22/06/2026
BBSSM School proudly celebrates the outstanding performance of its students in the KCH Cup 3×3 Basketball Tournament, organized at IIMT University, Meerut, on 21 June 2026. Demonstrating exceptional skill, teamwork, and sportsmanship, the Under-14 Girls Team secured the Runner-Up (2nd Position), while the Under-17 Boys Team clinched 3rd Position with a commendable display of talent and determination.
These achievements are a testament to the hard work and dedication of the students, as well as the guidance and support provided by their coaches and mentors. The entire BBSSM family congratulates all the players for bringing laurels to the school and wishes them continued success in their future sporting endeavors.
"Success in sports is not just about winning medals, but about developing discipline, teamwork, and the spirit to strive for excellence."🏀🏆
21/06/2026
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दिनांक 21 जून को बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मेरठ में उत्साह, अनुशासन एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता, पूर्व प्रधानाचार्य श्री कृष्ण कुमार शर्मा, भवन संयोजक श्री ज्योति प्रसाद (सदस्य, केंद्रीय कार्यकारिणी, योग विज्ञान संस्थान), योग शिक्षक श्री धीरज कुमार, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यगण, समस्त आचार्य-आचार्याएँ तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे आज सम्पूर्ण विश्व ने अपनाया है। उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की गई तथा वर्ष 2015 से विश्वभर में इसका आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पद्धति है, जो तनाव को कम करने, शारीरिक लचीलापन बढ़ाने, मांसपेशियों को सुदृढ़ करने तथा मानसिक एकाग्रता एवं सकारात्मक सोच के विकास में अत्यंत सहायक है।
इस अवसर पर भवन संयोजक श्री ज्योति प्रसाद (सदस्य, केंद्रीय कार्यकारिणी, योग विज्ञान संस्थान) के निर्देशन में विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। उन्होंने ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, वज्रासन, शवासन तथा सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराते हुए उनके लाभों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सूर्य नमस्कार बारह योग मुद्राओं का समन्वित क्रम है, जो शरीर को स्फूर्ति एवं ऊर्जा प्रदान करता है, रक्त संचार को सुचारु बनाता है, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है तथा सम्पूर्ण शरीर को स्वस्थ एवं सक्रिय बनाए रखने में सहायक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
योग शिक्षक श्री धीरज कुमार ने अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी तथा उज्जायी जैसे प्राणायामों का अभ्यास करवाया तथा उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राणायाम श्वसन तंत्र को सशक्त बनाता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि करता है, तनाव एवं चिंता को दूर करता है तथा मानसिक शांति एवं एकाग्रता प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित योग एवं प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है तथा व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को हठयोग, राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग तथा अष्टांग योग के विभिन्न स्वरूपों से भी परिचित कराया गया। सभी ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास करते हुए “करें योग, रहें निरोग” का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकगण, विद्यार्थियों एवं प्रबंध समिति के सदस्यों ने स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन के लिए नियमित योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम अत्यंत सफल, प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में संपन्न हुआ।
10/06/2026
बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, शास्त्री नगर, मेरठ में चल रहे दक्षता वर्ग के दसवें दिवस पर आज वंदना सत्र का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सभी शिक्षार्थियों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में कमला देवी सरस्वती शिशु मंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता अग्रवाल जी उपस्थित रहीं। उनके उद्बोधन का विषय “स्वत्व का बोध – वंदे मातरम्” रहा।
