11/02/2026
*आप सभी को ज्योतिषी पंडित विकास काकड़ा का प्रणाम।*
*अभी यूट्यूब पर एक प्रसिद्ध ज्योतिष जिनमें काफी फॉलोअर हैं गुरु और केतु की युति बहुत उनके द्वारा अच्छी बताई जा रही है. ऐसा आदमी आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति करता है. कुछ थॉट ऑफ प्रिंसिपल के अनुसार इस योग को मोक्ष के रूप में देखा जाता है.*जबकि यही एस्ट्रोलॉजर राहु और गुरु को बुरा योग बता रहे हैं।*
*ऑब्जेक्शन के कारण।*
*गुरु सात्विक ग्रह राहु और केतु तामसिक ग्रह हैं. शनि से भी निकट जाति का राहु केतु को माना जाता है.*
*मेष लग्न की कुंडली में भाग्य भाव का और 12वीं भाव का संबंध गुरु से होता है. भाग्य भाव में होने का मतलब है कि इसके बाद यह आठवें भाव में आएगा यानी उच्च आरोही कह सकते हैं.*
*परंतु कुछ लोग धनु राशि में ही इसे उच्च का फल देने वाला मानते हैं.*
*उच्च के मामले में वह शुभ फल देगा यह बड़ा कांसेप्ट है तामसिक ग्रह है तो मैटेरियलिस्टिक चीज देगा जो सात्विक ग्रह से मिल नहीं खाती हैं*
*गुरु मुख्य रूप से धर्म और आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति वाला माना जाए तो केतु को कुछ लोग अलगाव यानी कि इससे निवृत होने यानी से दूर होने के प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है*दोनों के क्या लक्ष्य हैं वह आपको क्या दे सकते हैं दोनों में विरोधाभास होने पर यह कैसे अध्यात्म के क्षेत्र में उन्नति कारक योग बन सकता है*
*राहु एक तरह की प्यास है अगर निकृष्ट जाति का मन कर यह गुरु चांडाल दोष बनता है तो धर्म के क्षेत्र में यह कैसे आडंबर नहीं देगा क्या यह सातवें ज्ञान देगा अगर इसे चांडाल योग कह रहे हैं तो गुरु केतु को क्यों नहीं.*
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