Dr. Md Khalid

Dr. Md Khalid

Share

वो कहता है ज़माने में नहीं कोई मेरे जैस?

11/03/2021

एक शाम मऊ के नाम

01/02/2021

جس کا نہ تھا خیال کبھی میرے آس پاس
کرتا رہا طواف وہی میرے آس پاس
जिसका न था ख्याल कभी मेरे आस पास
करता रहा तवाफ़ वही मेरे आस पास।
تیرا خیال تیری طلب تیری جستجو
ہر لمحہ ہر قدم پہ رہی میرے آس پاس
तेरा ख्याल तेरी तलब तेरी जुस्तुजू
हर लम्हा हर कदम पे रही मेरे आस पास।
سب نے تو ساتھ چھوڑ دیا، تھا میرا مگر
ایک مفلسی بیچاری رہی میرے آس پاس
सबने तो साथ छोड़ दिया था मेरा मगर
एक मुफलिसी बेचारी रही मेरे आस पास
اٹھا بڑوں کا سایہ اب تک ہوں دھوپ میں
اک چھاؤں تھی، جو اب نہ رہی میرے آس پاس
उठ्ठा बड़ों का साया तो अब तक हूँ धूप में
इक छाओं थी, जो अब न रही मेरे आस पास।
مشکل سفر میں کب وہ رہا میرا ہمسفر
تھا ساتھ ساتھ جب تھی خوشی میرے آس پاس
मुश्किल सफर में कब वो रहा मेरा हमसफर
था साथ साथ जब थी खुशी मेरे आस पास।
شیطاں کی ساری کوششیں بے کار ہوگیئں
اقراء کی روشنی ہے ابھی میرے آس پاس
शैतां की सारी कोशिशें बेकार हो गयीं
इक़रा की रौशनी है अभी मेरे आस पास
کرتا ہوں شکر یا رب ہر آن ہر گھڑی
سایہ ہے رحمتوں کا تری میرے آس پاس
करता हूँ शुक्र या रब हर आन हर घड़ी
साया है रहमतों का तेरि मेरे आस पास।
خالد ہمارے دل میں ترا نام ہے فقط
ناموں کا اک ہجوم سہی میرے آس پاس
खालिद हमारे दिल में तेरा नाम है फ़क़त
नामों का एक हुजूम सही मेरे आस पास।

۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ڈاکٹر محمد خالد

27/11/2020
04/11/2018

एक ग़ज़ल दोस्तों के नाम 04/11/18
**************************************
کچھ مجھے خوف نہیں تجھ سے ،مجھے کہنے دو ذرا
کچھ بچی آگ ہے دل میں ،مجھے جلنے دو ذرا

कुछ मुझे खौफ नहीं तुझसे, मुझे कहने दो ज़रा
कुछ बची आग है दिल में, मुझे जलने दो ज़रा।

نہ دبا ، دب کے میں ابھرا ہوں ، یہی فطرت ہے میری
گردِشیِ وقت میں گِھرا ہوں، کُچھ سنبھلنے دو ذرا

न दबा, दब के मैं उभरा हूँ यही फ़ितरत है मेरी
गर्दिशे वक़त में घिरा हूँ, कुछ संभलने दो ज़रा।

کیا کہو گے میری حالت پر ستم گر تم بھی
کتنا ہے ظرف بچا مجھ میں ابھی سہنے دو ذرا

कहोगे क्या मेरी हालत पर सितमगर तुम भी
कितना है जर्फ बचा मुझमे, अभी सहने दो ज़रा।

ایک سمندر ہے کہ جس کی آغوش میں لہریں ہیں بہت
گِر کے اٹھتی بھی تو ہیں تم بھی مجھے اٹھنے دو ذرا

एक समंदर है, जिसकी आगोश में लहरें है बहुत
गिर के उठती भी तो हैं, तुम भी मुझे उठने दो ज़रा।

نہ سمجھ مجھ کو جُدا، کے ہوں بارش کا ایک قطرہ
کبھی بن جاؤنگا سمندر، مجھے ملنے دو ذرا

न समझ मुझको जुदा मैं भी हूँ बारिश में गिरा
बन ही जाऊंगा समंदर, मुझे मिलने दो ज़रा।

डॉ मुहम्मद खालिद
----------------------

02/08/2018

छोटी सी नज़्म दोस्तों के नाम। 01/8/2018
************************************
نِکلی ہے بات دل سے یہ میری آواز میں
کُچھ بھی نہ مِل سکا ہمیں عُمرِ دراز میں۔

