Kids Kingdom Senior Secondary School

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An English medium school situated in the heart of Mau, KKS stands for the holistic development of students.

Started with the intention of providing quality eduation to children in Purvanchal, we are now 800 students strong, and growing each day.

13/05/2023

Persistence. Delivery. Success. Congratulations, Janhavi on being district topper 3! We are proud to you!

Kids Kingdom Senior Secondary School An English medium school situated in the heart of Mau, KKS stands for the holistic development of students. Started with the intention of providing quality eduation to children in Purvanchal, we are now 800 students strong, and growing each day.

13/05/2023

Congratulations, Maryam! Your commitment to success makes us proud.

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31/03/2023

शबरी को आश्रम सौंपकर महर्षि मतंग जब देवलोक जाने लगे, तब शबरी भी साथ जाने की जिद करने लगी।

शबरी की उम्र दस वर्ष थी। वो महर्षि मतंग का हाथ पकड़ रोने लगी।

महर्षि शबरी को रोते देख व्याकुल हो उठे। शबरी को समझाया "पुत्री इस आश्रम में भगवान आएंगे, तुम यहीं प्रतीक्षा करो।"

अबोध शबरी इतना अवश्य जानती थी कि गुरु का वाक्य सत्य होकर रहेगा, उसने फिर पूछा- कब आएंगे..?

महर्षि मतंग त्रिकालदर्शी थे। वे भूत भविष्य सब जानते थे, वे ब्रह्मर्षि थे। महर्षि शबरी के आगे घुटनों के बल बैठ गए और शबरी को नमन किया।

आसपास उपस्थित सभी ऋषिगण असमंजस में डूब गए।ये उलट कैसे हुआ। गुरु यहां शिष्य को नमन करे, ये कैसे हुआ???

महर्षि के तेज के आगे कोई बोल न सका।
महर्षि मतंग बोले-
पुत्री अभी उनका जन्म नहीं हुआ।
अभी दशरथ जी का लग्न भी नहीं हुआ।
उनका कौशल्या से विवाह होगा।फिर भगवान की लम्बी प्रतीक्षा होगी।
फिर दशरथ जी का विवाह सुमित्रा से होगा।फिर प्रतीक्षा..

फिर उनका विवाह कैकई से होगा।फिर प्रतीक्षा..

फिर वो जन्म लेंगे, फिर उनका विवाह माता जानकी से होगा।फिर उन्हें 14 वर्ष वनवास होगा और फिर वनवास के आखिरी वर्ष माता जानकी का हरण होगा। तब उनकी खोज में वे यहां आएंगे।तुम उन्हें कहना आप सुग्रीव से मित्रता कीजिये। उसे आतताई बाली के संताप से मुक्त कीजिये, आपका अभीष्ट सिद्ध होगा। और आप रावण पर अवश्य विजय प्राप्त करेंगे।

शबरी एक क्षण किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। अबोध शबरी इतनी लंबी प्रतीक्षा के समय को माप भी नहीं पाई।

वह फिर अधीर होकर पूछने लगी- "इतनी लम्बी प्रतीक्षा कैसे पूरी होगी गुरुदेव???"

महर्षि मतंग बोले- "वे ईश्वर है, अवश्य ही आएंगे।यह भावी निश्चित है। लेकिन यदि उनकी इच्छा हुई तो काल दर्शन के इस विज्ञान को परे रखकर वे कभी भी आ सकते है। लेकिन आएंगे "अवश्य"...!

जन्म मरण से परे उन्हें जब जरूरत हुई तो प्रह्लाद के लिए खम्बे से भी निकल आये थे। इसलिए प्रतीक्षा करना।वे कभी भी आ सकते है। तीनों काल तुम्हारे गुरु के रूप में मुझे याद रखेंगे। शायद यही मेरे तप का फल है।"

शबरी गुरु के आदेश को मान वहीं आश्रम में रुक गई। उसे हर दिन प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा रहती थी।वह जानती थी समय का चक्र उनकी उंगली पर नाचता है, वे कभी भी आ सकतें है।

