Shree Chandan jha ji Maharaj

Shree Chandan jha ji Maharaj श्री राम कथा वाचक ���

24/01/2026
भगवत कृपा से त्रयंबकेश्वर महादेव जी का दर्शन करने का लाभ प्राप्त हुआ  हर हर महादेव 🌹🥀🪷🌷🌺🌹🥀🪷🌷🌺🌺🙏🪔
09/11/2025

भगवत कृपा से त्रयंबकेश्वर महादेव जी का दर्शन करने का लाभ प्राप्त हुआ हर हर महादेव 🌹🥀🪷🌷🌺🌹🥀🪷🌷🌺🌺🙏🪔

18/07/2024

🙏 *जय श्री बांके बिहारी जी की जय* 🙏
🙏 *राधे राधे जी* 🙏 🙏 *सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो* 🙏

जय भोलेनाथ 🌹🌷🙏🌹
14/09/2023

जय भोलेनाथ 🌹🌷🙏🌹

जय महादेव 🌷🌹🙏🌷
14/09/2023

जय महादेव 🌷🌹🙏🌷

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर भोले नमः शिवाय।🌷🙏🌷🌹
13/09/2023

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर भोले नमः शिवाय।🌷🙏🌷🌹

जय श्री सीताराम हनुमान 🌷🙏🌹
08/09/2023

जय श्री सीताराम हनुमान 🌷🙏🌹

जय गुरुदेव 🌹🌹🌹🌹🌷🙏🌹
30/08/2023

जय गुरुदेव 🌹🌹🌹🌹🌷🙏🌹

यह बजरंग बाण प्राचीन पाण्डुलिपियों के आधार पर पाठसंशोधनपूर्वक प्रस्तुत किया जा रहा है । साधकों मेंप्रसिद्धगोकुलभवन अयोध्...
30/08/2023

