GMS kalyanpur East Champaran Bihar

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Teacher makes a good citizen

Photos from GMS kalyanpur East Champaran Bihar's post 14/09/2022

GMS Tulasipatti, Kalyanpur, East Champaran participating in national level exhibition cm project competition at Pragati MaidanNewDelhi

Photos from GMS kalyanpur East Champaran Bihar's post 12/09/2022

आज की गतिविधियां 👍

16/02/2022

क्या भगवान हमारे द्वारा चढ़ाया गया भोग खाते हैं ?
यदि खाते हैं, तो वह वस्तु समाप्त क्यों नहीं हो जाती ?
और यदि नहीं खाते हैं, तो भोग लगाने का क्या लाभ ?

एक लड़के ने पाठ के बीच में अपने गुरु से यह प्रश्न किया।
गुरु ने तत्काल कोई उत्तर नहीं दिया।
वे पूर्ववत् पाठ पढ़ाते रहे। उस दिन उन्होंने पाठ के अन्त में एक श्लोक पढ़ाया:

पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

पाठ पूरा होने के बाद गुरु ने शिष्यों से कहा कि वे पुस्तक देखकर श्लोक कंठस्थ कर लें।

एक घंटे बाद गुरु ने प्रश्न करने वाले शिष्य से पूछा कि उसे श्लोक कंठस्थ हुआ कि नहीं ? उस शिष्य ने पूरा श्लोक शुद्ध-शुद्ध गुरु को सुना दिया।
फिर भी गुरु ने सिर 'नहीं' में हिलाया, तो शिष्य ने कहा कि" वे चाहें, तो पुस्तक देख लें; श्लोक बिल्कुल शुद्ध है।”
गुरु ने पुस्तक देखते हुए कहा“ श्लोक तो पुस्तक में ही है, तो तुम्हारे दिमाग में कैसे चला गया? शिष्य कुछ भी उत्तर नहीं दे पाया।

तब गुरु ने कहा “ पुस्तक में जो श्लोक है, वह स्थूल रूप में है। तुमने जब श्लोक पढ़ा, तो वह सूक्ष्म रूप में तुम्हारे दिमाग में प्रवेश कर गया, उसी सूक्ष्म रूप में वह तुम्हारे मस्तिष्क में रहता है। और जब तुमने इसको पढ़कर कंठस्थ कर लिया, तब भी पुस्तक के स्थूल रूप के श्लोक में कोई कमी नहीं आई।

इसी प्रकार पूरे विश्व में व्याप्त परमात्मा हमारे द्वारा चढ़ाए गए निवेदन को सूक्ष्म रूप में ग्रहण करते हैं, और इससे स्थूल रूप के वस्तु में कोई कमी नहीं होती। उसी को हम *प्रसाद* के रूप में ग्रहण करते हैं।

शिष्य को उसके प्रश्न का उत्तर मिल गया। सत्य सनातन धर्म 🚩 🙏

05/02/2022

एकमात्र पक्षी जो बाज को चोंच मारने की हिम्मत करता है,
वह है रेवेन...
यह बाज की पीठ पर बैठता है और उसकी गर्दन पर अपनी चोंच से काटता है, हालांकि बाज जवाब नहीं देता न रैवेन से लड़ता है-
बाज रेवेन के साथ लड़ने में समय और ऊर्जा बर्बाद करना व्यर्थ मानता है - बाज सिर्फ अपने पंख खोलता है और आसमान में और ऊँची उड़ान भरने लगता है - उड़ान जितनी ऊँची होती जाती है, रेवेन को सांस लेने के लिए उतनी ही कठिनाई होती है और अंत में ऑक्सीजन की कमी के कारण रैवेन गिर कर मर जाता है -
इसीलिए कभी-कभी सभी लड़ाइयों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं होती है, लोगों के तर्कों- कुतर्कों या उनकी आलोचनाओं के जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है--- बस अपना कद ऊपर उठायें !
वह स्वतः ही गिर जाएंगे...................
मनीष

02/12/2021

😊

एक महिला की आदत थी, कि वह हर रोज सोने से पहले, अपनी दिन भर की खुशियों को एक काग़ज़ पर, लिख लिया करती थीं.... एक रात उन्होंने लिखा :

*मैं खुश हूं,* कि मेरा पति पूरी रात, ज़ोरदार खर्राटे लेता है. क्योंकि वह ज़िंदा है, और मेरे पास है. ये ईश्वर का, शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि मेरा बेटा सुबह सबेरे इस बात पर झगड़ा करता है, कि रात भर मच्छर - खटमल सोने नहीं देते. यानी वह रात घर पर गुज़रता है, आवारागर्दी नहीं करता. ईश्वर का शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि, हर महीना बिजली, गैस, पेट्रोल, पानी वगैरह का, अच्छा खासा टैक्स देना पड़ता है. यानी ये सब चीजें मेरे पास, मेरे इस्तेमाल में हैं. अगर यह ना होती, तो ज़िन्दगी कितनी मुश्किल होती ? ईश्वर का शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि दिन ख़त्म होने तक, मेरा थकान से बुरा हाल हो जाता है. यानी मेरे अंदर दिन भर सख़्त काम करने की ताक़त और हिम्मत, सिर्फ ईश्वर की मेहर से है..

