Suresh Kukna Nagaur

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महाराजा सूरजमल जी  की जयंती पर शत्-शत् नमन 🌹🌹वो सदा फिजाओं में उड़ता एक अजेय परिंदा हैउसकी शान के कसीदे ,तुम्हारी झूठ की...
13/02/2022

महाराजा सूरजमल जी की जयंती पर शत्-शत् नमन 🌹🌹

वो सदा फिजाओं में उड़ता एक अजेय परिंदा है
उसकी शान के कसीदे ,तुम्हारी झूठ की निंदा है
जो चाहो लिखो, तुम्हारी कलम व तुम्हारा कारिंदा है,
लाखों नहीं करोड़ों दिलों में महाराजा सूरजमल आज भी जिंदा है l
🙏🙏🙏🙏

 #एक फटी धोती और फटी  #कमीज पहने एक  व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी प...
25/05/2021

#एक फटी धोती और फटी #कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी पर बैठा देख एक #वेटर ने उनके सामने दो #गिलास साफ ठंडे पानी के रख दिए और पूछा- आपके लिए क्या लाना है?

उस व्यक्ति ने कहा- "मैंने मेरी बेटी को वादा किया था कि यदि तुम कक्षा दस में जिले में प्रथम आओगी तो मैं तुम्हे शहर के सबसे बड़े होटल में एक डोसा खिलाऊंगा।
इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक डोसा ले आओ।"वेटर ने पूछा- "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा-"मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।"पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बता कर कहा-"मैं इन दोनो को भर पेट नास्ता कराना चाहता हूँ।अभी मेरे पास पैसे नहीं है,इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलेरी से काट लेना।"मालिक ने कहा- "आज हम होटल की तरफ से इस #होनहार बेटी की सफलता की पार्टी देंगे।"

होटलवालों ने एक टेबल को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहको के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया।मालिक ने उन्हे एक बड़े थैले में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए मिठाई उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना सम्मान पाकर आंखों में खुशी के आंसू लिए वे अपने घर चले गए।

समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की I.A.S.की परीक्षा पास कर उसी शहर में कलेक्टर बनकर आई।उसने सबसे पहले उसी होटल मे एक सिपाही भेज कर कहलाया कि कलेक्टर साहिबा नास्ता करने आयेंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक टेबल को अच्छी तरह से सजा दिया।यह खबर सुनते ही पूरा होटल ग्राहकों से भर गया।

कलेक्टर रूपी वही लड़की होटल में मुस्कराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची।सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए।होटल के मालिक ने उन्हे गुलदस्ता भेंट किया और आर्डर के लिए निवेदन किया।उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस बेटर के आगे नतमस्तक होकर कहा- "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं।मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा डोसा लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने #मानवता की सच्ची मिसाल पेश करते हुए,मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी।

🎈आज मैं आप दोनों की बदौलत ही कलेक्टर बनी हूँ।आप दोनो का एहसान में सदैव याद रखूंगी

15/10/2020

भारत रत्न, भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं मिसाइल मैन के नाम से मशहूर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जयंती पर उन्हें मेरा कोटि-कोटि नमन l

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री  #डॉ_साहिब_सिंह_जी ( 15 मार्च 1943 - 30 जून 2007) पुण्यतिथि #संक्षिप्त_परिचयसाहिब सिंह जी का...
30/06/2020

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री #डॉ_साहिब_सिंह_जी ( 15 मार्च 1943 - 30 जून 2007)
पुण्यतिथि
#संक्षिप्त_परिचय
साहिब सिंह जी का जन्म 15 मार्च 1943 को वर्तमान बाहरी दिल्ली के मुण्डका गाँव में लाकड़ा गौत्र के एक जाट परिवार में हुआ था।

साहिब सिंह जी एक निश्छल हिंदूवादी नेता थे।
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार किया।केंद्र में रहते हुए व्यापार जुड़े कई जरूरी फैसले लिए।दिल्ली को विकास के मार्ग में दौड़ाने में उनका काफी योगदान रहा।

उनकी माँ का नाम भरपाई देवी व पिता का नाम मीर सिंह था। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) के सामान्य स्वयंसेवक के रूप में की। बाद में उन्होंने अपनी निष्ठा और कर्मठता के बल पर BJP में राजनीति के महत्वपूर्ण पदों को भी हासिल किया। वे विकास,हिंदूवादी विचारों,सादगी,शिक्षा नीति में सुधार और ब्यूरोक्रेसी पर अछि पकड़ के कारण जाने जाते हैं।

साहिब सिंह ने एम०ए० करने के पश्चात अलीगढ़ से पुस्तकालय विज्ञान में phd की और शहीद भगतसिंह कॉलेज दिल्ली में लाइब्रेरियन के रूप में नौकरी कर ली। मुख्यमन्त्री बनने से पूर्व तक वे लाइब्रेरियन रहे।

