03/11/2025
गीत — संध्या-मालती (चार बजे की रानी) �
(1)
दिनभर सोई रहती प्यारी,
धूप से जैसे रूठी क्यारी,
साँझ ढले जब पवन सुहानी,
खिल उठती ये फूलों की रानी। �
(सहगान)
चार बजे जब घड़ी बताए,
सुगंध हवाओं में भर जाए,
संध्या- मालती, रात की रानी,
महके आँगन, महके कहानी। �
(2)
पीली, गुलाबी, सफ़ेद कली,
रंग बदलती, मधुर छली,
एक ही डाली, रूप अनेक —
जीवन का यह सुंदर लेख। �
(सहगान)
चार बजे जब घड़ी बताए,
सुगंध हवाओं में भर जाए,
कृष्णकेली, प्यारी मनमानी,
महके आँगन, महके कहानी। �
(3)
चाँदनी में मुसकाती जाती,
भोर हुए फिर सोने जाती,
सीख यही हर दिल को देती —
खिलो समय पर, जग को देती। �
(अंतिम सहगान)
चार बजे जब घड़ी बताए,
सुगंध हवाओं में भर जाए,
संध्या- मालती, रात की रानी,
प्रेम सुगंध बिखेर कहानी। �