*लोकसभा चुनाव २०२४ 😗
*मथुरा संसदीय क्षेत्र -१७*
वास्तव में इस बार का चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है यह भारत को विकास की यात्रा को आगे ले जाने वाला , विश्व पटल पर भारत के शिरमौर होने की दिशा में उठने वाले कदमों को मज़बूत करने वाला , भारत का खोया हुआ गौरव पुनः वापस दिलाने में सहायक होने वाली सरकार को चुनने वाला चुनाव है । लेकिन जिस प्रकार से मतदाताओं की बेरुख़ी दिखायी दी है बहुत ही चिंताजनक और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ - साथ विपक्षी नेताओं के लिए भी स्वमूल्यांकन का विषय है । किसी भी लोकतांत्रिक देश में विपक्ष का कमजोर होना कितना नुक़सान दायक है यह अब तक दो चरणों में हुए मतदान प्रतिशत से स्पष्ट दिख रहा है मैं यहाँ वैसे तो केवल मथुरा के चुनाव पर ही चर्चा करना चाहूँगा जिस प्रकार लगभग दस पोलिंग बूथों पर मत ही नहीं डाले गये यह कोई अकस्मात् रात ही रात में लिया गया निर्णय नहीं होगा इसकी सुगबुगाहट पहले भी सुनायी दे रही होगी । मैं यहाँ इसके लिए ज़िला प्रशासन को ज़िम्मेदार मानता हूँ क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा बहुत बड़ी धनराशि मतदाता जागरूकता के प्रचार प्रसार के लिए आती है , क्या वास्तव में ज़िला प्रशासन द्वारा कोई मुहिम चलायी गई ? दूसरा इसके लिए सत्तारूढ़ दल के नेता और कार्यकर्ता , जब बीएलओ या कार्यकर्ता पर्ची बाँटने गया होगा तब भी सामान्य रूप से इस प्रकार की चर्चा किसी न किसी मतदाता के मुँह से अवश्य आयी होगी की हम तो मतदान करने नहीं जाएँगे तो क्या उस बीएलओ या कार्यकर्ता की यह नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं थी की प्रशासन को अवगत कराये । या फिर यह माना जाये की उन गाँवों , कॉलोनियों में बीएलओ गये ही नहीं तब भी वे दोषी हैं इसकी जाँच करायी जाये । लोकतंत्र में इस से बड़ी कालिख कुछ और नहीं हो सकती कि लोगों ने पूरे बूथ पर कोई मतदान ही नहीं किया । चाहे भले सत्तारूढ़ दल पुनः सरकार बना ले लेकिन यह बड़ा ही विचारणीय विषय है । जैसा कि मैंने ऊपर सबसे पहले इस बार के चुनाव का महत्व बताया कि यह चुनाव और इसका परिणाम हमें किस ओर लेकर जा सकता है जागरूक मतदाताओं को ऐसा नहीं करना चाहिये इसके लिये चुनाव से पहले और बाद में भी बहुत मौक़े और अन्य तरीक़े हैं अपनी बात रखने के । अब में बात करता हूँ मथुरा के चुनाव परिणाम की - पिछली बार सपा , बसपा , लोकदल तीनों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और कांग्रेस प्रत्याशी महेश पाठक लगभग छब्बीस हज़ार वोट ही प्राप्त कर सके थे इस बार लोकदल भाजपा के साथ है और यह सर्वविदित है कि मथुरा लोकदल का गढ़ है । सपा कांग्रेस के साथ है तो वहीं बसपा अकेले अपने केड़र वोट और जाट बोट के सहारे अपनी नैया पार लगाने की जुगत में है अब यह निर्भर करेगा कि सुरेश सिंह जाटों के बोट बैंक मानी जाने वाली बलदेव , माँट , छाता और गोवर्धन की अपनी खूँटेल पट्टी से कितना बोट ले पायेंगे हाँ मांट में पंडित श्याम सुन्दर शर्मा के प्रभाव वाला टैंटिगांव , नौहझील वाले क्षेत्र में ब्राह्मण बोट में भी सेंध सुरेश सिंह ने लगायी है श्याम सुन्दर शर्मा ने यदि माँट से बाहर भी एक दो सभायें की होती तो ब्राह्मण बोट में और बढ़ावा हो सकता था तो शायद सुरेश सिंह कहीं न कहीं फाइट में आ जाते । वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी मुझे नहीं लगता महेश पाठक जी से अधिक प्रभावशाली रूप से बढ़त बना पायेंगे क्योंकि जिस प्रकार से