20/04/2018
बेच दिया है मैंने, मैंने ज़मीर बेच दिया है !!!!!
नहीं बनना है इंसान मुझको आत्मा बेच दिया है।
तुम्हे मालूम नहीं उन कागज़ के टुकड़ों की कीमत !!!
एक मासूम की आबरू को सरेआम बेच दिया मैंने
नहीं करनी है इज़्ज़त बहन बेटियों की मुझे
सरे आम अपना आत्मसम्मान बेच दिया मैंने
तुम्हे मालूम नहीं
मुझे बस चाहिए उन गुलाबी गड्डियों की महक।।।।।
इन्ही से तो मैं गन्दगी के ढेर में जी सकुंगा
मोहब्बत, मान सम्मान ये सब ढकोसले हैं
ईमानदारी, संस्कार तहज़ीब विरासत,
ये मुझे हराम की नहीं खाने देंगे
चटवा गिरी, मार काट, नफरत फैला कर, भड़वागिरि करके ही मुझे अय्याशी और दारूबाजी का मजा मिलेगा
हाहाहाहाहा,
तुम क्या जानो
इतना अच्छा मौका मिला है, मिला है इतना
अच्छा वतन लूट लो लूट लो आबरू इस वतन की
हाहाहा चूतिये , धर्म के नाम पर फैलाउंगा दंगा,
इसी धर्म के नाम पर मुझे कोई नहीं बोलेगा
साले। चूतिये हैं
सब को बेच दूंगा
बेच दिया मैंने
लूटना है उनकी दौलत को , साले महीनों जमीनों को खरोच खरोच कर फसले उगाते है
उन लोगों को पता नहीं, सिर्फ मेहनत करना जानते है
मेहनत, मेहनत, हाहाहाहा
मेहनत वो करते है, मैं तो चालाकी, अय्यारी धोखा, वादा
झूट मक्कारी फरेब की खेती करता हूँ,
इसमें तो फायदा ही फायदा है,
राम रहीम की फसल है उगाओ और लड़ाओ, और जम कर काटो,
हा हा हा !!!! कब मिलेगा ऐसा मौका !!!!!!!
# # # # यही तो रोज़गार है मेरा # # # हाहाहाहा
पढ़ लिख कर बेशर्मी का तमगा मिल गया है।
कोट पहन कर दलाली करूँगा , दल्ला बनूँगा
सच्चाई बताने की ज़रूरत नहीं है इन मूर्खों को
दारू लड़की, ईमान बेच कर मिलता है तो इसमें बुराई क्या है।
भाग जाऊंगा लेके हज़ारो करोड़ों
क्या कर लेंगे, और क्या कर लिया !!!!! हा हा हा
भले कितने घरों का दीपक बुझ जाये, आबरू लूट जाये
क्या फर्क पड़ता है !!!!!!
मान सम्मान है सब बकवास , पैसा पैसा, नफरत नफरत
चल भाग यहाँ से
गन्दगी नाली का कीड़ा हूँ !!!!!!!!!
गर्मी है नाली के खून की
बेवक़ूफ़ हैं सब, सब बेवक़ूफ़ हैं
मार दूंगा, मरवा दूंगा भाग यहाँ से !!!!!!!
नोट चाहिए, नोट चाहिए, वोट चाहिए, वोट चाहिए।
मरे हुए संस्कारों की एक भीड़ चाहिए।
कहाँ है मेरे जैसे लोग, ढूंढों, इकठ्ठा करो,
जय चन्द ,मीर सादिक़ कहाँ हैं!!!! कहाँ है ये लोग
आत्मा मर चुकी है मेरी, कहाँ है दारू कहाँ है लड़की
मुझे अब कुछ भी नज़र नहीं आता ।।।।।
ताक़त है मेरे पास, हाहाहाहा।
डॉ मुहम्मद खालिद