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04/12/2022
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05/11/2022

02/11/2022

सवाल आया है कि रेलवे में रिजर्वेशन में अलग-अलग कोटे होते हैं, जैसे GNWL, RLWL, PQWL आदि... तो ये क्या हैं??... वैसे तो इंटरनेट पर सभी भाषाओं में इनके बारे में पढ़ने को मिल जाएगा, लेकिन मैं अपने शब्दों में बताने वाला हूँ... साथ ही यह भी बताऊँगा कि आप ट्रेन का नाम-नंबर देखकर कैसे अनुमान लगा सकते हो कि कहाँ से कहाँ तक कौन-सा कोटा लगता होगा...

सबसे पहले इनकी फुल फॉर्म देख लेते हैं...
GNWL... General Waiting List...
RLWL... Remote Location Waiting List
PQWL... Pooled Quota Waiting List...

अब मैं थ्योरी नहीं बताऊँगा, बल्कि प्रैक्टिकल बात बताऊँगा... मैं जो बताऊँगा, केवल अपने अनुभव के आधार पर बताऊँगा... इसका भारतीय रेलवे के वास्तविक नियमों से कोई लेना-देना नहीं है...

मैं उदाहरण दूँगा ट्रेन नंबर 12215 गरीब रथ एक्सप्रेस का... यह ट्रेन दिल्ली सराय रोहिल्ला से सुबह 08:55 बजे चलती है और अगले दिन सुबह 07:35 बजे बांद्रा पहुँच जाती है... रास्ते में यह कई स्टेशनों पर रुकती है...

अब जी, रेलवे चाहती है कि कोई भी ट्रेन हमेशा फुल रहे... यानी 100% ऑक्यूपेंसी रहे... अगर दिल्ली से ही पूरी ट्रेन फुल हो जाए और बांद्रा तक पूरी ट्रेन फुल रहे, तो यह बेस्ट है... लेकिन ट्रेन गुड़गाँव भी रुकती है, रेवाड़ी भी रुकती है, अलवर, जयपुर, अजमेर, फालना, आबू रोड, पालनपुर, अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच और सूरत भी रुकती है... ऑनलाइन रिजर्वेशन होता है और कोई कहीं से भी रिजर्वेशन करा सकता है... ऐसे में कुछ सीटें खाली भी रह जाती हैं... या तो पूरी खाली रहती हैं या पार्शियली खाली रहती हैं...

तो ऐसे में तीन कंडीशन बनती हैं...

किसी ने दिल्ली से बांद्रा तक रिजर्वेशन करा लिया... ऐसे में सीट की ऑक्यूपेंसी 100% हो गई... यानी पूरे रूट के लिए सीट बुक हो गई... यह है पहली कंडीशन...

दूसरी कंडीशन ये बनती है कि किसी ने जयपुर से बांद्रा तक रिजर्वेशन करा लिया... ऐसे में वो सीट दिल्ली से जयपुर तक खाली जाएगी... लेकिन दिल्ली से जयपुर 300 किमी दूर है और दोनों ही बड़े शहर भी हैं, इसलिए मैक्सिमम संभावना ये है कि दिल्ली से जयपुर जाने के लिए कोई अन्य यात्री रिजर्वेशन करेगा, तो यह सीट उसे दे दी जाएगी... यानी सीट कहीं भी खाली नहीं जाएगी...

अब सपोज करो कि किसी ने रेवाड़ी से बांद्रा तक रिजर्वेशन कराया... तो वो सीट दिल्ली से रेवाड़ी तक खाली जाएगी... क्योंकि दिल्ली से रेवाड़ी केवल 78 किमी दूर ही है और इस दूरी के लिए कोई भी यात्री गरीब रथ में आरक्षण नहीं कराएगा... यह है तीसरी कंडीशन...