यह बजरंग बाण प्राचीन पाण्डुलिपियों के आधार पर पाठ
संशोधनपूर्वक प्रस्तुत किया जा रहा है । साधकों मेंप्रसिद्ध
गोकुलभवन अयोध्या के श्रीराममंगलदास जी महाराज के यहाँ
से प्रकाशित पुस्तक तथा बीकानेर लाइब्रेरीकी
पाण्डुलिपियों का सहयोग इसके स्वरूप प्रस्तुति में मूल कारण है
। बाज़ार में उपलब्ध बजरंगबाण में २१चौपाइयांछूटी हुई हैं । जिनमें
दैन्यभाव की झलक के साथ इसके अनुष्ठान का दिग्दर्शन होता
है ।– TulasiDas जी महlराज
बजरंगबाण का यह पाठक्रम प्रामाणिकऔर अनुभूत है । उपलब्ध
पुस्तकों में लगभग २१ चौपाइयाँ छूटी हुई हैं ।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिद्ध करैं हनुमान ।।
जय हनुमन्त सन्त हितकारी ।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महा सुख दीजै
।।२।।
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा ।
सुरसा बदन पैठि विस्तारा ।।
आगे जाय लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका
।।४।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम पद लीन्हा
।।बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा ।
अति आतुर यम कातर तोरा
।।६।।
अक्षय कुमार को मारिसंहारा ।
लूम लपेटि लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई ।
जै जै धुनि सुर पुर में भई ।।८।।
अब विलंब केहि कारण स्वामी ।
कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी ।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।
आतुरहोई दुख करहु निपाता ।।१०।।
जै गिरधर जै जै सुख सागर ।
सुर समूह समरथ भट नागर ।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले ।
बैिरहिं मारू बज्र के कीलै ।।१२।।
गदा बज्र तै बैरिहीं मारो ।
महाराज निज दास उबारो ।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो
।।१४।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा ।
ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीशा ।।
सत्य होहु हरि शपथ पायके ।
राम दुत धरू मारू धायके ।।१६।।
जै हनुमन्त अनन्त अगाधा ।
दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा ।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ।।१८।।
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं
। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं । अपने काज लागि गुण गावौं ।।
२०।
।जय अंजनि कुमार बलवन्ता
। शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।।
बदन कराल काल कुल घालक ।
राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।२२।
।भूत प्रेत पिशाच निशाचर
। अग्नि बैताल काल मारी
मर ।।
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की ।
राखुनाथ मर्जाद नाम की ।।२४।
।जनकसुतापति-दास कहावौ ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावौ ।
।जय जय जय धुनि होत अकाशा ।
सुमिरत होत दुसहु दुःख नाशा ।।२६।
।चरन पकरि कर जोरि मनावौं |
एहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।
।उठु-उठु चलु तोहि राम दोहाई
पाँय परौं कर जोरि मनाई ।।२८।
।ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता
। ॐ हनु हनुहनु हनु हनु हनुमंता ।
।ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।
ॐ सं सं सहमि पराने खलदल ।।३०।।
अपने जन को तुरत उबारौ ।
सुमिरत होतअनन्द हमारौ ।
।ताते विनती करौं पुकारी ।
हरहु सकल प्रभु विपति हमारी ।।३२।
।ऐसो प्रबल प्रभाव प्रभु तोरा ।
कस नहरहु दुःख संकट मोरा ।।
हे बजरंग, बाण सम धावो ।
मेटि सकल दुःख दरस दिखावो ।।३४।।
हे कपिराज काज कब ऐहौ ।
अवसर चूकि अन्त पछितैहौ ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा ।
धावहु हे कपि पवन कुमारा ।।३६।।
जयति जयति जय जय हनुमाना ।
जयति जयति गुणज्ञान निधाना ।।
जयति जयति जय जय कपिराई ।
जयति जयतिजय जय सुखदाई ।।३८।।
जयति जयति जय राम पियारे ।
जयति जयति जय सिया दुलारे ।।
जयति जयति मुद मंगलदाता ।।
जयति जयति त्रिभुवन विख्याता ।।४०।।
यहि प्रकार गावत गुण शेषा ।
पावत पार नहीं लवलेषा ।।
राम रूप सर्वत्र समाना ।
देखत रहत सदा हर्षाना ।।४२।।
विधि शारदा सहित दिनराती ।
गावत कपि के गुण गण पांती ।।
तुम सम नही जगत् बलवाना ।
करि विचारदेखेउं विधि नाना ।।४४।।
यह जिय जानि शरण तव आई ।
ताते विनय करौं चित लाई ।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे ।
मेटहु सकलदुःख भ्रम सारे ।।४६।।
यहि प्रकार विनती कपि केरी ।
जो जन करै लहै सुख ढेरी ।।
याके पढ़त वीर हनुमाना ।
धावत बाण तुल्य बलवाना ।।४८।।
मेटत आय दुःख क्षण मांहीं ।
दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं ।।
पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षाकरै प्राण की ।।५०।।
डीठ, मूठ, टोनादिक नासै ।
परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे ।।
भैरवादि सुर करै मिताई ।
आयसु मानि करैं सेवकाई ।।५२।।
प्रण करि पाठ करैं मन लाई ।
अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई ।।
आवृति ग्यारह प्रतिदिन जापै ।
ताकी छाँह काल नहिं चांपै ।।५४।।
दै गूगल की धूप हमेशा।
करै पाठ तन मिटै कलेशा ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै ।
ताहि कहौ फिर कौन उबारै ।।५६।।
शत्रु समूह मिटै सब आपै ।
देखत ताहिसुरासुर काँपै ।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई ।
रहै सदा कपिराज सहाई ।।५८।।
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै।
सदा धरैं उर ध्यान ।।
तेहि के कारज तुरत ही,
सिद्ध करैं हनुमान ।।
इति श्रीगोस्वामितुलसीदासविरचितः बजरंगबाणः
🙏🙏🔱🔱📿📿🕉🕉

हरियाली तीज  की अनन्त शुभकामनाए  हरियाली तीज  के पावन पर्व पर श्री बांके बिहारी लाल जी के दर्शन , स्वर्ण हिण्डौले पर विर...
19/08/2023

हरियाली तीज की अनन्त शुभकामनाए हरियाली तीज के पावन पर्व पर श्री बांके बिहारी लाल जी के दर्शन , स्वर्ण हिण्डौले पर विराजमान श्री बांके बिहारी जी , जय बिहारी जी 🌷🌹🌹🌹,, जय श्री राधा कृष्ण 🌹🌷🙏🌹🌹🌷

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