19/01/2024
EXAM CLEAR
For any compitation
19/01/2024
15/12/2021
Is bhai ke pet main 37 or upsi main 155+ hai wah kya bat hai
01/09/2020
#2 trading
04/08/2020
Upsc topper 2019
26/07/2020
ऐसे पोस्ट के लिए हमारे पेज # # Examclear को लाइक करे।
20 साल में समुद्र में तीन गुणा बढ़ जाएगा कचरा, मछलियों से ज्यादा होगी प्लास्टिक
अनुमान है कि 2040 तक समुद्र में मौजूद कुल प्लास्टिक वेस्ट बढ़कर करीब 60 करोड़ टन हो जाएगा
अनुमान है कि 2040 तक समुद्र में मौजूद प्लास्टिक वेस्ट में तीन गुना तक इजाफा हो जाएगा। 2050 तक समुद्र में उतना प्लास्टिक होगा जितनी उसमें मछलियां भी नहीं हैं। यह जानकारी हाल ही में जारी एक नए शोध से सामने आई है। यह शोध द प्यू चैरिटेबल ट्रस्ट और सिस्टेमिक नामक संस्था द्वारा किया गया है। इसमें एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन, कॉमन सीस, ऑक्सफोर्ड और लीड्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सहयोग किया है। यह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है।
शोध के अनुसार, 2016 में करीब 1.1 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में फेंका गया था। यदि दुनियाभर के देश और कंपनियां इसको रोकने में असफल रहती हैं तो यह 2040 तक बढ़कर 2.9 करोड़ टन हो जाएगा। यह दुनिया भर में समुद्र तट के प्रत्येक मीटर पर लगभग 50 किलोग्राम प्लास्टिक के बराबर होगा। चूंकि प्लास्टिक को खत्म होने में कई दशक लग जाते हैं, ऐसे में अनुमान है कि समुद्र में मौजूद कुल प्लास्टिक वेस्ट बढ़कर 60 करोड़ टन के करीब हो जाएगा। इसकी विशालता का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह करीब 30 लाख ब्लू व्हेल मछलियों के वजन से भी ज्यादा होगा।
इससे पहले ओसियन कन्ज़र्वेंसी नामक संस्था द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 80 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में फेंका जा रहा है। अनुमान था कि करीब 15 करोड़ टन कचरा समुद्रों में मौजूद है। यह पर्यावरण और समुद्री इकोसिस्टम को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है।
22/07/2020
ऐसे पोस्ट पाने के लिए हमारे पेज clear को लाइक जरूर करे।
घरेलू उपभोग से संबंधित नेशनल सैंपल सर्वे (एनएसएस) के 75वें राउंड के सर्वेक्षण में स्वास्थ्य और बीमारियों की स्थिति पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हाल ही में प्रकाशित सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि 80 प्रतिशत भारतीय स्वास्थ्य बीमा से वंचित हैं।
ग्रामीण भारत में 85.9 प्रतिशत लोगों के पास किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं है। शहरी भारत में स्थिति थोड़ी बेहतर है। यहां 80.9 प्रतिशत भारतीय इससे वंचित हैं। सर्वेक्षण में निजी और सरकारी बीमा प्रदान करने वालों को शामिल किया गया था।
यह सर्वेक्षण जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच किया गया। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कुल 55 हजार लोग शामिल किए गए। समय-समय पर होने वाले इस सर्वेक्षण में स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च, निजी और सरकारी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच और देश में बीमारियों की स्थिति पता लगाने की कोशिश की जाती है।
20/07/2020
Rupay Ka itihas
कोरोना वायरस महामारी के दौरान अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर को जहां केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की सूची में रख रखा है, वहीं दूसरी तरफ जीएसटी में इसको ऐसी वस्तुओं की सूची में रखा है, जिन पर 18 फीसदी टैक्स लगता है. ऐसे में अब लोगों को इस जरूरी वस्तु पर भी ज्यादा टैक्स देना होगा. जीएसटी पर बनी अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) की गोवा पीठ ने ये आदेश जारी किया है.
इस कंपनी ने पूछा था एएआर से सवाल
स्प्रिंगफील्ड इंडिया डिस्टिलरीज ने एएआर की गोवा पीठ में अपील कर कंपनी द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले सैनिटाइजर का वर्गीकरण करने को कहा था. कंपनी की दलील थी कि इस उत्पाद पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है. इसके अलावा कंपनी ने यह भी पूछा था कि अब सैनिटाइजर आवश्यक वस्तु है, तो क्या इस पर जीएसटी छूट मिलेगी.
इसलिए लगेगा 18 फीसदी टैक्स
एएआर ने व्यवस्था देते हुए कहा कि आवेदक द्वारा विनिर्मित हैंड सैनिटाइजर अल्कोहल आधारित है. इस पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा. प्राधिकरण ने कहा कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने हालांकि हैंड सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु के रूप में वर्गीकृत किया है, लेकिन जीएसटी कानून में छूट वाली वस्तुओं की अलग सूची है.
ईवाई के टैक्स सलाहकार अभिषेक जैन ने कहा कि यह निष्कर्ष जीएसटी प्राधिकरण के हैंड सैनिटाइजर पर 18 फीसदी की कर दर के विचार के अनुरूप है. जैन ने कहा कि शुरुआत से ही हैंड सैनिटाइजर का वर्गीकरण बहस का विषय रहा है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान हैंड सैनिटाइजर की मांग काफी बढ़ गई है. बड़ी संख्या में कंपनियां सैनिटाइजर बाजार में कूद चुकी हैं. ऐसे में सरकार को बेवजह के विवाद से बचने के लिए इस पर चीजों को साफ करते हुए स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए
14/07/2020
इस तरह की पोस्ट पाने के लिए हमारे पेज को लाइक करे।
बिहार की राजधानी पटना में रहने वाली गुड़िया देवी जोकि अपने 12 साल के बेटे के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि वो एक नर्सिंग असिस्टेंट के रूप में काम करती हैं। पर कोरोनावायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने उनसे उनका काम छीन लिया है। एक महीने तक तो मैंने किसी तरह अपने बचाए हुए पैसों से घर चलाया। जब वो चुकने लगे तो अब हम मां बेटे दिन में एक बार खाकर गुजारा कर रहे हैं। पर मुझे डर है कि यदि जल्द ही सब कुछ ठीक न हुआ तो हमारे पास खाने को कुछ नहीं बचेगा। मैं जिस किराए के मकान में रहती हूं, उसका भाड़ा भी नहीं दे पा रही। मुझे डर है कि कहीं मेरा मकान मालिक मुझे घर से निकल ही न दे।
यह स्थिति सिर्फ किसी एक गुड़िया देवी की नहीं है। देश में न जाने कितने परिवार हैं जो कोरोनावायरस के कारण हुए लॉकडाउन से पूरी तरह बर्बाद हो चले हैं। एक तरफ काम छूटने की पीड़ा ऊपर से इस बीमारी का खौफ। एक आम भारतीय परिवार दोतरफा मार का शिकार है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Contact the school
Telephone
Website
Address
Vill+post Kasara Mau
Maunath Bhanjan
275101