तो अब आप अपनी कॉमन सेंस लगाकर ये बताओ कि रेलवे किस कंडीशन को ज्यादा चाहेगा???... जाहिर है कि पहली कंडीशन को ही प्रीफर किया जाएगा... रेलवे यही चाहेगा कि सीट दिल्ली से बांद्रा तक के लिए ही फुल हो जाए... यानी दिल्ली में ही 100% ऑक्यूपेंसी हो जाए...

दूसरे नंबर पर चाहेगा कि अगर दिल्ली से बांद्रा की सवारी न मिले, तो दिल्ली से जयपुर की सवारियाँ मिल जाएँ... या अजमेर तक की सवारियाँ मिल जाएँ... जयपुर और अजमेर से बांद्रा की सवारियाँ मिल जाएँगी...

और रेलवे कभी नहीं चाहेगा कि रेवाड़ी से बांद्रा की बुकिंग हो... अब हरियाणा वाले लोग नाराज मत हो जाना... जस्ट एक्जाम्पल है... क्योंकि वो सीट दिल्ली से रेवाड़ी तक खाली ही जाएगी... वही दूसरी तरफ यह ट्रेन सूरत सुबह सवेरे 4 बजे पहुँचती है... तो रेलवे ये भी नहीं चाहेगा कि उसे दिल्ली से सूरत के यात्री मिलें... क्योंकि ऐसे में वो सीट सूरत में खाली हो जाएगी और इतनी सुबह गरीब रथ में सूरत से बांद्रा जाने के लिए किसी अन्य यात्री की बुकिंग होना मुश्किल है... यानी मैक्सिमम प्रोबेबिलिटी है कि वह सीट सूरत से बांद्रा तक खाली ही जाएगी... तो ऐसी बुकिंग को रेलवे नहीं लेना चाहेगा...

पहली कंडीशन को GNWL कहते हैं... दूसरी कंडीशन को RLWL कहते हैं... और तीसरी कंडीशन को PQWL कहते हैं...

अब आप स्वयं बताइए कि इनमें से कौन-सी कंडीशन रेलवे के सबसे ज्यादा फेवर में है???... जाहिर है कि GNWL... और PQWL सबसे कम फेवर में है... इससे आप ये भी अंदाजा लगा सकते हैं कि कौन-सी वेटिंग लिस्ट के कन्फर्म होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं और कौन-सी के सबसे कम...

GNWL के कन्फर्म होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं... इसमें 200-300 तक की वेटिंग भी कन्फर्म हो जाती है... और PQWL के कन्फर्म होने के चांस सबसे कम होते हैं... इसमें 10 वेटिंग भी कन्फर्म होनी मुश्किल होती है...

ये बेसिक बातें हैं, जो मैंने आसान भाषा में बताई हैं... इसके बाद एडवांस बातें भी हैं... रेलवे के पास कई वर्षों का डेटा है और बड़े-बड़े एक्सपर्ट लोग हैं... तो रेलवे ट्रेन-टू-ट्रेन डिसाइड करता है कि किस ट्रेन में कहाँ से कहाँ तक कौन-सा कोटा देना है और कौन-सी वेटिंग लिस्ट लागू करनी है... ताकि ट्रेन में लगभग 100% ऑक्यूपेंसी रहे...

वापस गरीब रथ पर आते हैं... इस ट्रेन में दिल्ली-बांद्रा GNWL है... रेवाड़ी-बांद्रा PQWL है... दिल्ली-सूरत तक PQWL है... दिल्ली-जयपुर और जयपुर-बांद्रा RLWL है... दिल्ली-अजमेर और अजमेर-बांद्रा RLWL है... ऐसा क्यों है और कौन-से सेक्शन में सीट कन्फर्म होने के चांस ज्यादा हैं, वो आप समझ गए होंगे...

अब आप कहोगे कि इतनी भीड़ है और हमेशा ही सीटों को लेकर मारामारी रहती है, तो रेलवे को सीटें खाली रहने का डर क्यों होता है???... अगर रेलवे सबकुछ GNWL कर दे, तो सीटें तो वैसे भी भर जाएँगी...

