ नियंत्रण का प्रयास

1- ऑनलाइन पंजीकरण जरूर घर पर ही कर लें। पहले यात्रा का होगा फिर यात्रियों का अलग अलग होगा। ऑफलाइन भी है पर वहां आपका अनावश्यक समय लगेगा।
पंजीकरण लिंक - https://badrinath-kedarnath.gov.in/Auth/LoginRegister/Pilgrim_Registration.aspx

2- गाड़ी प्राइवेट सोनप्रयाग पार्किंग में खड़ी होगी , जगह की दिक्कत नही , टूरिस्ट बस या टेम्पो सीतापुर पार्किंग में ही होंगी।

3-आपको सोनप्रयाग से गौरीकुंड 5 किमी जाने के लिए जीप लेनी है वहां भी लाइन है दिन रात 150 गाड़ी चल रही हैं एक गाड़ी में 10 लोगो को जाना होता है 50 रुपये किराया है। लाइन लंबी हो तो सही हेल्थ वाले पैदल भी जा सकते हैं।

4-गौरीकुंड में भीड़ ज्यादा होने पर कभी भी यात्रा कुछ देर को रोक सकते हैं, आपके पास बुकिंग होनी चाहिए ऊपर मंदिर की तो जा सकते हैं। सामान्य रूप से 2 से 3 बजे तक चलता रहता है भीड़ बढ़ने पर 11 बजे तक भी बन्द हुआ है। इसलिए सवेरे निकलें

5- घोड़ा वालो का सबका कार्ड बना है, GPS चिप सब पर लगी है। प्रीपेड काउंटर है जिस पर 2400 गौरीकुंड से बेस चार्ज है वापसी 1500 रुपये है। जिसे लगता हो चढ़ाई करने में 18 किमी दिक्कत हो सकती है उसे पहले ही लेने में फायदा है। गौरीकुंड पर घोड़े सुबह 3 बजे से दिन के 2 बजे तक ही मिलते हैं।

6- मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है शाम 7 से 8 बजे तक बन्द हो जाता है । लोग रात के 12 बजे से लाइन में लग जाते हैं। 2 किलोमीटर लाइन आम बात है।

7- ठंड बहुत है गर्म जैकेट और दस्ताने जरूरी हैं । शाम को हाथ सुन्न हो जाते हैं ।

8- मंदिर। बेस कैम्प। सब जगह रुकने के लिए टेंट उपलब्ध हैं। धर्मशालाओ और टेंट में रुकने के लिए सबसे सस्ता साधन डोरमेट्री है। प्रति व्यक्ति के हिसाब से टेंट में 500 से 600 और धर्मशाला में 800 से 1200 रुपये है।

9- बारिश के लिए रेनकोट जरूर रखें। यहां रोज बारिश हुई ही है भले 30 मिनट हो।

10- पीने के पानी और खाने की दिक्कत रास्ते भर कहीं नही है मानो मेला लगा है।

11- उतरते समय भी गौरीकुंड से पार्किंग तक जाने के लिए गाड़ी लाइन में लगना पड़ेगा और जिनकी गाड़ी सीतापुर में है वहां तक भी जाम की वजह से पैदल चलना पड़ सकता है।

12- आपको दो बुकिंग होटल की हर हाल में चाहिए। एक मंदिर पर रुकने की और दूसरी सीतापुर /फाटा /गौरीकुंड के पास की। उसके बिना बिल्कुल न जाएं।

13- बुजुर्गों, महिलाए छोटे बच्चे के साथ जाने वालों को सलाह है अभी रुकिए कुछ दिन ।

22/03/2022

हर रोज नेताओं के साथ फोटो खिंचाने पर, मंत्रणा, विमर्श, शिष्टाचार, गहन मुद्दों पर चर्चा जैसे विशेषणों से ओतप्रोत लोगो, क्या कभी पहाड़ के सांसदों, विधायकों, और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से पूछ पाओगे कि पहाड़ की जवानी नोएडा की सड़कों पर क्यों दौड़ रही है? क्यों 15 घण्टे उसे काम करना पड़ रहा है?

