Shodh Sahyog

Shodh Sahyog

Share

A helping hand in research, shodh sahyog assist you in ...Ph.D and other tasks.

Shodh sahyog help you in thesis writing, research paper writing, indexing, characterisation etc.

16/07/2025

#विश्व_सर्प_दिवस 16 जुलाई
बरसात में प्रायः रोज ही अखबारों में सांप काटने से मौत या जहरीले जंतु के काटने से मरने की खबरें छपती रही हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग चालीस हजार लोग सांप काटने से मरते हैं।

उत्तर प्रदेश के अकेले पूर्वांचल के जिलों में ही तीन चार हजार लोग गर्मी और बरसात के दिनों में सर्पदंश से अकाल मौत मरते हैं। जबकि करीब पंद्रह हजार लोगों को सांप काटते हैं जिनमें विषहीन सांप के मामले अधिक होते हैं और ये लगभग सभी बच जाते हैं। कुछ की दहशत से ही हार्ट फेल होने से मौत हो जाती है।धामन और पानी वाले सांप डेड़हा भी लोगों को अक्सर काटते हैं, इन्हें विषदन्त नहीं होते। इनका काटा व्यक्ति खतरे से बाहर रहता है। दोमुही या गूंगी तो काटती तक नहीं। हां असावधान रहने पर अजगर अपनी कुंडली में दबाकर मार सकता है। यह भी एक विषहीन सांप है।

सर्पदंश का सबसे दुखद पहलू है कि इसमें एक खाते पीते परिवार की खुशियाँ अचानक छिन जाती हैं। सांप काटे व्यक्ति की दर्दनाक मृत्यु होती है। वह सबको देखता सुनता रहता है मगर शरीर के अंग लकवा ग्रस्त होते चलते हैं और अन्त में जबान लड़खड़ाने लगती है और बोलना बन्द हो जाता है। हम लोगों के निरंतर अभियान के बाद दैवीय आपदाओं मे जैसे बिजली गिरने आदि से मौत पर सरकारी मदद परिवार को मिलती है उसी तरह सर्पदंश में भी मिलने लगी है क्योंकि कई परिवारों के कामकाजी मुखिया की अकाल मृत्यु हो जाती है।

हमारी तरफ मात्र नाग यानि कोब्रा और करईत यानि क्रैत ही खतरनाक विषैले सांप हैं। हां सोनभद्र के दुद्धी क्षैत्र में और फैजाबाद के पास कहीं कहीं वाईपर भी मिलने की सूचना है। नाग या कोब्रा जो फन वाला होता है और क्रैत दोनों प्रायः मानवीय बसाहटों के निकट या गांवों में तो घरों के भीतर चले जाते हैं। अक्सर वे चूहों का पीछा करते हुये घरों में आते हैं। इनका प्रजनन काल मार्च अप्रैल से शुरु होता है और सक्रियता बरसात भर रहती है। ऐसे समय घर के आस पास कूड़े के ढेर, ईंट पत्थर साफ कर देना चाहिए। क्योंकि उसमें ही ये अक्सर आ जाते हैं।

कोब्रा गुस्सैल और आक्रामक होता है। इसके काटने पर दो सूजे धसाने जैसे साफ और बड़े निशान जो इनके ऊपरी जबड़े के विषदंतों के होते हैं साफ देखे जा सकते हैं, शेष जबड़े के दांत बहुत बारीक होते हैं और साफ नहीं उभरते। आधे इंच की समांतर दूरी के ये बड़े रक्तिम निशान और सूजन कोब्रा काटने का प्रमुख लक्षण है। इनके देखते ही सावधान होना चाहिए और नीम हकीमी और ओझाई सोखाई के चक्कर में न पड़कर सीधे जिला अस्पताल दंशित व्यक्ति को यथासंभव स्थिर रखते हुये पहुंचाना चाहिए। वहाँ एन्टीवेनम इंजेक्शन और कभी कभी इसके रिएक्शन की स्थिति में डेकाड्रान या कोरामिन इंजेक्शन लगाने से जान शर्तिया बचाई जा सकती है।

