Ascent Public Sen. Sec. School Padhar

Ascent Public Sen. Sec. School Padhar Educational Information

28/08/2026
25/08/2026

एक बार एक 80 साल के बूढ़े पिता और उनका 30 साल का पढ़ा-लिखा, आधुनिक बेटा अपने घर के बगीचे में बैठे थे। तभी पास के पेड़ पर एक कौवा आकर बैठ गया।
पिता ने बेटे से धीरे से पूछा, "बेटा, वह क्या है?"
बेटे ने अखबार पढ़ते हुए कहा, "पिताजी, वह एक कौवा है।"
कुछ मिनट बाद, पिता ने फिर से कौवे की तरफ इशारा किया और पूछा, "बेटा, वह क्या है?"
बेटे ने थोड़े खीझ भरे स्वर में कहा, "पिताजी, मैंने अभी तो बताया... वह एक कौवा है!"
थोड़ी देर बाद, पिता ने तीसरी बार वही सवाल दोहराया, "बेटा, वह क्या है?"
इस बार बेटा गुस्से से चिल्ला पड़ा, "आप बार-बार एक ही सवाल क्यों पूछते हैं? क्या आपको एक बार में समझ नहीं आता कि वह कौवा है? मुझे परेशान मत कीजिए!"
बूढ़े पिता ने कुछ नहीं कहा। वे चुपचाप उठे, कमरे के अंदर गए और अपनी 30 साल पुरानी एक पुरानी डायरी लेकर आए। उन्होंने वह डायरी बेटे के हाथ में थमाई और एक पन्ना पढ़ने को कहा।
उस पन्ने पर लिखा था:
"आज मेरा 3 साल का नन्हा बेटा मेरे साथ बगीचे में बैठा था। तभी पेड़ पर एक कौवा बैठा। मेरे मासूम बेटे ने मुझसे 23 बार पूछा—'पापा, यह क्या है?' और मैंने हर 23 बार उसे गले लगाया, प्यार से चूमा और मुस्कुराकर कहा—'बेटा, यह कौवा है।' मुझे ज़रा भी गुस्सा नहीं आया, बल्कि अपने बच्चे की मासूमियत देखकर मेरा दिल खुशी से भर गया।"
बेटे ने जब यह पढ़ा, तो उसके हाथ कांपने लगे, उसकी आँखों से आंसू बह निकले। उसने तुरंत झुककर अपने पिता के पैर पकड़ लिए और फूट-फूट कर रो पड़ा।

असेंट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पधर में धूमधाम से मना 'ग्रैंड पेरेंट्स डे', भावुक पलों के बीच बुजुर्गों का हुआ सम्मानपधर ...
22/08/2026

असेंट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पधर में धूमधाम से मना 'ग्रैंड पेरेंट्स डे', भावुक पलों के बीच बुजुर्गों का हुआ सम्मान
पधर (मंडी)।
स्थानीय असेंट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पधर में 'ग्रैंड पेरेंट्स डे' (दादा-दादी एवं नाना-नानी दिवस) अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और भावनात्मक माहौल के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर विद्यार्थियों के दादा-दादी और नाना-नानी को विद्यालय प्रांगण में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। बच्चों ने अपने बुजुर्गों का गर्मजोशी से स्वागत कर उनके प्रति आदर व कृतज्ञता व्यक्त की।
दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गुलाब सिंह चौहान द्वारा दीप प्रज्वलित कर तथा मां सरस्वती के चरणों में पुष्प अर्पित करके किया गया। इसके उपरांत नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने सुमधुर सरस्वती वंदना गाकर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और मनमोहक बना दिया। वहीं, कला अध्यापिका एवं संयोजिका श्रीमती आशा ठाकुर ने अपनी ओजस्वी व मधुर वाणी से सभी दादा-दादी, नाना-नानी और अभिभावकों का औपचारिक स्वागत किया।
भावभीना स्वागत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
विद्यार्थियों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी का तिलक लगाकर, ताजे फूलों और सुंदर गुलदस्तों (बुके) के साथ भावभीना स्वागत किया। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी लग गई:
एकल नृत्य: 12वीं कक्षा की छात्रा वाणी ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह की खूब तालियां बटोरीं।
नाटक मंचन: नौवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने परिवार में बुजुर्गों के महत्व और सामाजिक मूल्यों पर आधारित एक प्रेरणादायक नाटक प्रस्तुत किया।
पारंपरिक नाटी: कार्यक्रम के समापन पर 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने मनमोहक हिमाचली 'नाटी' प्रस्तुत कर पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
इसके साथ ही दादा-दादी और नाना-नानी के लिए कई रोचक गतिविधियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने जीवन के अमूल्य अनुभव साझा किए।
"बुजुर्ग परिवार की छत और सुरक्षा कवच हैं" — प्रधानाचार्य के वक्तव्य से आंखें हुईं नम
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य श्री गुलाब सिंह चौहान ने एक अत्यंत भावुक व प्रेरणादायक भाषण दिया, जिसे सुनकर उपस्थित बुजुर्गों और अभिभावकों की आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा:
"दादा-दादी और नाना-नानी हमारे परिवार के उस पुराने छाते की तरह होते हैं, जो चिलचिलाती धूप और मूसलाधार बारिश में बिना किसी शिकायत के हमारा सुरक्षा कवच बनकर हमारी रक्षा करते हैं। लेकिन वही छाता बाद में घर के किसी कोने में उपेक्षित पड़ा नजर आता है। हमें इस बात से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने बुजुर्गों के इस त्याग को समझना चाहिए। प्रत्येक युवा व बच्चे को प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट अपने दादा-दादी और नाना-नानी के पास बैठकर उनसे बातें करनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।"
इन्होंने निभाया आयोजन में अहम योगदान
कार्यक्रम को सफल और भव्य बनाने में विद्यालय के संयोजक मंडल और शिक्षक वर्ग का विशेष योगदान रहा:
संयोजक टीम: कार्यक्रम संयोजक श्रीमती शशीलता, पवना ठाकुर, वंदना, ईशा गुलेरिया और दुतेश ठाकुर ने अथक परिश्रम कर पूरे आयोजन की रूपरेखा को सफलता के मुकाम तक पहुंचाया।
शिक्षक वर्ग: अध्यापक योगराज शर्मा, रमेश कुमार, अमित धरवाल, अजय ठाकुर और शशि ठाकुर ने विभिन्न व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभालकर कार्यक्रम की सफलता में चार चांद लगाए।
स्नेह भोज के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी आदरणीय दादा-दादी, नाना-नानी और अभिभावकों के लिए सुरुचिपूर्ण जलपान (स्नेह भोज) की व्यवस्था की गई थी। सभी बुजुर्गों ने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों व बच्चों के इस अनूठे प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की और नम आंखों व भरे दिल से बच्चों को अपना शुभाशीर्वाद दिया।

02/08/2026

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31/07/2026

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