निकली है बात दिल से ये मेरी आवाज़ में
कुछ भी न मिल सका हमें उम्रे दराज़ में।

آنکھوں میں ہے جلن اور نہ چہرے پہ نُور ہے
بے چین دل مِلا ہمیں ترکِ نماز میں ۔

आँखों में है जलन और न चेहरे पे नूर है
बेचैन दिल मिला हमें तर्के नमाज़ में।

سُنتا تو ہوں جہاں میں جہاں بھر کے یہ نغمیں
لیکِن سکوں مِلا ہمیں ازاں کی آواز میں۔

सुनता तो हूँ जहाँ में, जहाँ भर के ये नग्में
लेकिन सकूँ मिला हमें अज़ाँ की आवाज़ में।

دُھلتے ہیں یہ گناہ شب و روز جو ہیں کرتے
تُحفہ مِلا نماز کا شبِ معراج میں۔

धुलते है ये गुनाह, शब् व रोज़ जो हैं करते
तोहफा मिला नमाज़ का शब् ए मेराज़ में।

گُناہ سے گِھرا اے خالِد بچانا میرے خدا
پہنچا مُجھے بھی یا رب مُقدّس حِجاز میں ۔

गुनाह से घिरा ए खालिद बचाना मेरे खुदा
पंहुचा मुझे भी या रब मुक़द्दस हिजाज़ में।

Mohammad Khalid

02/08/2018

एक छोटी सी नज़्म दोस्तों के लिए। 17/7/18
****************************
مُحبت ہی محبت کر اس نغمہ کے سِوا کیا ہے
نہیں تجھمیں اگر یہ شئے، تُو اِنساں کے سِوا کیا ہے۔

मोहब्बत ही मोहब्बत कर इस नगमां के सिवा क्या है
नहीं तुझमे अगर ये शै, तू इन्सां के सिवा क्या है।

یہی فطرت رہی تیری کے بہکانا ہے اِنساں کو
تکبُّر نے دیا تُحفہ ، تُو شیطاں کے سِوا کیا ہے۔

यही फ़ितरत रही तेरी, के बहकाना है इन्सां को
तकब्बुर ने दिया तोहफा, तू शैतां के सिवा क्या है।

پِلایا خون سینے کا بناکر دی شکل تُجھ کو
ہے دنیا میں کوئی رُتبا , لفظ "ماں" کے سِوا کیا ہے۔

पिलाया खून सीने का, बनाकर दी शकल तुझ को
है दुनिया में कोई रुतबा, लफ्ज़ 'मां' के सिवा क्या है।

نہیں غُربت میں کوئی عیب یہ رِشتہ ہے مُقدّر گا
ملے گا جو ہے قِسمت میں، یہ ایماں کے سِوا کیا ہے۔

नहीं ग़ुरबत में कोई ऐब , ये रिश्ता है मुक़द्दर का
मिलेगा जो है किस्मत में, ये इमां के सिवा क्या है।

کر کوشش تو دولت کی لُٹاکر اپنے ایماں کو
گر دنیا مِل گئ خالد پشیماں کے سِوا کیا ہے۔

कर कोशिश तू दौलत की, लूटाकर अपने इ मां को
गर दुनिया मिल गयी खालिद, पशेमां के सिवा क्या है।

डॉ मुहम्मद खालिद।
++++++++++++++

पशेमाँ -अफ़सोस, पछताना।

14/06/2018

29/5/2018 एक ग़ज़ल दोस्तों के नाम
********************************
न ग़ज़ल है न आवाज़ है न ही रूह में वो परवाज़ है
जिसे सुन सका कभी न तू वही राग हैं तेरे रात दिन।१

तेरी जुस्तुजू ने दिया है क्या बची उम्र में अब रहा है क्या
जो न जल सका किसी बाम पर वो चराग है तेरे रात दिन

क्यों हो गफलतों में पड़े हूए एक नज़र उठा केजो देख लो
जो नशे में गुज़ारी है जिंदगी वही दाग हैं तेरे रात दिन।३

न वो हसरतों का दौर है न वो नफरतोंं की मीनार है
जिसे खो के फिर तू न पा सका वही लाग हैं तेरे रात दिन।

तुझे क्यों न देखूं ऐ जिंदगी तूने क्या किया मेरे साथ में
जिसे बुन सका कभी न तू वही ताग हैं तेरे रात दिन।५

मेरी जिंदगी तेरा चैन थी मुझे छोड़कर कहाँ खुश रहा
जो सवँर सका न बहार में वही बाग़ है तेरे रात दिन।६

Dr.Mohammad Khalid

बाम - कोठा, छत,
राग - नगमा
ताग - धागा
लॉग - मोहब्बत, इश्क़, लगन

14/06/2018

12/6/2018 एक रचना दोस्तों की नज़र
*********************

प्यार करते हो तो निभाओ उम्र के हर मोड़ पर
आँखों में लौ ये प्यार की जलती रहे तो अच्छा है।