एन्टीवेनम शक की दशा में भी लगाया जा सकता है क्योंकि यह विष नहीं प्रतिविष है और मौत के मामले में च्वायस ठीक नहीं। हां शरीर में कितना विष गया है उसके मुताबिक एन्टीवेनम के दो - चार से चौदह पंद्रह वायल लग सकते हैं। इसलिये हर जिला प्रशासन गर्मी बरसात में यह सुनिश्चित कर ले कि जिला अस्पताल और पीएचसी पर पर्याप्त संख्या में एन्टीवेनम वायल उपलब्ध हों। संबन्धित अधिकारी समय समय पर इसे चेक भी करें।

अब स्वास्थ्य विभाग की वैन भी बुलाकर सांप काटे व्यक्ति को अस्पताल ले जाया जा सकता है और विलम्ब अधिक न हो इसलिये निजी साधन से भी समय रहते अस्पताल पहुंचना चाहिए। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की नयी गाईडलाईंस के मुताबिक दंश के स्थान पर चीरा लगाने और बहुत कसते हुये बांधने आदि की मनाही है। बस किसी मजबूत डंडे से प्रभावित भाग यदि हाथ या पैर है तो उसे स्थिर और सीधा रखने के लिए उसी के साथ बांध देना चाहिए ताकि वह ज्यादा हिले डुले नहीं।

देखा यह जा रहा है कि सर्पदंश के इलाज में जिस तरह की तत्परता होनी चाहिए और ध्यान रखना चाहिए वह चिकित्सकों में नहीं है। क्योंकि उन्हे सर्पदंश के इलाज में उपयुक्त प्रशिक्षण नहीं होता। पीएचसी के डाक्टर तो सर्पदंश के मामले को देखते ही पल्ला छुड़ा लेते हैं। अपनी जिम्मेदारी से इस तरह भागना उचित नहीं है। जरुरी है कि सर्पदंश के कुशल चिकित्सक के नेतृत्व में हर जिले मुख्यालय पर हर वर्ष पीएचसी के चिकित्सकों के लिए एक कार्यशिविर आयोजित हो जिसमें जनपद के जिलाधिकारी और सीएमओ भी समय निकाल कर अवश्य उपस्थित रहें।पत्रकार भी रहें क्योंकि अक्सर ग्रामीण पत्रकार या जिलों के डेस्क संभालने वाले पत्रकार बन्धु "जहरीले जन्तु के काटने" जैसे भ्रामक और अनुत्तरदायित्व भरे शीर्षक से खबरें देते हैं। जबकि वे सभी मामले सर्पदंश के होते हैं बाकि और कोई ऐसा जहरीला "जन्तु" गांवों में नहीं है जो जानलेवा हो।

कोब्रा के बाद करईत की भी चर्चा कर लें जो इस मामले में कोब्रा से अधिक खतरनाक है कि इस सांप की, कोब्रा के विष की आधी मात्रा ही जानलेवा है। और यह बहुत शान्त सांप है। अक्सर रात में सोते वक्त काटता है। यह वही सांप है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका काटा सुबह का सूरज नहीं देखता। इसके लक्षण भी ठीक से नहीं उभरते। विषदन्त के निशान भी महीन होते हैं। इसलिये ऐसे मामले में जोखिम न उठाकर सीधे जिला अस्पताल का रुख करना चाहिए।

सर्पदंश से बचाव और उपचार में आपकी सक्रियता किसी की जान बचा सकती है। इसलिये इस समय यह जानकारी औरों को दीजिये और भगवान के लिये झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। झाड़फूंक के 99 फीसदी मामले का अन्जाम दर्दनाक मौत ही होती है।

सर्प और सर्पदंश से जुड़ी आपकी जिज्ञासाओं का स्वागत है। अकेला सांप ही सम्पूर्ण जीव जगत का ऐसा प्राणी है जिसको लेकर सबसे अधिक भ्रांतियां हैं।

श्रावण, सांप और भ्रांति।
================

भ्रांति( 1) सांप दुद्ध पीते है।
सत्य- सांप मांसाहारी होते हैं, दुग्ध नहीं पचा सकते अतः सांप दूध नहीं पीते।

