16/07/2025
#विश्व_सर्प_दिवस 16 जुलाई
बरसात में प्रायः रोज ही अखबारों में सांप काटने से मौत या जहरीले जंतु के काटने से मरने की खबरें छपती रही हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग चालीस हजार लोग सांप काटने से मरते हैं।
उत्तर प्रदेश के अकेले पूर्वांचल के जिलों में ही तीन चार हजार लोग गर्मी और बरसात के दिनों में सर्पदंश से अकाल मौत मरते हैं। जबकि करीब पंद्रह हजार लोगों को सांप काटते हैं जिनमें विषहीन सांप के मामले अधिक होते हैं और ये लगभग सभी बच जाते हैं। कुछ की दहशत से ही हार्ट फेल होने से मौत हो जाती है।धामन और पानी वाले सांप डेड़हा भी लोगों को अक्सर काटते हैं, इन्हें विषदन्त नहीं होते। इनका काटा व्यक्ति खतरे से बाहर रहता है। दोमुही या गूंगी तो काटती तक नहीं। हां असावधान रहने पर अजगर अपनी कुंडली में दबाकर मार सकता है। यह भी एक विषहीन सांप है।
सर्पदंश का सबसे दुखद पहलू है कि इसमें एक खाते पीते परिवार की खुशियाँ अचानक छिन जाती हैं। सांप काटे व्यक्ति की दर्दनाक मृत्यु होती है। वह सबको देखता सुनता रहता है मगर शरीर के अंग लकवा ग्रस्त होते चलते हैं और अन्त में जबान लड़खड़ाने लगती है और बोलना बन्द हो जाता है। हम लोगों के निरंतर अभियान के बाद दैवीय आपदाओं मे जैसे बिजली गिरने आदि से मौत पर सरकारी मदद परिवार को मिलती है उसी तरह सर्पदंश में भी मिलने लगी है क्योंकि कई परिवारों के कामकाजी मुखिया की अकाल मृत्यु हो जाती है।
हमारी तरफ मात्र नाग यानि कोब्रा और करईत यानि क्रैत ही खतरनाक विषैले सांप हैं। हां सोनभद्र के दुद्धी क्षैत्र में और फैजाबाद के पास कहीं कहीं वाईपर भी मिलने की सूचना है। नाग या कोब्रा जो फन वाला होता है और क्रैत दोनों प्रायः मानवीय बसाहटों के निकट या गांवों में तो घरों के भीतर चले जाते हैं। अक्सर वे चूहों का पीछा करते हुये घरों में आते हैं। इनका प्रजनन काल मार्च अप्रैल से शुरु होता है और सक्रियता बरसात भर रहती है। ऐसे समय घर के आस पास कूड़े के ढेर, ईंट पत्थर साफ कर देना चाहिए। क्योंकि उसमें ही ये अक्सर आ जाते हैं।
कोब्रा गुस्सैल और आक्रामक होता है। इसके काटने पर दो सूजे धसाने जैसे साफ और बड़े निशान जो इनके ऊपरी जबड़े के विषदंतों के होते हैं साफ देखे जा सकते हैं, शेष जबड़े के दांत बहुत बारीक होते हैं और साफ नहीं उभरते। आधे इंच की समांतर दूरी के ये बड़े रक्तिम निशान और सूजन कोब्रा काटने का प्रमुख लक्षण है। इनके देखते ही सावधान होना चाहिए और नीम हकीमी और ओझाई सोखाई के चक्कर में न पड़कर सीधे जिला अस्पताल दंशित व्यक्ति को यथासंभव स्थिर रखते हुये पहुंचाना चाहिए। वहाँ एन्टीवेनम इंजेक्शन और कभी कभी इसके रिएक्शन की स्थिति में डेकाड्रान या कोरामिन इंजेक्शन लगाने से जान शर्तिया बचाई जा सकती है।
एन्टीवेनम शक की दशा में भी लगाया जा सकता है क्योंकि यह विष नहीं प्रतिविष है और मौत के मामले में च्वायस ठीक नहीं। हां शरीर में कितना विष गया है उसके मुताबिक एन्टीवेनम के दो - चार से चौदह पंद्रह वायल लग सकते हैं। इसलिये हर जिला प्रशासन गर्मी बरसात में यह सुनिश्चित कर ले कि जिला अस्पताल और पीएचसी पर पर्याप्त संख्या में एन्टीवेनम वायल उपलब्ध हों। संबन्धित अधिकारी समय समय पर इसे चेक भी करें।