साहिब सिंह का विवाह 1954 में मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में उन्हीं की नामाराशी एक कन्या साहिब कौर से कर दिया गया, जिनसे उनके पाँच सन्तान हुईं; दो बेटे व तीन बेटियाँ। उनका पूरा परिवार मुण्डका गाँव में अभी भी रहता है।

#राजनीतिक_जीवन
सन 1977 में वे पहली बार दिल्ली नगर निगम के पार्षद चुने गये। पार्षद के पद की शपथ उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी गुरु राधा किशन के नाम पर ली थी। प्रारम्भ में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था लेकिन जनता पार्टी के टूटने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी की हैसियत से चुनाव जीते। मदन लाल खुराना की सरकार में उन्हें सन 1993 में शिक्षा और विकास मन्त्रालय का महत्वपूर्ण मन्त्रीपद सौंपा गया जिस पर रहते हुए उन्होंने कई अच्छे कार्य किये। इसका यह परिणाम हुआ कि1996 में जब भ्रष्टाचार के आरोप में मदनलाल खुराना ने त्याग पत्र दिया तो दिल्ली प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कमान साहिब सिंह को ही दी गयी। न्यायालय द्वारा खुराना को भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त होने के बाद भी वे ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहे।

वे एक छोटे से घर में रहते थे।आने जाने के लिए वे अक्षर बस या ऑटो या फिर पैदल ही चलते थे। वे दिखावे की दुनिया से दूर बहुत ही साधारण जीवन जीते थे और जनता के करीब रहते थे।

उनके इस कार्य से जनता में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ काफी तेजी से बढा और 1999 का लोकसभा चुनाव उन्होंने बाहरी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से दो लाख से अधिक मतों के अन्तर से जीता।2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने एन०डी०ए० सरकार में उन्हें श्रम और नियोजन मन्त्रालय का दायित्व सौंपा। उन्होंने ब्यूरोक्रेसी के पेंच कसते हुए कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज की दरों को कम करने से रोका। उनके इस कार्य को मीडिया ने ए बुल इन चाइना शॉप कहकर सराहना की।

दिल्ली के शिक्षक समुदाय में साहिब सिंह काफी लोकप्रिय थे। हरीभूमि के नाम से प्रकाशित होने वाला एक राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र उन्हीं के स्वामित्व में निकलता था।

30 जून 2007 को उनकी कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी।इस दुर्घटना पर कई बार विपक्ष की साजिश के सवाल भी उठाए जाते हैं।

वे अपनी सादगी,विकास कार्यो,धर्म और कर्तव्यपरायणता के लिए दिल्ली की जनता के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके शिक्षा नीति के कारण वे दिल्ली के शिक्षक वर्ग में भी बहुत लोकप्रिय थे।

उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन।

*🤸‍♀️अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस* (International Day of Yoga)*📒Theme: 🌿:* घर पर *योग है* परिवार के साथ योग’ है.*योग से ना सि...
21/06/2020

*🤸‍♀️अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस* (International Day of Yoga)
*📒Theme: 🌿:* घर पर *योग है* परिवार के साथ योग’ है.

*योग से ना सिर्फ शरीर* रोगमुक्त रहता है,
बल्कि *मानसिक और बौद्धिक* स्तर पर मानव को सशक्त, *शांत* और *ओजस्वी* बनाता है।

*🤸‍♀️योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🤾‍♂️*

किसानों के मसीहा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। #भारतरत्नचौधरीच...
29/05/2020

किसानों के मसीहा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
#भारतरत्नचौधरीचरणसिंह

