13/06/2026
# *संघर्ष से सफलता तक: घोटा पिपलिया के हंसराज ने आईआईटी मुंबई में बनाया अपना स्थान*
**मनासा।**
" सफलता कभी भी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती "
इस कहावत को सच कर दिखाया है ग्राम घोटा पिपलिया के प्रतिभाशाली छात्र **मा. हंसराज पाटीदार** ने, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और अदम्य आत्मविश्वास के बल पर देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान **Indian Institute of Technology Bombay** (IIT Mumbai) में चयन प्राप्त कर अपने परिवार, गांव ,जिलाऔर विद्यालय *फ्लोरेंस इंटरनेशनल स्कूल मनासा* का नाम गौरवान्वित किया है और यही नही इसी के साथ साथ CBSE बोर्ड परीक्षा में भी 87.8%मार्क्स लाकर विद्यालय में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
हंसराज की सफलता केवल एक विद्यार्थी के चयन की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक गाथा है। जब हंसराज मात्र 13 वर्ष के थे, तभी उनके पिता का कोरोना में असामयिक निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक परिस्थितियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गईं। पढ़ाई जारी रखना भी कठिन प्रतीत होने लगा। कई बार विद्यालय की फीस की व्यवस्था करना परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन जाता था।
मगर कहते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है।"
इसी बात को ध्यान में रखते हुए हंसराज ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी माता के संघर्षों को बहुत करीब से देखा और उनके सपनों को अपना लक्ष्य बना लिया। सीमित संसाधनों और अनेक कठिनाइयों के बीच भी उन्होंने पढ़ाई को कभी बाधित नहीं होने दिया। गांव घोटा पिपलिया से प्रतिदिन विद्यालय तक आने-जाने के लिए उनके पास कोई समुचित वाहन व्यवस्था भी नहीं थी, लेकिन इन कठिनाइयों ने उनके हौसलों को कमजोर करने के बजाय और अधिक मजबूत बनाया।
और ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह भी है कि *Florence International School** में अध्ययनरत हंसराज ने विद्यालय के अलावा और किसी बड़े संस्थान से कोचिंग नहीं ली सिर्फ अपनी मेहनत , अनुशासन और अपने विद्यालय के शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन मात्र से ही इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करके दिखलाया। विद्यालय के प्रबंधन ने सदैव उनके अंदर छिपी प्रतिभा को पहचाना और समय-समय पर उनका मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया। विद्यालय परिवार ने भी उनकी परिस्थितियों को समझते हुए हर संभव सहयोग प्रदान किया ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो।
हंसराज की सफलता के पीछे उनके विद्यालय के प्रबंधन और शिक्षकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। शिक्षकों ने न केवल उन्हें विषयगत ज्ञान प्रदान किया, बल्कि कठिन समय में उनका मनोबल भी बढ़ाया। जब भी परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हुईं, शिक्षकों ने उन्हें निरंतर प्रेरित किया कि वे अपने लक्ष्य से कभी विचलित न हों। इसी मार्गदर्शन और छात्र की अथक मेहनत का परिणाम है कि आज उन्होंने आईआईटी मुंबई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपना स्थान सुनिश्चित किया है।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक श्री रवि बाँगा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हंसराज जैसे विद्यार्थी पूरे समाज और उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
इस लेख के माध्यम से आप सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि आए आप, हम और सभी शिक्षक मिलकर अपने बच्चों को मोबाइल की इस कृत्रिम दुनिया से बाहर निकाले और उन्हें ज्ञान रूपी सागर से भरी किताबों में डुबकी लगाने दे क्योंकि हर एक विद्यार्थी में अद्भुत प्रतिभा होती है बस जरूरत है उसे निखारने की।
और आज वास्तविक रूप से ये पंक्तियाँ चरितार्थ हुई कि
" सफलता सपनों में जीने से नहीं हकीकत में मेहनत करने से मिलती है", हंसराज पाटीदार का संघर्ष इसका जीवंत उदाहरण है
धन्यवाद