भ्रांति( 2) सांप बिन की धुन पर नाचते है।
सत्य - सांप की सुनने की क्षमता बहुत कमजोर होती है सांप केवल कंपन महसूस करते हैं यह केवल बीन की गति हिलने डुलने पर प्रतिक्रिया करते हैं लोगों को भ्रांति होती है यह नाच रहे हैं।

भ्रांति( 3) शेषनाग अपने सर पर मणि रखते हैं।
सत्य - यह केवल मिथक है इसका कोई प्रमाण नहीं है।

भ्रांति( 4) सांपों के पेट पूछ में भी जहर होता है।
सत्य -- सांपों के समस्त शरीर में जहर नहीं होता केवल मुंह में की विष ग्रंथियों में जहर होता है वह भी कोबरा करेत वाइपर जैसे सर्पों में।

भ्रान्ति (4) सांप अपने मारने वाले की फोटो आंखों में खींच लेता है।
सत्य- यह भी एक मिथक है जिससे बॉलीवुड की फिल्मों ने प्रचारित किया है ।

सर्पों के ऐसे अनेकों मिथक प्रचलित हैं जिनका निराकरण किया जाना जरूरी है । प्रत्येक जीव का इको सिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान है भगवान की प्रत्येक रचना इस सृष्टि में सार्थक प्रयोजनयुक्त है।

12/07/2025

आज़ाद ऊर्जा - न तार, न कोई रुकावट

DARPA ने लेज़र के ज़रिए बिना तारों के 8.6 किलोमीटर दूर तक 800 वाट से ज़्यादा ऊर्जा भेजी।
यह टेस्ट जून 2025 में न्यू मैक्सिको में उनके POWER प्रोग्राम के तहत हुआ, जो 30 मिनट तक चला।

इस कामयाबी ने साबित किया कि अब एक ताकतवर लेज़र और खास रिसीवर से लंबी दूरी तक भारी मात्रा में ऊर्जा भेजी जा सकती है।

यह बिना तारों वाली ऊर्जा में एक बड़ी छलांग है। इसके फायदे बहुत बड़े हैं। सोचिए, ऐसे ड्रोन जो हवा में ही चार्ज हो जाएं, सैन्य ठिकाने जो बिना ईंधन के चलें, और दूर-दराज़ के इलाके जहां बिना बिजली ग्रिड के ऊर्जा पहुंचे।
यह तकनीक सेना और आपदा की स्थिति में क्रांति ला सकती है।

बिना तारों की ऊर्जा को कहानी से हकीकत में बदलना।

आपको क्या लगता है, यह तकनीक जंग के मैदान से बाहर आम ज़िंदगी को कैसे बदलेगी ?
ज़्यादातर लोगों के लिए यह एक तकनीकी चमत्कार है, लेकिन जो गहराई से देखते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा इशारा है।
गैर-आयनीकरण, निर्देशित ऊर्जा से वैश्विक अदृश्य नियंत्रण युग शुरू हो रहा है।

आधिकारिक तौर पर क्या हुआ ?
अमेरिका की सैन्य एजेंसी DARPA ने ऐलान किया कि उन्होंने माइक्रोवेव बीम के ज़रिए 5 मील से ज़्यादा दूरी तक बिना तारों के बिजली भेजी।

उन्होंने एक सिस्टम इस्तेमाल किया, जिसे स्पाइडर्स (सेफ पावर इंटेलिजेंट डायरेक्टेड एनर्जी रिले सिस्टम) कहते है, इसका मतलब है- दूर से बिजली देने की ताकत,
बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के बिना, बहुत कम नुकसान के साथ।
यह सुनने में शानदार लगता है, लेकिन... ऐसा क्यों हो रहा है ? और इसके पीछे असल में कौन है ?

निकोला टेस्ला ने यह काम 100 साल पहले किया था।

निकोला टेस्ला का सपना था कि पूरी दुनिया को मुफ्त, तारों के बिना ऊर्जा मिले। उनकी वार्डेनक्लिफ़ टॉवर परियोजना का मकसद हवा, ज़मीन और ईथर के ज़रिए बिजली भेजना था।
लेकिन जेपी मॉर्गन ने इसे रोक दिया था। क्यों ?