असल में रेलवे को धुर से धुर तक 100% ऑक्यूपेंसी चाहिए... अब पूर्वा एक्सप्रेस का उदाहरण लेते हैं... यह ट्रेन नई दिल्ली से हावड़ा जाती है... रेलवे को आसानी से नई दिल्ली से हावड़ा की सवारियाँ मिल जाएँगी... लेकिन अगर किसी ने अलीगढ़ से हावड़ा की बुकिंग करा ली, तो वह सीट नई दिल्ली से अलीगढ़ तक खाली जाएगी... चाहे हावड़ा या पटना/गया का कितना भी रश हो, लेकिन नई दिल्ली से अलीगढ़ के लिए उस सीट की बुकिंग नहीं होगी... रेलवे ऐसा कभी नहीं चाहेगा...

इसलिए रेलवे अलीगढ़ को PQWL दे देगा, यानी सबसे कम वरीयता... यानी अलीगढ़ के दो-चार लोगों को कन्फर्म सीट देकर फिर PQWL लागू कर देगा, जिसके कन्फर्म होने के चांस न के बराबर है... इस दौरान रेलवे दिल्ली से हावड़ा की बुकिंग लेता रहेगा...

याद रखना कि ये केवल बेसिक्स हैं और सभी ट्रेनों के लिए यूनीवर्सल रूल नहीं हैं... लेकिन इससे आप काफी कुछ अनुमान लगा सकते हो...

कुछ और उदाहरण देता हूँ...

12920 मालवा एक्सप्रेस कटरा से इंदौर-महू जाती है... ट्रेन कटरा से सुबह चलती है और शाम तक नई दिल्ली पहुँच जाती है... इस ट्रेन में कटरा से नई दिल्ली तक PQWL है... क्यों???... मेरे विचार से इसमें कटरा से नई दिल्ली तक RLWL होनी चाहिए, क्योंकि कटरा से नई दिल्ली काफी दूर है और उन्हें बहुत यात्री मिलेंगे और नई दिल्ली से आगे इंदौर के लिए यह ट्रेन ओवरनाइट है, इसलिए नई दिल्ली से इंदौर तक भी फुल ऑक्यूपेंसी रहेगी... लेकिन रेलवे ने इसमें कटरा-नई दिल्ली में PQWL दे रखी है... इसका अर्थ है कि रेलवे चाहता है कि इस ट्रेन में इंदौर-उज्जैन के यात्रियों को हमेशा वरीयता मिले... अगर रेलवे दिल्ली तक PQWL हटा ले, तो कटरा से दिल्ली तक बहुत सारी बुकिंग हो जाएगी और कटरा से इंदौर-उज्जैन के तीर्थयात्रियों को सीट नहीं मिलेगी और उन्हें परेशान होना पड़ेगा...

एक ट्रेन है 16318 हिमसागर एक्सप्रेस... ट्रेन कटरा से चलती है और कन्याकुमारी तक जाती है... कटरा से रात 10:30 बजे चलती है, सुबह 05:40 बजे लुधियाना पहुँचती है और दोपहर 02:00 बजे नई दिल्ली पहुँचती है... इसमें कटरा से नई दिल्ली तक GNWL है, जबकि मेरे विचार से RLWL होनी चाहिए थी... हैरानी की बात ये है कि कटरा से लुधियाना तक भी GNWL है...

इसका अर्थ है कि कटरा से लुधियाना तक के यात्री इस ट्रेन में आ जाओ... ट्रेन कटरा-लुधियाना सेक्शन में परफेक्ट ओवरनाइट भी है... इससे वैष्णों देवी से जालंधर, लुधियाना, धुरी, संगरूर, जाखल, जींद, रोहतक जाने वाले तीर्थयात्रियों को आसानी से सीट मिल जाती है और उन्हें दूसरी ट्रेनों की तरफ नहीं देखना पड़ता... यह ट्रेन सुपरफास्ट न होकर मेल/एक्सप्रेस है, यानी उतनी तेज भी नहीं चलती... अब जाहिर है कि इस ट्रेन में कटरा से कन्याकुमारी तक यानी धुर से धुर तक एकाध ही यात्री जाता होगा, बाकी सब बीच में उतरने-चढ़ने वाले हैं... इसलिए रेलवे ने इस ट्रेन में ज्यादा सख्ती नहीं दिखाई...

