Rastrakavi Ramdhari Singh 'Dinkar' High School

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22/09/2025
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की 50वीं पुण्यस्मृति वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित ' रश्मिरथी पर्व' के अंतर्गत-           ...
25/06/2024

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की 50वीं पुण्यस्मृति वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित ' रश्मिरथी पर्व' के अंतर्गत-

नेतरहाट आवासीय विद्यालय, झारखंड
के
विद्यार्थियों द्वारा

'रश्मिरथी खंडकाव्य का सामूहिक सस्वर-पाठ
एवं
'दिनकर साहित्य पर आधारित अंत्याक्षरी'

26 जून (बुधवार), पूर्वाह्न 11 बजे

स्थान - नेतरहाट आवासीय विद्यालय, झारखंड

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‘रश्मिरथी पर्व’ के माध्यम से हिंदी-साहित्य और भारतीय-संस्कृति के प्रचार-प्रसार-विस्तार के द्वारा राष्ट्रनिर्माण हेतु इस उद्यम में सहभागी बने। अपनी भागेदारी तय करने के लिए इस लिंक पर जाकर जानकारी दें 👉 https://rb.gy/61owc6

Rashtrakavi Ramdhari Singh 'Dinkar'
Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar Smriti Niyas
Netarhat School
Netarhat
Netarhat Vidyalaya, Netarhat

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह "दिनकर" विचार मंच
Netarhat Vidyalaya, Netarhat
Prabhat Ranjan
Saket Kumar SonuWa
Nishant Kumar Ojha
Pavan Sriwastawa
Central University Of Jharkhand, Ranchi


#रश्मिरथी
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#नेतरहाट

एक व्यक्ति जो इस धरती से विदा लेता है,वह वास्तव में कभी नहीं छोड़ता है,क्योंकि वे अभी भी हमारे दिल में जीवित हैं,हमारे म...
19/04/2023

एक व्यक्ति जो इस धरती से विदा लेता है,
वह वास्तव में कभी नहीं छोड़ता है,
क्योंकि वे अभी भी हमारे दिल में जीवित हैं,
हमारे माध्यम से, वे जीवित हैं। मेरी संवेदना।

18/09/2021
02/01/2019

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं, है अपना ये व्यवहार नहीं
धरा ठिठुरती है सर्दी से, आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर, सर्द हवा का पहरा है
सूना है प्रकृति का आँगन, कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं
हर कोई है घर में दुबका हुआ, नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं
चंद मास अभी इंतज़ार करो, निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही, क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही
उल्लास मंद है जन -मन का, आयी है अभी बहार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं
ये धुंध कुहासा छंटने दो, रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो, फागुन का रंग बिखरने दो
प्रकृति दुल्हन का रूप धार, जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता, घर -घर खुशहाली लायेगी
तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि, नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर, जय गान सुनाया जायेगा
युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध, नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध
आर्यों की कीर्ति सदा -सदा, नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
अनमोल विरासत के धनिकों को, चाहिये कोई उधार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं

*✍🏻राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर*

26/02/2018

एनार्की (Anarchy by Dinkar)

"अरे, अरे, दिन-दहाड़े ही जुल्म ढाता है !
रेलवे का स्लीपर उठाए कहाँ जाता है ?"

"बड़ा बेवकूफ़ है, अजब तेरा हाल है ;
तुझे क्या पड़ी है ? य' तो सरकारी माल है ?"

"नेता या प्रणेता! तेरा ठीक तो ईमान है ?
पर, दिया जाता अब देश में न कान है l
बने जाते कल-कारखाने आलीशान भी,
साथ-साथ तेरे कुछ अपने मकान भी l”

“भाई, बकने दो उन्हें, तुम तो सुजान हो,
कविता बनाते हो, हमारे अभिमान हो l
मान लो, कभी जो चूर-धुन थोड़ा पाते हैं,
भारत से बाहर तो फेंक नहीं आते हैं l
जो भी बनवाये, अपना ही व’ भवन है,
देश में ही रहता है, देश का जो धन है l”

“और, अरे यार ! तू तो बड़ा शेर-दिल है,
बीच राह में ही लगा रखी महफ़िल है !
देख, लग जाएँ नहीं मोटर के झटके,
नाचना जो हो तो नाच सड़क से हटके l”

“सड़क से हट तू ही क्यों न चला जाता है ?
मोटर में बैठ बड़ी शान दिखलाता है !
झाड़ देंगे, तुझमें जो तड़क-भड़क है,
टोकने चला है, तेरे बाप की सड़क है ?

सर तोड़ देंगे, नहीं राह से टलेंगे हम,
हाँ, हाँ, जैसे चाहें, वैसे नाच के चलेंगे हम l
बीस साल पहले की शेखी तुझे याद है l
भूल ही गया है, अब भारत आज़ाद है l”

24/09/2017

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी के उन रचनाकारों में से हैं, जिनकी कलम से अंगारे भी फूटे और प्रेम की धारा भी बही. एक ही व्यक्ति 'उर्वशी' भी रचता है और उसी रचनाकार को देश के हालात पर गुस्सा आता है, तो 'परशुराम की प्रतीक्षा' सामने आती है.
‘दिनकर’ के जन्मदिन के मौके पर कविता पहुंचा डॉ. कुमार विश्वास के पास. ‘दिनकर’, कुमार विश्वास के दिल के बेहद करीब हैं. विश्वास ने ‘महाकवि' जैसे मंच के लिए भी सबसे पहले जिस कवि को चुना, वो ‘दिनकर’ ही थे.

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