sanskar vidhya mandir

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"childhood dreams • endless possibilities "

06/06/2026

नाखून की हर परत की तरह, शिक्षा की हर परत भी बच्चे के भविष्य को मजबूत बनाती है।
संस्कार विद्या मंदिर, ओले मथुरा — जहाँ ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास मिलकर सफलता की नींव रखते हैं। ✨📚

30/05/2026

✌️💫

27/04/2026

हीटवेव अलर्ट 🚨☀️
तेज़ गर्मी आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। सावधान रहें और सुरक्षित रहें।
💧 पर्याप्त पानी पिएं
🧢 सिर ढककर बाहर निकलें
🌤 धूप में जाने से बचें
🏠 ठंडी जगह पर रहें
आपकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

14/04/2026

डॉ. अम्बेडकर केवल एक नेता नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रतीक थे। आज के विद्यार्थियों के लिए उनका जीवन प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है:
ज्ञान ही असली शस्त्र है: बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और दुनिया की सबसे बड़ी डिग्रियां हासिल कीं। वे सिखाते हैं कि गरीबी या मुश्किल हालात आपकी पढ़ाई में बाधा नहीं, बल्कि एक चुनौती हैं।
* **अनंत जिज्ञासा:** उनके पास लगभग 50,000 किताबों का निजी संग्रह था। वे मानते थे कि सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए।
संस्कार और शिक्षा: शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल डिग्री लेना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और समानता लाना है।
> *"शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा वह दहाड़ेगा।"* — बाबा साहेब
हमारा अनुरोध:
प्रिय विद्यार्थियों, इस अवकाश के दौरान बाबा साहेब के जीवन के संघर्षों के बारे में कम से कम 5 पंक्तियाँ अपनी डायरी में अवश्य लिखें। उनके पदचिन्हों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जय भीम! जय हिन्द!
सादर,
प्रधानाचार्य
संस्कार विद्या मंदिर

Photos from Dr. Subhash Garg's post 13/04/2026
07/04/2026

"आपकी यादें और आपके द्वारा दिखाया गया रास्ता हमेशा हमारे साथ रहेगा।"

23/03/2026

आज 23 मार्च है—वही ऐतिहासिक दिन जब भारत माँ के लाडले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लिया था। उनकी शहादत सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हम सबके लिए प्रेरणा की मशाल है।

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का वह अमर विचार आज भी हमारी रगों में जोश भर देता है:

"वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को नहीं कुचल पाएंगे।"

आज संस्कार विद्या मंदिर परिवार इन महान क्रांतिकारियों की वीरता और बलिदान को कोटि-कोटि नमन करता है। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम उनके सपनों का भारत बनाएंगे। 🙏✨

12/03/2026

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09/03/2026

भारत के छोटे कस्बों और गाँवों में कुछ समय बिताइए, तो एक बात बहुत जल्दी समझ में आ जाएगी — गुटखा अब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का सामान्य हिस्सा बन चुका है।
किसी भी किराना दुकान पर जाइए, बाहर रंग-बिरंगे गुटखे के पाउच लटकते दिखेंगे। हर पैकेट की कीमत केवल ₹10 या ₹20 होती है, इसलिए लोगों को लगता है कि यह बहुत छोटा ख़र्च है। लेकिन जब यह छोटी आदत रोज़ाना लाखों लोग दोहराते हैं, तो इसका बड़ा असर बेहद गंभीर हो जाता है।
नवीनतम Household Consumption & Expenditure Survey एक चिंताजनक सच्चाई दिखाता है।
- ग्रामीण परिवार अपनी खपत का लगभग 4% तंबाकू पर खर्च करते हैं, जबकि शिक्षा पर केवल 2.5%।
- पिछले दशक में तंबाकू पर खर्च तेज़ी से बढ़ा है — ग्रामीण भारत में 58% और शहरी भारत में 77%।
- आज केवल गुटखा ही ग्रामीण भारत में तंबाकू खर्च का लगभग 41% हिस्सा है, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी खपत बहुत अधिक है।
असल ज़मीनी हकीकत देखें तो यह केवल सही या गलत चुनाव का मामला नहीं है।
गुटखा सस्ता है, आसानी से उपलब्ध है और कई समुदायों में सामाजिक रूप से स्वीकार्य है। बहुत से मज़दूर और दिहाड़ी कामगार, जो शारीरिक रूप से कठिन काम करते हैं, थकान या तनाव से निपटने के लिए इसे जल्दी आदत बना लेते हैं।
लेकिन समय के साथ इसकी कीमत बहुत भारी पड़ती है — स्वास्थ्य पर, परिवार की आर्थिक स्थिति पर, और बच्चों के भविष्य के अवसरों पर।
अगर भारत वास्तव में चाहता है कि ग्रामीण क्षेत्र आगे बढ़ें, तो चर्चा केवल सड़कों, योजनाओं और बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं रह सकती।
हमें मज़बूत जागरूकता, व्यवहार में बदलाव और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों की भी ज़रूरत है।
👉 जब कोई परिवार गुटखे पर बच्चे की शिक्षा से ज़्यादा पैसा खर्च करने लगे, तो यह हमारे विकास सफ़र की गहरी चुनौती को दिखाता है

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