आओ कुछ ऐसा करें जिससे मिले सब को ख़ुशी
दुनया अपनी फूलों सी संवरती रहे तो अच्छा है।

चलो धो लें जो मैल हैं सारे दिलों में हमारे अपने
निभें सारे रिश्ते दुश्मनी मिटती रहे तो अच्छा है।

उन पस्तियों को देख लो जो थी अना की ज़द में
कुछ बचे वक़अत उम्र निखरती रहे तो अच्छा है।

अदब् से मिलो सबसे अदब् हो तुम्हारा भी कहीं
हो एतेबार सब पर दूरियां घटती रहे तो अच्छा है।

मत चलो तेज़ तुम इतने के बिखर जाएँ रिश्ते
प्यार की मेहदी सफर में चढ़ती रहे तो अच्छा है।

डॉ मोहम्मद खालिद

20/04/2018

बेच दिया है मैंने, मैंने ज़मीर बेच दिया है !!!!!

नहीं बनना है इंसान मुझको आत्मा बेच दिया है।
तुम्हे मालूम नहीं उन कागज़ के टुकड़ों की कीमत !!!
एक मासूम की आबरू को सरेआम बेच दिया मैंने
नहीं करनी है इज़्ज़त बहन बेटियों की मुझे
सरे आम अपना आत्मसम्मान बेच दिया मैंने
तुम्हे मालूम नहीं
मुझे बस चाहिए उन गुलाबी गड्डियों की महक।।।।।
इन्ही से तो मैं गन्दगी के ढेर में जी सकुंगा
मोहब्बत, मान सम्मान ये सब ढकोसले हैं
ईमानदारी, संस्कार तहज़ीब विरासत,
ये मुझे हराम की नहीं खाने देंगे
चटवा गिरी, मार काट, नफरत फैला कर, भड़वागिरि करके ही मुझे अय्याशी और दारूबाजी का मजा मिलेगा
हाहाहाहाहा,
तुम क्या जानो
इतना अच्छा मौका मिला है, मिला है इतना
अच्छा वतन लूट लो लूट लो आबरू इस वतन की
हाहाहा चूतिये , धर्म के नाम पर फैलाउंगा दंगा,
इसी धर्म के नाम पर मुझे कोई नहीं बोलेगा
साले। चूतिये हैं
सब को बेच दूंगा
बेच दिया मैंने
लूटना है उनकी दौलत को , साले महीनों जमीनों को खरोच खरोच कर फसले उगाते है
उन लोगों को पता नहीं, सिर्फ मेहनत करना जानते है
मेहनत, मेहनत, हाहाहाहा
मेहनत वो करते है, मैं तो चालाकी, अय्यारी धोखा, वादा
झूट मक्कारी फरेब की खेती करता हूँ,
इसमें तो फायदा ही फायदा है,

राम रहीम की फसल है उगाओ और लड़ाओ, और जम कर काटो,
हा हा हा !!!! कब मिलेगा ऐसा मौका !!!!!!!
# # # # यही तो रोज़गार है मेरा # # # हाहाहाहा
पढ़ लिख कर बेशर्मी का तमगा मिल गया है।
कोट पहन कर दलाली करूँगा , दल्ला बनूँगा
सच्चाई बताने की ज़रूरत नहीं है इन मूर्खों को
दारू लड़की, ईमान बेच कर मिलता है तो इसमें बुराई क्या है।
भाग जाऊंगा लेके हज़ारो करोड़ों
क्या कर लेंगे, और क्या कर लिया !!!!! हा हा हा
भले कितने घरों का दीपक बुझ जाये, आबरू लूट जाये
क्या फर्क पड़ता है !!!!!!
मान सम्मान है सब बकवास , पैसा पैसा, नफरत नफरत
चल भाग यहाँ से
गन्दगी नाली का कीड़ा हूँ !!!!!!!!!
गर्मी है नाली के खून की
बेवक़ूफ़ हैं सब, सब बेवक़ूफ़ हैं
मार दूंगा, मरवा दूंगा भाग यहाँ से !!!!!!!
नोट चाहिए, नोट चाहिए, वोट चाहिए, वोट चाहिए।
मरे हुए संस्कारों की एक भीड़ चाहिए।
कहाँ है मेरे जैसे लोग, ढूंढों, इकठ्ठा करो,
जय चन्द ,मीर सादिक़ कहाँ हैं!!!! कहाँ है ये लोग
आत्मा मर चुकी है मेरी, कहाँ है दारू कहाँ है लड़की
मुझे अब कुछ भी नज़र नहीं आता ।।।।।
ताक़त है मेरे पास, हाहाहाहा।

डॉ मुहम्मद खालिद

Want your school to be the top-listed School/college in Maunath Bhanjan?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


Mohammadabad Gohna
Maunath Bhanjan
276403