*मैं खुश हूं,* कि हर रोज अपने घर का झाड़ू पोछा करना पड़ता है, और दरवाज़े -खिड़कियों को साफ करना पड़ता है. शुक्र है, मेरे पास घर तो है. जिनके पास छत नहीं, उनका क्या हाल होता होगा ? ईश्वर का, शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि कभी कभार, थोड़ी बीमार हो जाती हूँ. यानी मैं ज़्यादातर सेहतमंद ही रहती हूं. ईश्वर का, शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि हर साल त्यौहारो पर तोहफ़े देने में, पर्स ख़ाली हो जाता है. यानी मेरे पास चाहने वाले, मेरे अज़ीज़, रिश्तेदार, दोस्त, अपने हैं, जिन्हें *तोहफ़ा दे सकूं. अगर ये ना हों, तो ज़िन्दगी कितनी बेरौनक* हो..? ईश्वर का, शुक्र है..

*मैं खुश हूं,* कि हर रोज अलार्म की आवाज़ पर, उठ जाती हूँ. यानी मुझे हर रोज़, एक नई सुबह देखना नसीब होती है. ये भी, ईश्वर का ही करम है..

*जीने के इस फॉर्मूले पर अमल करते हुए, अपनी और अपने लोगों की ज़िंदगी, सुकून की बनानी चाहिए. छोटी या बड़ी परेशानियों में भी, खुशियों की तलाश करिए, हर हाल में, उस ईश्वर का शुक्रिया कर, जिंदगी खुशगवार बनाए...!!!!*
🙏🙏🙏

Think Positive in each & every situation.

06/11/2021

*_मास्साब का स्कूटर_*

प्रवीण भारती जी, पेशे से प्राइमरी अध्यापक थे।

कस्बे से विद्यालय की दूरी 7 किलोमीटर थी।

एकदम वीराने में था उनका विद्यालय।

कस्बे से वहाँ तक पहुंचने का साधन यदा कदा ही मिलता था, तो अक्सर लिफ्ट मांगके ही काम चलाना पड़ता था और न मिले तो प्रभु के दिये दो पैर, भला किस दिन काम आएंगे।

"कैसे उजड्ड वीराने में विद्यालय खोल धरा है सरकार ने, इससे भला तो चुंगी पर परचून की दुकान खोल लो।"
लिफ्ट मांगते, साधन तलाशते प्रवीण जी रोज यही सोचा करते। 😪😪

धीरे धीरे कुछ जमापूंजी इकठ्ठा कर, उन्होंने एक स्कूटर ले लिया।

चेतक का नया चमचमाता स्कूटर।

स्कूटर लेने के साथ ही उन्होंने एक प्रण लिया कि वो कभी किसी को लिफ्ट को मना न करेंगें।।
आखिर वो जानते थे जब कोई लिफ्ट को मना करे तो कितनी शर्मिंदगी महसूस होती है। 🛵😇

अब प्रवीण जी रोज अपने चमचमाते स्कूटर से विद्यालय जाते, और रोज कोई न कोई उनके साथ जाता। लौटते में भी कोई न कोई मिल ही जाता।🛵👬☀️🛵👬🏾☀️🛵👫☀️🛵👬🏻☀️

एक रोज लौटते वक्त एक व्यक्ति परेशान सा लिफ्ट के लिये हाथ फैलाये था, , अपनी आदत अनुसार प्रवीण जी ने स्कूटर रोक दिया। वह व्यक्ति पीछे बैठ गया। 🛵👬

थोड़ा आगे चलते ही उस व्यक्ति ने छुरा निकाल प्रवीण जी की पीठ पर लगा दिया। 🕵🏽‍♂️🔪

"जितना रुपया है वो, और ये स्कूटर मेरे हवाले करो।" व्यक्ति बोला। 🕵🏽‍♂️🔪💵🛵

प्रवीण जी की सिट्टी पिट्टी गुम, डर के मारे स्कूटर रोक दिया। पैसे तो पास में ज्यादा थे नहीं, पर प्राणों से प्यारा, पाई पाई जोड़ कर खरीदा स्कूटर तो था। 😪😓

*"एक निवेदन है,"* स्कूटर की चाभी देते हुए प्रवीण जी बोले । 😇

"क्या?" वह व्यक्ति बोला। 🧐

"यह कि तुम कभी किसी को ये मत बताना कि ये स्कूटर तुमने कहाँ से और कैसे चोरी किया, विश्वास मानो मैं भी रपट नहीं लिखउँगा।" प्रवीण जी बोले। 😇