कांग्रेस और सपा के किसी भी बड़े नेता के प्रचार में साथ न चलना और किसी बड़े नेता के द्वारा जनसभा का ना होना यह दर्शाता है कि शीर्ष नेतृत्व यहाँ अपनी स्थिति जान गया था और प्रत्याशी को उसके हाल पर ही छोड़ दिया हालाँकि कांग्रेस प्रत्याशी मेरा सहपाठी होने के साथ साथ मेरा बहुत अच्छा मित्र भी है और जिस प्रकार की जीवटता के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा वह क़ाबिले तारीफ़ है वास्तव में सच्चा सिपाही वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत ना हारे । बोट प्रतिशत निश्चित ही प्रभावित रहा है लेकिन जिस प्रकार से मोदी जी द्वारा दिये गये नारे *अबकी बार चार सौ पार* से ऐसा लगा कि बीजेपी कार्यकर्ता थोड़े से शिथिल हुए उन्हें भी यह लगने लगा कि मोदी योगी के सहारे ही जीत जाएँगे और शहर के कई बूथों पर तो बूथ अध्यक्ष और एजेंट तक भी नहीं बना पाये और जहां बने वहाँ बूथ अध्यक्षों के बैठने की व्यवस्था तक पदाधिकारी और प्रत्याशी द्वारा नहीं की गई जिस बूथ मज़बूती की बात भाजपा करती थी इस बार बूथ कमजोर पड़ा । यह अलग बात है की संगठन और संघ के अनुसंगिक संगठनों के कारण भाजपा जीत तो जाएगी लेकिन हार जीत का अंतर इस बार बहुत कम ( एक लाख के अंदर ) ही रहेगा
Balkishan Agrawal Maths Guru
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26/04/2024
उसका किरदार परख लेना यकीन से पहले,
मेरे बारे में जो तुमसे बुरा कहता है..
वोट पर्चियों के लिए, 1950 ईसीआई (आपका वोटर आईडी) पर एसएमएस करें, आपको 15 सेकंड में वोट पर्ची मिल जाएगी।जैसे - ECI SWD3456789
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22/04/2024
New year पर 5 दिन पहले शुभकामनाएँ करते थे पर जब अपना *हिन्दू नववर्ष* आ रहा हे तो कोई क्यों नहीं शुभकामनाएँ भेज रहे हो
चलो अब हम भी शुभकामनाएँ देना शुरू करे। 🍁"रिद्धि दे, सिद्धि दे,
वंश में वृद्धि दे, ह्रदय में ज्ञान दे,
चित्त में ध्यान दे, अभय वरदान दे,
दुःख को दूर कर, सुख भरपूर कर, आशा को संपूर्ण कर,
सज्जन जो हित दे, कुटुंब में प्रीत दे,
जग में जीत दे, माया दे, साया दे, और निरोगी काया दे,
मान-सम्मान दे, सुख समृद्धि और ज्ञान दे,
शान्ति दे, शक्ति दे, भक्ति भरपूर दें..."🍁
🍁आप को 9 अप्रैल से शुरू होने वाले नव वर्ष विक्रम संवत 2081 के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।
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29/03/2024
झुक झुककर सीधा खड़ा हुआ,अब फिर झुकने का शौक़ नहीं
अपने ही हाथों रचा स्वयं ,तुमसे मिटने का ख़ौफ़ नहीं
तुम हालातों की भट्टी में, जब-जब भी मुझको झोंकोगे
तब तपकर सोना बनूँगा मैं,तुम मुझको कब तक रोकोगे
अब समझ में आया है कि सबके लिए अच्छा होना ।
कभी भी अपने लिए अच्छा नहीं हो सकता ।।
अलविदा दोस्तों
सबसे ना मिला करो इतनी सादगी के साथ , ये दौर अलग है ये लोग अलग हैं
लगे आग यदि अपने घर में, सब चीखें चिल्लाते हैं।
जले पड़ोसी का घर जिस दिन, जाकर नहीं बुझाते हैं।।
मिले जीविका जिसे जहाॅं से उसका तो सम्मान करें।
कर्तव्यों को भूल लोग क्यों, दरबारी बन जाते हैं।।
नतमस्तक गुंडो के आगे, फिरें छुपाते मुंह अपना।
बनकर बर्बादी का कारण, सब कुछ ठीक दिखाते हैं।।
बातों के जो शहंशाह हैं,छींटाकशी करें सब पर।
कभी न झांकें अंतर्मन में, सबको गलत बताते हैं।।
कुछ को केवल अपनी चिंता, नहीं सोचते औरों की।
आदर्शों की बातें करके, मन में नहीं लजाते हैं।।
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