25/05/2026
कर्ण की निष्ठा देखी।
द्रौपदी का संघर्ष देखा।
अब महाभारत के सबसे
जटिल और महान पात्र की कथा —
भीष्म।
जिनकी महानता ने
उन्हें महान बनाया —
लेकिन उसी महानता ने
उन्हें बंधन में भी डाल दिया।
हस्तिनापुर के राजकुमार
देवव्रत के पिता
शांतनु को
मत्स्यगंधी सत्यवती से
प्रेम हो गया।
लेकिन सत्यवती के पिता
ने एक शर्त रखी —
"मेरी पुत्री का पुत्र ही
हस्तिनापुर का राजा बनेगा।"
देवव्रत ने
अपने पिता की
प्रसन्नता के लिए
सिंहासन का त्याग कर दिया।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं था।
तब देवव्रत ने
वह प्रतिज्ञा ली
जिसने उन्हें
भीष्म बना दिया —
"मैं आजीवन
विवाह नहीं करूँगा।
न मेरी कोई संतान होगी।"
उस दिन स्वर्ग से
फूल बरसे।
देवताओं ने कहा —
"आज से यह भीष्म हैं।"
लेकिन क्या यह
केवल बलिदान था?
या एक ऐसी प्रतिज्ञा
जो आगे चलकर
पूरे वंश का
बंधन बन गई?
हर बलिदान
ज्ञान नहीं होता।
कभी-कभी हम
किसी और की
प्रसन्नता के लिए
ऐसे निर्णय ले लेते हैं
जिनकी कीमत
पूरी ज़िंदगी चुकानी पड़ती है।
लेकिन यही प्रतिज्ञा
आगे चलकर
उनके जीवन का
सबसे बड़ा बंधन बन गई…
अगली कथा में जानिए।
हर हर महादेव ❤️
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