हर रोज रास्ते में फूल बिछाती है और हर क्षण प्रतीक्षा करती।

कभी भी आ सकतें हैं।
हर तरफ फूल बिछाकर हर क्षण प्रतीक्षा। शबरी बूढ़ी हो गई।लेकिन प्रतीक्षा उसी अबोध चित्त से करती रही।

और एक दिन उसके बिछाए फूलों पर प्रभु श्रीराम के चरण पड़े। शबरी का कंठ अवरुद्ध हो गया। आंखों से अश्रुओं की धारा फूट पड़ी।

गुरु का कथन सत्य हुआ।भगवान उसके घर आ गए। शबरी की प्रतीक्षा का फल ये रहा कि जिन राम को कभी तीनों माताओं ने जूठा नहीं खिलाया, उन्हीं राम ने शबरी का जूठा खाया।

ऐसे पतित पावन मर्यादा, पुरुषोत्तम, दीन हितकारी श्री राम जी की जय हो। जय हो। जय हो। एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद वृद्धा भीलनी के मुंह से स्वर/बोल फूटे-

"कहो राम ! शबरी की कुटिया को ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ..?"

राम मुस्कुराए- "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मोल/मूल्य..?"

"जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ, जब तुम जन्मे भी नहीं थे, यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो ? कैसे दिखते हो ? क्यों आओगे मेरे पास ? बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा, जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा।

राम ने कहा- "तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को शबरी के आश्रम में जाना है।”

"एक बात बताऊँ प्रभु ! भक्ति में दो प्रकार की शरणागति होती है। पहली ‘वानरी भाव’ और दूसरी ‘मार्जारी भाव’।

”बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है, ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर को पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। दिन रात उसकी आराधना करता है...!” (वानरी भाव)

पर मैंने यह भाव नहीं अपनाया। ”मैं तो उस बिल्ली के बच्चे की भाँति थी, जो अपनी माँ को पकड़ता ही नहीं, बल्कि निश्चिन्त बैठा रहता है कि माँ है न, वह स्वयं ही मेरी रक्षा करेगी, और माँ सचमुच उसे अपने मुँह में टांग कर घूमती है। मैं भी निश्चिन्त थी कि तुम आओगे ही, तुम्हें क्या पकड़ना...।" (मार्जारी भाव)

राम मुस्कुराकर रह गए!!

भीलनी ने पुनः कहा- "सोच रही हूँ बुराई में भी तनिक अच्छाई छिपी होती है न... “कहाँ सुदूर उत्तर के तुम, कहाँ घोर दक्षिण में मैं!" तुम प्रतिष्ठित रघुकुल के भविष्य, मैं वन की भीलनी। यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो तुम कहाँ से आते..?”

राम गम्भीर हुए और कहा-

भ्रम में न पड़ो मां! “राम क्या रावण का वध करने आया है..?”

रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से बाण चलाकर भी कर सकता है।

राम हजारों कोस चलकर इस गहन वन में आया है, तो केवल तुमसे मिलने आया है मां, ताकि “सहस्त्रों वर्षों के बाद भी, जब कोई भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे तो इतिहास चिल्ला कर उत्तर दे, कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी माँ ने मिलकर गढ़ा था।”

"जब कोई भारत की परम्पराओं पर उँगली उठाये तो काल उसका गला पकड़कर कहे कि नहीं! यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ, एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है।"

राम वन में बस इसलिए आया है, ताकि “जब युगों का इतिहास लिखा जाए, तो उसमें अंकित हो कि "शासन/प्रशासन और सत्ता" जब पैदल चलकर वन में रहने वाले समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, तभी वह रामराज्य है।”
(अंत्योदय)

राम वन में इसलिए आया है, ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतीक्षाएँ अवश्य पूरी होती हैं। राम रावण को मारने भर के लिए नहीं आया है माँ!