लास्ट में एक और इंट्रस्टिंग कम्बीनेशन...

ट्रेन नंबर 22199 ग्वालियर से बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस... यह ट्रेन ग्वालियर से इटावा, कानपुर, लखनऊ होते हुए भी बलरामपुर जा सकती थी, जो 500 किमी पड़ता... लेकिन ट्रेन का रूट ग्वालियर से हजरत निजामुद्दीन, मुरादाबाद, लखनऊ होते हुए है और 950 किमी है... शायद ही कोई यात्री ग्वालियर से बलरामपुर की बुकिंग कराता होगा... ट्रेन ग्वालियर से 14:55 बजे चलती है, निजामुद्दीन 19:15 बजे पहुँचती है, लखनऊ 03:30 बजे और गोंडा 05:40 बजे पहुँचती है... यानी निजामुद्दीन से गोंडा तक परफेक्ट ओवरनाइट है... यानी इस ट्रेन में सबसे ज्यादा रश निजामुद्दीन से लखनऊ व गोंडा तक रहेगा... यानी ग्वालियर से निजामुद्दीन तक इसमें बिल्कुल भी रश नहीं रहेगा और हमेशा सीट मिलेगी... उसी तरह लखनऊ से बलरामपुर तक भी हमेशा सीट मिलेगी... अगर वेटिंग चल रही है, तब भी वो वेटिंग हमेशा कन्फर्म होगी...

लेकिन रेलवे ने इस ट्रेन में ग्वालियर से निजामुद्दीन तक PQWL दी है... यानी सीट कन्फर्म होने के सबसे कम चांस... ऐसा क्यों दिया है, वो मेरी समझ से बाहर है... इसमें GNWL देते, तब भी कोई दिक्कत नहीं थी... या RLWL तो देनी ही चाहिए थी... PQWL से होता ये है कि ग्वालियर से निजामुद्दीन तक इसमें जल्दी वेटिंग दिखने लगती है, उधर डेढ़ घंटे बाद ही ग्वालियर में ताज एक्सप्रेस पहुँचती है... 2S और CC होने के कारण ताज में सीटें अक्सर खाली मिलती हैं और लोग सुशासन की बजाय ताज में आरक्षण करा लेते हैं... और अब तो गतिमान की टाइमिंग भी सेम है...

इससे होता ये है कि ग्वालियर व आगरा से निजामुद्दीन जाने के लिए ट्रेन में वेटिंग दिख सकती है, लेकिन एक्चुअल में सैकड़ों सीटें खाली रहती हैं... फिर चार्ट बनते समय वे सारी की सारी वेटिंग कन्फर्म हो जाती हैं... अगर मुझे कभी इस ट्रेन में जाना हो और PQWL में 200 वेटिंग भी चल रही हो, तो मैं इसमें बुकिंग कर लूँगा और वह 100% कन्फर्म हो जाएगी...

अब सवाल आता है कि रेलवे ने इस ट्रेन के वेटिंग कोटे पर काम क्यों नहीं किया???... इसका कारण है कि इस ट्रेन का रूट ऐसा है कि इसमें कभी भी 100% ऑक्यूपेंसी नहीं हो सकती... यह ट्रेन दुधारू गाय नहीं है... रेलवे ने उन ट्रेनों पर खूब रिसर्च की है, जो दुधारू गाय हैं...

कुल मिलाकर बेसिक्स आप समझ गए होंगे... और ट्रेन का नाम-नंबर देखकर अब आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि कहाँ से कहाँ तक कौन-सी वेटिंग लिस्ट मिल सकती है और किस वेटिंग लिस्ट के कन्फर्म होने के चांस ज्यादा हैं...

साभार __नीरज मुसाफिर

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