सफर जंक्शन

सफर जंक्शन Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from सफर जंक्शन, Education Website, Lalganj, Mirzapur.

🌍 Travel | Vlog | Explore | Discover
🛣️ Roads • Places • Experiences
❤️ हर सफर एक कहानी
🎒 जहाँ रास्ते हैं, वहाँ कहानी है...
🚗 चलो निकलते हैं एक नए सफर पर!
📸 Travel • Vlogs • Desi Life

27/08/2026

Aaj ke vlog mein hum ghoomne nikle Mahipalpur Park, New Delhi 🌳😍 जो IGI Airport के बिल्कुल पास स्थित है। इस वीडियो में आपको पार्क के खूबसूरत हरे-भरे नज़ारे, शानदार sculptures, walking paths, greenery और पूरे park का अलग-अलग view देखने को मिलेगा।

अगर आप Delhi में घूमने के लिए कोई शांत, खूबसूरत और अच्छी जगह ढूंढ रहे हैं, तो यह vlog आपके लिए है। ❤️

📍 Location: Mahipalpur, New Delhi
✈️ Near: IGI Airport, New Delhi
🎥 Video: Full Park Tour Vlog

वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share ❤️ | Comment 💬 और Subscribe 🔔 जरूर करें।

22/08/2026

आज के इस vlog में मैं आपको लेकर चल रहा हूँ अपने गांव से मिर्जापुर शहर तक के सफर पर। 🚗🌿
इस वीडियो में आपको गांव की खूबसूरत गलियां, रास्ते, आसपास का नजारा और मिर्जापुर शहर की झलक देखने को मिलेगी। ❤️
अगर आपको Village Life, Travel Vlogs और Mirzapur के खूबसूरत नजारे पसंद हैं, तो वीडियो को Like 👍 करें, Comment 💬 करें और Channel को Subscribe 🔔 जरूर करें।
आपका प्यार और Support ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है ❤️

20/08/2026

🚗✨ मिर्ज़ापुर से लालगंज का यादगार सफर | Safar Junction

इस Vlog में हम आपको लेकर चल रहे हैं मिर्ज़ापुर से लालगंज के खूबसूरत रास्तों पर। रास्ते में देखने को मिलेगा करणपुर का हरा-भरा पहाड़, प्राकृतिक नज़ारे और लालगंज थाना की झलक। 🌿⛰️

अगर आपको यात्रा, गाँव की सुंदरता और उत्तर प्रदेश की अनदेखी जगहें पसंद हैं, तो यह Vlog आपके लिए है। ❤️

📍 Route: Mirzapur → Karanpur Pahad → Lalganj

वीडियो पसंद आए तो Page Follow करें, Like करें और अपने दोस्तों के साथ Share करें।

✈️ Safar Junction – हर सफर की एक नई कहानी।

             दिल्ली की गर्म दोपहर थी। हवा में धूल तैर रही थी, और दूर पहाड़ियों के पीछे से सूरज हल्की-सी चमक फैलाता था। आ...
30/11/2025


दिल्ली की गर्म दोपहर थी। हवा में धूल तैर रही थी, और दूर पहाड़ियों के पीछे से सूरज हल्की-सी चमक फैलाता था। आज की तरह ऊँची-ऊँची इमारतें नहीं थीं… बस जंगल, मैदान और कुछ टूटे-फूटे खंडहर।

और इन्हीं खंडहरों के बीच, अकेला खड़ा था —
क़ुतुब मीनार।
वैसे ही सीधा, वैसे ही गर्व से भरा, जैसे एक योद्धा सदियों से पहरा दे रहा हो।

यह तस्वीर 1860–1880 के बीच की है —
जब कैमरे नए थे, दिल्ली शांत थी, और क़ुतुब मीनार अपनी असली, कच्ची रौनक में दिखाई देती थी।
लकड़ी के तिपाए पर रखा बड़ा सा कैमरा, उसके सामने खड़ा फोटोग्राफर, और चुपचाप पोज़ देती यह मीनार —
मानो इतिहास खुद को तस्वीर में कैद करवा रहा हो।

लेकिन क़ुतुब मीनार की कहानी इससे बहुत पुरानी है…
साल था 1192।

दिल्ली के आसमान पर नए शासक कुतुबुद्दीन ऐबक का राज शुरू हुआ था।
युद्धों की आग ठंडी हो चुकी थी, और वह दिल्ली में अपनी जीत का एक निशान छोड़ना चाहता था —
ऐसा निशान, जो सदियों तक दुनिया को उसकी ताक़त याद दिलाए।