घर का पेट पालने की चिंता में बचपन- जवानी को छोड़कर 15 घंटे काम करने के बाद सड़कों पर दौड़ने को मजबूर प्रदीप सिर्फ एक नाम या संख्या नहीं है- वह समूह और बहुवचन है। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मेरठ, लुधियाना, आगरा, देहरादून, मुम्बई, आदि शहरों की सड़कों पर आपको हजारों प्रदीप मिल जाएंगे। कभी सोचा इतने प्रदीप क्यों दौड़ रहे होंगे?

सवाल प्रदीप की मेहनत और सपनों का नहीं है बल्कि ऐसी परिस्थितियां को जन्म देने वाली व्यवस्था का है जिसने उसे मजबूर किया। सवाल गर्व का नहीं शर्म का है।

क्या गांधी की निंदा "अभिव्यक्ति की आजादी" वाले देश में "ईश निंदा" तुल्य है??..कौन है गांधी ??.भगवान है ?? अवतार है?? नबी...
30/12/2021

क्या गांधी की निंदा "अभिव्यक्ति की आजादी" वाले देश में "ईश निंदा" तुल्य है??..
कौन है गांधी ??.

भगवान है ?? अवतार है?? नबी है?? जीसस है??..
जब इस देश में प्रभु राम के माता सीता त्याग पर चर्चा हो सकती हैं ??
भगवान कृष्ण पर टिका टिप्पणी हो सकती है ??
संविधान पर चर्चा हो सकती हैं ??
तो फिर गांधी पर क्यों नही ??
क्या गांधी राम,कृष्ण,देश,संविधान से बड़े हैं ??.
जब इस देश मे "देश तेरे टुकड़े कर देंगे" कहने की आजादी हैं..
जब इस देश मे "देश के हत्यारे जिन्ना" की फोटो यूनिवर्सिटी में लगाने की आजादी हैं..
जब इस देश मे "रावण" की भी पूजा करने की आजादी है..
जब इस देश मे लाखो हिंदुओ के हत्यारे औरंगजेब, गजनवी, गौरी, तैमूर के समर्थन की आजादी हैं..
तो फिर गोडसे समर्थन की आजादी क्यों नही ??..
क्या कांग्रेस एक लोकतांत्रिक देश को "ईश निंदा" जैसी कबिलाई सँस्कृति की और ले जाने पर अग्रसर हैं ??..
क्या गांधी को "सहिष्णुता की मिसाल" उपाधि से नवाजने वाली कांग्रेस, गांधी की आलोचना पर "असहिष्णु" बनने पर अग्रसर हैं ??..

जवाब दे कांग्रेस ??..
क्योंकि लोकतंत्र में किसी की भी तानाशाही मंजूर नही, फिर चाहे वो "गांधी" के नाम पर ही क्यों न हो

17/12/2021

जब रेप टाला नहीं जा सकता तो उसे लेटकर एन्जॉय करना चाहिए : रमेश कुमार, कांग्रेस विधायक
:
जिस दिन इसके घर की महिला या बेटी का दुर्भाग्यपूर्ण रेप होगा तब इसे समझ मे आएगा कि वाकई में रेप किसका होता है,

विक्टिम का या पूरे घरवालों का !!

09/12/2021

चिरकाल से इस देश का यही दुर्भाग्य रहा है लेकिन अब तो ये सिद्ध होता जा रहा कि नही है उनका खून इस मिट्टी में, ये हराम का खून है।

क्यों कि.....

