Admission Help Desk

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Admission Open for all courses

29/10/2025

‼️𝐁.𝐏𝐡𝐚𝐫𝐦 𝐀𝐝𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐀𝐥𝐞𝐫𝐭‼️

जो भी छात्र एवं छात्राएं 𝐁.𝐏𝐡𝐚𝐫𝐦 अथवा 𝐁.𝐏𝐡𝐚𝐫𝐦 𝐋𝐚𝐭𝐞𝐫𝐚𝐥 𝐄𝐧𝐭𝐫𝐲 (𝐒𝐞𝐜𝐨𝐧𝐝 𝐘𝐞𝐚𝐫) में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनके लिए महत्वपूर्ण सूचना।

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि कल (𝟑𝟎 अक्टूबर 𝟐𝟎𝟐𝟓) है। इस तिथि के बाद इस सत्र में प्रवेश संभव नहीं होगा। प्रवेश या अन्य किसी जानकारी हेतु तुरंत संपर्क करें 👇
📞𝟕𝟔𝟔𝟖𝟕𝟗𝟔𝟓𝟐𝟔.

🏫 कृषक कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, राजगढ़, मिर्जापुर

26/10/2025

‼️आखिरी तिथि 𝟐𝟖𝐭𝐡 अक्टूबर 𝟐𝟎𝟐𝟓‼️
सबसे कम शुल्क में 𝐌.𝐄𝐝. में प्रवेश लें।
शिक्षक बनने की राह अब पहले से कहीं आसान।
आज ही पहला कदम उठाएं और 𝐌.𝐄𝐝. में प्रवेश पाए।
✅छात्रवृत्ति की सुविधा.
✅हॉस्टल की सुविधा.
✅गरीब छात्र/छात्राओं एवं ईडब्ल्यूएस को विशेष छूट.
𝐀𝐝𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐇𝐞𝐥𝐩𝐥𝐢𝐧𝐞 𝐍𝐨
☎️𝟕𝟔𝟔𝟖𝟕𝟗𝟔𝟓𝟐𝟔.
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25/10/2025

🌾 Urgent Hiring 🌾
Position: Agronomy Teacher
Qualification: M.Sc. / NET / Ph.D.

🏫 Krishak P.G. College, Rajgarh, Mirzapur
📞 Helpline: 7668796526.

✨ Join our team of dedicated educators and contribute to shaping the future of agricultural science!

24/10/2025

𝐂𝐨𝐜𝐨𝐧𝐮𝐭 𝐒𝐡𝐞𝐥𝐥𝐬 (नारियल के छिलके) एक उत्तम पौधारोपण माध्यम हैं, क्योंकि पौधों की नर्सरी से तैयार पौध को सीधे मिट्टी में उसी छिलके के साथ रोपा जा सकता है। ये जैव-अवक्रमणीय (𝐁𝐢𝐨𝐝𝐞𝐠𝐫𝐚𝐝𝐚𝐛𝐥𝐞) होते हैं, इसलिए पौधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि, जब ये छिलके गलकर मिट्टी में मिल जाते हैं, तो पौधों को पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

🌴 𝐂𝐨𝐜𝐨𝐧𝐮𝐭 𝐒𝐡𝐞𝐥𝐥𝐬 (नारियल के छिलकों) में पौधे लगाने के फायदे 🌱

1. बायोडिग्रेडेबल (𝐁𝐢𝐨𝐝𝐞𝐠𝐫𝐚𝐝𝐚𝐛𝐥𝐞) – नारियल के छिलके स्वाभाविक रूप से मिट्टी में गल जाते हैं, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता।
2. पोषक तत्वों की आपूर्ति (𝐍𝐮𝐭𝐫𝐢𝐞𝐧𝐭 𝐒𝐮𝐩𝐩𝐥𝐲) – जब ये छिलके गलते हैं, तो वे मिट्टी को अतिरिक्त पोषक तत्व देते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।
3. जल धारण क्षमता (𝐖𝐚𝐭𝐞𝐫 𝐑𝐞𝐭𝐞𝐧𝐭𝐢𝐨𝐧) – नारियल के छिलके पानी को लंबे समय तक रोककर रखते हैं, जिससे पौधों को नमी बनी रहती है और बार-बार पानी देने की जरूरत कम पड़ती है।
4. वातन (𝐀𝐞𝐫𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧) – इसकी बनावट पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा पहुंचाने में मदद करती है, जिससे जड़ें स्वस्थ रहती हैं।
5. कीट और रोग प्रतिरोधक (𝐏𝐞𝐬𝐭 𝐑𝐞𝐬𝐢𝐬𝐭𝐚𝐧𝐭) – छिलकों में प्राकृतिक रूप से कीटों से बचाने वाले तत्व पाए जाते हैं, जिससे पौधे अधिक सुरक्षित रहते हैं।
6. आसान प्रत्यारोपण (𝐄𝐚𝐬𝐲 𝐓𝐫𝐚𝐧𝐬𝐩𝐥𝐚𝐧𝐭𝐢𝐧𝐠) – नारियल के छिलके में उगे पौधों को सीधे मिट्टी में लगाया जा सकता है, क्योंकि छिलका गलकर मिट्टी का हिस्सा बन जाता है।
यदि आप भी प्रकृति और आधुनिक कृषि के इस संगम से जुड़ना चाहते हैं तो जुड़िए कृषक पी.जी. कॉलेज, राजगढ़, मिर्जापुर के एडवांस एग्रीकल्चर प्रोग्राम्स से🌾
🎓 उपलब्ध कोर्स:
👉 𝐁.𝐒𝐜. 𝐀𝐠. (𝐇𝐨𝐧𝐬.)
👉 𝐌.𝐒𝐜. 𝐀𝐠𝐫𝐨𝐧𝐨𝐦𝐲
👉 𝐌.𝐒𝐜. 𝐇𝐨𝐫𝐭𝐢𝐜𝐮𝐥𝐭𝐮𝐫𝐞
📞 अधिक जानकारी एवं प्रवेश हेतु संपर्क करें:
☎️𝟕𝟔𝟔𝟖𝟕𝟗𝟔𝟓𝟐𝟔.