मॉर्गन ने कहा, “अगर तुम इसमें मीटर नहीं लगाना चाहते तो यह हमारे लिए बेकार ही नहीं बल्कि ये हमारे आर्थिक औद्योगिक भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है, तुम सभी लोगों को मुफ्त में बिजली देना चाहते हो, तुम्हारे फार्मूले को नष्ट कर देना चाहिए।

क्योंकि वहां कोई मीटर नहीं था, कोई नियंत्रण नहीं था, कोई लाभ नहीं था।

और फिर
कुछ दिन बाद
टेस्ला की रहस्यमय तरीके से मृत्यु हुई - DARPA का उत्थान हुआ।

टेस्ला की संदिग्ध मौत के बाद उनकी सारी चीज़ें, उनके आविष्कार, लेख और डायरी CIA ने ज़ब्त कर ली थी।

बाद में समय- समय पर टेस्ला द्वारा किए गए अनुसंधान और खोजों के पेटेंट अमरीकी सरकारी वैज्ञानिकों के नाम से दर्ज होते रहे, टेस्ला के आविष्कारों पर अलग - अलग लोग नोबेल प्राइज पाते रहे।
और अब टेस्ला की मृत्यु के 82 साल बाद निकोला टेस्ला की सबसे बड़ी खोज को DARPA ने अपने नाम दर्ज कर ली है।

अभी क्यों? और DARPA ही क्यों ?

DARPA एक सैन्य शाखा है - वाणिज्यिक नहीं। अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो इसके पीछे सैन्य मकसद हैं, ऊर्जा हथियार, सेंसर से निगरानी
साइकोट्रॉनिक्स - दिमाग को आवृत्तियों से प्रभावित करना, जैसे HAARP
यह तकनीक किसी भी चीज़ को बिना तारों के बिजली दे सकती है - रोबोट से लेकर आपके शरीर में मौजूद नैनोकणों तक।

मानव शरीर और दिमाग के लिए इसका मतलब ?
अगर वे 5 मील दूर तक ऊर्जा भेज सकते हैं, तो किसी इंसान पर निशाना साधकर ऊर्जा भेजी जा सकती है।

मानव शरीर की ऊर्जा प्रणाली को प्रभावित किया जा सकता है, शरीर में मौजूद छोटे-छोटे नैनोकणों को सक्रिय किया जा सकता है।
ये किरणें सिर्फ बिजली नहीं देतीं, बल्कि ये भी कर सकती हैं - संवेदनाओं को पहचानना, बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा करना, दिमाग की तरंगों में दखल देना।

इसका नतीजा क्या होगा ?
बिना ग्रिड के सिस्टम को बिजली देना, ड्रोन, सेंसर, रोबोट, सैन्य ठिकाने।
आम ज़िंदगी में बदलाव - बिना चार्ज किए स्मार्टफोन, “स्मार्ट शहर” जहां हर जगह अदृश्य किरणें हों,
DARPA + 5G + नैनोटेक्नोलॉजी - जब DARPA बिना तारों की ऊर्जा भेजता है, 5G बिना तारों का डेटा भेजता है, और नैनोकण आपके शरीर की आंतरिक स्थिति का पता लगाते हैं ... ...तो आपके पास एक स्मार्ट शहर में एक स्मार्ट शिविर में एक स्मार्ट व्यक्ति होगा।

यह सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि एक डिजिटल दिमागी जाल का ढांचा है।

DARPA यह तकनीक मानवता के लिए नहीं, बल्कि सैन्य और नियंत्रण के लिए बना रहा है।
यह 5G और नैनोटेक्नोलॉजी के साथ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बना सकता है, जो लोगों के शरीर और दिमाग को ट्रैक और कंट्रोल करे।
यह एक “डिजिटल जाल” हो सकता है, जहां आपकी आज़ादी खतरे में पड़ सकती है।

टेस्ला ने मुफ्त ऊर्जा पूरी मानवता को देना चाहा था, लेकिन अब यह ताकतवर लोगों के हाथ में है। यह ऊर्जा नेटवर्क आज़ादी के लिए नहीं, बल्कि नियंत्रण के लिए बनाया जा रहा है।
आपका शरीर और आपकी चेतना निशाना बन रहे हैं। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि अदृश्य किरणों में छिपी सच्चाई है।

01/07/2022

New research

CRISPR-Cas9 gene editing approach can alter the social behavior of animals

Date:May 16, 2022 Source:Georgia State University

Georgia State University scientists have created gene-edited hamsters for studies of social neuroscience.