और उसी सोच से रखा गया पहला पत्थर —
क़ुतुब मीनार का।

लेकिन ऐबक इसे पूरा नहीं कर पाया।
उसने सिर्फ पहली मंज़िल तैयार की और फिर दुनिया से चला गया।
बाकी चार मंज़िलें उसके दामाद इल्तुतमिश ने बनवाईं।

यह मीनार सिर्फ पत्थर नहीं थी—
यह एक घोषणा थी:
“नया दौर शुरू हो चुका है।”

      साल था लगभग 1947 का—भारत आज़ादी की दहलीज़ पर खड़ा था।चांदनी चौक की सड़क पर सुबह का सूरज हल्की धूप बिखेर रहा था। दू...
30/11/2025


साल था लगभग 1947 का—भारत आज़ादी की दहलीज़ पर खड़ा था।
चांदनी चौक की सड़क पर सुबह का सूरज हल्की धूप बिखेर रहा था। दूर से ट्राम की घंटी की आवाज़ आती थी, और उसके ट्रैक पर पीछे से लोगों का सैलाब चलता हुआ लगता था।

सड़क के बीचों-बीच खड़ा था दिल्ली का मशहूर घंटाघर—
लंबा, शाही, और अपने चारों ओर की भीड़ से बेख़बर, मानो सदियों से शहर को अपनी आँखों के सामने बदलते देखता आया हो।

घंटाघर के नीचे से रोज़ लोगों की दुनिया गुजरती थी—
रोटी बेचने वाला हलवाई, अचार की खुशबू फैलाती दुकाने, शादी का सामान ढोते रिक्शे, जल्दी में भागता कोई युवक, और धीरे-धीरे चलती बुज़ुर्गों की टोली।

उस समय की ज़िंदगी में एक अजीब-सी शांति थी…
भीड़ थी, आवाज़ें थीं, मगर हर कदम में अपनापन था।

ट्राम धीरे-धीरे खड़खड़ाती हुई घंटाघर के सामने से निकली।
कंडक्टर ने सीटी बजाई, और कुछ बच्चे उसे देखकर खिलखिला उठे।
सड़क के किनारे बैठे लोग ठंडी हवा में चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे।

उसी क्षण, किसी ने ऊपर घड़ी की ओर देखा—
घंटाघर की बड़ी सुइयाँ जैसे शहर के हर पल को अपने अंदर कैद करती जा रही थीं।
दिल्ली बदल रही थी।
लोग बदल रहे थे।
वक्त बदल रहा था…
पर घंटाघर?
वह अपने पत्थरों में पुरानी दिल्ली की आत्मा को संभाले खड़ा था।

लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह टॉवर अपने आख़िरी सालों में है।
कुछ ही वर्षों बाद इसे “कमज़ोर” और “खतरा” बताकर गिरा दिया जाएगा।
और यह सड़क—जो आज शांत और खुली दिखती है—
एक दिन ट्रैफिक से भर जाएगी…
लोग भागेंगे, दुकानें बदल जाएँगी, ट्राम गायब हो जाएगी…
लेकिन इस तस्वीर में कैद यह पल कभी नहीं बदलेगा।

यह वही पल है—
जब पुरानी दिल्ली का दिल अभी भी धीरे-धीरे धड़क रहा था।
जब लोगों की ज़िंदगी घड़ी की टिक-टिक पर नहीं,
बल्कि एक-दूसरे के साथ बिताए गए पलों पर चलती थी।

और घंटाघर?
आज वह नहीं है,
लेकिन इस फोटो में वह अब भी चांदनी चौक की धड़कन की तरह ज़िंदा है—
अपने आख़िरी घंटों की कहानी सुनाता हुआ।

27/11/2024

दास्तां सुनाऊं और मजाक बन जाऊं..
बेहतर है, खामोश रहूं और रज़ाक बन जाऊं..🙏

29/05/2024

गांव बदलकर शहर हो रहे हैं।
और इंसान बदलकर जहर हो रहे है.....

29/05/2024

यह कहकर मेरे दिल ने हौसले बढ़ाए हैं...
गमों की धूप के आगे खुशी के साए हैं...

29/05/2024

दब के मर जाओगे जवाबों में......
कभी मत पूछना जिंदगी क्या है......

29/05/2024

सभी को खुश रखने की कोशिश मत कर…..
तू इंसान है दारू नहीं 🫣

Address

Lalganj
Mirzapur
231211

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when सफर जंक्शन posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share