जब उरी हुआ.... तो तुम हँस रहे थे!
जब पुलवामा हुआ.... तो तुम हँस रहे थे!
रोहित सरदाना की मृत्यु हुई...तो तुम हंस रहे थे!
जब मनोहर पर्रिकर जी की मृत्यु हुई....तो तुम हँस रहे थे!
जब सुषमा स्वराज जी की मृत्यु हुई.... तो तुम हँस रहे थे!
जब भारत पाकिस्तान से हार गया......तो तुम हँस रहे थे!
अब जब राष्ट्र के CDS बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ, तो भी तुम हँस ही रहे।

खैर जनरल विपिन रावत की असमय मृत्यु से चीनी, पाकिस्तानियों का खुश होना लाजमी है लेकिन भारत की मजहबी कौम, उनके समर्थक राजनीतिक दल, जिहादी, अर्बन नक्सली, पत्रकार, कुछ संपादक, कुछ न्यूज चैनल और उसके एंकर खुशी मनाएं, उन माधरजातों को इस मिट्टी का कैसे माना जाय ??

आज देश के एक वीर सिपाही के निधन पर गलत, दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी करने वाले माधरजात हरामी हैं दोगले हैं और अपनी नस्ल बदल चुके हैं, यह कहने में मुझे जरा सा भी संकोच नहीं है।

जनरल हमेशा आंतरिक सुरक्षा के इन खतरों से हमें आगाह करते रहे कि ऐसे पापियों को हमें पहचानना होगा। आज देख लिया कि इस देश को बाहरी शत्रुओं से ज्यादा आंतरिक शत्रुओं से समस्या है। दिख रहा कि एक बहुत विशाल शत्रु सेना देश के अन्दर ही है, जो खा भी देश का रहे हैं और गरिया भी देश को ही रहा है।

जनरल विपिन रावत उन बड़े नामों में से थे जिन्होंने सबसे पहले ढाई मोर्चे कहना शुरू किया था। दो मोर्चे कौन से देश हैं, वो हम सब जानते हैं, बाकी का आधा कौन है, उसे स्वीकारने में कुछ लोग हिचक जाते हैं। आज के उनके कुकृत्यों के बाद अगर उस "ढाई मोर्चे" के बचे हुए "आधे" को पहचानना शुरू नहीं किया गया तो मूर्ख ही है वो।

खैर जनरल की असमय मृत्यु से उपजे दुख ने इस स्तर पर जैसा गहरा अवसाद पैदा किया है वह देखकर लग रहा है कि भारत का गंभीर हिन्दू जनमानस अब एक एकीकृत राष्ट्र की तरह देश को देखने लगा है, तभी देश को लेकर इतना संवेदनशील हो गया है। दुःख की ऐसी घड़ी में सम्पूर्ण राष्ट्र एक परिवार की तरह प्रतिक्रिया दे रहा है। इस नए समाज की एकजुटता और संवेदनाओं को नमन। किसी सैनिक के जाने पर व्यक्तिगत क्षति की तरह लोगों का प्रतिक्रिया देना देश के प्रति उनके कर्तव्यों व निष्ठा को प्रदर्शित कर रहा है। दिवंगत आत्माओं को नमन लेकिन बहुत सारा दुःख और ढेर सारे प्रश्न हैं जिनकी जाँच होनी ही चाहिए और बहुत सारे चिन्हित हरामियों पर कार्यवाई भी होनी चाहिए।

यह देश सिर्फ़ रोने के लिए और हर बार खून के घूंट पी जीने के लिये नहीं बना, उसे सवालों के जवाब भी चाहिए और देश के सम्मानित जनों के मृत्यु पर हंसने वालों पर कठोर एक्शन भी।

22/11/2021

त्रिपुरा में एक टीएमसी कार्यकर्ता को पकड़ा तो सभी टीएमसी सांसद एकजुट होकर प्रदर्शन करने लगे।
बंगाल में सैंकड़ो भाजपा कार्यकर्ता मार दिए एक भी बीजेपी सांसद ने उफ्फ तक नहीं की।

जनप्रतिनिधियों को समझना चाहिए वो संगठन के कार्यकर्ताओं से जनप्रतिनिधि बने हैं, खुद से नहीं...
ये बात तो BJP को समझना चाहिए, लखीमपुर मे मारे गए BJP कार्यकर्ताओ के यहाँ कितने BJP के नेता गए। बंगाल छोड़िये।