10/04/2020

#डीआईजी_नवनीत_सिकेरा_जी ने एक *बेहद मार्मिक स्टोरी* पोस्ट की।
एक #जज अपनी पत्नी को क्यों दे रहे हैं तलाक???
"" #रोंगटे_खड़े"" कर देने वाली स्टोरी* को जरूर पढ़े
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⚡कल रात एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी *ज़िन्दगी के कई पहलुओं को छू लिया*.
करीब 7 बजे होंगे,
शाम को मोबाइल बजा ।
उठाया तो *उधर से रोने की आवाज*...
मैंने शांत कराया और पूछा कि *भाभीजी आखिर हुआ क्या*?
उधर से आवाज़ आई..
*आप कहाँ हैं??? और कितनी देर में आ सकते हैं*?
मैंने कहा:- *"आप परेशानी बताइये"*।
और "भाई साहब कहाँ हैं...?माताजी किधर हैं..?" "आखिर हुआ क्या...?"
लेकिन
*उधर से केवल एक रट कि "आप आ जाइए"*, मैंने आश्वाशन दिया कि *कम से कम एक घंटा पहुंचने में लगेगा*. जैसे तैसे पूरी घबड़ाहट में पहुँचा;
देखा तो भाई साहब [हमारे मित्र जो जज हैं] सामने बैठे हुए हैं;
*भाभीजी रोना चीखना कर रही हैं* 12 साल का बेटा भी परेशान है; 9 साल की बेटी भी कुछ नहीं कह पा रही है।
मैंने भाई साहब से पूछा कि *""आखिर क्या बात है""*???
*""भाई साहब कोई जवाब नहीं दे रहे थे ""*.
फिर भाभी जी ने कहा ये देखिये *तलाक के पेपर, ये कोर्ट से तैयार करा के लाये हैं*, मुझे तलाक देना चाहते हैं,
मैंने पूछा - *ये कैसे हो सकता है???. इतनी अच्छी फैमिली है. 2 बच्चे हैं. सब कुछ सेटल्ड है. ""प्रथम दृष्टि में मुझे लगा ये मजाक है""*.
लेकिन मैंने बच्चों से पूछा *दादी किधर है*,
बच्चों ने बताया पापा ने उन्हें 3 दिन पहले *नोएडा के वृद्धाश्रम में शिफ्ट* कर दिया है.
मैंने घर के नौकर से कहा।
मुझे और भाई साहब को चाय पिलाओ;
कुछ देर में चाय आई. भाई साहब को *बहुत कोशिशें कीं चाय पिलाने की*.
लेकिन उन्होंने नहीं पी और कुछ ही देर में वो एक *"मासूम बच्चे की तरह फूटफूट कर रोने लगे "*बोले मैंने 3 दिन से कुछ भी नहीं खाया है. मैं अपनी 61 साल की माँ को कुछ लोगों के हवाले करके आया हूँ.
*पिछले साल से मेरे घर में उनके लिए इतनी मुसीबतें हो गईं कि पत्नी (भाभीजी) ने कसम खा ली*. कि *""मैं माँ जी का ध्यान नहीं रख सकती""*ना तो ये उनसे बात करती थी
और ना ही मेरे बच्चे बात करते थे. *रोज़ मेरे कोर्ट से आने के बाद माँ खूब रोती थी*. नौकर तक भी *अपनी मनमानी से व्यवहार करते थे*
माँ ने 10 दिन पहले बोल दिया.. बेटा तू मुझे *ओल्ड ऐज होम* में शिफ्ट कर दे.
मैंने बहुत *कोशिशें कीं पूरी फैमिली को समझाने की*, लेकिन *किसी ने माँ से सीधे मुँह बात नहीं की*.
*जब मैं 2 साल का था तब पापा की मृत्यु हो गई थी दूसरों के घरों में काम करके *""मुझे पढ़ाया. मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं जज हूँ""*.
लोग बताते हैं माँ कभी दूसरों के घरों में काम करते वक़्त भी मुझे अकेला नहीं छोड़ती थीं.
*उस माँ को मैं ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट करके आया हूँ*. पिछले 3 दिनों से
मैं *अपनी माँ के एक-एक दुःख को याद करके तड़प रहा हूँ,*जो उसने केवल मेरे लिए उठाये।
मुझे आज भी याद है जब..
*""मैं 10th की परीक्षा में अपीयर होने वाला था. माँ मेरे साथ रात रात भर बैठी रहती""*.
एक बार *माँ को बहुत फीवर हुआ मैं तभी स्कूल से आया था*. उसका *शरीर गर्म था, तप रहा था*. मैंने कहा *माँ तुझे फीवर है हँसते हुए बोली अभी खाना बना रही थी इसलिए गर्म है*.
लोगों से *उधार माँग कर मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी तक पढ़ाया*. मुझे *ट्यूशन तक नहीं पढ़ाने देती थीं*कि कहीं मेरा टाइम ख़राब ना हो जाए.
*कहते-कहते रोने लगे..और बोले--""जब ऐसी माँ के हम नहीं हो सके तो हम अपने बीबी और बच्चों के क्या होंगे""*.
हम जिनके *शरीर के टुकड़े हैं*,आज हम उनको *ऐसे लोगों के हवाले कर आये, ""जो उनकी आदत, उनकी बीमारी, उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते""*,
जब मैं ऐसी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकता तो *"मैं किसी और के लिए भला क्या कर सकता हूँ".*
आज़ादी अगर इतनी प्यारी है और *माँ इतनी बोझ लग रही हैं, तो मैं पूरी आज़ादी देना चाहता हूँ*
जब *मैं बिना बाप के पल गया तो ये बच्चे भी पल जाएंगे*. इसीलिए मैं तलाक देना चाहता हूँ।

