28/03/2022
सारी रात train में जागकर सुबह शुलभ शौचालय में भी लाइन में लगकर फिर ऑटो रिक्शा चालकों को तलाशकर, उसे मुँह माँगे पैसे देकर , फिर से आतंकवादी की तरह 3 जगह कॉलेज वेरिफिकेशन करवाकर 8.00 बजे से ही अपनी सीट पर बैठे हैं कि पेपर स्टार्ट हो जाये और फिर आता है बहुत ही शानदार पेपर जो कि लगता है कि पढा ही क्यू था जब वर्ग 3 की बजाय वर्ग 1 का पेपर आना था तो फिर कही भोले बाबा का नाम लेकर सबमिट करते हैं कि
और स्कोर दिखाई देता है दो गुलदस्तों के साथ
फिर बाहर आँखों में आंसू लेकर निराश मन से पापा को फोन लगाया जाता है कि पापा आपकी उम्मीद पर खरा नही उतर पाया
और फिर से वही सब ट्रैन की यात्रा और मुँह लटकाये घर
मोहल्ले के लोग बोलते हैं कि बस इतने ही नम्बर ??
अब क्या जबाब दे कि मामा हमें प्राथमिक शिक्षक की बजाय पता नही क्या बनना चाहते हैं
ओर फिर एंट्री होती है मोहल्ले में एक बन्दे की जिसने ना कोई कोचिंग ली ना कोई परीक्षा पास की टेंसन ली और बोला कि 10 लाख हो तो नोकरी अब भाईयो क्या करें ज्यादा शब्द नहीं है यहीं विराम देता हूँ शायद आप भी छात्रों की पीड़ा समझें
क्योंकि हम जिस समाज में रहते हैं वहाँ, जिसको सफलता नहीं मिली है उसे बेबकूफ ही समझा जाता है
अब तुम्हारे हवाले नोकरी साथियों ..!!!!!😢😢😢😢
ात्र_की_कलम_से
TNS institute Morena