माता शबरी एकटक राम को निहारती रहीं।

राम ने फिर कहा-

राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता! “राम की यात्रा प्रारंभ हुई है, भविष्य के आदर्श की स्थापना के लिए।”

"राम राजमहल से निकला है, ताकि “विश्व को संदेश दे सके कि एक माँ की अवांछनीय इच्छओं को भी पूरा करना ही 'राम' होना है।”

"राम निकला है, ताकि “भारत विश्व को सीख दे सके कि किसी सीता के अपमान का दण्ड असभ्य रावण के पूरे साम्राज्य के विध्वंस से पूरा होता है।”

"राम आया है, ताकि “भारत विश्व को बता सके कि अन्याय और आतंक का अंत करना ही धर्म है।”

"राम आया है, ताकि “भारत विश्व को सदैव के लिए सीख दे सके कि विदेश में बैठे शत्रु की समाप्ति के लिए आवश्यक है कि पहले देश में बैठी उसकी समर्थक सूर्पणखाओं की नाक काटी जाए और खर-दूषणों का घमंड तोड़ा जाए।”

और

"राम आया है, ताकि “युगों को बता सके कि रावणों से युद्ध केवल राम की शक्ति से नहीं बल्कि वन में बैठी शबरी के आशीर्वाद से जीते जाते है।”

शबरी की आँखों में जल भर आया था।
उसने बात बदलकर कहा- "बेर खाओगे राम..?”

राम मुस्कुराए, "बिना खाये जाऊंगा भी नहीं मां!"

शबरी अपनी कुटिया से झपोली में बेर लेकर आई और राम के समक्ष रख दिये।

राम और लक्ष्मण खाने लगे तो कहा-
"बेर मीठे हैं न प्रभु..?”

"यहाँ आकर मीठे और खट्टे का भेद भूल गया हूँ मां! बस इतना समझ रहा हूँ कि यही अमृत है।”

सबरी मुस्कुराईं, बोली- "सचमुच तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो, जय श्रीराम "🙏

23/10/2022

May this Deepawali be alight with the brightness of knowledge, compassion for others, and wellness - for us and for those around us.
The Kids Kingdom Senior Secondary School family; all our teachers, students, and staff wish you a very happy Diwali.

01/10/2022

स्कूल जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों तक पहुँचायें

1. शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें। टीवी पर आठ बजे के बाद आपके बच्चे से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता है।

2. अपने बच्चे की स्कूल डायरी देखने के लिए 30-45 मिनट निकालिए। उसके गृहकार्य पूरे कराइये।

3. रोज सभी विषयों में उनका प्रदर्शन देखिए उन विषयों का खास ध्यान रखिए जिसमें वह अच्छा नहीं कर रहा है।

4. उनकी बुनियादी शिक्षा भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

5. उन्हें रात को 10:00 बजे तक सोने और सुबह 6:00 बजे उठने की आदत डालिए।

6. अगर आप किसी पार्टी/सामाजिक आयोजन में जाते हैं और बच्चों के साथ देर रात तक लौटते हैं तो अगले दिन बच्चे को आराम करने दीजिए (स्कूल मत भेजिए) अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अगले दिन स्कूल जाए तो रात 10:00 बजे तक घर लौट आइए।

7. अपने बच्चे में पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत का विकास कीजिए।

8. *सोने के समय अपने बच्चों को वीर शिवाजी, डॉ बी आर अम्बेडकर, सावित्री बाई फुले ज्योतिबा फुले की जीवन गाथा और संघर्ष की कहानियां जरूर सुनाए*

9. हर साल गर्मी की छुट्टी में (अपने बजट के अनुसार ) कहीं घूमने जाइए। इससे वे अलग लोगों के साथ और अलग जगहों पर रहना सीखते हैं।

10. अपने बच्चे की प्रतिभा का पता लगाइए और उसे इसको निखारने में सहायता कीजिए (वह किसी विषय, संगीत, खेल, अभिनय, चित्रांकन, नृत्य आदि में दिलचस्पी रख सकता है)। इससे उसका जीवन आनंददायक हो जाएगा।

11. उसे सिखाइये कि प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए (कम से कम गर्म चीजें प्लास्टिक में उपयोग न करें )।

12. हर रविवार कोशिश कीजिए कि खाने की कोई ऐसी चीज बनाएं जो उन्हें पसंद है। उन्हें इसमें अपनी मदद करने के लिए कहिए (उन्हें अच्छा लगेगा)।