A team of Georgia State University researchers led by Regents' Professor of Neuroscience H. Elliott Albers and Distinguished University Professor Kim Huhman used CRISPR-Cas9 technology to eliminate the actions of a neurochemical signaling pathway that plays a critical role in regulating social behaviors in mammals. Vasopressin and the receptor that it acts on called Avpr1a regulates social phenomena ranging from pair bonding, cooperation, and social communication to dominance and aggression. The new study, published in the Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS), finds that knocking out the Avpr1a receptor in hamsters, and thus effectively eliminating vasopressin's action on it, dramatically altered the expression of social behavior in unexpected ways.

19/04/2022

क्या पेड़ पौधों में भी अनुभूति होती है? अनुभूति से यहाँ मतलब है कि क्या पेड़ पौधे भी सुख दुःख अनुभव करते हैं? क्या वे भी विचार करते हैं? क्या वे भी भविष्य की योजनायें बनाते हैं? क्या उनके पास बाकी जीवों से अलग कोई ESP यानी एक्स्ट्रा सेंसरी रेस्पोंस प्रणाली है?

इस संदर्भ में जब भी बात की जाती है तो तुरंत ही दिमाग उन कुछ प्रयोगों के बारे में सोचने लगता है जिन्हें हममें से सभी ने कहीं न कहीं पढ़ा या सुना है जिसमें पौधों को पॉलीग्राफ मशीन से जोड़ा गया था और जिसके निष्कर्ष में यह पता चला था कि पौधे भी सुख दुःख अनुभव करते हैं। इन प्रयोगकर्ताओं में एक प्रसिद्ध नाम है क्लेव बैकस्टर।

क्लेव बैकस्टर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए में इन्टेरोगेटर के पद पर काम करते थे। उन्होंने 1960 में पौधों के साथ कुछ प्रयोगों को अंजाम दिया, जिसमें उन्होंने इलेक्ट्रोड्स को पौधों से कनेक्ट किया और उससे एक पॉलीग्राफ मशीन को जोड़ा। पॉलीग्राफ मशीन में इलेक्ट्रोड्स के मध्य घटते बढ़ते विधुत प्रतिरोध के अनुसार ग्राफ उपर नीचे होता रहता था। इसके जरिये उन्होंने तमाम प्रयोगों को अंजाम दिया और ये निष्कर्ष दिया कि पेड़ पौधे भी सुख दुःख अनुभव करते हैं। प्रयोग के दौरान जब एक पौधे को नुकसान पहुँचाया गया तो ग्राफ में बदलाव देखा गया।

जब कई वैज्ञानिकों ने इन प्रयोगों को दोहराना चाहा तो पाया कि हर बार निष्कर्ष भिन्न आते थे। बाद में कई और प्रयोगकर्ताओं ने ऐसे ही दावे किये लेकिन कोई भी विज्ञान की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। तो क्या इसका मतलब ये है कि पेड़ पौधों में कोई अनुभूति नहीं होती?

पेड़ पौधों में अनुभूति होती है लेकिन वैसी नहीं जैसी जानवरों या हमारे भीतर पायी जाती है। इसका कारण है कि पौधों के भीतर कोई सेंट्रल नर्वस सिस्टम नहीं होता। पेड़ पौधों में जीवन सम्बन्धी फैसले किसी केन्द्रीयकृत प्रणाली द्वारा नहीं बल्कि लोकल स्तर पर लिए जाते हैं। यानी ऐसा नहीं होता कि शरीर में विभिन्न जगहों से सूचनाएं किसी एक स्थान पर भेजी जा रही हों और फिर वहां से कोई निर्देश जारी होते हों। बल्कि सेल्स खुद परिस्थितिनुसार फैसले लेते हैं और केमिकल सिग्नल से बाकी सेल्स को सूचित करते हैं ताकि वे भी तदनुसार फैसले ले सकें।

