Gandhi Vidya Mandir

Gandhi Vidya Mandir Gandhi Vidhya Mandir was inaugurated on 28th August 1959. The school was built by some known businessmen from Margherita on the piece of land donated by Mr. T. B.

Pradhan.

29/03/2025
An Artefact at Delhi Airport made of Metal Bells and named “SOUND OF SILENCE”…
27/03/2025

An Artefact at Delhi Airport made of Metal Bells and named “SOUND OF SILENCE”…

07/10/2022

ढाक की धुन पर थिरकते पाँव - मेरा भी मन कर रहा था उतर पड़ूँ माँ को रिझाने - पर न जाने कैसी हिचक थी - और भी तो भक्त खड़े थे - शायद मेरी ही तरह अपने उस संकोच के आवरण को टॉड नहीं पाए…

On this occasion, I am paying my sincere respect to all the teachers of GVM - the few names I remember are Shuklaji, Cha...
12/07/2022

On this occasion, I am paying my sincere respect to all the teachers of GVM - the few names I remember are Shuklaji, Chaubey Ji, Brahmdevsingh Ji, Rajrup Singh Ji, Lallu Singh Ji, Pandey Ji, Gogoi Sir, Jagannath Ji, Prakash Ji (the poet), Satyanarayan Singh (my senior) & P Narayan Rao (my classmate)

गांधी विद्या मंदिर के हाल में स्थापित था माँ सरस्वती का ये चित्रपट - विद्यालय के प्रतिस्थापना दिवस से - अभी हेडमास्टर के...
05/02/2022

गांधी विद्या मंदिर के हाल में स्थापित था माँ सरस्वती का ये चित्रपट - विद्यालय के प्रतिस्थापना दिवस से - अभी हेडमास्टर के कार्यालय में स्थापित है

30/05/2019

I am Sharing a Hindi poem . The lines are really meaningful and beautiful.

-कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!

-पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

-बार बार रफू करता रहता हूँ,..जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़* है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

-जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!!

18/04/2019

मन करता है
सपनों में ही सही
एक बार फिर
अपने स्कूल हो आऊँ।

बस्ता, टिफन ले
ढीली सरकती नीली निकर में
नील लगी धुली सुथरी
हाफ शर्ट पहन
फिर छोटा हो जाऊं।

पालिश किये काले जूते
फीते कस कर बांधती
देर न हो इसलिए
धकेल स्कूल भेजती
माँ से लिपट जाऊं।

वो रास्ते भर
जेब में पड़ी इकन्नी को टटोलते
आधी छुट्टी के चटखारों
चाट, गोलगप्पों
चनाचूर और ठंडी बर्फ के
स्वाद का सपना जगाते
इकन्नी का हिसाब बैठाऊँ।

रास्ते में पड़े पत्थर को
ठोकरों पे रख
या रेल की पटरी पर
संभल, बाजीगर की तरह
दोस्तों के साथ
चलते मचलते
स्कूल पहुँच जाऊं।

दौड़ कर
प्रार्थना की लाइन में खड़े हो
स्वर में स्वर मिला
रटे रटाये जेहन में बसे
शब्दों को खंगालते
गंदे जूतों को
मास्टर जी की नजरों से बचा
जल्दी जल्दी
अपनी सीट पर पहुँच जाऊं।

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