"क्यों?" व्यक्ति हैरानी से बोला। 🧐

"यह रास्ता बहुत उजड्ड है, निरा वीरान | सवारी मिलती नहीं, उस पर ऐसे हादसे सुन आदमी लिफ्ट देना भी छोड़ देगा।" प्रवीण जी बोले।😪

व्यक्ति का दिल पसीजा, उसे प्रवीण जी भले मानुष प्रतीत हुए, पर पेट तो पेट होता है। 'ठीक है कहकर' वह व्यक्ति स्कूटर ले उड़ा। 🛵💨

______☀️______

अगले दिन प्रवीण जी सुबह सुबह अखबार उठाने दरवाजे पर आए, दरबाजा खोला तो स्कूटर सामने खड़ा था। प्रवीण जी की खुशी का ठिकाना न रहा, दौड़ कर गए और अपने स्कूटर को बच्चे जैसा खिलाने लगे, देखा तो उसमें एक कागज भी लगा था।🛵📝

*"मास्साब, यह मत समझना कि तुम्हारी बातें सुन मेरा हृदय पिघल गया।* 😏

कल मैं तुमसे स्कूटर लूट उसे कस्बे ले गया, सोचा भंगार वाले के पास बेच दूँ।
"अरे ये तो मास्साब का स्कूटर है। 🤨" इससे पहले मैं कुछ कहता भंगार वाला बोला।

"अरे, मास्साब ने मुझे बाजार कुछ काम से भेजा है।" कहकर मैं बाल बाल बचा। परन्तु शायद उस व्यक्ति को मुझ पर शक सा हो गया था। 🛵👀🏃‍♂️

फिर मैं एक हलवाई की दुकान गया, जोरदार भूख लगी थी तो कुछ सामान ले लिया। "अरे ये तो मास्साब का स्कूटर है।🤨" वो हलवाई भी बोल पड़ा। "हाँ, उन्हीं के लिये तो ये सामान ले रहा हूँ, घर में कुछ मेहमान आये हुए हैं।" कहकर मैं जैसे तैसे वहां से भी बचा। 🛵👀🏃‍♂️

फिर मैंने सोचा कस्बे से बाहर जाकर कहीं इसे बेचता हूँ। शहर के नाके पर एक पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिया।👮🏽‍♂️

"कहाँ, जा रहे हो और ये मास्साब का स्कूटर तुम्हारे पास कैसे।🤨" वह मुझ पर गुर्राया। किसी तरह उससे भी बहाना बनाया। 🛵👀🏃‍♂️💨

हे, मास्साब तुम्हारा यह स्कूटर है या आमिताभ बच्चन। सब इसे पहचानते हैं। 😪 आपकी अमानत मैं आपके हवाले कर रहा हूँ, इसे बेचने की न मुझमें शक्ति बची है न हौसला। आपको जो तकलीफ हुई उस एवज में स्कूटर का टैंक फुल करा दिया है।🙁"

पत्र पढ़ प्रवीण जी मुस्कुरा दिए, और बोले। "कर भला तो हो भला।" 😄 😜
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Photos from GMS kalyanpur East Champaran Bihar's post 23/03/2021

कैच- अप कोर्स का प्रशिक्षण शुरू हुआ सीआरसी तुलसी पट्टी में । जिसका उद्घाटन संकुल संचालक श्री लाबहादुर दास, संकुल समन्वयक श्री सुदामा महतो एवम् प्रशिक्षक के रूप में मै (मनीष कुमार पाण्डेय) और अमरेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर संयुक्त रूप से शुभारंभ किया।

कैच-अप कोर्स के जरिए पिछले वर्ग का सिलेबस किया जाएगा पूरा
सरकारी विद्यालयों में कैच-अप कोर्स चलाने का मुख्य उद्देश्य छात्रों के पिछले वर्ग की पढ़ाई को पूरा करना है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्ग दो से लेकर दस तक के छात्रों के लिए तीन महीने तक विशेष कैच-अप कोर्स स्कूलों में चलाया जाएगा। बताया गया कि कोरोना काल के चलते लॉकडाउन में पढ़ाई बाधित होने की वजह से सरकार के दिशा निर्देश के आलोक में स्कूलों में नामांकित सभी वर्ग के छात्रों को प्रमोट करते हुए अगले क्लास में नामांकन दिया जा चुका है। पिछले क्लास के सिलेबस को पूरा करने के लिए विशेष कैच-अप कोर्स चलाया जाएगा। जिससे छात्रों को अगली कक्षा के सिलेबस को समझने में आसानी होगी।

21/03/2021

"हवा और पानी, जंगल और वन्य जीवों की रक्षा करने की योजनाएं वास्तव में मनुष्य की रक्षा करने की योजना है। – Stewart Udall" –

अंतरास्ट्रीय वन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
🙏मनीष

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