Dear Students
Our competitions that were announced under the "HAPPY DIWALI CELEBRATION" event will take place in our college ...the dates for competitions will be announce soon...........
To participate in competitions please register on bellow link:
http://on.fb.me/13GCEWc
Shri Ji Baba Saraswati Mahavidyalaya, Mathura
This is an academic institution, governed by Vidya Bharti Akhil Bhartiya Shiksha Sansthan
श्री जी बाबा सरस्वती (व्या.प्र.) महाविद्यालय , विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संसथान के लक्ष्य को पूरा करने हेतु मथुरा जनपद में सन २००० में स्थापित विद्या भारती का एक मात्र महाविद्यालय है | मानव संसाधन के विकास के लिए यह अपनी श्रेष्ठता, निष्ठां, अनुशासन एवं अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है | यहाँ शिक्षा एक व्यवसाय नहीं अपितु सामाजिक प्रतिबद्धता है और सतत प्रयास है राष्ट्र निर्माण का |
23/10/2014
श्री जी बाबा सरस्वती महाविद्यालय परिवार की ओर से आप सभी को सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें |
एक बार 3 लोग बैठ के बातें कर रहे थे और बड़ी जोर
जोर से हंस रहे थे, उन में से -एक किसी मीडिया चैनल
का मालिक था, एक विदेशी था,एक नेता था
सब से पहले विदेशी बोला -
यहाँ के लोग तो मुर्ख हैं,हमारा कूड़ा खाते हैं।
हमारे कुत्तो की साबुन से नहाते हैं।
हमारे बनाये कीटनाशक को अमृत समझ के पीते हैं।
इनकी ही गौ माता को मार कर हम
मैग्गी, लेज, और सभी सामानों में मिलाते हैं।
ये मुर्ख ब्रांडेड समझ के मजे से खा जाते हैं।
नीम की दातुन को छुङवा के, लगा दिया कोलगेट
घिसने पे।
जो बनती है, जानवरों की हड्डी पिसने पे।
दीवाली जैसे त्यौहारों पे भी,
अब ये हमारी चोकलेट -कुरकुरे खाते हैं
और अपनी गौ माता के दूध में मिलावट बताते हैं।
हम यहाँ बैठ कर इनको, अपने इशारे पे नचवाते हैं।
राम सेतु आदि यहाँ बैठ के तुड्वाते हैं।
यह थे कभी दुनिया के मालिक, आज नौकर
इनको बना दिया।
आसमान से पटक कर, मिट्टी में इनको मिला दिया।
पर अक्ल इन मूर्खो को अभी भी नहीं आई
आज भी ब्रांडेड से नहाते हैं, ब्रांडेड खाते हैं।
ब्रांडेड चलाते हैं, ब्रांडेड पहनते हैं
हा हा हा हा हा
पूरे कमरे में गूंज रही, ठहाको की फुलवारी थी।
अब विदेशी के बाद नेता की बारी थी।
दारु का गिलास उठा के नेता बोला।
अरे विदेशी भाई तुमने हमको कम तोला।
ये लोग तुम्हारे गुलाम न होते।
हम अगर आपके साथ न होते।
हमने सोने की चिड़िया को रुलाया है।
यहाँ का राज हमने ही तुम्हे दिलाया है।
तुमने तो सिर्फ पैसा और सामान दिया है।
असली पागल तो इनको हमने किया है।
कभी जात के नाम पे ,कभी धर्म के नाम पे,
हमने भाई भाई को लड़ाया है।
हम देश को निचोड़ के बेच देंगे तुम इत्मीनान रखना।
बस पैसा कम न हो जाये मेरे स्विस खाते का ख्याल
रखना।
इसी बीच मीडिया वाला चिल्लाया तोड़ दारु
की बोतल, जोर से बङबङाया
तुम दोनों कुछ भी न होते,
हम अगर आपके साथ न होते
तुम्हारी हर नीच हरकत हम छुपाते हैं।
पकड़ के किसी बेकसूर को ज़ालिम ज़ालिम चिल्लाते
हैं।
ब्रांडेड आपके इसलिए बिकते हैं, क्यूँ की हर ब्रेक में
हमारे दिखते हैं।
विदेशी सामान का असली सच हम दिखाते नहीं हैं।
इसलिए अच्छे स्वदेशी प्रोडक्ट टिक पाते नही हैं।
अच्छे भले लोगों को हम फंसा रहे हैं।
इसलिए आप सबको मुर्ख बना रहे हैं।
हर चैनल हर एंकर बिकता है ।
इसलिए सुबह 6 बजे हर जगह विदेशी प्रोडक्ट
दिखता है।
अगर सिर्फ 24 घंटे हम ईमांनदारी से खबरें चला दें
तुम दोनों को एक दिन में जेल भिजवा दें
So that es Diwali pe Sabko chocklate ki jagah sweets do !!
Ohho
The only person you should try to be better than is the
person you were yesterday.
None other than you-yourself is your biggest
competitor.
09/10/2014
09/10/2014
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें.....
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