19/11/2021

अब से भी समझ लें...यह युद्ध हमें ही लड़ना है. सरकारें हमारी ओर से नहीं लड़ेंगी. सरकार अपनी होगी तो लड़ाई में कुछ आसानी होगी, बस!
इस युद्ध का अन्तिम पर्व, इस खेल का एन्ड-गेम सड़कों पर होगा. जो सड़कों और गलियों में वर्चस्व कायम रख सकेगा वह जीतेगा. सरकार अगर हमारी होगी तो वह मूक और असहाय दर्शक की भूमिका में होगी, उनकी होगी तो उनके साथ हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए खड़ी होगी.

अपनी गली में तैयारी कीजिये, अपने पड़ोसी से बात कीजिये. उसके साथ खड़े होइए, उसे अपने साथ खड़ा कीजिये. मोदी योगी को वोट दीजिये, पर वोट देकर घर में मत सो जाइये. पृथ्वी राज चौहान ने सत्रह लड़ाइयाँ जीती थीं, पर इस्लाम के खतरे को समाप्त नहीं किया. उन्होंने सिर्फ एक लड़ाई जीती और उसका नतीजा सिर्फ पृथ्वीराज ने नहीं भुगता, हम सब ने उसका मूल्य चुकाया. मोदी जी चाहे जितने चुनाव जीत लें, हमारे शत्रुओं को सिर्फ एक लड़ाई जीतनी है.

उस दिन की तैयारी कीजिये जिस दिन ये मोदी और योगी सत्ता में नहीं होंगे. पर तैयारी पूरी होने तक उन्हें सत्ता में बिठाए रखिये. मोदी को इस खेल का पिंच हिटर ना समझें, नाईट वॉचमैन भर समझें.

तकलीफ इस बात की नही है कि छठ पे छुट्टी दी है , तकलीफ इस बात की है कि इगाश की छुटी नही मिलती इस राज्य मे।
08/11/2021

तकलीफ इस बात की नही है कि छठ पे छुट्टी दी है , तकलीफ इस बात की है कि इगाश की छुटी नही मिलती इस राज्य मे।

हरेकला हजब्बा मेंगलोर  में सड़कों पर फल बेचते हैं एक दिन एक विदेशी टूरिस्ट उनसे फल खरीद रहा था लेकिन वह अंग्रेजी नहीं सम...
08/11/2021

हरेकला हजब्बा मेंगलोर में सड़कों पर फल बेचते हैं

एक दिन एक विदेशी टूरिस्ट उनसे फल खरीद रहा था लेकिन वह अंग्रेजी नहीं समझ पा रहे थे उन्हें अफसोस हुआ कि वह पढ़ाई नहीं कर पाए

फिर उन्हें लगा कि उनके गांव के दूसरे बच्चों को भी भविष्य में यह अफसोस ना हो

उसके बाद वह अपनी पाई पाई की कमाई से अपने गांव में एक स्कूल खोल दिए

आज उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया गया है

यकीन रखिए अब किसी सैफ अली खान किसी बरखा दत्त किसी शबनम हाशमी या किसी तीस्ता सीतलवाड़ किसी राजदीप सरदेसाई जैसे दलालों को पद्म सम्मान नहीं दिए जाते बल्कि जो सच में पद्म सम्मान का हकदार है इसे दिया जाता है

29/10/2021

सामाजिक सर्जिकल स्ट्राइक करो

"जिसकी दीवाली नही
उससे खरीदारी नही"

04/10/2021

उत्तराखंड एक मात्र ऐसा राज्य है जहां बिहारियों को छठ पूजा, पंजाबियों को लोहड़ी, मुस्लिमों को ईद की सरकारी छुट्टी मिलती है। पर यहां के लोकपर्व हरेला, घुघुती त्यार, घी त्यार, फुलदेई की कोई छुट्टी नही मिलती। हम अपने ही होमलैंड में दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह गए हैं।

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