पौधों में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख सेंसरी रेस्पोंस में एक प्रमुख रेस्पोंस है “Proprioception” यानी पोजीशन का सेन्स। आपने देखा होगा कि पौधे हमेशा उर्ध्वाधर दिशा में बढ़ते हैं। यानी गमले को आप लिटा भी दें तो कुछ दिनों बाद पौधा खुद को एडजेस्ट करके पुनः ऊपर की ओर बढ़ने लगता है। पौधों में पोजीशन का सेंस आता है कुछ खास किस्म के सेल्स से जिन्हें स्टेटोलिथ्स कहते हैं जो कि जड़ों और नवअंकुरों के सिरे पर पाए जाते हैं। इनके भीतर कुछ बीड्स जैसे पार्टिकल्स होते हैं जिनकी पोजीशन ग्रेविटी के कारण बदल जाती है जिससे पौधों ग्रेविटी को सेंस कर अपनी पोजीशन बदल सकते हैं।

साथ ही पौधे प्रकाश की दिशा में भी खुद को मोड़ लेते हैं इस रेस्पोसं को “Phototropism” कहते हैं। इस सेन्स का कारण भी नवांकुरों के सिरे पर मौजूद कुछ फोटोरिसेप्टर सेल्स हैं जो बाकी सेल्स को बताते हैं कि प्रकाश किस दिशा से आ रहा है ताकि वे पौधे को प्रकाश की दिशा में मोड़ सकें। इसके साथ ही पौधे प्रकाश की मात्रा को भी सेंस कर सकते हैं। आपने देखा होगा रात्रि के समय कुछ पौधे अपनी पत्तियों को झुका लेते हैं या बंद कर लेते हैं। इसी सेंस से पौधे सीजन की जानकारी भी प्राप्त कर लेते हैं।

जैसा की आप जानते हैं कि सुबह और शाम के समय सूर्य के प्रकाश में रेड स्पेक्ट्रम की मात्रा ज्यादा होती है। इससे पौधों को सुबह और शाम के मध्य के अन्तर का पता चलता है और चूँकि यह अंतर सीजन के अनुसार बदलता रहता है इससे पौधों को पता चल जाता है कि ये सीजन पतझड़ का है या बसंत का।

इसके अलावा पौधे वातावरण में मौजूद केमिकल्स को भी सेंस कर सकते हैं। आपने कैल्शियम कार्बाइड रसायन के बारे में जरुर सुना होगा जिसे आम भाषा में कार्बाइड भी कहा जाता है। इसका उपयोग फलों को पकाने में किया जाता है। कैल्शियम कार्बाइड वातावरण में मौजूद नमी से क्रिया कर एथिलीन गैस बनाता है जो कि पौधों में एक हार्मोन का काम करती है। एथिलीन पौधों की कई गतिविधियों जैसे फूलों के खिलने, फलों के पकने, पत्तों के झड़ने इत्यादि को नियंत्रित करती है।

बहुत से पौधे कीटों के आक्रमण पर प्रभावित पत्तों से कुछ जहरीले केमिकल्स का उत्पादन करते हैं। पत्तों से वातावरण में उत्सर्जित इन केमिकल्स को सेंस करके पेड़ के अन्य पत्ते भी इन जहरीले केमिकल्स का उत्पादन शुरू कर देते हैं और यही नहीं आस पास के पेड़ पौधे भी इन केमिकल सिग्नल्स को सेंस कर यही प्रक्रिया दोहराते हैं।

पौधों में टच सेन्स भी होता है जिसको छुईमुई और पिचर प्लांट जैसे कुछ पौधों में अच्छे से अनुभव किया जा सकता है। छुईमुई के पौधे को जब आप छूते हैं या पिचर प्लांट पर कोई कीड़ा बैठता है तो उस हलचल से कुछ विशेष संवेदी सेल्स में इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स पैदा होते हैं जो कुछ अन्य सेल्स को ट्रिगर कर देते हैं जो कुछ कुछ हाइड्रोलिक पम्प जैसा काम करते हैं। इस सिग्नल के मिलते ही ये सेल जो तरल से फूले हुए होते हैं अपना तरल छोड़ देते हैं और सिकुड़ जाते हैं। लिहाजा इनसे जुड़े भाग जैसे पत्तियां बंद होकर लटक जाती हैं।

17/04/2022

Kissing bug new research 2022 going on… Chagas disease

Development of a paper printed colorimetric sensor based on Cu-Curcumin nanoparticles for evolving point-of-care clinical diagnosis of sodium in patient suffered from Chagas disease.