वंदना सत्र के प्रारम्भ में डॉ. वंदना शर्मा जी, प्रधानाचार्या, भगवती देवी सरस्वती बालिका मंदिर, मुज़फ्फरनगर द्वारा श्रीमती गीता अग्रवाल जी का स्वागत अंगवस्त्र (पटका) पहनाकर किया गया।
💐 मुख्य उद्बोधन के प्रमुख बिंदु
श्रीमती गीता अग्रवाल जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में बताया कि—
“वंदे मातरम्” भारत की राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था।
यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास “आनंदमठ” (1882) में प्रकाशित हुआ था।
यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जन-जागरण का महत्वपूर्ण स्रोत बना।
उन्होंने वीर सैनिक सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव के शौर्य का उल्लेख कर शिक्षार्थियों को प्रेरित किया।
साथ ही बताया कि वंदे मातरम् के रचनाकाल को लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं l, जो इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।
🎉उपस्थित सम्माननीय अतिथि
* श्री विशोक जी (प्रदेश निरीक्षक, भारतीय शिक्षा समिति)
* श्री महेश शर्मा जी (शैक्षिक प्रमुख)
* श्री मदन पाल जी (प्रदेश निरीक्षक, शिशु शिक्षा समिति)
* विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी
🎉संचालन
आज के कार्यक्रम का सफल संचालन श्री भगत सिंह जी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम अनुशासित, प्रेरणादायी एवं राष्ट्रभावना से परिपूर्ण रहा। वंदना सत्र ने सभी शिक्षार्थियों में “स्वत्व का बोध” एवं राष्ट्रीय चेतना को और अधिक सुदृढ़ किया।
Vidya Bharti Meerut Prant, Pkg Gupta, Geeta Agarwal
09/06/2026
बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल
डी ब्लॉक, शास्त्री नगर, मेरठ में चल रहे दक्षता वर्ग के नवम दिवस का शुभारंभ प्रातः वंदना सत्र के पश्चात हुआ। पूरे वातावरण में अनुशासन, ऊर्जा एवं सकारात्मकता का भाव देखने को मिला। आज के मुख्य वक्ता श्री प्रदीप गुप्ता जी (प्रान्तीय संगठन मंत्री) रहे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में “हमारा लक्ष्य (विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान)” विषय पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती का लक्ष्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो संस्कारवान, आत्मनिर्भर, चरित्रवान एवं राष्ट्रभक्त हों। उन्होंने यह भी समझाया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के साथ समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना है।
कार्यक्रम में विद्या भारती के शैक्षिक दृष्टिकोण के अनुसार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नैतिक मूल्यों के संवर्धन, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा अनुशासन पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर संस्कृत श्लोक के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को भी समझाया गया—
“उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥”
अर्थ:
जिस भूमि के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र स्थित है, उस भूभाग को भारत कहा जाता है। जहाँ भारत की संतति निवास करती है, वही भारत वर्ष कहलाता है।
सनातन धर्म का अर्थ:
सनातन धर्म का अर्थ है “शाश्वत धर्म” या “सदैव रहने वाला धर्म”। यह ऐसा धर्म है जो समय के साथ नष्ट नहीं होता, बल्कि जीवन के शाश्वत मूल्यों जैसे सत्य, धर्म, करुणा, अहिंसा, कर्तव्य और मानवता पर आधारित है।
इस अवसर पर निम्नलिखित गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही—
श्री विशोक जी (प्रदेश निरीक्षक)
श्री प्रभात कुमार गुप्ता (प्रधानाचार्य, बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर, मेरठ)
श्रीमती गीता अग्रवाल (प्रधानाचार्या, कमला देवी सरस्वती शिशु मंदिर)
श्रीमती सीमा श्रीवास्तव (प्रधानाचार्या, शिशु वाटिका)
श्री कृष्ण कुमार शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य)
दक्षता वर्ग में उपस्थित सभी शिक्षार्थीगण एवं संचालन टोली के सदस्यों ने पूरे उत्साह एवं अनुशासन के साथ सहभागिता की। सभी ने इस सत्र से प्रेरणा लेकर अपने शिक्षण कार्य में और अधिक दक्षता लाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में हुआ।
Vidya Bharti Meerut Prant
08/06/2026
शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती पश्चिम उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में चल रहे 10 दिवसीय आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत “समग्र विकास की भारतीय संकल्पना” विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया।
इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी ने प्रतिभागियों को भारतीय दृष्टिकोण से समग्र विकास की अवधारणा पर मार्गदर्शन प्रदान किया। यह सत्र ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।
अपने उद्बोधन में श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी ने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा केवल भौतिक या बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास का समन्वय है। यही समग्र विकास की भारतीय संकल्पना है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में जहाँ केवल परीक्षा एवं रोजगार केंद्रित दृष्टिकोण पर बल दिया जाता है, वहीं भारतीय दृष्टि विद्यार्थी के चरित्र निर्माण, संस्कार निर्माण एवं जीवन मूल्यों के विकास पर अधिक जोर देती है। यही कारण है कि भारतीय शिक्षा पद्धति “विद्या से अमृतत्व की ओर” की भावना को साकार करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि समग्र विकास का अर्थ केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, सामाजिक उत्तरदायित्व, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का विकास करना है।
श्री गुप्ता जी ने आचार्यों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग, सेवा भाव एवं नैतिक मूल्यों का विकास करें, जिससे वे एक जिम्मेदार एवं संस्कारवान नागरिक बन सकें।
इस अवसर पर प्रशिक्षण वर्ग में उपस्थित समस्त आचार्य-दीदी एवं प्रतिभागियों ने इस विषय को अत्यंत उपयोगी एवं जीवनोपयोगी बताया तथा इसे अपने शिक्षण व्यवहार में अपनाने का संकल्प लिया।
अंत में प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता जी ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि समग्र विकास की यह भारतीय संकल्पना ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है और यही भाव भविष्य की पीढ़ी को सशक्त बनाएगा।
Pkg Gupta
Vidya Bharti Meerut Prant
08/06/2026
शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती पश्चिम उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में चल रहे 10 दिवसीय आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत “साइबर सुरक्षा” विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी सिद्ध हुआ।
प्रातःकालीन वंदना सत्र के पश्चात मुख्य वक्ता के रूप में पधारे श्री सचिन सैनी जी (आई.टी. प्रमुख, मेरठ प्रान्त) ने साइबर सुरक्षा विषय पर विस्तृत एवं व्यावहारिक उद्बोधन दिया।
अपने उद्बोधन में श्री सचिन सैनी जी ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। आज शिक्षा, बैंकिंग, संचार एवं दैनिक जीवन की अधिकांश सेवाएँ इंटरनेट पर आधारित हैं, ऐसे में प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए सतर्कता एवं जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि अनजान लिंक पर क्लिक करना, कमजोर पासवर्ड का उपयोग करना, ओटीपी साझा करना तथा सोशल मीडिया पर अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी साझा करना साइबर अपराधों के प्रमुख कारण हैं। इनसे बचाव के लिए सावधानी ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है।
श्री सैनी जी ने आगे कहा कि सभी आचार्यों एवं विद्यार्थियों को “डिजिटल साक्षरता” के साथ-साथ “डिजिटल अनुशासन” को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने पासवर्ड सुरक्षा, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सुरक्षित ब्राउज़िंग तथा फर्जी वेबसाइटों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम तकनीक का सही एवं सुरक्षित उपयोग करेंगे तो यह हमारे जीवन को सरल, तेज एवं सशक्त बनाएगी, लेकिन लापरवाही की स्थिति में यही तकनीक गंभीर खतरे का कारण भी बन सकती है।
इस अवसर पर प्रशिक्षण वर्ग में उपस्थित सभी आचार्य-दीदी एवं प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं तथा इसे अपने शिक्षण एवं दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने मुख्य वक्ता श्री सचिन सैनी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सत्र अत्यंत उपयोगी रहा, जिससे सभी प्रतिभागियों में डिजिटल जागरूकता एवं साइबर सुरक्षा के प्रति नई समझ एवं सजगता का विकास हुआ।
Vidya Bharti Meerut Prant Gupta
08/06/2026
शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती पश्चिम उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में चल रहे 10 दिवसीय आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग का आठवां दिन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा। प्रातःकालीन वंदना सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे श्री संदीप त्यागी जी (सह मंत्री, भारतीय शिक्षा समिति पश्चिम उत्तर प्रदेश) ने “पंच परिवर्तन” विषय पर अपना सारगर्भित उद्बोधन दिया।
प्रशिक्षण वर्ग के आठवें दिन की शुरुआत परंपरागत वंदना, सरस्वती मंत्र एवं ध्येय मंत्र के साथ हुई। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
श्री संदीप त्यागी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्त, चरित्रवान एवं कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। इसी लक्ष्य की पूर्ति हेतु “पंच परिवर्तन” की संकल्पना को प्रत्येक आचार्य के जीवन और शिक्षण में उतारना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आचार्य स्वयं इन पांच आयामों को आत्मसात करेंगे, तभी वे विद्यार्थियों के माध्यम से समाज में परिवर्तन ला सकेंगे।
मुख्य वक्ता श्री त्यागी जी ने “पंच परिवर्तन” के पांचों आयामों को विस्तार से समझाया—
1. कुटुंब प्रबोधन: उन्होंने कहा कि सशक्त राष्ट्र की नींव सशक्त परिवार है। वर्तमान में परिवारों में संवादहीनता बढ़ रही है। आचार्यों का दायित्व है कि वे अभिभावकों को भारतीय कुटुंब व्यवस्था के महत्व, संस्कार एवं सामूहिकता का बोध कराएं। सप्ताह में एक दिन सामूहिक भोजन, कथा-कीर्तन एवं वृद्धजनों का सम्मान जैसी परंपराएं पुनर्जीवित करनी होंगी।
2. पर्यावरण एवं जल संरक्षण: श्री त्यागी ने बताया कि “प्रकृति रक्षति रक्षिता:” का भाव हमें बच्चों में जगाना है। प्रत्येक विद्यालय एवं घर में वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग तथा ऊर्जा संरक्षण को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। आचार्य स्वयं उदाहरण बनकर छात्रों को प्रेरित करें।
3. सामाजिक समरसता: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय समाज की शक्ति उसकी विविधता में एकता है। जाति, भाषा या क्षेत्र के भेदभाव को मिटाकर “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के भाव को जागृत करना है। विद्यालयों में सामूहिक भोज, त्योहारों का संयुक्त आयोजन एवं सेवा बस्ती कार्य के माध्यम से समरसता को बढ़ावा देना चाहिए।
4. स्वयं जागरण: मुख्य वक्ता ने कहा कि आर्थिक स्वावलंबन के बिना सामाजिक प्रगति अधूरी है। हमें अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्राथमिकता देनी होगी। “वोकल फॉर लोकल” केवल नारा नहीं, जीवन मंत्र बने। आचार्य बच्चों को स्थानीय कारीगरों, उत्पादों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराएं।
5. नागरिक कर्तव्य: श्री त्यागी जी ने कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी जरूरी है। स्वच्छता, यातायात नियमों का पालन, मतदान, राष्ट्रगान का सम्मान एवं सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे कर्तव्यों का बोध छात्रों को कराना प्रत्येक आचार्य का दायित्व है।
इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति के मंत्री श्री प्रदीप भारद्वाज जी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन शैली है। यदि 5 वर्षों तक हम निरंतर इस पर कार्य करें तो भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है। उन्होंने सभी आचार्यों से आह्वान किया कि वे इसे अपने संकल्प पत्र में शामिल करें।
कार्यक्रम में विद्या भारती पश्चिम उत्तर प्रदेश के शैक्षिक सचिव श्री महेश सिंह शर्मा जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षण वर्ग की अब तक की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इस अवसर पर कमला देवी सरस्वती शिशु मंदिर की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता अग्रवाल, मनोहरी देवी शिशु वाटिका की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा श्रीवास्तव सहित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे समस्त आचार्य-दीदी उपस्थित रहे। प्रधानाचार्य श्री प्रभात कुमार गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आठवें दिन का यह सत्र निश्चित रूप से सभी आचार्यों के लिए दिशा-निर्देशक सिद्ध होगा और वे पंच परिवर्तन के वाहक बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
Vidya Bharti Meerut Prant