अब स्वास्थ्य विभाग की वैन भी बुलाकर सांप काटे व्यक्ति को अस्पताल ले जाया जा सकता है और विलम्ब अधिक न हो इसलिये निजी साधन से भी समय रहते अस्पताल पहुंचना चाहिए। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की नयी गाईडलाईंस के मुताबिक दंश के स्थान पर चीरा लगाने और बहुत कसते हुये बांधने आदि की मनाही है। बस किसी मजबूत डंडे से प्रभावित भाग यदि हाथ या पैर है तो उसे स्थिर और सीधा रखने के लिए उसी के साथ बांध देना चाहिए ताकि वह ज्यादा हिले डुले नहीं।
देखा यह जा रहा है कि सर्पदंश के इलाज में जिस तरह की तत्परता होनी चाहिए और ध्यान रखना चाहिए वह चिकित्सकों में नहीं है। क्योंकि उन्हे सर्पदंश के इलाज में उपयुक्त प्रशिक्षण नहीं होता। पीएचसी के डाक्टर तो सर्पदंश के मामले को देखते ही पल्ला छुड़ा लेते हैं। अपनी जिम्मेदारी से इस तरह भागना उचित नहीं है। जरुरी है कि सर्पदंश के कुशल चिकित्सक के नेतृत्व में हर जिले मुख्यालय पर हर वर्ष पीएचसी के चिकित्सकों के लिए एक कार्यशिविर आयोजित हो जिसमें जनपद के जिलाधिकारी और सीएमओ भी समय निकाल कर अवश्य उपस्थित रहें।पत्रकार भी रहें क्योंकि अक्सर ग्रामीण पत्रकार या जिलों के डेस्क संभालने वाले पत्रकार बन्धु "जहरीले जन्तु के काटने" जैसे भ्रामक और अनुत्तरदायित्व भरे शीर्षक से खबरें देते हैं। जबकि वे सभी मामले सर्पदंश के होते हैं बाकि और कोई ऐसा जहरीला "जन्तु" गांवों में नहीं है जो जानलेवा हो।
कोब्रा के बाद करईत की भी चर्चा कर लें जो इस मामले में कोब्रा से अधिक खतरनाक है कि इस सांप की, कोब्रा के विष की आधी मात्रा ही जानलेवा है। और यह बहुत शान्त सांप है। अक्सर रात में सोते वक्त काटता है। यह वही सांप है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका काटा सुबह का सूरज नहीं देखता। इसके लक्षण भी ठीक से नहीं उभरते। विषदन्त के निशान भी महीन होते हैं। इसलिये ऐसे मामले में जोखिम न उठाकर सीधे जिला अस्पताल का रुख करना चाहिए।
सर्पदंश से बचाव और उपचार में आपकी सक्रियता किसी की जान बचा सकती है। इसलिये इस समय यह जानकारी औरों को दीजिये और भगवान के लिये झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। झाड़फूंक के 99 फीसदी मामले का अन्जाम दर्दनाक मौत ही होती है।
सर्प और सर्पदंश से जुड़ी आपकी जिज्ञासाओं का स्वागत है। अकेला सांप ही सम्पूर्ण जीव जगत का ऐसा प्राणी है जिसको लेकर सबसे अधिक भ्रांतियां हैं।
श्रावण, सांप और भ्रांति।
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भ्रांति( 1) सांप दुद्ध पीते है।
सत्य- सांप मांसाहारी होते हैं, दुग्ध नहीं पचा सकते अतः सांप दूध नहीं पीते।
भ्रांति( 2) सांप बिन की धुन पर नाचते है।
सत्य - सांप की सुनने की क्षमता बहुत कमजोर होती है सांप केवल कंपन महसूस करते हैं यह केवल बीन की गति हिलने डुलने पर प्रतिक्रिया करते हैं लोगों को भ्रांति होती है यह नाच रहे हैं।
भ्रांति( 3) शेषनाग अपने सर पर मणि रखते हैं।
सत्य - यह केवल मिथक है इसका कोई प्रमाण नहीं है।
भ्रांति( 4) सांपों के पेट पूछ में भी जहर होता है।
सत्य -- सांपों के समस्त शरीर में जहर नहीं होता केवल मुंह में की विष ग्रंथियों में जहर होता है वह भी कोबरा करेत वाइपर जैसे सर्पों में।
भ्रान्ति (4) सांप अपने मारने वाले की फोटो आंखों में खींच लेता है।
सत्य- यह भी एक मिथक है जिससे बॉलीवुड की फिल्मों ने प्रचारित किया है ।
सर्पों के ऐसे अनेकों मिथक प्रचलित हैं जिनका निराकरण किया जाना जरूरी है । प्रत्येक जीव का इको सिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान है भगवान की प्रत्येक रचना इस सृष्टि में सार्थक प्रयोजनयुक्त है।
12/07/2025