Overview:

World Chagas Day observed annually on 14th April.

First time observed On 14th April 2020.

The date 14th April was chosen to observe this day as on this date in the year 1990 the first case of Chagas disease in a human was reported.

Berenice Soares de Moura, a Brazilian girl was the first reported patient of Chagas Disease.

The disease was named after Dr. Calros Ribeiro Justiniano Chagas, who first diagnosed this disease.

This disease was later termed the silent disease as it progresses slowly and is frequently asymptomatic.

Once an individual is infected with this disease, it can cause the infected person to suffer from severe digestive and cardiac alterations as well as heart failure.

This disease is also known as the American trypanosomiasis, or silent disease.

Causative agent… parasite named Trypanosoma cruzi.

Transmitted to humans (primary host) through the triatomine bug (kissing bug).

Disease is more prone to the people in regions like Mexico, Central America, and South America.

08/04/2022

Forensic odontology

Forensic odontology is a branch of forensic sciences that uses the skill of a dentist in personal identification during mass calamities, sexual assault, and child abuse to name a few.

Forensic odontologists utilize the knowledge of dentistry in bite mark analysis, fixation of identity in mass disasters, and age estimation. Thus, the duty and responsibility of forensic odontologists has increased in recent years. Therefore, practicing dentists and dental students should be made aware of the available newer technologies and its use in forensic dentistry.

As denture prosthesis is quite resistant to high temperatures, they can be used as aids in identification process.

The denture can reveal the positive identity of a person only if it is marked.

Two methods of marking have been proposed: the surface marking method and the inclusion method.

The inclusion method includes metal identification bands, computer-printed denture microlabeling system, lead paper labeling, embedding the patient photograph, denture barcoding, T bar, laser etching, lenticular card system, radiographic identification tags, and electronic microchips. However, inclusion methods are more permanent and provide a more predictable result.

23/03/2022

The supercomputer PARAM Ganga is based on a heterogeneous and hybrid configuration of Intel Xeon Cascade lake processors, and NVIDIA Tesla V100. There are 312 (CPU+GPU+HM) nodes with a total peak computing capacity of 1.67 (CPU+GPU+HM) PFLOPS performance. The cluster consists of compute nodes connected with the Mellanox (HDR) InfiniBand interconnect network. The system uses the Lustre parallel file system and operating system is CentOS 7.x.

05/03/2022

Hi, friends ..
Anyone looking for Ph.D. assistance and Thesis writing help, we (ShodhSAHYOG ) are the leading assistance for Research work under supervision by Dr. Himanshu v. Chauhan and his team.

We offer Ph.D. support with Thesis writing ,Research Paper writing and Research Proposals etc.

For Enquiry
Call/WhatsApp : +91 9456639189
8979565084
Research field offered
BOTANY,
ZOOLOGY
MICROBIOLOGY
BIOTECHNOLOGY
BIOINFORMATICS
TOXICOLOGY
MEDICAL SCIENCE
BIOCHEMISTRY CHEMISTRY
GEOLOGY
GEOGRAPHY
HOME SCIENCE
SOCIOLOGY
PSYCHOLOGY
POLITICAL SCIENCE
PUBLIC ADMINISTRATION
HISTORY
ECONOMICS Management(MBA)
EDUCATION
etc

25/02/2022

Q. What technology has been developed by a Hong Kong scientist to detect autism at a very early stage?
[A] Immunology Response
[B] WBC imaging
[C] Retinal eye scanning
[D] Brain Pulse detection

27/03/2020

Cytoskeleton.

Want your school to be the top-listed School/college in Meerut City?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


W. K Road
Meerut City