*सारी प्रॉपर्टी इन लोगों के हवाले* करके उस *ओल्ड ऐज होम* में रहूँगा. कम से कम मैं माँ के साथ रह तो सकता हूँ।
और अगर *इतना सब कुछ कर के ""माँ आश्रम में रहने के लिए मजबूर है"", तो एक दिन मुझे भी आखिर जाना ही पड़ेगा*.
माँ के साथ रहते-रहते आदत भी हो जायेगी. *माँ की तरह तकलीफ* तो नहीं होगी.
*जितना बोलते उससे भी ज्यादा रो रहे थे*.
बातें करते करते रात के 12:30 हो गए।
मैंने भाभीजी के चेहरे को देखा.
उनके *भाव भी प्रायश्चित्त और ग्लानि* से भरे हुए थे; मैंने ड्राईवर से कहा अभी हम लोग नोएडा जाएंगे।
भाभीजी और बच्चे हम सारे लोग नोएडा पहुँचे.
*बहुत ज़्यादा रिक्वेस्ट करने पर गेट खुला*. भाई साहब ने उस *गेटकीपर के पैर पकड़ लिए*, बोले मेरी माँ है, मैं उसको लेने आया हूँ,
चौकीदार ने कहा क्या करते हो साहब,
भाई साहब ने कहा *मैं जज हूँ,*
उस चौकीदार ने कहा:-
*""जहाँ सारे सबूत सामने हैं तब तो आप अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाये,
औरों के साथ क्या न्याय करते होंगे साहब"*।
इतना कहकर हम लोगों को वहीं रोककर वह अन्दर चला गया.
अन्दर से एक महिला आई जो *वार्डन* थी.
उसने *बड़े कातर शब्दों में कहा*:-
"2 बजे रात को आप लोग ले जाके कहीं मार दें, तो
*मैं अपने ईश्वर को क्या जबाब दूंगी..*?"
मैंने सिस्टर से कहा *आप विश्वास करिये*. ये लोग *बहुत बड़े पश्चाताप में जी रहे हैं*.
अंत में किसी तरह उनके कमरे में ले गईं. *कमरे में जो दृश्य था, उसको कहने की स्थिति में मैं नहीं हूँ.*
केवल एक फ़ोटो जिसमें *पूरी फैमिली* है और वो भी माँ जी के बगल में, जैसे किसी बच्चे को सुला रखा है.
मुझे देखीं तो उनको लगा कि बात न खुल जाए
लेकिन जब मैंने कहा *हम लोग आप को लेने आये हैं, तो पूरी फैमिली एक दूसरे को पकड़ कर रोने लगी*
आसपास के कमरों में और भी बुजुर्ग थे सब लोग जाग कर बाहर तक ही आ गए.
*उनकी भी आँखें नम थीं*
कुछ समय के बाद चलने की तैयारी हुई. पूरे आश्रम के लोग बाहर तक आये. किसी तरह हम लोग आश्रम के लोगों को छोड़ पाये.
सब लोग इस आशा से देख रहे थे कि *शायद उनको भी कोई लेने आए, रास्ते भर बच्चे और भाभी जी तो शान्त रहे*.......
लेकिन भाई साहब और माताजी एक दूसरे की *भावनाओं को अपने पुराने रिश्ते पर बिठा रहे थे*.घर आते-आते करीब 3:45 हो गया.
👩 💐 *भाभीजी भी अपनी ख़ुशी की चाबी कहाँ है; ये समझ गई थी* 💐
मैं भी चल दिया. लेकिन *रास्ते भर वो सारी बातें और दृश्य घूमते रहे*.
👵 💐*""माँ केवल माँ है""* 💐👵
*उसको मरने से पहले ना मारें.*
*माँ हमारी ताकत है उसे बेसहारा न होने दें , अगर वह कमज़ोर हो गई तो हमारी संस्कृति की ""रीढ़ कमज़ोर"" हो जाएगी* , बिना रीढ़ का समाज कैसा होता है किसी से छुपा नहीं
अगर आपकी परिचित परिवार में ऐसी कोई समस्या हो तो उसको ये जरूर पढ़ायें, *बात को प्रभावी ढंग से समझायें , कुछ भी करें लेकिन हमारी जननी को बेसहारा बेघर न होने दें*, अगर *माँ की आँख से आँसू गिर गए तो *"ये क़र्ज़ कई जन्मों तक रहेगा"*, यकीन मानना सब होगा तुम्हारे पास पर *""सुकून नहीं होगा""* , सुकून सिर्फ *माँ के आँचल* में होता है उस *आँचल को बिखरने मत देना*।
✍👏👏💐💐👏👏
इस *मार्मिक दास्तान को खुद भी पढ़िये और अपने बच्चों को भी पढ़ाइये ताकि पश्चाताप न करना पड़े*।

Education is most important for every person
05/04/2019

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Only u can try to best
15/02/2019

Only u can try to best

07/07/2017

आज की तारीख कितनी अच्छी है

7/7/17

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.. ... ✍🏻
*जय वीर तेजाजी*
👉👉$ûRêSh👈👈

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