23/10/2025

आज दिनांक 𝟐𝟑𝐫𝐝 𝐎𝐜𝐭𝐨𝐛𝐞𝐫, 𝐉𝐄𝐄𝐂𝐔𝐏 (डी. फार्मा) कॉउंसलिंग की अंतिम तिथि है। इसके बाद एडमिशन नही होगा। ऐसे विधार्थी जो अभी तक एडमिशन/कॉउंसलिंग नही कराये हैं, वो आज कॉउंसलिंग करा लें। कॉउंसलिंग करते समय कॉलेज कोड 𝟒𝟑𝟕𝟔,𝟒𝟎𝟓𝟒 डालकर अपनी सीट सुनिश्चित करा लें।
अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करें।
☎️𝟕𝟔𝟔𝟖𝟕𝟗𝟔𝟓𝟐𝟔.

19/10/2025

‼️होम गार्डन / किचन गार्डन और खाद्य सुरक्षा एवं संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (UNSDGs)‼️

होम गार्डन/किचन गार्डन का अर्थ है — घर के आसपास छोटे क्षेत्र में सब्ज़ियाँ, फल, हरी पत्तियाँ, मसाले, औषधीय पौधे या फूल आदि उगाना। यह परंपरागत पद्धति न केवल परिवार को ताज़ा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।

“खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है कि हर व्यक्ति को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। किचन गार्डन इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है”

🥦 उपलब्धता(𝐀𝐯𝐚𝐢𝐥𝐚𝐛𝐢𝐥𝐢𝐭𝐲): घर पर ही नियमित रूप से सब्ज़ियाँ और फल प्राप्त होते हैं।
🍚 सुलभता (𝐀𝐜𝐜𝐞𝐬𝐬𝐢𝐛𝐢𝐥𝐢𝐭𝐲): बाजार पर निर्भरता घटती है और खर्च कम होता है।
💪 पोषण में सुधार (𝐍𝐮𝐭𝐫𝐢𝐭𝐢𝐨𝐧): परिवार को विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन मिलता है।
💰 आय के अवसर (𝐈𝐧𝐜𝐨𝐦𝐞): अतिरिक्त उत्पादन को बेचकर परिवार आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकता है।
🌿 संवेदनशीलता में कमी (𝐑𝐞𝐬𝐢𝐥𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞): संकट या महामारी के समय भोजन का स्थायी स्रोत बनता है।

17/10/2025

‼️🌾 𝐃𝐞𝐬𝐢 𝐇𝐚𝐫𝐫𝐨𝐰 – किसानों का सच्चा साथी! 🌾‼️

आजकल किसान भाई देसी हैरो का उपयोग मक्का, टमाटर, गोभी, मिर्च आदि फसलों (जो लाइन से लगाई जाती हैं) के लिए करते हैं। इस उपकरण से कार्य तेज़ी से होता है, श्रम और समय दोनों की बचत होती है।

ऐसे ही देसी जुगाड़ और आधुनिक खेती तकनीकों के बारे में जानने के लिए आज ही जुड़ें कृषक पी.जी. कॉलेज, राजगढ़ मिर्जापुर के एडवांस एग्रीकल्चर प्रोग्राम से! 🌱
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16/10/2025

‼️बिना खाद वाली पारंपरिक खेती‼️

पारंपरिक खेती वह पद्धति है जिसमें किसान आधुनिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते। इस खेती में पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों का उपयोग किया जाता है। जैसे – गोबर की खाद, हरी खाद, फसल चक्र, जैविक अपशिष्ट और पशुओं की मदद से भूमि की उर्वरता को बनाए रखा जाता है। पारंपरिक खेती में मिट्टी की गुणवत्ता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य सुरक्षित रहते हैं। यह खेती भले ही थोड़ी धीमी होती है, लेकिन लंबे समय तक भूमि को उपजाऊ और संतुलित बनाए रखती है।
यदि आप भी प्रकृति और आधुनिक कृषि के इस संगम से जुड़ना चाहते हैं तो जुड़िए कृषक पी.जी. कॉलेज, राजगढ़, मिर्जापुर के एडवांस एग्रीकल्चर प्रोग्राम्स से 🌾

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15/10/2025

🌳 पेड़ों की सुंदरता और सेहत, आपकी देखभाल से 🌳

पेड़ों की नियमित छँटाई (𝐓𝐫𝐞𝐞 𝐓𝐫𝐢𝐦𝐦𝐢𝐧𝐠) न केवल उनकी सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि उन्हें स्वस्थ और संतुलित भी रखती है। अनावश्यक शाखाओं को हटाने और पेड़ों को सही आकार देने का कार्य ट्री ट्रिमर करता है। जो पेड़ों की वृद्धि, सुरक्षा और पर्यावरण के संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है। छँटाई से पेड़ों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे उनकी जड़ें और पत्तियाँ मजबूत होती हैं। यदि आप भी प्रकृति और आधुनिक कृषि के इस संगम से जुड़ना चाहते हैं तो जुड़िए कृषक पी.जी. कॉलेज, राजगढ़, मिर्जापुर के एडवांस एग्रीकल्चर प्रोग्राम्स से 🌾

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