13. प्रत्येक बच्चा जन्म से वैज्ञानिक होता है उसके पास ढेरों सवाल होते हैं मुमकिन है हम जवाब न दे पायें पर जानकारी न होने के कारण हमें सवाल पर गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए (उत्तर पता करने की कोशिश कीजिए और उन्हें बताइए)।

14. उन्हें अनुशासन और जीने के बेहतर तरीकों के बारे में बताइए। ( सही गलत के बारे में समझाइए )

15. दाखिले के लिए किसी स्कूल के सर्वश्रेष्ठ होने संबंध में निर्णय ( कॉरपोरेट स्कूल या पास प्रतिशत ज्यादा होने या परिचितों, पड़ोसियों की सिफारिश या सरकारी स्कूल या कम बजट वाला स्कूल होने के आधारहोने के आधार पर मत कीजिए ) । सबसे अच्छा स्कूल वह है जो आपके बजट के लिहाज से उपयुक्त हो। भविष्य में आपको बच्चे की शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। इसलिए आपको आज कुछ पैसे बचाने की जरूरत है। इसके अलावा दूसरे खर्चे तो हैं ही। इसलिए योजना सोच समझकर बनाइए।

16. उनमें खुद पढ़ने और सीखने की आदत डालिए।

17. उन्हें मोबाइल फोन का उपयोग न करने दिया जाए, आवश्यक होने पर अपनी देख-रेख में ही मोबाइल का उपयोग करने दिया जाए।

18. बच्चे को अपने काम में सहायता करने के लिए कहिए। (इसमें खाना बनाना, सफाई,चीजों को व्यवस्थित करना शामिल है।)

19. और सबसे महत्त्वपूर्ण कि हमें अपने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी देने चाहिए ताकि वो जीवन में सफल और सही इन्सान बन सके।

हमें अपने अनुभव के आधार पर अपने बच्चों का जीवन सुंदर और स्वस्थ बनाने में उनकी सहायता करना चाहिए।
🙏 🙏

05/09/2022

Thank you, for changing the world one day at a time.

We wish all our teachers a very happy Teacher's Day, and also fondly remember Sri Sarvepalli Radhakrishnan Ji on his birth anniversary, an educator par excellence and a lifelong inspiration for the work we do.

15/08/2022

It's no small feat to have proven wrong all those who doubted this nation's fate 75 years ago. 75 years of multiplicity, togetherness, of courage, and sacrifice, of constant building and rebuilding. 75 years of independence.

With gratitude in our hearts, and hope for a truly free future, one that Rabindranath Tagore once envisioned, we wish everyone a very happy 75th Independence Day.

Kids Kingdom Senior Secondary School An English medium school situated in the heart of Mau, KKS stands for the holistic development of students. Started with the intention of providing quality eduation to children in Purvanchal, we are now 800 students strong, and growing each day.

किड्स किंग्डम सीनियर सेकेंडरी स्कूल 10वीं के बच्चे जिले में टॉप फाइव में, 12वीं का परिणाम भी बेस्ट 09/08/2022

https://apnamau.in/kids-kingdom-senior-secondary-school-10th-children-in-top-five-in-the-district-12th-result-even-better/

We're making headlines, already!
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किड्स किंग्डम सीनियर सेकेंडरी स्कूल 10वीं के बच्चे जिले में टॉप फाइव में, 12वीं का परिणाम भी बेस्ट मऊ। सीबीएसई दसवीं के परीक्षा में अखिल यादव ने 96.4 % अंक हासिल कर विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया

Kids Kingdom Sr. Sec School – Sculpting a better world with Education 02/07/2022

Join us in this exciting journey. Our admissions are open now!
Log on to our website www.kidskingdomschoolmau.com to know more.

*Srishti Sharma, District Topper 1, Class 10th Boards

Kids Kingdom Sr. Sec School – Sculpting a better world with Education Kids Kingdom Sr. Sec. School, in its present form was established in the year 2005, it is a progressive, child centered, and Higher Secondary School affiliated to the Central Board of Secondary Education, New Delhi. The School is run under the aegis of RAS eventual foundation, consisting of eminent....

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